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गुरुवार, 28 जून 2012

नाम ''पकिस्तान'' है मगर पाकीज़गी का नाम नहीं !

नाम ''पकिस्तान''  है मगर  पाकीज़गी  का नाम नहीं !




[ my voice]




पाकिस्तान की जेल  में बंद  भारतीय कैदी सरबजीत की रिहाई पर बुधवार शाम से शरू पाकिस्तान के नाटक ने सरबजीत के परिवार के साथ साथ करोड़ों भारतीयों की भावनाओं का भी मखौल उड़ाया है . ह्रदय मे  भर आये   आक्रोश  को  इन  शब्दों में  प्रकट करने का प्रयास किया  है  -

तू  जो  कहता  है  तेरी बात पर यकीन नहीं ;
नाम ''पकिस्तान''  है मगर  पाकीज़गी  का नाम नहीं .

तेरी मक्कारियों  के  ज़ख्म  अभी  ताज़ा  हैं  ;
तेरे जैसा ज़माने में तमाशबीन    नहीं .


तू है खादिम  मगर खुद  को समझता  है खालिक  ;
ख़बीस  देख  तेरे पैरों  तले   ज़मीन   नहीं .

ख़निल  तेरी जगह  दोजख़  में बड़ी पक्की है ;
वैसे  दोजख़   भी  इससे  बड़ी तौहीन नहीं .

देखकर   दर्द औरों के बड़ा हँसता   है ;
रीआइ  मौत  पर तेरे होगा  कोई ग़मगीन नहीं .


[ख़निल-सेंधमार  चोर  , खालिक-ईश्वर  ,रिआइ-मक्कार ]

                                  शिखा कौशिक 




सोमवार, 25 जून 2012

भाजपा को आज एक राहुल गाँधी चाहिए



shri rahul gandhi 



  



घुट  रही  है   भाजपा ;परिवर्तन  आंधी  चाहिए ,
भाजपा को   आज   एक   राहुल   गाँधी   चाहिए .

पद  का  मोह  जिसको  न  हो संगठन  पर ध्यान दे  ;
मखमली  नेता  नहीं  मोटी   खादी  चाहिए .

चुक गए  नेता हैं जो संन्यास लेने  को  कहो    ;
उनको  लोभ- मोह  छोड़  लेनी  समाधि चाहिए .

तर्क की  अब  धार  भाजपा में  न  रही  ;
बात  पूरी  न  सही  आधी  तो  होनी चाहिए .

सबल  विपक्ष लोकतंत्र का  रहा  प्रहरी  सदा  ;
भाजपा की  दूर होनी  हर  व्याधि  चाहिए .

       शिखा  कौशिक

बुधवार, 6 जून 2012

डिम्पल-सभी दलों की भाभी ?

डिम्पल-सभी दलों की भाभी ?










राजनीति एक कोठरी ;नेता रखते चाबी ;

स्व हित में दायें बाएं ;जैसे चाहे घुमा दी ;

भोली जनता क्या जाने वो है सीधी-सादी ;

डिम्पल कैसे बन गयी सभी दलों की भाभी !



shikha kaushik