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बुधवार, 26 फ़रवरी 2014

भाजपा घुटने टेकने को तैयार


मुस्ल‌िमों से भाजपा ने मांगी माफी

मुस्ल‌िमों से माफी मांगने को तैयार है भाजपा: राजनाथ


 आख़िरकार भाजपा ने अपना आखिरी दांव सत्ता प्राप्ति के लिए चल ही दिया .जब भाजपा ने यह देख लिया कि श्री मोदी को आगे करने पर भी वे हिन्दू -समाज को धार्मिक रूप से बहलाने व् फुसलाने में कामयाब नहीं हो पाये तब मुस्लिम-समाज से गलतियों के लिए क्षमा मांगने के लिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व तैयार हो गया . इस तरह घुटने टेकने के तीन ही निहितार्थ हैं -

* श्री मोदी के रूप में छोड़ा गया ब्रह्मास्त्र मिटटी में मिल गया !

* भाजपा ने श्री मोदी के कारण एन.डी.ए. के पूर्व सहयोगियों को खोया उन्हें फिर से जोड़ने का प्रयास है ये !

*भाजपा को दिख गया है कि वे २०१४ के लोक-सभा चुनाव में भी पूर्ण-बहुमत नहीं प्राप्त कर पायेंगें क्योंकि मुस्लिम-वोट उन्हें मिलेंगी नहीं और हिन्दू दोबारा पागल बनेंगें नहीं !

 सत्ता प्राप्ति के लिए पहले राम-मंदिर का मुद्दा गरमाना फिर बाबरी-मस्जिद के गुम्बद तोड़ने के लिए जनता को उकसाना ,गुजरात में गोधरा और साम्प्रदायिक दंगे -ये ऐसे अपराध हैं जिनकी लिए माफ़ी मांगने तक का हक़ भाजपा को नहीं है .बेहतर है वे देश की बागडोर स्थिर सरकार प्रदान करने वाली कॉंग्रेस पार्टी जैसी धर्मनिरपेक्ष पार्टी के पास ही रहने दें !

 शिखा कौशिक 'नूतन'

