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शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

अन्ना मौन व्रत ले लो !


 

अन्ना द्वारा निरंतर अरविन्द केजरीवाल पर दिए जा रहे बयान अत्यंत निंदनीय हैं .अन्ना का यह बयान भी नितांत आपत्तिजनक है कि-''केजरीवाल के सत्ता मोह के कारण उनका आन्दोलन बिखरा .''जबकि वास्तविकता सभी जानते हैं कि लम्बे खिचे इस आन्दोलन से जनता का मोह भंग होने लगा था तब टीम अन्ना के कई सदस्यों ने मिलकर इस आन्दोलन को एक दीर्घकालिक संकल्प में परिणत करने हेतु एक नई राजनैतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया जिसपर पहले अन्ना ने भी सहमति कि मुहर लगा दी थी ....पर अन्ना अपने इस कदम से भी बाद में पीछे हट गए .रही बात यह कि अन्ना केजरीवाल पर सत्ता प्राप्ति हेतु धन प्रयोग का जो आरोप लगा रहे हैं तो उसमे क्या गलत है ?अब ये तो सभी जानते हैं कि नेताओं और पूंजीपतियों के भेदिये पानी पी पी कर तो केजरीवाल को खबरे लाकर नहीं दे रहे .आज के युग में 'राम' बनकर कहाँ राजनीति में टिका जा सकता है यहाँ तो 'कृष्ण बनना पड़ता है जो 'न दैन्यं न पलायनम ' की शिक्षा देते हैं .अन्ना को चाहिए वे अविलम्ब ये ऐलान कर दें कि -''राजनैतिक बयानों के सम्बन्ध में मैं आजीवन मौन व्रत पर हूँ !''

                       शिखा कौशिक 'नूतन'

गुरुवार, 23 अगस्त 2012

'' राहुल को लाना होगा अपनी कार्यशैली में बड़ा अंतर ''


यह  स्वागत  योग्य  है  कि श्री  राहुल गाँधी भारतीय राजनीति में एक बड़ी भूमिका के लिए तैयार हैं किन्तु बड़ी भूमिका के साथ  साथ उन्हें  अपनी  कार्य  शैली  में भी  बड़ा  अंतर  लाना  होगा  .पिछले  दिनों  श्री सलमान  खुर्शीद  द्वारा की गयी टिप्पणी को भी सकारात्मक  नज़रिए  से देखा जाना चाहिए .राहुल को अब जुगनू की भांति नहीं सूर्य की भांति चमकना होगा .उन्हें जनता के समक्ष निरंतर उपस्थित रहना होगा .यूं.पी. के चुनाव के बाद एक माह तक गायब रहना जनता में यह सन्देश प्रेषित करता है कि-'हमारा नेता गंभीरता के साथ हमारी समस्याओं के प्रति जागरूक नहीं है' -


'जुगनू नहीं तू आफ़ताब बन चमकना सीख 
करनी है सियासत तो कुछ दांव-पेंच सीख '

                                         राहुल जी को अपने व् अपने परिवार के खिलाफ लगाये जाने वाले आरोपों का भी खुलकर विरोध करना होगा क्योंकि उनकी चुप्पी को इस रूप में प्रसारित किया जाता है कि 'यदि ये आरोप निराधार हैं तो राहुल व् गाँधी परिवार इनका विरोध क्यों नहीं करता '-

       दुश्मन  लगाना चाह रहा दामन पर तेरे दाग 
          मायूस हो यूं चुप न बैठ पुरजोर आज चीख '

                                                      देश कि सभी प्रधान  समस्याओं पर अपने नज़रिए से राहुल जी को चाहिए कि वे जनता को अवगत कराते रहे  .ये न हो कि --भट्टा परसौल पर तो आप अपना विरोध दर्ज कराये पर दिल्ली पुलिस द्वारा रामलीला मैदान में आम जनता पर मध्य रात्रि में किये गए अत्याचार पर कुछ न कहें .आपको महगाई जैसे मुदों पर अपनी राय से जनता को अवगत कराना चाहिए ताकि जनता में यह सन्देश जाये कि 'हमारा प्रिय नेता हमारी समस्याओं के प्रति संवेदनशील है '-


'तू वतनपरस्त है  कर मुल्क़ की ख़िदमत 
मुफ़लिसी पर चोट कर ना मांगें कोई भीख '

                

