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सोमवार, 16 अप्रैल 2012

...तो सडको पर पिटने व् जेल जाने के लिए तैयार रहें !

...तो सडको पर पिटने व्  जेल जाने के लिए तैयार रहें !


इंटरनेट यूजर्स की अभिव्यक्ति की आजादी के लिए  संघर्ष कर रही इस   कम्यूनिटी ''Save Your Voice: A Movement Against Web Censorship ''ने कल यह आयोजन किया -
''Protest against professor's arrest for posting Mamta's cartoons (16 photos)
ममता बनर्जी के कार्टून पोस्ट करने पर प्रोफ़ेसर की प्रताडना के विरोध में इंटरनेट यूज़र्स ने बनाये कार्टून्स ममता बनर्जी के कार्टून्स पोस्ट करने पर पश्चिम बंगाल के एक प्रोफ़ेसर की प्रताड़ना के विरोध में Save Your Voice की ओर से इंटरनेट यूज़र्स ने 15 अप्रैल दिन रविवार को इण्डिया गेट पर शाम पांच बजे इकट्ठे होकर कार्टून्स बनाये. पशिचम बंगाल के प्रोफ़ेसर अम्बिकेश महापात्र को ममता बनर्जी के कार्टून्स बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और प्रताड़ित किया गया, इसे हम अभिव्यक्ति की आज़ादी पर एक और हमले के रूप में देखते हैं. जिस तरह गांधी जी ने नमक क़ानून का विरोध दांडी में नमक बनाकर किया था वैसे ही कार्टून्स पर पाबंदी लगाने का विरोध इंडिया गेट पर कार्टून्स बनाकर किया गया. पिछले काफी समय से सेव योर वॉयस अभियान इंटरनेट सेंसरशिप के सरकारी प्रयासों के खिलाफ आवाज़ उठाता रहा है. केंद्र सरकार पहले ही इंटरनेट की आजादी पर अंकुश लगाने के प्रयास कर रही है और अब राज्य सरकारें भी उसी रस्ते पर चलती नज़र आ रही हैं. इंटरनेट यूज़र्स ने इंडिया गेट पर कार्टून्स बनाकर ये सन्देश दिया कि हमारी अभिव्यक्ति की आज़ादी को कुचलना इतना आसान नहीं है. सेव योर वॉयस टीम www.saveyourvoice.inwww.facebook.com/saveyourvoice Contact: 09717900302, 09810659060; email: saveyourvoice@gmail.com



इस आयोजन ने तो इस कम्यूनिटी की साख पर ही प्रश्न चिह्न लगा दिया है

आप अगर ऐसी कुत्सित विचारधारा वाले लोगो के पक्ष में धरना  देंगे ...उनका समर्थन करेंगे तो याद रखिये आने वाले कल में आप स्वयं की अथवा अपनी माता बहनों की मजाक उड़ते देंखेगें इंटरनेट पर .
                                         वास्तविकता तो यह है कि हम जैसे इंटरनेट यूजर्स को ऐसे विकृत मानसिकता वाले यूजर्स को सबक सिखाने के लिए एक संगठन  बनाना  चाहिए ...ना कि इस जैसे मानसिक  बलात्कारियों का समर्थन करना चाहिए .
                     स्त्री की गरिमा को ...अस्मिता को शर्मिंदा करने वाली ऐसी किसी भी ब्लॉग पोस्ट ...सोशल साईट की पोस्ट ...फोटो ...कार्टून का तो हमें सबसे पहले विरोध करना चाहिए चूंकि ये सभी इंटरनेट यूजर्स की नैतिक छवि को धूमिल करता है .हम इंटरनेट पर क्या ये सब करने ..देंखने के लिए आये ?
                                     जो इस कुत्सित सोच वाले प्रोफ़ेसर का पक्ष ले रहें है क्या अपने परिवारीजन के अभद्र चित्रण पर ये नहीं कहेंगें -'''यदि मेरी माँ ..बहन का ऐसा कोई चित्रण किया गया तो मैं करने वाले का हाथ तोड़ दूंगा .'' ये है हमारी नैतिकता ...हम स्त्री को देवी का सम्मान देते हैं .हम कैसे उसकी गरिमा के साथ खिलवाड़ देख सकते हैं ?
                        आम भारतीय नारी तक की ऐसी मजाक उड़ाई जाये तब भी हमारा खून खौल उठाता है फिर राष्ट्र हित में अपना जीवन लगाने वाली ममता दी की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करने वाले को दण्डित तो किया ही जाना चाहिए .यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि सोनिया गाँधी जी व् मायावती  जी जैसी महिला नेत्रियों को भी कुछ इंटरनेट यूजर्स या गुंडे अपनी वीभत्स सोच का लगातार  शिकार बना रहे हैं



