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मंगलवार, 18 जून 2013

राहुल जी के जन्म दिवस पर हार्दिक शुभकामनायें

Photo: HAPPY BIRTHDAY RAHUL JI. 43 ON 19TH JUNE;
https://www.facebook.com/events/164634627041214/

[with thanks -RAHUL GANDHI WITH A VISION FOR COMMON PEOPLE's photo.]  

महात्मा गाँधी जी के पदचिन्हों   का अनुसरण कर देश के हर कोने तक की यात्रा , जनता से सीधा संवाद ,उनकी समस्याओं को जानने का सच्चा प्रयास और मस्तिष्क में निरंतर वर्तमान राजनैतिक ढांचे को बदलने के विचारों का आवागमन -सन २००४ से श्री राहुल गाँधी जी का जीवन इन सब कार्यों को ही समर्पित रहा है .


[with thanks -RAHUL GANDHI WITH A VISION FOR COMMON PEOPLE's photo.]  
  कम बोलते हैं पर सच बोलते हैं .मीडिया में छा जाने का कोई आकर्षण नहीं .मीडिया से  दूर  भारतीय  जन -जीवन  की समस्याओं  को  समझकर  उन्हें  अंतिम  रूप से समाप्त करने के लिए सतत प्रयासरत युवा  नेता राहुल  जी  भले  ही  विपक्षियों  की कटु  आलोचना  का शिकार बनते रहते हो पर अपनी कार्य शैली में बदलाव उन्हें  मंज़ूर   नहीं .पद प्राप्ति की कोई कामना नहीं .
                                           लक्ष्य-देश सेवा माध्यम-राजनीति
युवराज ,राहुल बाबा ,अमूल बेबी ,बुद्धू और भी न जाने कितने व्यंग्यात्मक  व् अपमानजनक उद्बोधनों से राहुल जी को नीचा दिखाने का प्रयास विपक्षियों द्वारा किया गया ..यहाँ तक कि उन पर दुष्कर्म करने का झूठा आरोप तक लगाया गया जो अंतिम रूप से कोर्ट द्वारा झूठा करार दिया गया .विपक्षियों ने राहुल जी के इरादों में फौलाद की ताकत भर दी ...जितनी चोट मारी गयी राहुल जी उतने ही मजबूत हुए .चौदह वर्ष की किशोर वय में दादी की नृशंस हत्या व् इक्कीस वर्ष की युवा वय में प्रिय पिता की दर्दनाक हत्या झेल चुके राहुल जी के दिल व् दिमाग ने जब देश -सेवा के लिए स्वयं को समर्पित किया तब राहुल जी ने साफ़ तौर पर माना कि उन्हें राजनीति में यह स्थान विरासत में मिला है पर राहुल जी ने अपनी कर्मठता से इस विरासत में मिली प्रतिष्ठा को और भी ऊँचा उठाया .
               आज वे विचार  रखते हैं कि सिस्टम को बदले बिना भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को सुलझाया नहीं जा सकता .उनका मानना है कि सत्ता एक हाथ में न रहकर उसका विकेंद्रीकरण होना चाहिए .वे ईमानदार युवाओं से आह्वान करते हैं देश सेवा हेतु राजनीति में आने का .उनका नजरिया साफ है -वे विपक्ष की   भांति देशवासियों से किसी प्रतिमा के लिए लोहा नहीं मांगते ...वे विचारों में फौलाद की ताकत चाहते हैं .यदि प्रधान मंत्री पद के प्रति उनकी कोई लालसा नहीं है और वे संगठन को मजबूत करने में ज्यादा रुचि लेते हैं तो इसे उनकी अयोग्यता के रूप में प्रचारित करने वाले विपक्षियों को खुली छूट है कि वे आडवानी जी व् मोदी जी जैसे सत्ता लोलुप नेताओं को सिर पर बैठाये पर यह जान लें कि वर्तमान में केवल राहुल जी ही ऐसे भारतीय नेता हैं जो देश को सही दिशा में आगे ले जा सकते हैं क्योंकि वे हिन्दू वोट के लालच में दंगों की याद दिलाकर उन्हें उकसाते नहीं हैं और न ही मुस्लिम समुदाय को धमकाने का प्रयास करते हैं
                               'श्रीमद्भगवत गीता''  को अपना प्रेरक ग्रन्थ बताने वाले राहुल जी के प्रति कोई पूर्वाग्रह न रखकर उनके साथ आयें व् कॉग्रेस पार्टी के हाथ मजबूत करें .१९ जून को राहुल जी के जन्म दिवस पर उन्हें हार्दिक  शुभकामनायें  प्रेषित  करती हूँ इन शब्दों में