   राहुल जी को यह भी ध्यान रखना होगा कि 'वे एक राष्ट्रीय नेता हैं '.किसी भी प्रदेश के चुनावों में उन्हें स्वयं को झोंक देने की जरूरत  नहीं है .उनका काम है राज्य के पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करना ,अनुशासित करना .उत्तर प्रदेश के हाल में हुए चुनावों में राहुल जी ने तो अपनी सारी ताकत झोक दी और प्रदेश के पार्टी नेता हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहे जिसके कारण राहुल जी की छवि को धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया गया -

              '  मासूम  रियाई की मक्कारियों से बच 
                   कई खा  चुके हैं धोखा इसकी गवाह तारीख़ '

                                     राहुल जी को अपने आस पास चापलूसों,चाटुखोरों के जमावडे को भी रोकना होगा .उन्हें जनता के सीधे संपर्क में रहना होगा तभी आने वाले कल में वे पूरे भारत को कुशल नेतृत्व देने में सक्षम हो पायेंगें -
'अपने में ला सिफत सिफलों  को दूर रख 
तेरी फ़िरासत देखकर दुश्मन भी जाये रीझ '
                                               शिखा कौशिक 


मंगलवार, 10 जुलाई 2012

मैं हूँ बागी संगमा ....


मैं हूँ बागी संगमा ....

विदेशी मूल के मुद्दे पर कॉंग्रेस से  गया था भाग ;
फिर जुड़ा 'यू.पी.ए' से  ...जिसकी सोनिया सरताज ,
पुत्री को मंत्री बना ....भोगा  सत्ता राज ,
राष्ट्रपति पद के लिए फिर जली ह्रदय में आग ;
छोड़ पार्टी  अपनी  किया नया आगाज़ ,
'वोट मुझे देना सभी 'सुन आत्मा की  आवाज़  ,
वैसे मेरी आत्मा  मुझे छोड़ चुकी है आज ,
मैं हूँ बागी संगमा ..मुझे क्या नैतिकता से काज?
                       शिखा कौशिक 

बुधवार, 16 नवंबर 2011

राहुल गाँधी जी के बयान पर तूफ़ान -एक षड्यंत्र

राहुल गाँधी जी के बयान  पर तूफ़ान -एक षड्यंत्र 

                                   


राहुल गाँधी जी के हर बयां को लेकर जो तूफ़ान खड़ा कर दिया जाता है वो हमारे समाज को दिशाहीनता की ओर अग्रसर करने वाले विपक्षी नेताओं व् बुद्धिजीवियों का  षड्यंत्र ही नजर आता है.''कब तक महाराष्ट्र में जाकर भीख मांगोगे या पंजाब  में जाकर काम  ?'' बयान के पीछे उनकी भावना केवल उत्तर प्रदेश के विकास की अवरूद्ध गति को गति प्रदान करने की थी न कि उत्तर प्रदेश के नागरिको का अपमान करने की भावना या देश में विघटन -क्षेत्रवाद को बढ़ावा देने की भावना .पर देखने में आता है कि स्वयं को चर्चा में लाने के लिए अवसरवादी नेता राहुल जी के बयानों को गलत मोड़  देकर जनता को भड़काने का प्रयत्न करते हैं .केवल राहुल जी ही नहीं अनेक बड़े नेता इस दुश्प्रवर्ती का शिकार होते रहते हैं . मीडिया को चाहिए कि ऐसे अवसरवादी नेताओं के बयानों को ज्यादा महत्त्व न देकर सकारात्मक भूमिका निभाते हुए समाज के सामने सटीक ख़बरों को ही प्रस्तुत करे .''भीख मांगना '' हमारी भाषा में अपने स्वाभिमान  को एक ओर रखकर कोई काम करना भी है ..केवल कटोरा हाथ में लेकर भीख मांगना नहीं .अन्य राज्यों में उत्तर प्रदेश के नागरिकों के साथ जो व्यव्हार किया  जाता है उसे कोई भी स्वाभिमानी व्यक्ति स्वीकार नहीं कर सकता पर अपने प्रदेश में जब रोजगार न मिले तो क्या करे ? इसलिए राहुल जी ने जो शब्द कहे हैं वो केवल हमारा दर्द जानने वाला नेता ही कह सकता है .इस लिए उनके बयान को मुद्दा बनाकर स्वार्थ की रोटी सकने वालों को अपने इस कर्म पर शर्मिंदा होना चाहिए .जनता का हित देखने वाले ऐसा कर्म नहीं कर सकते .


                                                      शिखा कौशिक 
                                [विचारों   का   चबूतरा  ]
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