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बुधवार, 20 नवंबर 2013

चायवाले और मोदी -लघु कथा


'चच्चा ये रक्खो अपने चाय की प्यालियाँ . इब मैं नहीं जाउंगा चाय लेकर आस-पास की दुकानों पर चाय पहुँचाने ........जी चाहता है उस लीडर के बाल नोंच लूं ...मजाक बनाकर रख दिया हम चायवालों का !!!'' बारह वर्षीय बालक रहमत चाय के पानी की तरह उबलते हुए बोला तो उसका उस्ताद सुक्खू ठन्डे दूध की तरह समझाता हुआ बोला -'' बेट्टा इत्ता न गरमावे ...दो चार दिन बक लेन दें ....सब जानें हैं उस साहेब को ..कौन इब चाय बनाकर बेच्चे है ...और ये बता ..के कहवे है कोई ?'' सुक्खू के पूछने पर रहमत दांत पीसता हुआ बोला -'' के बताऊँ उस्ताद ..किस - किसका नाम लूं .मुझे चाय लेकर जाते देख एक कहे -''लो आ गया लोकल मोदी '' और एक कहे -''कहाँ रह गया अबे इत्ती देर लगा दी तैने मोदी ..कोबरा पोस्ट देखन बैठ गया था क्या ? '' वो कूने पे जिसकी दुकान है वो कहे '' चुप रहो भाई कही हम पर भी सर्विलांस न लगवा दे '' फेर सब मिलके हँसे हैं हमपर... चच्चा सच में बदनाम करके डाल दिया इस मोदी ने चाय वालों को ...कहीं का न छोड़ा .'' ये कहकर रहमत ने झूठी प्यालियाँ उठाई और धोने के लिए सड़क के नल के पास चल दिया .
शिखा कौशिक 'नूतन'

शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

गांधी परिवार चौका या छक्का नहीं !


श्री नरेंद्र मोदी जिस दिन से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुए हैं उस दिन से उनका ध्यान केवल गांधी परिवार के खिलाफ ज़हर उगलने में लगा हुआ है जैसे उनके समर्थक ''मोदी बनाम गांधी परिवार क्रिकेट मैच'' देखने बैठे हो और मोदी जी गांधी परिवार के खिलाफ जहरीले बयान रुपी चौके-छक्के लगा कर तालियां बटोर रहे हो .गांधी परिवार के खिलाफ ज़हर उगलने वाले सुब्रमण्यम स्वामी से नबर वन का स्थान छीनने में लगे मोदी जी शालीनता की सीमायें पार कर गांधी परिवार की प्रतिष्ठा को कोई नुकसान पहुंचा पाएं या नहीं पर अपनी विकास-पुरुष की छवि को उन्होंने धुल-धूसरित कर डाला है .केंद्र से भेजे गए धन के लिए यदि राहुल जी ये कहते हैं कि ''हमने धन भेजा राज्य को '' तो क्या गलत है ? मोदी जी भी शान से कहते हैं ''हमने गुजरात का ये विकास कर दिया -वो विकास कर दिया''-क्या उन्होंने अपने चाचा जी के धन से ये विकास कर दिया या उनके ताऊ जी ने अपनी मेहनत से ये विकास कर दिया .मेहनत और धन दोनों भारतीय जनता के हैं ''भारतीय जनता पार्टी '' के नहीं . किसी समय प्रमोद महाजन भी गन्दी भाषा का इस्तेमाल कर गांधी परिवार को जनता की नज़रों में गिराने का प्रयास कर चुके हैं पर आज उनका तो नामों निशान भी नहीं और उनके शहजादे राहुल महाजन क्या-क्या गुल खिला रहे हैं ये सब को मालूम हैं .साफ़ है राहुल गांधी जी के हर शब्द को पकड़कर एक तूफ़ान उठाने वाले मोदी जी अपनी ही गरिमा के साथ गन्दा खेल खेल रहे हैं और सबसे ज्यादा अपना ही नुकसान कर रहे हैं .
शिखा कौशिक 'नूतन'