     ''कंटक पथ पर नंगें पैर कठिन चुनौती हाथ
    मगर अकेले नहीं हो राहुल हिंदुस्तान तुम्हारे साथ ''

शिखा कौशिक 'नूतन '

शनिवार, 15 जून 2013

ग़मों को ठोकरें....मेरे वालिद ने अपना नाम दिया

 

मेरे  वालिद 
ग़मों को ठोकरें....मेरे वालिद ने अपना नाम दिया
ग़मों को ठोकरें मिटटी में मिला ही देती ,
मेरे वालिद ने आगे बढ़ के मुझे थाम लिया .

मुझे वजूद मिला एक नयी पहचान मिली ,
मेरे वालिद ने मुझे जबसे अपना नाम दिया .


मेरी नादानियों पर सख्त हो डांटा मुझको;
मेरे वालिद ने हरेक फ़र्ज़ को अंजाम दिया .

अपनी मजबूरियों को दिल में छुपाकर रखा ;
मेरे वालिद ने रोज़ ऐसा इम्तिहान दिया .

खुदा का शुक्र है जो मुझपे की रहमत ऐसी ;
मेरे वालिद के दिल में मेरे लिए प्यार दिया .
                                                          शिखा कौशिक 




बुधवार, 12 जून 2013

मोदी से उम्मीदें

मोदी से उम्मीदें 

Cinematographer
Film Industry.
Thane, India.


बीजेपी-

करामात  से पूर्ण बहुमत दिलायेंगें  .
सत्ता सुख चखवायेंगें   !!

जनता -

महगाई से छुटकारा दिलवाएंगें 
भ्रष्टाचार पर रोक लगायेंगें !

विपक्ष -

बीजेपी को डूबवायेंगें 
अल्पसंख्यक वोट हमें पड़वायेंगें   !

ब्लोगर -

नई नई पोस्ट लिखवायेंगें   
कमेन्ट खूब दिलवाएंगें !

गुजरातवासियों को -

दिल्ली में मुंह की खायेंगें   
लौट यही पर आयेंगें !


शिखा कौशिक 'नूतन '

मंगलवार, 11 जून 2013

'राजनैतिक फज़ीता गीत माला ''

lk advani cartoon,modi,rajnath singh cartoon,bjp,mysay.in  

[गूगल से साभार ]

                                          वैधानिक  घोषणा  
[यह साक्षात्कार  पूर्णत : काल्पनिक  है  .इसके  पात्र  के नाम व् स्थान सब काल्पनिक  हैं  .इनका किसी भी   राजनैतिक   पार्टी   [बीजेपी या आर.एस.एस  ]  से   कोई   सम्बन्ध  नहीं  है  ]

आर.जे.- आपके  अपने  एफ  एम् .चैनल  पर  आज  हमारे  साथ  हैं वयोवृद्ध  नेता  जी  भिड्वानी  जी  .स्वागत है आपका हमारे खास प्रोग्राम ''राजनैतिक फज़ीता गीत  माला '' में .भिड्वानी जी तो आप हमारे श्रोताओं को आज अपनी पसंद के टॉप फ़ाइव फज़ीता गीत कौन कौन से सुनवा रहे हैं और किसे डैडीकेट   कर रहे हैं इन्हें  ?