रविवार, 12 जनवरी 2014

ऑनर किलिंग व् पुत्री धर्म

Sita : Goddess Sita Stock Photo
ऑनर किलिंग व् पुत्री धर्म 

आज भारतीय समाज 'ऑनर  किलिंग ' जैसे स्त्री विरूद्ध अपराध से आक्रांत दिखाई दे रहा है .वैश्विक जीवन मूल्यों  से प्रभावित होते भारतीय सामाजिक-पारिवारिक मूल्यों ने एक विचित्र   स्थिति को जन्म दे दिया है .आज पिता -पुत्री व् बहन -भाई के पारस्परिक स्नेहमयी संबंधों में दरार सी आई प्रतीत होती है .परिवर्तन के इस दौर में पुन:-पुन:पिता व् भ्राताओं के पुत्री व् भगिनी के प्रति कर्तव्यों  पर तो विचार की मांग उठती रहती है किन्तु पुत्री व् बहन के कर्तव्यों व् आचरण का भी इस सन्दर्भ में अवलोकन कर लेना अनिवार्य हो जाता है .गत वर्ष घटित एक घटना में एक पुत्री अपने प्रेमी के साथ घर से भाग गयी जिसके परिणाम  स्वरुप उसके पिता ने जहर खा लिया .क्या पुत्री का धर्म  यही है कि वो अपने हित -चिंतन में अपने पिता की भावनाओं को स्वाहा कर दे ? एक अन्य घटना क्रम में एक पुत्री ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर माता -पिता की हत्या कर दी .उसका एकलौता भाई किसी तरह बच गया .धिक्कार है ऐसी पुत्रियों पर !संयम- अनुशासन जैसे गुण कहाँ लुप्त हो गए हमारी पुत्रियों में से ?
                          भ्रमित व् स्वार्थी पुत्रियों को जानना चाहिए कि वे उस देश में पैदा हुई हैं जिसका इतिहास पुत्रियों के उज्जवल चरित्रों से भरा पड़ा है .राजा कुशनाभ की घृताची अप्सरा  के गर्भ से जन्मी सौ कन्याओं की पितृ-भक्ति वन्दनीय है और असंयमित होती आज की पीढ़ी की बेटियां इससे पुत्री-धर्म की शिक्षा ले सकती हैं . राजा कुशनाभ की अत्यंत सुन्दर अंगों वाली पुत्रियाँ एक दिन उद्यान भूमि में गति ,नृत्य करती आनंद मग्न हो रही थी तब उनके रूप-यौवन पर आसक्त होकर वायु देवता ने उनसे कहा -
''अहम् ...            ...भविष्यत ''-[श्लोक-१६-१७ ,पृष्ठ ९६ ,बाल कांड त्रियस्त्रिश: सर्ग :-श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण ]  
 [अर्थात-सुन्दरियों मैं तुम सबको अपनी प्रेयसी के रूप में प्राप्त करना चाहता हूँ !तुम सब मेरी भार्यएं बनोगी .अब मनुष्य भाव का त्याग करो और मुझे अंगीकार करके देवांगनाओं  की भांति दीर्घ आयु प्राप्त कर लो .विशेषतः मानव शरीर में यौवन कभी स्थिर नहीं रहता -प्रतिक्षण क्षीण होता जाता है .मेरे साथ सम्बन्ध हो जाने से तुम लोग अक्षय यौवन प्राप्त करके अमर हो जाओगी !]  
वायु देव के इस प्रस्ताव को सुनकर पतिर -भक्त  कुशनाभ कन्याओं का यह  प्रतिउत्तर  भारतीय  संस्कृति में पुत्रियों को दिए गए संस्कारों  को प्रदर्शित करते हैं -यथा -
''माँ भूत स  कालो  .....नो  भर्ता भविष्यति ''  [21-22 श्लोक  उपरोक्त ]
[दुर्मते ! वह समय कभी न आवे जब कि हम अपने सत्यवादी पिता की अवहेलना करके कामवश या अत्यंत अधर्मपूर्वक स्वयं ही वर  ढूँढने लगें .हम लोगों पर हमारे पिता जी का प्रभुत्व है , वे हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ देवता हैं .पिता जी हमें  जिसके हाथ में दे देंगे ,वही हमारा पति होगा ]
ऐसी पितृ भक्त कन्याओं को जब वायुदेव ने कुपित होकर उनके भीतर प्रवेश कर उनके अंगों  को टेढ़ा कर कुबड़ी बना दिया तब पिता कुशनाभ द्वारा चयनित ऐश्वर्यशाली तेजस्वी वर ब्रह्मदत्त के साथ विवाहकाल में हाथ के स्पर्श होते ही सभी कन्यायें कुब्जत्व दोष से रहित ,निरोग तथा उत्तम शोभा से संपन्न हुई .    
कुल की मर्यादा को अपने काम भाव से ऊपर स्थान देने वाली कुशनाभ कन्याओं ने पुत्री-धर्म  का जो उदाहरण प्रस्तुत किया वह वर्तमान में कितना प्रासंगिक हो उठा है .आज यदि पुत्री-धर्म की शिक्षा कन्याओं को शिशु काल से ही प्रदान की जाये तो भारतीय समाज को देश व् कुल का मन बढ़ने वाली पुत्रियाँ प्राप्त हो सकेंगी .
                                            माता सीता की पितृ भक्ति सर्वविदित है .राजा जनक ने निश्चय  किया था कि-
''वीर्य शुल्केती ........मुनिपुङ्गव '' [श्लोक १३ ,बाल कांड, पृष्ठ १५५ षटपष्टितम: सर्ग :]
[अपनी इस अयोनिजा (सीता)कन्या के विषय में मैंने यह निश्चय किया है कि जो अपने पराक्रम से इस धनुष को चढ़ा देगा ,उसी के साथ मैं इसका ब्याह करूंगा .इस तरह इसे वीर्य शुल्क (  पराक्रम शुल्क वाली ) बनाकर अपने घर में रख छोड़ा .मुनि श्रेष्ठ ! भूतल से प्रकट होकर दिनों-दिन बढ़ने वाली मेरी पुत्री सीता को कई राजाओ ने यहाँ आकर माँगा ]   