[फेसबुक ]

                                           
 ऐसे अमर्यादित लोगों का समर्थन यदि हम करते हैं तो हम अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं .
                               ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला  नहीं ये उस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरूपयोग है .वैसे ही जैसे एम्.ऍफ़.हुसैन साहब ने हिन्दू देवी देवताओं की नग्न तस्वीरे बनाकर अपनी कला को कलंकित कर लिया था .पूनम पांडे इसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का फ़ायदा उठाकर आधी रात को अपनी नग्न तस्वीरे ट्विटर पर डाल देंती  है ....क्या हम ऐसी ओछी हरकतों  को समर्थन देकर लोकतंत्र में दिए गए अभिव्यक्ति के अधिकार की धज्जिया उड़ाते रहे और उड़ाने वालों का पक्ष लेते रहे .
                                 शुक्र है कि ममता दी के समर्थकों ने सही कदम उठाकर यह दिखा  दिया कि हमारे देशवासियों में अभी वो ज़ज्बा कायम है जो किसी नारी के अपमान को सहन नहीं करता ....काश त्रेतायुग में भी कुछ अयोध्यावासियों में यह ज़ज्बा होता तो अनर्गल प्रलाप करने वाले धोबी को कड़ा दंड मिल जाता और माता सीता को वनगमन न करना पड़ता .
                                               अभिव्यक्ति कि स्वत्रन्त्रता आपका अधिकार है पर किसी की गरिमा से खेलने का हक किसी को नहीं है .आप अपने उत्तम विचारों ..जिनसे राष्ट्र-समाज  का हित हो विश्व में प्रसारित करने के अधिकारी है.. किसी की अस्मिता को रौदने या मखौल उड़ाने के अधिकारी नहीं 
                                नारी हो ..पुरुष हो ..सभी का अपना एक गरिमामाय जीवन है .आम भारतीय नागरिक हो अथवा जानी-मानी हस्ती -सबकी अपनी अस्मिता है ..गौरव है .अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर यदि आप इससे खिलवाड़ करने का प्रयास करेंगें तो आप को जान लेना चाहिए कि आप को दंड अवश्य  मिलेगा .अपना विवेक...अपनी नैतिकता को अपनी विकृत सोच के कबाड़ख़ाने में बंद करके रखने वालों को सड़कों पर पिटने ...जेल जाने  के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि  यह भी तो जनता का अपने मन में ...अपने श्रद्धेय ..प्रिय पात्र के अपमान के विरोध में उबल रही भावना की एक  अभिव्यक्ति मात्र ही है .वैसे भी गोस्वामी जी ने ''श्रीरामचरितमानस ''में सही ही तो लिखा है -
                     ''विनय न मानत जलधि जड़ गए तीन दिन बीत ;
                       बोले राम सकोप तब भय बिनु होई न प्रीत ''


                                                      जय हिंद! जय भारत माता की !
                                                                                     शिखा कौशिक 

रविवार, 12 फ़रवरी 2012

जनता को भिखारी समझते हैं क्या ?