भिड्वानी जी -सबसे पहले आपका शुक्रिया की आपने मुझ जैसे भूले-बिसरे नेता को इस कार्यक्रम में बुलाया  ''जय श्री राम श्रोताओं '' .आज मैं जो पांच   'फज़ीता गीत' आपको  सुनवाने  वाला  हूँ  वे  इस तरह  हैं -

1-सबसे पहला  फज़ीता गीत डैडीकेट है  'गोभी  जी' को पूरे दुःख के साथ मुबारकबाद  देते  हुए -


''मुबारक हो तुमको समां ये सुहाना 
मैं खुश ? हूँ मेरे आसुओं पे न जाना 
मैं तो दीवाना दीवाना दीवाना .....'' 

2 -दूसरा  'फज़ीता गीत समर्पित  है ''नागनाथ  जी 'को -

"ऐसा जख्म दिया  है 
जो न फिर भरेगा 
हर हसीन ? चेहरे से अब ये दिल डरेगा "

3-तीसरा 'फज़ीता गीत '' समर्पित है 'ऊष्मा जी' को जो मुझे मनाने की बहुत कोशिश कर रही है -

''रूठे रब  को मनाना आसान है 
रूठे यार ? को मानना मुश्किल   है "

4 -चौथा ''फज़ीता गीत '' डैडी केट करना चाहूँगा ''केटली जी '' को  -

"तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं ,
गैर ? के दिल को सराहोगी तो मुश्किल होगी !"

5 -पांचवा व् अंतिम फज़ीता गीत मैं समर्पित करना चाहूँगा खुद को -

''ए दिल तुझे कसम है हिम्मत न हारना ,
दिन जिंदगी के जैसे भी गुजरें गुजारना ''

आर.जे -आप 'पटल जी ' के लिए कोई फज़ीता गीत '' सपर्पित नहीं करना चाहेंगें ?

भिड्वानी जी - हाँ हाँ .....
याद आ रही है तेरी याद आ रही है 
याद आने से तेरे जाने से 
तडपा रही है !

आर जे -बहुत बहुत शुक्रिया भिड्वानी जी !!............................श्रोताओं तो ये थे भिड्वानी जी .आपको ये कार्यक्रम कैसा लगा ? जल्द से जल्द एस.एम्.एस द्वारा हमें सूचित करें इस नंबर पर ''420 ''.

शिखा कौशिक 'नूतन ' 
  

शुक्रवार, 7 जून 2013

चुल्लू भर पानी में डूब मरो संजय पंचोली

                
पुरुष कितना स्वार्थी है ये हर वो हादसा साबित करता है जब कोई कली कुचल दी जाती है .वो गीतिका हो या जिया .जिया को आधुनिक नारी की संज्ञा देकर उसकी आत्म हत्या को आधुनिकता का दुष्परिणाम बताने वाले ये क्यों भूल जाते हैं कि उसकी मौत परिणाम है उस पुरुष की बेवफाई का  जिसने जब तक  चाहा उसकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया  और  जब दिल भर गया तब झूठ बोलकर उससे  किनारा  कर  लिया पर क्या जिया के लिए ये सब इतना ही आसान था ?संजय पंचोली हो या कोई और इन्हें तब तक जिया जैसी लड़कियों से कोई परेशानी नहीं होती जब   तक ये इन्हें हासिल नहीं कर लेते पर हासिल कर लेने के बाद यूज एंड थ्रो की नीति अपनाते हुए छल का सहारा लेने लगते हैं .जिया जैसी लडकिया इन्हें उदार पुरुष समझ कर इन्हें सब कुछ सौप देती हैं अपना .ऐसा आज ही नहीं होता ये सब पुरातन काल से होता आया है .पुरुष का छल दुष्यंत-शकुन्तला वृतांत में भी था और आज भी प्रचंड रूप में दृष्टिगोचर हो रहा है .आज बस मेरे ह्रदय से यही निकल रहा है -चुल्लू भर पानी में डूब मरो संजय पंचोली ...जिसने इतनी चुलबुली -जीवंत लड़की को आत्महत्या के लिए मजबूर कर डाला ....तुम से सौ गुना वफादार तो जिया का एक फैन निकला जिसने जिया की मौत पर खुद फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली .

शिखा कौशिक 'नूतन '

बुधवार, 5 जून 2013

क्या बुराई है 'बहन जी ''टाइप दिखने में ?क्या है बहनजी फोबिया ?

Kareena with a mission in Satyagraha

मैंने प्रकाश झा से कहा था कि मुझे बहन जी टाइप मत
 बनाना।क्यों कहा करीना ने ऐसा ?

  बहन  जी फोबिया  आखिर  क्या  है  -

जब  कोई पुरुष  सड़क पर या किसी अन्य जगह पर  किसी महिला को संबोधित करते हुए कहता है -बहन जी और महिला को महसूस होता है कि ये उसकी सुन्दरता -स्मार्टनेस को कलंकित करने जैसा है तब उसे बहन जी फोबिया का शिकार  कहा जा सकता  है .

बहन जी फोबिया का शिकार आयु-वर्ग-

इस आयु वर्ग में १५ वर्ष से ६५ वर्ष तक की महिला को रखा जा सकता है .

क्या है कारण  इस फोबिया का -

अक्सर हम देखते हैं कि अभिनेत्रियाँ उम्र बढ़ जाने पर भी मेक अप के माध्यम से कम उम्र का दिखना चाहती हैं अमूमन ऐसी ही स्थिति कुछ आम महिलाओं की भी है .'बहन जी ' कहे जाने पर उनको एतराज इसलिए भी हो सकता है कि उन्हें महसूस होता उनका आकर्षण कम हो रहा है और पुरुष वर्ग उनकी खिल्ली उड़ा रहा है .

बहन जी फोबिया से बचने के लिए क्या उपाय करती हैं -

आजकल यह प्रचलन है कि शादीशुदा महिलाये भी साड़ी व् परम्परागत स्त्री वस्त्रों की जगह कम उम्र की दिखने के लिए जींस-टीशर्ट पहनना पसंद कर रही हैं .दूर से दिखने पर वे स्कूल गर्ल नज़र आती हैं और पास पहुँचने पर स्कूल गर्ल की माता जी .बस उदेश्य एक ही कोई उन्हें 'बहन जी ' न कह दे .मैडम कहलाना वे सर्वाधिक पसंद करती हैं और अब तो उनके बच्चे भी अपनी मॉम को आधुनिक परिधानों में देखना पसंद करते हैं .

कैसे बचें इस बहन जी फोबिया से ?

महिलाओं को चाहिए कि 'बहन जी ' कहे जाने पर गौरवान्वित महसूस करें .वर्तमान में जब लोग अपनी बहन तक का लिहाज़ नहीं करते तब कोई पुरुष जब आपको बहन का दर्ज़ा दे रहा है तब आपको शुक्रगुज़ार होना चाहिए उसका .साथ ही बहन जी का दर्ज़ा देने वाला पुरुष आपके प्रति गलत धारणा नहीं रखेगा -इस विचार को मस्तिष्क में स्थान दे .आप ऐसे सज्जनों का दिल से सम्मान करें .यदि कोई चिढाने के लिए भी ऐसा कर रहा है तो भी आपका तो सम्मान ही है .बहन का दर्ज़ा आकर्षण का केंद्र बनने वाली स्त्री से कहीं ऊपर है .

