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रविवार, 14 अप्रैल 2013

''भारतीय नारी '' ब्लॉग प्रतियोगिता -2

''भारतीय नारी '' ब्लॉग प्रतियोगिता -2 


जीवन में किस 'भारतीय नारी ' ने किया है आपको सर्वाधिक प्रभावित ? दो सौ शब्दों की सीमा में लिख दीजिये अपना संस्मरण .यही है -''भारतीय नारी '' ब्लॉग प्रतियोगिता -2 

    नियम व् शर्ते
*अपनी प्रविष्टि  केवल इस इ मेल पर प्रेषित करें [shikhakaushik666@hotmail.com].अन्यत्र प्रेषित प्रविष्टि प्रतियोगिता का हिस्सा न बन सकेंगी .प्रविष्टि  के साथ अपना पूरा पता सही सही भेंजे .
* प्रतियोगिता आयोजक का निर्णय ही अंतिम माना जायेगा .इसे किसी भी रूप में चुनौती नहीं दी जा सकेगी .
*प्रतियोगिता किसी भी समय ,बिना कोई कारण बताये  रद्द की जा सकती है .
* विजेता को '' खामोश  ख़ामोशी और हम ''काव्य संग्रह की एक प्रति पुरस्कार  स्वरुप प्रदान की जाएगी .
*उत्तर भेजने की अंतिम तिथि ३० मई  २०१३ है .
*प्रतियोगिता परिणाम के विषय में अंतिम तिथि के बाद इसी ब्लॉग पर सूचित कर दिया जायेगा .


शिखा कौशिक 'नूतन '

बुधवार, 10 अप्रैल 2013

तेजाबी तानों से बेहाल पीड़ित परिवार -तेजाबी हमलावर अब तक फरार

कांधला में २ अप्रैल को हुई तेजाबी घटना का कोई भी हमलावर आज दसस्वें  दिन तक भी नहीं पकड़ा गया है .कल कॉग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रीता बहुगुणा जी ने भी पीड़ित परिवार से मिलकर हर संभव मदद व् अपराधियों को जल्द से जल्द पकडे जाने का आश्वासन दिया है .परसों शाम मैं भी सुश्री शालिनी कौशिक जी व् हमारे पिता जी के मित्र श्री प्रेमचंद गुप्ता जी के साथ पीड़ित परिवार के घर पर उनके परिजनों से मिली .नौ बहनों में दूसरे नंबर की बहन अंजुमन दीदी का गला पड़ा हुआ था .इस घटना के बाद से उनके परिवार का  जीवन नर्क हो गया है .उनका कहना था कि पुलिस जांच के नाम पर उनके ही फोन टेप कर रही है और तंज कस रही कि इतने फोन व् एस.एम्.एस तो हमारे भी नहीं आते .सबसे छोटी बहन जो 11  कक्षा की छात्रा है घटना के दिन से स्कूल नहीं गयी है .पुलिस उससे व् उसके साथ के बच्चों से भी पूछताछ कर प्रताड़ित कर रही है ..उनका कहना है कि पूरी बिरादरी में ये घटना एक तफरी का विषय बन गया है .कोई आपस में बात करता हुआ कहता है कि -हाय कैसी दिखती हैं वे लड़कियां ?और कुछ लोग तो सर.गंगाराम हॉस्पिटल में जीवन -मृत्यु से लडती उनकी बहन के लिए यहाँ तक कह रहे हैं कि वो पट्टी बंधकर नाटक कर रही है .तेजाबी हमले की शिकार लड़कियों के चरित्र पर सवाल उठाए जा रहे हैं .अंजुमन दीदी का कहना है कि -सब यह प्रदर्शित कर रहें हैं कि वे तो आब- ए -जम-जम में नहाये हुए पाक-साफ हैं और पीड़ित परिवार तेजाब में नहाया हुआ गन्दा परिवार है . कोई कहता है कि इन लड़कियों ने नौकरी पाने के लिए यह नाटक रचा है और कोई कहता है कि -ये लडकिया उन लड़कों से बात करती आ रही थी .तेजाबी हमले की शिकार बहनों में से एक पहले से ही सर्वाइकल  दर्द की शिकार है उससे देखते ही मन भर आया .अंजुमन दीदी का गुस्सा इस सारी बिरादरी से है जिसने ऐसे कठिन समय में उनका साथ छोड़  दिया  है .हमने जब पूछा कि आपको किसी पर शक है तो उनका कहना था कि -हमारे लिए तो सारी दुनिया ही दुश्मन हो रही है किसका नाम लें .पीड़ितों की माता जी ने बताया कि -लडकिया बहुत डरी हुई हैं और रात में डरकर जाग जाती हैं .सब हालात देख व् सुनकर मैं व् शालिनी जी इसी निष्कर्ष पर पहुंचें कि यदि पुलिस सही ढंग से कार्यवाही करती तो अब तक दोनों तेजाबी हमलावर जेल के भीतर होते और इन हमलावरों से बढ़कर है हमारा तेजाबी मानसिकता वाला ये समाज जो पीड़ित परिवार को अपने तेजाबी विचारों से हर घडी  जला रहा .
हमलावर शीघ्र पकडे जाये और उन्हें फाँसी की सजा मिले व् पीड़ित बहने  शीघ्र   इस सदमे व् तेजाबी घावों से निजात पायें ऐसी कामनाओं के साथ मैं अपनी इस ब्लॉग पोस्ट को समाप्त करती हूँ .
       शिखा कौशिक 'नूतन '