  माता सीता ने पिता द्वारा निर्धारित पराक्रम शुल्क अर्थात परम प्रकाशमान शिव जी के धनुष पर प्रत्यन्चा चढ़ा देने वाले अयोध्या के राजकुमार श्रीराम को ही वरमाला पहनाई .यद्यपि माता सीता पुष्प वाटिका में श्रीराम के दर्शन कर उन पर मुग्ध हो गयी थी किन्तु वे यह भी जानती थी कि पिता का निश्चय उनकी भावनाओं से ऊपर है .इसीलिए   श्रीराम को वर के रूप में प्राप्त करने की इच्छा वे जिह्वा पर नहीं लाती और गौरी पूजन के समय मात्र इतना ही वर मांगती हैं -
''मोर मनोरथु जानहु नीके ,बसहु सदा उर पुर सबहि के ,
कीन्हेउ प्रगट न कारन तेहि ,अस कही चरण गहे वैदेही !''[श्रीरामचरितमानस ,बाल कांड ,पृष्ठ -२१९]
माता सीता श्री राम को वर रूप में प्राप्त करना चाहती हैं पर तभी जब वे उनके पिता द्वारा किये गए निश्चय को पूरा करें .यही कारण है कि वे सब ह्रदय में निवास करने वाली माता गौरी से अपनी मनोकामना नहीं  प्रकट करती क्योंकि माता गौरी तो उनके ह्रदय की कामना को भली -भांति जानती ही हैं .पिता के प्रण को अपनी मनोकामना से ऊपर स्थान देने वाली माता सीता इसीलिए जगत में जनकनंदनी ,जानकी ,जनकसुता और वैदेही के नाम से प्रसिद्द हुई .पुत्री धर्म का पालन करने वाली महान माता सीता के समक्ष जब आज की पिता को धोखा  देकर  भाग  जाने  वाली पुत्री को खड़ा करते  हैं तब सिर  शर्म  से झुक जाता है .
                                             तपस्विनी कन्या वेदवती की पितृ भक्ति के आगे कौन जन नतमस्तक न होगा ?रावण द्वारा उनका परिचय पूछे जाने पर वे कहती हैं -
''कुशध्वज  जो ........राक्षस पुंगव्  '' [श्लोक ८-१७ ,उत्तरकांडे पृष्ठ -६४३ ,सप्तदश: सर्ग:] 
[अमित तेजस्वी ब्रह्म ऋषि श्रीमान कुशध्वज मेरे पिता थे , जो ब्रहस्पति के पुत्र थे और बुद्धि में भी उन्ही के समान माने जाते थे .प्रति दिन वेदाभ्यास करने वाले उन महात्मा पिता से वांगमयी   कन्या के रूप में मेरा प्रादुर्भाव हुआ था .मेरा नाम वेदवती है .जब मैं बड़ी हुई तब देवता ,गन्धर्व ,राक्षस और नाग भी पिता जी के पास आकर उनसे मुझे मांगने लगे .राक्षसेश्वर ! मेरे पिता जी ने उनके हाथ में मुझे नहीं सौपा .इसका कारण क्या था ? मैं बता रही हूँ ...सुनिए  -पिता जी की इच्छा थी कि तीनों लोकों के स्वामी देवेश्वर भगवान् विष्णु मेरे दामाद बने .इसीलिए वे दूसरे किसी के हाथ में मुझे नहीं देना चाहते थे .उनके इस अभिप्राय को सुनकर बलाभिमानी दैत्यराज शम्भू उन पर कुपित हो उठा और उस पापी ने रात में सोते समय मेरे पिता की हत्या कर दी .   इससे मेरी महाभागा माता को बड़ा दुःख हुआ और वे पिता जी के शव को ह्रदय से लगाकर चिता की आग में प्रविष्ट हो गयी .तबसे मैंने प्रतिज्ञा कर ली है कि भगवान नारायण के प्रति पिता जी का जो मनोरथ था उसे सफल करूंगी .इसीलिए मैं उन्ही को अपने ह्रदय मंदिर में धारण करती हूँ .यही प्रतिज्ञा करके मैं ये महान तप कर रही हूँ ]
रावण के द्वारा कामवश अपने केश पकडे जाने पर वेदवती क्रोधित होकर अग्नि में समाने के लिए तत्पर होकर यही कहती हैं -
'यदि ...सुता '[उत्तर कांड   ,अष्टादश:सर्ग: .पृष्ठ ६४५ ,श्लोक ३३ ]
[यदि मैंने कुछ भी सत्कर्म ,दान और होम किये हो तो अगले जन्म में मैं सती-साध्वी अयोनिजा कन्या के रूप में प्रकट होऊं तथा किसी धर्मात्मा पिता की पुत्री बनू ]
यही वेदवती अगले जन्म में राजा जनक की पुत्री सीता  के रूप में जानी गयी .पिता के प्रण को प्राण चुकाकर  भी देवी वेदवती ने भंग न होने दिया और अगले जन्म में सनातन विष्णु अवतार श्रीराम को पति रूप में पाया .
ऐसी उज्जवल चरित्र वाली पुत्रियों की भूमि भारत में आज जब कुछ पुत्रियाँ अमर्यादित आचरण कर पिता की भावनाओं को रौंदती हुई कामोन्माद में घरों से भाग रही हैं तब यह जरूरी हो जाता है कि भारतीय समाज अपने परिवारों में दिए जाने वाले संस्कारों पर ध्यान दें क्योंकि शिशु तो अनुसरण से सीखता है .पुत्रियों को पुत्री धर्म की शिक्षा दें ताकि आने वाली पीढ़िया उनके उज्जवल चरित्रों से शिक्षा लेकर कुल व् देश का गौरव बढ़ाएं तथा ''ऑनर किलिंग' जैसे स्त्री विरूद्ध अपराधों पर भी इसी तरह  रोक लगायी जा सकती हैं .