शिखा कौशिक 'नूतन '



ऑनर किलिंग व् पुत्री धर्म

Sita : Goddess Sita Stock Photo
ऑनर किलिंग व् पुत्री धर्म 

आज भारतीय समाज 'ऑनर  किलिंग ' जैसे स्त्री विरूद्ध अपराध से आक्रांत दिखाई दे रहा है .वैश्विक जीवन मूल्यों  से प्रभावित होते भारतीय सामाजिक-पारिवारिक मूल्यों ने एक विचित्र   स्थिति को जन्म दे दिया है .आज पिता -पुत्री व् बहन -भाई के पारस्परिक स्नेहमयी संबंधों में दरार सी आई प्रतीत होती है .परिवर्तन के इस दौर में पुन:-पुन:पिता व् भ्राताओं के पुत्री व् भगिनी के प्रति कर्तव्यों  पर तो विचार की मांग उठती रहती है किन्तु पुत्री व् बहन के कर्तव्यों व् आचरण का भी इस सन्दर्भ में अवलोकन कर लेना अनिवार्य हो जाता है .गत वर्ष घटित एक घटना में एक पुत्री अपने प्रेमी के साथ घर से भाग गयी जिसके परिणाम  स्वरुप उसके पिता ने जहर खा लिया .क्या पुत्री का धर्म  यही है कि वो अपने हित -चिंतन में अपने पिता की भावनाओं को स्वाहा कर दे ? एक अन्य घटना क्रम में एक पुत्री ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर माता -पिता की हत्या कर दी .उसका एकलौता भाई किसी तरह बच गया .धिक्कार है ऐसी पुत्रियों पर !संयम- अनुशासन जैसे गुण कहाँ लुप्त हो गए हमारी पुत्रियों में से ?
                          भ्रमित व् स्वार्थी पुत्रियों को जानना चाहिए कि वे उस देश में पैदा हुई हैं जिसका इतिहास पुत्रियों के उज्जवल चरित्रों से भरा पड़ा है .राजा कुशनाभ की घृताची अप्सरा  के गर्भ से जन्मी सौ कन्याओं की पितृ-भक्ति वन्दनीय है और असंयमित होती आज की पीढ़ी की बेटियां इससे पुत्री-धर्म की शिक्षा ले सकती हैं . राजा कुशनाभ की अत्यंत सुन्दर अंगों वाली पुत्रियाँ एक दिन उद्यान भूमि में गति ,नृत्य करती आनंद मग्न हो रही थी तब उनके रूप-यौवन पर आसक्त होकर वायु देवता ने उनसे कहा -
''अहम् ...            ...भविष्यत ''-[श्लोक-१६-१७ ,पृष्ठ ९६ ,बाल कांड त्रियस्त्रिश: सर्ग :-श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण ]  
 [अर्थात-सुन्दरियों मैं तुम सबको अपनी प्रेयसी के रूप में प्राप्त करना चाहता हूँ !तुम सब मेरी भार्यएं बनोगी .अब मनुष्य भाव का त्याग करो और मुझे अंगीकार करके देवांगनाओं  की भांति दीर्घ आयु प्राप्त कर लो .विशेषतः मानव शरीर में यौवन कभी स्थिर नहीं रहता -प्रतिक्षण क्षीण होता जाता है .मेरे साथ सम्बन्ध हो जाने से तुम लोग अक्षय यौवन प्राप्त करके अमर हो जाओगी !]  
वायु देव के इस प्रस्ताव को सुनकर पतिर -भक्त  कुशनाभ कन्याओं का यह  प्रतिउत्तर  भारतीय  संस्कृति में पुत्रियों को दिए गए संस्कारों  को प्रदर्शित करते हैं -यथा -
''माँ भूत स  कालो  .....नो  भर्ता भविष्यति ''  [21-22 श्लोक  उपरोक्त ]
