लाउडस्पीकर लगाये के मुल्ला देत अज़ान , चिंतन में बाधा पड़े अल्लाह है परेशान ! करें जागरण माता का डी.जे. तेज बजा , मैय्या मंडप आई हैं ऊँगली कान लगा ! पर्यटन स्थल बन गए सारे तीरथ धाम , मुक्ति स्थल पर भला क्या हनीमून का काम ? नेता अपना हो गया चौबीस कैरेट सच्चा , खुद तो सच्चा देशभक्त जनता कुत्ते का बच्चा ! खरीदारी करते फिरें माह आया रमज़ान , रोज़े रखकर क्या करे जब अल्लाह में ना ध्यान ? शिखा कौशिक 'नूतन '
एक दृश्य - दो छात्राएं कॉलेज से लौट रही थी .एक लड़का उनका पीछा करने लगा .एक छात्रा दूसरी से कहती है -बदतमीज़ कहीं का !पीछे ही पड़ गया नरेन्द्र मोदी की तरह एक ये और एक मोदी पीछे ही पड़ गया पूरे देश के, प्रधानमत्री बना दो जी !
दृश्य दो -बेटा बाप से -पिता जी चलो यहाँ गाँव का मकान बेंचकर शहर चले जब नरेन्द्र मोदी गुजरात का मोह छोड़कर पूरे भारत में अपनी राजनीति चमका सकता है तब हम शहर जाने का रिस्क क्यूँ नहीं ले सकते ?
दृश्य तीन - चेले गुरुदेव से -गुरुदेव अब आप केवल भजन करो आश्रम की अन्य सब व्यवस्थाएं हम देख लेंगें .जब नरेन्द्र मोदी आडवाणी जी को एक तरफ हाशिये पर खड़ा कर सकता है तब आप क्या चीज़ हैं गुरुदेव ?
दृश्य चार -माँ बच्चे से -सो जा वरना नरेन्द्र मोदी आ जायेगा !
बच्चा -पर पहले तो आप गब्बर के नाम से डराती थी अम्मी !
माँ -चुप कर तब ये मोदी केवल गुजरात में रहता था अब सारे भारत में घूमता है !
दृश्य पांच -बॉस कर्मचारी से -ये काम पूरा क्यूँ नहीं हुआ ?
कर्मचारी -एक को भेजा है आंकड़े इकट्ठे करने .उसके आते ही पूरा हो जायेगा सर !
बॉस-वाह बेटा ! तू तो हो गया नरेन्द्र मोदी और वो तेरा 'एक' हो गया अमित शाह जब वो लायेगा आंकड़े तब चुनाव की नीति निर्धारण होगा !
दृश्य छह-बेटी की माँ बेटी के बाप -अजी सुनते हो ...ठीक से देख लेना लड़का ..कंही नरेंद्र मोदी की पत्नी की तरह हमारी छोरी भी उम्र भर बस अपने पति का इंतजार ही करती न रह जाये !
वैधानिक चेतावनी -ये पोस्ट शुद्ध हास्य से पूर्ण है इससे ऐसे ही भाव से लें
इस गीत को लिखने की प्रेरणा रोज़ी दारूवाला जी के व्यक्तित्व से ही मिली है जरा देंखें उनकी टिप्पणी -
rosy daruwala ने कहा…
सोशल साइट्स ही क्या, आज तो हालत इतनी बदतर होगई है कि घरेलु महिलायें घर में और कामकाजी महिलाएं अपने ऑफिस में भी महफूज़ नहीं हैं . लोग केवल मज़ा लेने के लिए हमारा मखौल उड़ाते हैं ..ये किसी एक महिला का नहीं, वरन पूरे स्त्री समुदाय का अपमान और अपरोक्ष शोषण है .लेकिन इसके विरुद्ध कोई कार्रवाही सरकार कर पाएगी, इसका भरोसा मुझे तो नहीं, मेरे ख्याल में तो अब नारी को ही डंडा उठाना पड़ेगा ........
मैं तोइस मामले में सजग रहती हूँ . एक का चार सुनाती हूँ और ऐसा सुनाती हूँ कि दोबारा किसी की हिम्मत नहीं होती मुझे छेड़ने की ...........अगर ठीक से याद करूँ तो अब तक कम से कम दस की तो पिटाई कर चुकी हूँ . आप भी ये कर के देखिये, परिणाम अच्छा आएगा . यहाँ कलम चला कर कुछ होने वाला नहीं, हाथ चलाना सीखो ...........