शिखा कौशिक 'नूतन 



बुधवार, 20 नवंबर 2013

चायवाले और मोदी -लघु कथा


'चच्चा ये रक्खो अपने चाय की प्यालियाँ . इब मैं नहीं जाउंगा चाय लेकर आस-पास की दुकानों पर चाय पहुँचाने ........जी चाहता है उस लीडर के बाल नोंच लूं ...मजाक बनाकर रख दिया हम चायवालों का !!!'' बारह वर्षीय बालक रहमत चाय के पानी की तरह उबलते हुए बोला तो उसका उस्ताद सुक्खू ठन्डे दूध की तरह समझाता हुआ बोला -'' बेट्टा इत्ता न गरमावे ...दो चार दिन बक लेन दें ....सब जानें हैं उस साहेब को ..कौन इब चाय बनाकर बेच्चे है ...और ये बता ..के कहवे है कोई ?'' सुक्खू के पूछने पर रहमत दांत पीसता हुआ बोला -'' के बताऊँ उस्ताद ..किस - किसका नाम लूं .मुझे चाय लेकर जाते देख एक कहे -''लो आ गया लोकल मोदी '' और एक कहे -''कहाँ रह गया अबे इत्ती देर लगा दी तैने मोदी ..कोबरा पोस्ट देखन बैठ गया था क्या ? '' वो कूने पे जिसकी दुकान है वो कहे '' चुप रहो भाई कही हम पर भी सर्विलांस न लगवा दे '' फेर सब मिलके हँसे हैं हमपर... चच्चा सच में बदनाम करके डाल दिया इस मोदी ने चाय वालों को ...कहीं का न छोड़ा .'' ये कहकर रहमत ने झूठी प्यालियाँ उठाई और धोने के लिए सड़क के नल के पास चल दिया .
शिखा कौशिक 'नूतन'

शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

गांधी परिवार चौका या छक्का नहीं !


श्री नरेंद्र मोदी जिस दिन से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुए हैं उस दिन से उनका ध्यान केवल गांधी परिवार के खिलाफ ज़हर उगलने में लगा हुआ है जैसे उनके समर्थक ''मोदी बनाम गांधी परिवार क्रिकेट मैच'' देखने बैठे हो और मोदी जी गांधी परिवार के खिलाफ जहरीले बयान रुपी चौके-छक्के लगा कर तालियां बटोर रहे हो .गांधी परिवार के खिलाफ ज़हर उगलने वाले सुब्रमण्यम स्वामी से नबर वन का स्थान छीनने में लगे मोदी जी शालीनता की सीमायें पार कर गांधी परिवार की प्रतिष्ठा को कोई नुकसान पहुंचा पाएं या नहीं पर अपनी विकास-पुरुष की छवि को उन्होंने धुल-धूसरित कर डाला है .केंद्र से भेजे गए धन के लिए यदि राहुल जी ये कहते हैं कि ''हमने धन भेजा राज्य को '' तो क्या गलत है ? मोदी जी भी शान से कहते हैं ''हमने गुजरात का ये विकास कर दिया -वो विकास कर दिया''-क्या उन्होंने अपने चाचा जी के धन से ये विकास कर दिया या उनके ताऊ जी ने अपनी मेहनत से ये विकास कर दिया .मेहनत और धन दोनों भारतीय जनता के हैं ''भारतीय जनता पार्टी '' के नहीं . किसी समय प्रमोद महाजन भी गन्दी भाषा का इस्तेमाल कर गांधी परिवार को जनता की नज़रों में गिराने का प्रयास कर चुके हैं पर आज उनका तो नामों निशान भी नहीं और उनके शहजादे राहुल महाजन क्या-क्या गुल खिला रहे हैं ये सब को मालूम हैं .साफ़ है राहुल गांधी जी के हर शब्द को पकड़कर एक तूफ़ान उठाने वाले मोदी जी अपनी ही गरिमा के साथ गन्दा खेल खेल रहे हैं और सबसे ज्यादा अपना ही नुकसान कर रहे हैं .
शिखा कौशिक 'नूतन'

शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

ये मामला केवल फेसबुक तक सीमित नहीं

27-9-13 को यह फोटो फेसबुक पर देखा था 
फेसबुक पर यह पढ़ा-




Vishal Haloli Congress



इस लड़की का नाम है सुष्मिता।



इसने फेसबुक पर फोटो अपलोड किया था।

किसी लड़के ने इसका फोटो सेव करके गूगल में

इसका प्रोफाइल दाल कर कॉल गर्ल की लिस्ट में डाल

दिया।

ये लड़की बहुत अच्छे परिवार की थी।

उस लड़के ने पूरे शहर में फैला दिया की ये एक कॉल

गर्ल है।

जब उस लड़की और उसके परिवार को पता चला तो पूरे

परिवार ने सामूहिक आत्महत्या कर ली।

दोस्तों ये है फेसबुक की दुनिया।

अब आप ही बताएं इसका क्या उपाय

किया जा सकता है?

सभी बहनों से हाथ जोड़ कर नम्र निवेदन है

की कृप्या अपनी फोटो फेसबुक से त्वरित हटायें।



पहले बहुत दुःख हुआ पर फिर गुस्सा आया .सुष्मिता के परिवार ने गलत कदम उठाया .ये मामला केवल फेसबुक तक सीमित नहीं है .आज तक हजारों लड़कियों ने बदनामी के डर से आत्महत्या कर डाली है पर हमारा समाज नहीं सुधरा .अब जरूरत है ऐसे गंदे लोगों का सामना डट कर करने का .गलत जानकारी देकर तो कोई भी ,कहीं से किसी भी महिला के फोटो को अपलोड कर बदमान कर सकता है ...पर इसका मतलब ये तो नहीं कि आत्महत्या कर ऐसे अपराधियों को बढ़ावा दिया जाये .जिसने ऐसा गन्दा काम किया है उसे पूरे समाज व् देश के सामने लाकर उसको उचित दंड दिलाना ही सही रास्ता है .



शिखा कौशिक 'नूतन '

शनिवार, 14 सितंबर 2013

मुज़फ्फरनगर दंगे -गुनाहगार हम सभी हैं !

मुज़फ्फरनगर दंगों के कारण कर्फ्यू लगा एक महिला का प्रसव घर में ही कराना पड़ा जिसके कारण बच्चे को जन्म देते ही माँ चल बसी.क्या उस बच्चे से उसकी जननी को जुदा करने के गुनाहगार हम सब नहीं है !

हजारों लोग अपने घर से बेघर हो गए .उनके घरों में लगी आग के लिए क्या हम सब गुनाहगार नहीं हैं ?

दहशत का माहौल .आपसी विश्वास ध्वस्त .क्या इसके लिए गुनाहगार हम नहीं हैं ?

मासूमों की आँखों में आंसू ,अपनों का खून .क्या इसके गुनाहगार हम नहीं हैं ?

एक-दो मिसाल से कुछ नहीं होगा हम सभी को मिसाल बनना होगा .आइये इन्सान बने !!

शिखा कौशिक ‘नूतन’

शुक्रवार, 6 सितंबर 2013

सोशल मीडिया का दुरूपयोग अपनी चरम सीमा पर

सोशल  मीडिया का दुरूपयोग अपनी चरम सीमा पर  है  . न  यूजर  अपनी  मर्यादा  में  हैं  और  न  ही  उसकी  भद्दी  पोस्ट पर कमेन्ट करने वाले .देश के माननीय व्यक्तियों तक को नहीं छोड़ा जा रहा है तब आम आदमी की क्या बिसात ?

Diwakar Dayal
Diwakar Dayal's photo.



Ishan Singh Hindustani बात को तोड़ कर अर्थ का अनर्थ बनाना 

कोई तुम जैसे भाँड और खान'ग्रेसी बिकाउ चैनल से सीखे

Ishan Singh Hindustani's photo.Bhavesh Chaudhary हाक थू...




Sonia Gaxdhi

Sonia Gaxdhi

@SoniGaxdhi

President of the Indian Notional Kangroes & they know it. However, any connection with the real thing is absolutely imaginary.
10, Ghor Anarth, Delhi.


DrYumYumSingh

DrYumYumSingh

@DrYmYmSingh

Running Again Singh is back!
Cuckoo-land

supporters visibly angry after learning that the 5th lifeline in KBC is called "Paplu".They want it to be changed it to "Pappu

ये झलकियाँ काफी हैं या ........?
शिखा कौशिक 'नूतन '