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मंगलवार, 14 अप्रैल 2015

ब्लोगिंग के साइड इफेक्ट [नकारात्मक प्रभाव ]


ब्लोगिंग के साइड इफेक्ट [नकारात्मक प्रभाव ]
 आज सम्पूर्ण विश्व कंप्यूटरमय होने की दिशा में  प्रयासरत है .बैंकिंग क्षेत्र,तकनीकी संसथान और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान कंप्यूटर के यंत्र मस्तिष्क से लाभान्वित हो रहे हैं ;वहीँ लाइफ लाइन बने इंटरनेट ने दुनियाभर के कम्प्यूटर्स को जोड़कर सम्पूर्ण विश्व को ग्लोबल फैमिली में परिवर्तित कर दिया है .इसी क्रम में ''वर्ड प्रेस '' ''ब्लोगर'' आदि के द्वारा प्रदान की गयी सुविधा से लाभान्वित होते हुए आज अंग्रेजी ,हिंदी सहित अनेक भाषाओँ में लाखों ब्लॉग स्थापित किये जा चुके हैं .ये ब्लॉग साहित्य;तकनीक;कला;राजनीति आदि अनेक क्षेत्रों से सम्बंधित स्तरीय सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं .''ब्लॉग '' जिन्हें हम हिंदी भाषी ''चिट्ठा'' भी कहते हैं -सरल शब्दों में चिट्ठाकार की निजी डायरी का ही ऑनलाइन   रूप है .चिट्ठाकारी ने जहाँ प्रत्येक व्यक्ति को यह सुअवसर प्रदान किया है कि वह अपनी रचनाओं को स्वयं प्रकाशित कर पाठकों से त्वरित प्रतिक्रियाएं प्राप्त कर सकें वहीँ दूसरी ओर प्रकाशकों की मनमानी को भी ठेंगा दिखा दिया है .आज हर ब्लोगर स्वयं ही लेखक है और स्वयं ही प्रकाशक भी .ये है ब्लोगिंग के सिक्के का एक पहलू अब जरा दूसरे  पहलू पर भी विचार करें तो इसके नकारात्मक प्रभावों से भी हम परिचित होते हैं .क्या हैं ये नकारात्मक प्रभाव ?इन पर निम्न बिन्दुओं के अंतर्गत विचार किया जा सकता है -

*स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव -सर्वप्रथम ब्लोगिंग के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर विचार करें तो यह तथ्य प्रकट होता है कि ब्लोगर को ब्लोगिंग का नशा इस कदर अपनी गिरफ्त में ले लेता है कि वह पहले कि अपेक्षा ज्यादा समय पी.सी.,लैपटौप,मोबाईल पर खर्च करने लगता है .ब्लोगिंग न कर पाने पर वह थकान  महसूस करता है ,अनमना हो जाता है और चिडचिडा भी हो जाता है .ज्यादा ब्लोगिंग करने के कारण
उसे अनेक शारीरिक समस्याएं जैसे पीठ दर्द,सिरदर्द प्रेषण करने लगती हैं .ब्लोगिंग न करने पर बेचैनी व् तनाव बढ़ता है यहाँ तक कि दिमागी गतिविधियों  और रक्तचाप तक में परिवर्तन होता देखा गया है .ब्लोगिंग के चक्कर में व्यक्ति खाने व् सोने जैसी अनिवार्य  गतिविधियों कि उपेक्षा करता है जिसका दुष्परिणाम उसे ख़राब स्वास्थ्य के रूप में चुकाना पड़ता है .

*परिवार की अनदेखी -   ब्लोगिंग करने वाला व्यक्ति परिवार की अनदेखी भी करने लगता है .वह अपना  खाली समय बच्चों  ,पत्नी व् अन्य परिवारीजन के साथ बितानें में खर्च न करके ब्लॉग-पोस्ट लेखन में देने लगता है .जाहिर सी बात है इससे परिवार के आपसी संबंधों में खिचाव आने लगता है .

*आउटडोर  गतिविधियों की अनदेखी -ब्लोगिंग के aadee  लोग ब्लॉग-जगत की दुनिया में इतना मग्न हो जाते हैं कि जरूरी काम निपटाकर तुरंत कंप्यूटर पर ब्लॉग गतिविधियों में रम जाते है .इसके चक्कर में वे अपने आस-पास के लोगों से कट जाते हैं और बाहरी गतिविधियों में रुचि लेना बंद कर देते हैं .एक ओर ब्लोगिंग जहाँ संसार भर के लोगों के बीच दूरियां काम कर रही है वहीँ आदमी को उसके सामाजिक दायरे से काट कर एकाकी भी बना रही है -
                                 ''फासलों की दुनियां में दूरियां नहीं बाकी;
                                    आदमी जहाँ भी है,दायरों में है .''