[दुर्मते ! वह समय कभी न आवे जब कि हम अपने सत्यवादी पिता की अवहेलना करके कामवश या अत्यंत अधर्मपूर्वक स्वयं ही वर  ढूँढने लगें .हम लोगों पर हमारे पिता जी का प्रभुत्व है , वे हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ देवता हैं .पिता जी हमें  जिसके हाथ में दे देंगे ,वही हमारा पति होगा ]
ऐसी पितृ भक्त कन्याओं को जब वायुदेव ने कुपित होकर उनके भीतर प्रवेश कर उनके अंगों  को टेढ़ा कर कुबड़ी बना दिया तब पिता कुशनाभ द्वारा चयनित ऐश्वर्यशाली तेजस्वी वर ब्रह्मदत्त के साथ विवाहकाल में हाथ के स्पर्श होते ही सभी कन्यायें कुब्जत्व दोष से रहित ,निरोग तथा उत्तम शोभा से संपन्न हुई .    
कुल की मर्यादा को अपने काम भाव से ऊपर स्थान देने वाली कुशनाभ कन्याओं ने पुत्री-धर्म  का जो उदाहरण प्रस्तुत किया वह वर्तमान में कितना प्रासंगिक हो उठा है .आज यदि पुत्री-धर्म की शिक्षा कन्याओं को शिशु काल से ही प्रदान की जाये तो भारतीय समाज को देश व् कुल का मन बढ़ने वाली पुत्रियाँ प्राप्त हो सकेंगी .
                                            माता सीता की पितृ भक्ति सर्वविदित है .राजा जनक ने निश्चय  किया था कि-
''वीर्य शुल्केती ........मुनिपुङ्गव '' [श्लोक १३ ,बाल कांड, पृष्ठ १५५ षटपष्टितम: सर्ग :]
[अपनी इस अयोनिजा (सीता)कन्या के विषय में मैंने यह निश्चय किया है कि जो अपने पराक्रम से इस धनुष को चढ़ा देगा ,उसी के साथ मैं इसका ब्याह करूंगा .इस तरह इसे वीर्य शुल्क (  पराक्रम शुल्क वाली ) बनाकर अपने घर में रख छोड़ा .मुनि श्रेष्ठ ! भूतल से प्रकट होकर दिनों-दिन बढ़ने वाली मेरी पुत्री सीता को कई राजाओ ने यहाँ आकर माँगा ]   
  माता सीता ने पिता द्वारा निर्धारित पराक्रम शुल्क अर्थात परम प्रकाशमान शिव जी के धनुष पर प्रत्यन्चा चढ़ा देने वाले अयोध्या के राजकुमार श्रीराम को ही वरमाला पहनाई .यद्यपि माता सीता पुष्प वाटिका में श्रीराम के दर्शन कर उन पर मुग्ध हो गयी थी किन्तु वे यह भी जानती थी कि पिता का निश्चय उनकी भावनाओं से ऊपर है .इसीलिए   श्रीराम को वर के रूप में प्राप्त करने की इच्छा वे जिह्वा पर नहीं लाती और गौरी पूजन के समय मात्र इतना ही वर मांगती हैं -
''मोर मनोरथु जानहु नीके ,बसहु सदा उर पुर सबहि के ,
कीन्हेउ प्रगट न कारन तेहि ,अस कही चरण गहे वैदेही !''[श्रीरामचरितमानस ,बाल कांड ,पृष्ठ -२१९]
माता सीता श्री राम को वर रूप में प्राप्त करना चाहती हैं पर तभी जब वे उनके पिता द्वारा किये गए निश्चय को पूरा करें .यही कारण है कि वे सब ह्रदय में निवास करने वाली माता गौरी से अपनी मनोकामना नहीं  प्रकट करती क्योंकि माता गौरी तो उनके ह्रदय की कामना को भली -भांति जानती ही हैं .पिता के प्रण को अपनी मनोकामना से ऊपर स्थान देने वाली माता सीता इसीलिए जगत में जनकनंदनी ,जानकी ,जनकसुता और वैदेही के नाम से प्रसिद्द हुई .पुत्री धर्म का पालन करने वाली महान माता सीता के समक्ष जब आज की पिता को धोखा  देकर  भाग  जाने  वाली पुत्री को खड़ा करते  हैं तब सिर  शर्म  से झुक जाता है .