पांच राज्यों  में  जारी  चुनावी प्रचार के दौरान सभी पार्टियों ने जनता को काफी कुछ मुफ्त में देने का आश्वासन दिया है .कोई पार्टी लड़कियों को मुफ्त शिक्षा का ऐलान कर रही है तो कोई मुफ्त लैपटॉप प्रदान करने की घोषणा कर रही है .ये सब सुनकर -देखकर जनता को तो बस क्रोध ही आ सकता है .सत्ता पाते ही जनता के पैसों से अपने  खजाने भरने वाले  चुनावों के समय जनता को भिखारी समझते हैं क्या ?
                                   हम भिखारी  नहीं !ये नेताओं व् राजनैतिक दलों को भली प्रकार जान लेना चाहिए .आप किसानों को उनके उत्पादो  का उचित मूल्य दीजिये .सरकारी विभागों  में ईमानदारी  से कार्य  करवाइए .खुद  ईमानदार रहिये और भ्रष्ट लोगो को कोई पद मत दीजिये .आपका काम बस इतना है .इसे ही गरिमापूर्ण तरीके से निभाए .
                                   हम भारतीयों के हाथों में दम है .हमें मुफ्त में कुछ नहीं चाहिए .बस हमें हमारे हक़ से वंचित  न किया जाये .जनता का पैसा जन-हित में खर्च हो जाये बस इतनी व्यवस्था करनी है आपको .दानवीर बनने वाले नेतागण क्या ऐसा कर पाएंगे ?

                                             शिखा कौशिक 

गुरुवार, 15 दिसंबर 2011

.नरेंद्र मोदी जी को ऐसे शुभ -आरम्भ हेतु हार्दिक शुभकामनायें !

जेठ की गर्मी में ये  ठंडी  हवाओं  जैसी खबर है . शीत में गर्म रजाई सी खबर  है- नरेंद्र मोदी जी ने भारतीय नेताओं की ख़राब होती  छवि को सुधारने का  सार्थक प्रयास किया है .खबर इसप्रकार है -
Narendra Modi
''अहमदाबाद।। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'सद्भावना' दिखाते हुए सूरत में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया और राहुल गांधी की खिल्ली उड़ाने वाले होर्डिंग्स लगाने पर बीजेपी कार्यकर्ताओं की जमकर खबर ली और इन्हें तुरंत हटाने का निर्देश दिया।............ सूरत के बीजेपी कार्यकर्ताओं ने 18 दिसंबर को मोदी के सद्भावना उपवास से पहले ये होर्डिंग लगाए थे। मोदी ने ट्वीट किया, 'मैंने अखबारों में सूरत में बीजेपी कार्यकर्ताओं के कुछ आपत्तिजनक होर्डिंग के बारे में पढ़ा। लोकतंत्र में हमें इस तरह की चीजों से बचना चाहिए और एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए।' मोदी की सख्ती के बाद ये होर्डिंग्स हटा दिए गए हैं। ''[नवभारत टाइम्स से साभार ]
                        यदि नरेंद्र  मोदी जी   इसकी  शरुआत  करते  हैं तो वास्तव में सराहनीय हैं क्योंकि इन्होने ही यह कहकर कि -''कॉंग्रेस  बूढी हो गयी है ' और ''राहुल गाँधी को भारत  में क्लर्क की नौकरी भी नहीं मिलेगी '' अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरूपयोग किया था .लोकतंत्र में वास्तव में असहमति प्रकट करने या विरोध प्रदर्शित करने का तरीका भी सभ्य ही होना चाहिए क्योंकि किसी व्यक्ति की सार्वजानिक छवि को नुकसान पहुचाने के लिए अपशब्द कहना आज राजनीति में आम बात हो गयी  .यदि नेतागण सयंमित प्रतिक्रिया प्रकट करेंगे तो अवश्य जनता  में सकारात्मक सन्देश जायेगा और थप्पड़ या जूते मारे जाने जैसी  घटनाएँ नहीं घटेंगी .नरेंद्र मोदी जी को ऐसे शुभ -आरम्भ हेतु हार्दिक शुभकामनायें !


                                      शिखा  कौशिक  
                              [vicharon ka chabootra ]

मंगलवार, 13 दिसंबर 2011

राहुल पी.एम्.बनने का सपना देख रहे हैं ?तो यह स्वाभाविक ही है !


