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रविवार, 26 अगस्त 2012

''विद्रोही सीता की जय'' लिख परतें इतिहास की खोलूँगी !


''विद्रोही सीता की जय'' लिख परतें इतिहास की खोलूँगी !
Hindu Goddess Sita

त्रेता में राम दरबार सजा ; थी आज परीक्षा सीता की ,
तुम  करो  प्रमाणित  निज  शुचिता थी राजाज्ञा रघुवर की ,
वाल्मीकि  संग खड़ी सिया के मुख पर क्षोभ के भाव दिखे ,
सभा उपस्थित जन जन संग श्री राम लखें ज्यों चित्रलिखे . 
बोली सीता -श्री राम  सुनो  अब और परीक्षा ना दूँगी  नारी जाति सम्मान हित अपवाद सभी  मैं  सह लूंगी !  प्रभु आप  निभाएं राजधर्म मैं नारी धर्म निभाऊंगी ; आज आपकी आज्ञा  का पालन न � �गी , स्वाभिमानी  नारी बन सब राजदंड मैं भोगूंगी  नारी जाति सम्मान हित .... जो अग्नि परीक्षा पहले दी उसका भी मुझको खेद है , ये कुटिल आयोजन  बढ़वाते  नर-नारी में भेद हैं , नारी विरूद्ध अन्याय पर विद्रोह की भाषा बोलूंगी  नारी जाति सम्मान हित ....... था नीच अधम पापी रावण जिसने था मेरा हरण किया , पर अग्नि परीक्षा ली राजन क्यों आपने ये अपराध किया ? हर  नारी मुख से  हर युग में ये प्रश्न आपसे पूछूंगी , नारी जाति सम्मान हित .....
नारी का यूं अपमान न हो इसलिए त्यागा रानीपद ;
मैने छोड़ा साकेत यूं ही ना घटे कभी नारी का कद ,
नारी का मान बढ़ाने को सब मौन मैं अपने तोडूंगी ,
नारी जाति सम्मान हित ....

अग्नि परीक्षा शस्त्र लगा पुरुषों के हाथ मेरे कारण ;
भावुकता में ये भूल हुई पाप हुआ मुझसे दारुण ,
मत झुकना तुम अन्याय समक्ष सन्देश सभी को ये दूँगी .
नारी जाति सम्मान  हित ....


इस महाभयंकर भूल की मैं दूँगी  खुद को अब यही सज़ा ;
ये भूतल फटे अभी इस क्षण जाऊं इसमें अविलम्ब समा ,
अपराध किया जो मैंने ही दंड मैं उसका झेलूंगी ,
नारी जाति सम्मान हित .....
पुत्री सीता की व्यथा देख फट गयी धरा माँ की छाती ; बोली ये जग है पुरुषों का नारी उनको कब है भाती  ? आ पुत्री मेरी गोद में तू तेरे सब कष्ट मिटा  दूँगी . नारी जाति सम्मान हित ..... सीता के नयनों में उस  क्षण अश्रु नहीं अंगारे  थे ; विद्रोही सीता रूप देख उर काँप रहे वहाँ सारे थे , फिर समा गयी सीता कहकर ये अत्याचार न भूलूंगी . नारी जाति सम्मान हित ....
नारी धीरज को मत परखो सीता ने ये सन्देश दिया ;
सन्देश यही एक देने को निज प्राणों का उत्सर्ग किया ,
'विद्रोही सीता की जय ''लिख परतें इतिहास की खोलूँगी 
जय सीता माँ की बोलूंगी ..जय सीता माँ की बोलूंगी !

                               शिखा कौशिक 'नूतन'
                              [नूतन रामायण ]