                                             तपस्विनी कन्या वेदवती की पितृ भक्ति के आगे कौन जन नतमस्तक न होगा ?रावण द्वारा उनका परिचय पूछे जाने पर वे कहती हैं -
''कुशध्वज  जो ........राक्षस पुंगव्  '' [श्लोक ८-१७ ,उत्तरकांडे पृष्ठ -६४३ ,सप्तदश: सर्ग:] 
[अमित तेजस्वी ब्रह्म ऋषि श्रीमान कुशध्वज मेरे पिता थे , जो ब्रहस्पति के पुत्र थे और बुद्धि में भी उन्ही के समान माने जाते थे .प्रति दिन वेदाभ्यास करने वाले उन महात्मा पिता से वांगमयी   कन्या के रूप में मेरा प्रादुर्भाव हुआ था .मेरा नाम वेदवती है .जब मैं बड़ी हुई तब देवता ,गन्धर्व ,राक्षस और नाग भी पिता जी के पास आकर उनसे मुझे मांगने लगे .राक्षसेश्वर ! मेरे पिता जी ने उनके हाथ में मुझे नहीं सौपा .इसका कारण क्या था ? मैं बता रही हूँ ...सुनिए  -पिता जी की इच्छा थी कि तीनों लोकों के स्वामी देवेश्वर भगवान् विष्णु मेरे दामाद बने .इसीलिए वे दूसरे किसी के हाथ में मुझे नहीं देना चाहते थे .उनके इस अभिप्राय को सुनकर बलाभिमानी दैत्यराज शम्भू उन पर कुपित हो उठा और उस पापी ने रात में सोते समय मेरे पिता की हत्या कर दी .   इससे मेरी महाभागा माता को बड़ा दुःख हुआ और वे पिता जी के शव को ह्रदय से लगाकर चिता की आग में प्रविष्ट हो गयी .तबसे मैंने प्रतिज्ञा कर ली है कि भगवान नारायण के प्रति पिता जी का जो मनोरथ था उसे सफल करूंगी .इसीलिए मैं उन्ही को अपने ह्रदय मंदिर में धारण करती हूँ .यही प्रतिज्ञा करके मैं ये महान तप कर रही हूँ ]
रावण के द्वारा कामवश अपने केश पकडे जाने पर वेदवती क्रोधित होकर अग्नि में समाने के लिए तत्पर होकर यही कहती हैं -
'यदि ...सुता '[उत्तर कांड   ,अष्टादश:सर्ग: .पृष्ठ ६४५ ,श्लोक ३३ ]
[यदि मैंने कुछ भी सत्कर्म ,दान और होम किये हो तो अगले जन्म में मैं सती-साध्वी अयोनिजा कन्या के रूप में प्रकट होऊं तथा किसी धर्मात्मा पिता की पुत्री बनू ]
यही वेदवती अगले जन्म में राजा जनक की पुत्री सीता  के रूप में जानी गयी .पिता के प्रण को प्राण चुकाकर  भी देवी वेदवती ने भंग न होने दिया और अगले जन्म में सनातन विष्णु अवतार श्रीराम को पति रूप में पाया .
ऐसी उज्जवल चरित्र वाली पुत्रियों की भूमि भारत में आज जब कुछ पुत्रियाँ अमर्यादित आचरण कर पिता की भावनाओं को रौंदती हुई कामोन्माद में घरों से भाग रही हैं तब यह जरूरी हो जाता है कि भारतीय समाज अपने परिवारों में दिए जाने वाले संस्कारों पर ध्यान दें क्योंकि शिशु तो अनुसरण से सीखता है .पुत्रियों को पुत्री धर्म की शिक्षा दें ताकि आने वाली पीढ़िया उनके उज्जवल चरित्रों से शिक्षा लेकर कुल व् देश का गौरव बढ़ाएं तथा ''ऑनर किलिंग' जैसे स्त्री विरूद्ध अपराधों पर भी इसी तरह  रोक लगायी जा सकती हैं .

शिखा कौशिक 'नूतन