रविवार, 7 अप्रैल 2013

न्याय के लिए साथ आये

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ACID ATTACK IN KANDHLA[SHAMLI]

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Justice for Acid Victims in Kandhla Shamli

न्याय के लिए साथ आये




चुप नहीं रहना है अब पुरजोर आज चीख लो ,
साथ अपने लड़कियों तेजाब रखना सीख लो !

 मूक दर्शक बन के ये सारा समाज देखता ,
साथ देंगें ये नपुंसक ? मत दया की भीख लो !

 है नहीं कोई व्यवस्था  छोड़ दो बैसाखियाँ ,
अपनी सुरक्षा करने को मुट्ठियाँ अब भींच लो !

कमजोर हैं नाज़ुक हैं हम इन भ्रमों में मत रहो ,
काली तुम चंडी हो तुम पापी का रक्त चूस लो !

तुम डराओगे हमें ! हम भी डरा सकते तुम्हे ,
आर पार की ये रेखा हौसलों से खींच लो !

शिखा कौशिक 'नूतन'


THIS WAS THE FIRST ACID ATTACK IN KANDHLA [SHAMLI] ON GIRLS .ON 2ND APRIL 2013 FOUR SISTERS WERE RETURNING TO THEIR HOME AFTER A COLLEGE EXAM DUTY .TWO OR THREE BOYS HAVE THROWN ACID ON THEM .ONE SISTER WAS SERIOUSLY INJURED IN THIS ATTACK .SHE HAS BEEN ADMITTED IN SR.GANGA RAM HOSPITAL IN DELHI . AT THE SPOT SISTERS TRIED THEIR BEST TO CATCH THEM BUT THE CONVICTS GOT OFF .THE CONVICTS ARE STILL AT LARGE . THIS IS REALLY FRUSTRATING .LET US WAIT AND WATCH HOW WILL POLICE DEAL WITH THE ROGUES ? BUT ONE THING IS CLEAR WE OPPOSE THIS ATTACK  WITH ALL FORCE  .
    JAY HIND
DR.SHIKHA KAUSHIK

शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

कुम्भकर्णी नींद से जागो -समाज-प्रशासन (तेजाबी हमला-शामली[कांधला] )

 

तेजाबी  हमलों  की  शिकार  बहनों का दर्द मात्र इतना नहीं कि वे तेजाबी हमलें का शिकार बनी .उनका दर्द मृत सामाजिक संवेदनाएं भी हैं .जब उन पर हमला किया गया वे एक कॉलेज की परीक्षा में ड्यूटी देकर घर लौट रही थी .दिन का समय था .वे तेजाब फैकने वालों से भिड़ी भी पर वे मार-पीट कर भागने में सफल रहे .वे सड़क पर पानी के लिए तड़पती रही और स्वयं रिक्शा कर अस्पताल गयी .आस पास के लोंगों  ने  कोई  मदद  नहीं की .यदि समाज की संवेदनाएं इतनी मृत नहीं होती तो शायद ऐसी घटना घटती ही नहीं .
    तेजाबी घटना की शिकार तीन  बहनों ने मीडिया के सामने अपने दुःख को प्रकट करते हुए कहा कि -''कोई हमारा साथ नहीं दे रहा है '' कडवी सच्चाई यही है हमारे समाज की कि लड़कियों पर- ताने कसे जाते हैं ,उनके साथ छेड़खानी की जाती है और जब इस सब से काम नहीं बनता तो तेजाबी हमले कर उन्हें सबक सिखाया जाता है और समाज मूक दर्शक बनकर सब कुछ देखता रहता है .
         आज अगर किशोर व् युवा तेजाबी इरादे लेकर सड़कों पर घूम रहे हैं तो उसके लिए उनके परिवार वाले भी कम जिम्मेदार   नहीं है जो  ये  नहीं देखते  कि उनके नौनिहाल   किसकी   जिंदगी  बर्बाद  करते घूम रहे हैं .पूरा प्रशासन  भी सुप्त अवस्था में रहता है .एक बाइक  पर चार-से पांच लफंगें हूँ-हा-हा का शोर मचाते दिन भर सड़कों पर घूमते  रहते हैं   और उन पर किसी कि पाबन्दी नहीं -न घरवालों की और न प्रशासन की .लड़कियों के स्कूल-कॉलेज की छुट्टी का समय हो अथवा ट्यूशन पर जाने-लौटने  का समय , महिला शिक्षिकाओं के आने-जाने का समय चौराहों-गलियों में लफंगों की भीड़ इकट्ठा रहती है .न समाज इस ओर ध्यान दे रहा और न प्रशासन .
    इस एक तेजाबी घटना ने यदि समाज व् प्रशासन को कुम्भकर्णी  नींद से नहीं जगाया तो आने वाले दिनों में ऐसी घटनाओं के  फिर से  होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता .

     शिखा कौशिक 'नूतन'

गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !


आज घर से  निकलते समय परसों हुई तेजाबी घटना की दहशत ने दिल को दहला दिया . मैंने आस-पास आज ज्यादा ध्यान दिया .कौन पास से गुजर  रहा है ? इस पर ध्यान स्वयं ही चला गया .हमारे कस्बे में हुई तेजाबी घटना ने इस धारणा  को तोड़ दिया कि हमारा क़स्बा इस तेजाबी आग से बचा हुआ है .तेजाबी हमले की शिकार बहने बहुत कर्मशील हैं और अपने परिवार के भरण-पोषण हेतु शिक्षिका का कार्य कर रही हैं .सात वर्ष पूर्व पिता के निधन के बाद से अपनी माता जी के साथ जीवन की विषमताओं को झेलती हुई इन बहनों पर तेजाबी हमला करते समय क्या कायर हमलावरों के हाथ नहीं कांपे ?किस माँ की कोख से पैदा होते हैं ये हैवान जो न तो किसी की जिंदगी  का दर्द तो महसूस कर सकते नहीं बल्कि घर से काम के लिए निकली लड़कियों की राह का रोड़ा बन जाते हैं .किन बहनों के होते हैं ये भाई  जो अपनी बहन   की ओर  उठी  नज़र  को तो फोड़ डालना चाहते  हैं पर गैर  लड़की  को सबक  सिखाने  के लिए तेजाब  से झुलसा  डालते  हैं उसकी  जिंदगी .निश्चित रूप  से अब  बेटियों   को बहुत सतर्क रहना होगा .बार बार मेरा ह्रदय उस माँ के दिल के दर्द का अंदाज़ा लगाकर रो पड़ता है जो घर से बाहर जाती बेटियों को लाखों हिदायते देकर भेजती है और जब बेटियां उन सब का पालन करने पर भी वहशियों का निशाना बनें तो माँ किस तरह अपने दिल को समझाए ! -

हवाएं शहर की अब महफूज़ नहीं हैं ,
रख दिया कलेजा माँ का चीरकर ,
बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

घूमते हैं शख्स कई तेजाब लिए हाथ ,
तुमसे उलझ जायेंगे ये जान-बूझकर , 
बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

 बेटे नहीं किसी के न भाई किसी के ,
ये पले शैतान की गोद खेलकर ,
बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

 ज़िस्म है इन्सान का हैवान की है रूह ,
काँपती इंसानियत इनके गुनाह सुनकर ,
 बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

 किस जगह मिल जाएँ कोई न ठिकाना ,
हर कदम बढ़ाना ज़रा दिल को थाम कर ,
बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

 मुंह अपना छिपाते मनहूस हमलावर ,
पहचाने कैसे कौन भागे तेजाब फेंककर ,
बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

 आँहे,  आंसू ,चीखें ,  दर्द बाँटते हैं ये ,
आता मज़ा इनको है खुनी खेल खेलकर ,
बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

हिफाज़त न छोड़ना मुकद्दर के भरोसे ,
ये घूमते हैं अपना ईमान बेचकर ,
बेटियों घर से निकलना देख-भाल कर !

हे ईश्वर !पीड़ित परिवार  को इस सदमे से उबरने की शक्ति प्रदान कर और ऐसे वहशियों को फांसी  पर लटकाने
का रास्ता साफ कर !

      शिखा कौशिक 'नूतन'