क्षमा करना .कुछ बुरा लगे तो मैं अपने शब्द वापिस ले लेती हूँ
रोज़ी
4 जुलाई 2013 2:02 pm
हास्य गीत -मैडम दारूवाला
ओ मैडम दारूवाला !ओ मैडम दारूवाला !
तूने जादू कर डाला तूने जादू कर डाला !
तू लगती हंटरवाली तू लगती नाज़ुक बाला !
जो तेरे पीछे आता उसके पीछे पड़ जाती ,
सैंडिल से है धमकती कभी डंडे खूब लगाती ,
गुंडों की गुंडागर्दी को चुटकी में धो डाला !
ओ मैडम दारूवाला !ओ मैडम दारूवाला !
जो पति करे कुछ टेढ़ा उसको सीधा कर देती ,
बेले है जिससे रोटी बेलन सिर पर धर देती ,
तेरे आगे लग जाता उनके मुंह पर ताला !
ओ मैडम दारूवाला !ओ मैडम दारूवाला !
है तेजधार की बुद्धि बहस में रहती आगे ,
स्पीड तेज़ चिंतन की आगे आगे भागे ,
तू मॉडर्न युग की नारी तेरा ही बोलबाला !
ओ मैडम दारूवाला !ओ मैडम दारूवाला !
ये एक सच्चाई है भले ही कडवी क्यों न हो ! फेसबुक से लेकर ट्विटर तक हर सोशल साईट पर महिलाओं को अभद्र टिप्पणियों का सामना करना पड़ रहा है .अलका जी ने अपनी ट्वीट के माध्यम से ये ही मुद्दा उठाया है .सोशल साइट्स को यूँ तो पढ़े-लिखे लोगों का मंच माना जा सकता है पर यहाँ पर महिलाओं को शर्मिदा करने वाले पुरुष वर्ग की टिप्पणियों से ऐसा लगता है कि वे अपनी अहमवादी सोच को भी यहाँ साथ लेकर बैठे हैं .फेसबुक पर लड़कियों को कितने हल्के में लिया जाता है इससे कोई भी अनजान है .कुछ पुरुष फर्जी लड़की नाम से अकाउंट खोलकर मज़े लेने का काम करते हैं और लड़कियों की छवि मजे लेने वाली वस्तु की बना डालते हैं .महिला केवल मनोरंजन का साधन है -ऐसी सोच रखने वाले कितनी गन्दी टिप्पणियां करते हैं इसका मुझे स्वयं अंदाजा है .''नवभारत टाइम्स '' पर मेरी ब्लॉग पोस्ट्स पर आने वाली अभद्र टिप्पणियों के कारण ही मैंने पिछले वर्ष अपनी १६० पोस्ट रात में जागकर एक घंटे में डिलीट कर डाली थी और तब से अब तक 'नवभारत टाइम्स ' की वेबसाईट पर बने अपने ब्लॉग पर मैं नहीं गयी .
@alkalambaaicc as a public figure this is your responsibility to take strong action against these type twts .if you can't this is not good .
महिलाओं के साथ ऐसा वैचारिक बलात्कार इन सोशल साइट्स पर बंद होना ही चाहिए .सरकार को आवश्यक कदम उठाते हुए सोशल साइट्स को महिलाओं के खिलाफ शोषण का हथियार बनने से रोकना ही चाहिए !आपकी क्या राय है ?
शिखा कौशिक 'नूतन'
क्रिकेट में जीत को लेकर ढोल बजाते लोगों को देखकर लगा ये भारत के नहीं हो सकते .जहाँ अपने इतने बहन-भाई विपदा के शिकार हुए हैं ...उस भारत के नागरिक एक खेल में जीत को लेकर इतना तमाशा करें तो यही भाव मन में आते हैं -
आपको याद होगा शाहरुख़ खान का वो बयान जिसमे उन्होंने ये कहा था कि भारत में एक मुस्लिम के रूप में उन्हें अलग नज़र से देखा जाता है .इसीलिए उन्होंने अपने बच्चों के नाम भी हिन्दू रखे हैं .बहरहाल वो ये बताना भूल गए कि उनकी पत्नी एक हिन्दू है और शायद बच्चों के नाम उन्होंने ही रखें हो पर ये एक हकीकत है कि आज का भारतीय मुस्लमान अपने बच्चों के नाम या उपनाम हिन्दू रख रहा है .
