अन्ना द्वारा निरंतर अरविन्द केजरीवाल पर दिए जा रहे बयान अत्यंत निंदनीय हैं .अन्ना का यह बयान भी नितांत आपत्तिजनक है कि-''केजरीवाल के सत्ता मोह के कारण उनका आन्दोलन बिखरा .''जबकि वास्तविकता सभी जानते हैं कि लम्बे खिचे इस आन्दोलन से जनता का मोह भंग होने लगा था तब टीम अन्ना के कई सदस्यों ने मिलकर इस आन्दोलन को एक दीर्घकालिक संकल्प में परिणत करने हेतु एक नई राजनैतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया जिसपर पहले अन्ना ने भी सहमति कि मुहर लगा दी थी ....पर अन्ना अपने इस कदम से भी बाद में पीछे हट गए .रही बात यह कि अन्ना केजरीवाल पर सत्ता प्राप्ति हेतु धन प्रयोग का जो आरोप लगा रहे हैं तो उसमे क्या गलत है ?अब ये तो सभी जानते हैं कि नेताओं और पूंजीपतियों के भेदिये पानी पी पी कर तो केजरीवाल को खबरे लाकर नहीं दे रहे .आज के युग में 'राम' बनकर कहाँ राजनीति में टिका जा सकता है यहाँ तो 'कृष्ण बनना पड़ता है जो 'न दैन्यं न पलायनम ' की शिक्षा देते हैं .अन्ना को चाहिए वे अविलम्ब ये ऐलान कर दें कि -''राजनैतिक बयानों के सम्बन्ध में मैं आजीवन मौन व्रत पर हूँ !''
शिखा कौशिक 'नूतन'