*छदम व् काल्पनिक प्रोफाइलों से युक्त ब्लॉग जगत में प्रतिपल यह भय बना रहता है कि आपकी रचनाओं की कॉपी कर कोई अन्य इनके लेखन का श्रेय न ले ले .कई बार वास्तविक परिचय छिपाकर कुछ ब्लोगर अपनी धार्मिक ,राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति करने वाले लेख लिखकर उतेजना पैदा करने का कुत्सित प्रयास भी करते हैं .

*वर्चस्व की लड़ाई से ब्लॉग जगत भी अछूता नहीं है .कुछ ब्लोगर धन-बल से समस्त ब्लॉग जगत को अपनी निजी  संपत्ति  बनाने में लगें रहते हैं .वे एक पसंदीदा ब्लोगर-समूह बनाकर उन्हें सम्मानित करते हैं और सम्पूर्ण ब्लॉग जगत में इसका प्रचार प्रसार कर अन्य ब्लोगर्स कि तुलना में स्वयं  स्वयं द्वारा सम्मानित ब्लोगर्स को श्रेष्ठ    घोषित कर देते हैं जिससे अच्छा लेखन करने वाले ब्लोगर्स हतोत्साहित होते हैं .

*महिला ब्लोगर्स और भी अधिक सजग रहकर ब्लॉग पोस्ट डालनी होती है .कई बार महिला ब्लोगर्स को ज्वलंत मुद्दे उठाने के लिए वास्तविक पहचान छिपाकर ब्लोगिंग करने के लिए मजबूर होना पड़ता है .यहाँ एक महिला ब्लोगर द्वारा अपने प्रोफाइल में उद्धृत ये पंक्तियाँ उल्लेखनीय हैं -''मैं द्रौपदी हूँ और चीर-हरण से डरती हूँ .''

                             उपर्युक्त वर्णित ब्लोगिंग के नकारात्मक प्रभावों से डरकर ब्लोगिंग छोड़ देना न तो उचित है और न ही संभव .आवश्यकता है संयमित ,सजग  व् सटीक ब्लोगिंग की .वास्तव में यह आज के हर रचनाशील व्यक्ति के लिए एक वरदान है .आज ब्लोगिंग ने हमें यह सुअवसर प्रदान किया है किहम अपने निजी अनुभवों ,स्थानीय व् राष्ट्रीय से लेकर अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं पर निर्भीकता के साथ विचार प्रस्तुत कर सकें .महिला ब्लोगर्स को जहाँ तक मैंने महसूस किया है प्रोत्साहित ही किया जाता है और यदि कोई अशालीन टिप्पणियों के द्वारा आपको परेशां करता है तब आप मॉडरेशन लागू कर पहले स्वयं टिप्पणियों का निरिक्षण कर ले तभी प्रकाशित करें -अशालीन टिप्पणियों को आप हटा सकती हैं .
            प्रत्येक ब्लोगर को यह भी ध्यान रखना हाहिये कि वह ब्लोगिंग के चक्कर में न तो अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करे और न ही परिवार कि अपेक्षाओं की उपेक्षा .समय निर्धारित कर ब्लोगिंग का शौक पूरा करें 
                     धार्मिक कट्टरता,राजनैतिक विद्वेश्ता,अशालीन सामग्री से युक्त ब्लॉग पोस्ट व् ब्लॉग को उपेक्षित कर ब्लॉग जगत की गरिमा बनाये रखने में हम सभी ब्लोगर्स अपूर्व योगदान दे सकते हैं .आने वाले समय में ब्लोगिंग का भविष्य सुनहरा है क्योकि ब्लोगर दिल से लिखता है दबाव में नहीं .

                                    जय हिंद 
                                                                           शिखा कौशिक 

2 टिप्‍पणियां:

PRAHLAD VERMA ने कहा…

एक वास्तविक दुनिया का आभासी पर्दा आपने उठा दिया है।

PRAHLAD VERMA ने कहा…

एक वास्तविक दुनिया का आभासी पर्दा उठाने की कोशिश की है आपने।