हमारे यहाँ कुछ वर्ष पहले एक राज मिस्त्री ने काम किया .उसका नाम सब पप्पू कहते .हम सब उसे हिन्दू समझते रहे बाद में पता चला वो मुस्लिम था .इसी तरह एक और राज मिस्त्री का नाम है -डीजल [ये भी मुस्लिम है ] .हमारे घर के सामने एक घर बन रहा है उसमे काम करने वाले एक मजदूर का नाम है सोनू [ये भी मुस्लिम है] .यहाँ ये तर्क देना की किसी नाम पर किसी धर्म विशेष का अधिकार नहीं व्यर्थ है क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि हिन्दू अपने बच्चों के नाम हिंदी या संस्कृत भाषा के शब्दों पर रखते हैं और मुस्लिम उर्दू -अरबी भाषा के शब्दों पर .
इस तथ्य से तो सब परिचित हैं ही कि फिल्मों में सफल होने के लिए कई अभिनेताओं-अभिनेत्रियों ने हिन्दू नामों का सहरा लिया जैसे दिलीप कुमार [युसूफ ] अजीत , मधुबाला ,मीना कुमारी आदि पर वहां कारण अलग था .मुस्लिम समाज में फिल्मों को देखने पर कड़ी पाबन्दी थी इसलिए फिल्मों के दर्शक हिन्दू ही ज्यादा थे पर आज मुस्लिम समाज में हिन्दू नाम रखने की बढती प्रवर्ति उनमे असुरक्षा के भाव को दर्शाता है .क्यों भयभीत हैं हिंदुस्तान के मुस्लिम ? मैं एक हिन्दू के तौर पर कह सकती हूँ कि हमारे मन में मुस्लिम समाज को लेकर कोई पूर्वाग्रह नहीं .हिन्दू-मुस्लिम मिलकर ही हमारा भारतीय समाज पूरा होता है .हिंदुस्तान हिन्दुओं के साथ साथ मुस्लिमों का भी है .देश की रक्षा व् विकास में दोनों सामान रूप से भागीदार हैं फिर किस बात का डर है हमारे मुस्लिम समाज को ?
जहाँ तक मैं मानती हूँ ये भय -ये डर पडोसी देश में बैठे कट्टरपंथी बाशिंदे हमारे मुस्लिम भाइयों के दिल में पैदा कर रहे हैं .वे न तो पाकिस्तान में हिन्दुओं को सुकून से रहना देना कहते हैं और न हिंदुस्तान में मुसलमानों को .हमारे भारतीय मुस्लिम भाइयों को चाहिए कि वे इनके बहकावे में न आये .हिंदुस्तान मुस्लिमों के लिए सबसे सुरक्षित मुल्क है और रहेगा क्योंकि यहाँ हम न हिन्दू हैं ...न मुस्लिम हैं ...हम केवल भारतीय हैं .
मैं मुस्लिम समाज से अपील करूंगी कि वे बेखटके अपने बच्चों के नाम अरबी-उर्दू के शब्दों में रखें .आप हिंदुस्तान की शान है क्योंकि आप ही तो अब्दुल कलाम है ..आप ही हामिद अंसारी साहब हैं और आप ही सलमान खुर्शीद हैं .अब तो अभिनेता भी अपने नाम सलमान ,शाहरुख़ व् आमिर रखकर ही फिल्म जगत में सफलता पा रहें हैं और इनके फेंस में हिन्दू जनता भी है तब कैसा डर ?
केदार नाथ में जिन भक्तों को प्रकृति के कोप का भाजन बनना पड़ा उनको शत शत श्रद्धांजलि !
केदारनाथ में भक्तों के साथ प्रभु ने ये कैसा खेल खेला ? भगवान के दर्शन को गए भक्तोंके साथ ऐसा होगा तो ये ही भाव मन में उभरेंगें - तड़प तड़प के भक्त जब त्याग देता प्राण , कैसे कहूँ प्रभु तुम्हें करुणा के हो निधान ? सौप कर जीवन तुम्हें सद्कर्म जो करता रहे , उसको भी कष्ट देने का अजब तेरा विधान ! पूजता रहे तुम्हें कष्ट सहकर भी सदा , उसकी पुकार भी देते नहीं हो ध्यान ! सहता रहा दुःख ताप सब भक्ति में तेरा भक्त , रखा नहीं तुमने प्रभु श्रद्धा का कोई मान ! टूट गयी आस्था डोला अटल विश्वास , लगता है सच होता नहीं कोई कहीं भगवान !