राहुल पी.एम्.बनने का सपना देख रहे हैं ?तो यह स्वाभाविक  ही है 
Rahul Gandhi



सपने सभी देखते हैं .सपने देखने में बुराई क्या है ?बाबा रामदेव जी व् अन्ना जी द्वारा राहुल गाँधी जी की आलोचना यह कह कर किया जाना कि-''राहुल पी.एम्.बनने का सपना देख रहे हैं ?कोई प्रभाव नहीं छोड़ती विशेषकर   अन्ना जी के मुख  से .आज युवा अन्ना जी को  एक आदर्श के रूप में देख रहे हैं .उन्हें कोई भी टिप्पणी करने से पूर्व यह विचार अवश्य   करना चाहिए कि मीडिया उसे किस तरह प्रचारित करेगा ?राहुल गाँधी जी पिछले  सात  वर्षों  से राजनीति  में सक्रिय  हैं पर आज तक उन्होंने सरकार में कोई पद नहीं स्वीकारा है .उनका ध्यान  शुरू से ही अपनी पार्टी के संगठन   को जमीनी स्तर से मजबूत करने पर रहा है .लोकपाल को लेकर राहुल जी की आलोचना में यह कहना कि ''  पी.एम्. बनने का सपना देख  रहें हैं '' या ''एक दिन  झोपडी में जाकर  रहने  से गरीबों  का दुखदर्द  नहीं समझा जा सकता ''जैसे कटाक्ष  करना राजनीति से प्रेरित  लगते हैं .अन्ना जी को सशक्त  लोकपाल हेतु शुरू किये गए अपने आन्दोलन को राजनीति से दूर ही रखना चाहिए .राहुल गाँधी जी पर सीधे प्रहार करने में तो विपक्ष ही काफी आतुर रहता है फिर  अन्ना जी क्यों  अपने को राजनैतिक पार्टियों का मोहरा  बना  रहे हैं ?अन्ना जी को इस  विषय में पुनर्विचार करना चाहिए वैसे   भी राहुल गाँधी जी अगर पी.एम्. बनने का सपना देख रहे हैं तो यह स्वाभाविक  ही है .प्रत्येक   व्यक्ति अपना कोई न  कोई लक्ष्य तो निर्धारित करता ही है और उनके समर्थक भी तो यही चाहते हैं .रही बात गरीबों के दुखदर्द को जानने की तो ये तो वे भी नहीं जानते जो खुद गरीबी से उठकर मंत्री-मुख्यमंत्री के पद पर सुशोभित होते हैं .इनके विषय में भी  तो कुछ कहना चाहिए अन्ना जी आपको !
                                              शिखा कौशिक 
                            [विचारों का चबूतरा ]

रविवार, 13 नवंबर 2011

ईट का जवाब पत्थर से दें !

ईट का जवाब पत्थर से दें !

                                               
                                                 [in wikipedia se sabhar ]
''.......मियां जी  एक थप्पड़ ही तो लग गया है मेरे हाथ से आपके गाल पर गलती से ...अब माफ़ भी कर दो .इस के कारण  हमारे आपसे ताल्लुकात में कोई फर्क नहीं आना चाहिए .आना-जाना,उठना -बैठना ,लेना-देना -सब पहले जैसा ही चलता रहना चाहिए .'' लाट साहब ने अपनी टाई की नॉट  कसते हुए और हाथ बढ़ाते हुए कहा .मियां जी गाल सहलाते हुए बोले ''......अब हटिये भी लाट साहब .कहाँ हम -कहाँ आप .आपने मुझको  भारत और खुद को अमेरिका समझ रखा है क्या ?आप थप्पड़ मारें जाएँ और मैं माफ़ करता जाऊ .हम तो ईट का जवाब पत्थर से देते हैं ......''और इसके बाद मियां जी ने फार्मूला-१ रेस की कार की गति से हाथ उठाया और एक जोरदार तमाचा लाट साहब के गोरे गाल पर रसीद कर दिया .


[[पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर अब्दुल कलाम जी के अमेरिका द्वारा किये  गए अपमान का जवाब भी तो  ''भारत  सरकार  को  मियां   जी की   तरह ही   देना चाहिए ना ?]
                                                     शिखा कौशिक