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मंगलवार, 10 जुलाई 2012

मैं हूँ बागी संगमा ....


मैं हूँ बागी संगमा ....

विदेशी मूल के मुद्दे पर कॉंग्रेस से  गया था भाग ;
फिर जुड़ा 'यू.पी.ए' से  ...जिसकी सोनिया सरताज ,
पुत्री को मंत्री बना ....भोगा  सत्ता राज ,
राष्ट्रपति पद के लिए फिर जली ह्रदय में आग ;
छोड़ पार्टी  अपनी  किया नया आगाज़ ,
'वोट मुझे देना सभी 'सुन आत्मा की  आवाज़  ,
वैसे मेरी आत्मा  मुझे छोड़ चुकी है आज ,
मैं हूँ बागी संगमा ..मुझे क्या नैतिकता से काज?
                       शिखा कौशिक 

गुरुवार, 5 जुलाई 2012

''नेता जिन्दा बाद ???



भाईयो और बहनों   
                       हम चमचे हैं नेता जी   .इलेक्शन का  टाइम  है .नेताजी  ने आपके लिए जो भेजा है उसे स्वीकार करे और कहिये -
                ''नेता जिन्दा बाद   ''
                    चार जलेबी खाकर बोलो 'नेता जिंदाबाद ''
                    तीन समोसे खाकर बोलो 'नेता जिंदाबाद'
                     चाट पकौड़ी खाकर बोलो 'नेता जिंदाबाद '
                     सदी कम्बल लेकर बोलो 'नेता जिंदाबाद ''
नेता जिंदाबाद ..............................नेता जिंदाबाद 
टीन कनस्तर बजा कर बोलो 'नेता जिंदाबाद'
ढोल नगाड़े बजाकर बोलो' नेता जिंदाबाद '
वोट  के बदले नोट कमा लो 'नेता जिंदाबाद'
दारू पीकर कहो झूमकर 'नेता जिंदाबाद'
नेता जिंदाबाद ................................नेता जिंदाबाद 
                            रुकिए  ....हमें  भी जनता की तरफ  से कुछ कहना है .सुनिए   -
                            पानी  बिजली को तरसे हम 'नेता जिंदाबाद '
                          लूट डकैती  रोज है होती 'नेता जिंदाबाद'
                        मंहगाई  ने कमर तोड़ दी 'नेता जिंदाबाद '
                         पांच साल में आई याद  'नेता जिंदाबाद '
नेता हैं आबाद और जनता है बर्बाद 
फिर भी नेता जिंदाबाद ???
                        इसलिए भाईयो और बहनों -भ्रष्टाचार ...भय बढ़ाने वाले नेता को वोट मत दीजिये .सोच  समझ कर मतदान करें !
                                                    जय hind !
                                                  जय भारत !
                                                                  शिखा कौशिक 
                                     [नेता जी क्या कहते हैं ]

                                     

गुरुवार, 28 जून 2012

नाम ''पकिस्तान'' है मगर पाकीज़गी का नाम नहीं !

नाम ''पकिस्तान''  है मगर  पाकीज़गी  का नाम नहीं !




[ my voice]




पाकिस्तान की जेल  में बंद  भारतीय कैदी सरबजीत की रिहाई पर बुधवार शाम से शरू पाकिस्तान के नाटक ने सरबजीत के परिवार के साथ साथ करोड़ों भारतीयों की भावनाओं का भी मखौल उड़ाया है . ह्रदय मे  भर आये   आक्रोश  को  इन  शब्दों में  प्रकट करने का प्रयास किया  है  -

तू  जो  कहता  है  तेरी बात पर यकीन नहीं ;
नाम ''पकिस्तान''  है मगर  पाकीज़गी  का नाम नहीं .

तेरी मक्कारियों  के  ज़ख्म  अभी  ताज़ा  हैं  ;
तेरे जैसा ज़माने में तमाशबीन    नहीं .


तू है खादिम  मगर खुद  को समझता  है खालिक  ;
ख़बीस  देख  तेरे पैरों  तले   ज़मीन   नहीं .

ख़निल  तेरी जगह  दोजख़  में बड़ी पक्की है ;
वैसे  दोजख़   भी  इससे  बड़ी तौहीन नहीं .

देखकर   दर्द औरों के बड़ा हँसता   है ;
रीआइ  मौत  पर तेरे होगा  कोई ग़मगीन नहीं .


[ख़निल-सेंधमार  चोर  , खालिक-ईश्वर  ,रिआइ-मक्कार ]

                                  शिखा कौशिक 




सोमवार, 25 जून 2012

भाजपा को आज एक राहुल गाँधी चाहिए



shri rahul gandhi 



  



घुट  रही  है   भाजपा ;परिवर्तन  आंधी  चाहिए ,
भाजपा को   आज   एक   राहुल   गाँधी   चाहिए .

पद  का  मोह  जिसको  न  हो संगठन  पर ध्यान दे  ;
मखमली  नेता  नहीं  मोटी   खादी  चाहिए .

चुक गए  नेता हैं जो संन्यास लेने  को  कहो    ;
उनको  लोभ- मोह  छोड़  लेनी  समाधि चाहिए .

तर्क की  अब  धार  भाजपा में  न  रही  ;
बात  पूरी  न  सही  आधी  तो  होनी चाहिए .

सबल  विपक्ष लोकतंत्र का  रहा  प्रहरी  सदा  ;
भाजपा की  दूर होनी  हर  व्याधि  चाहिए .

       शिखा  कौशिक

बुधवार, 6 जून 2012

डिम्पल-सभी दलों की भाभी ?

डिम्पल-सभी दलों की भाभी ?










राजनीति एक कोठरी ;नेता रखते चाबी ;

स्व हित में दायें बाएं ;जैसे चाहे घुमा दी ;

भोली जनता क्या जाने वो है सीधी-सादी ;

डिम्पल कैसे बन गयी सभी दलों की भाभी !



shikha kaushik

शुक्रवार, 25 मई 2012

मध्यावधि- चुनाव कौन चाहता है ?

मध्यावधि- चुनाव कौन चाहता है ?

जनता...नहीं केवल अवसरवादी विपक्षी दल .


जिनके लिए है 


राजनीति खिलता हुआ कमल ;


जनता को पता है 


ये है दलदल 


जिसमे कोई भी हो दल 


जनता के साथ करता है छल ;


समस्याओं को सुलझाने में 


रहते हैं विफल ;


हर काम को टाल देते हैं 


आज नहीं कल

 ,
फिर चुनावों के लिए 


क्यों हो रहे विकल ;


शायद लग जाये लॉटरी 


और खटारा गाड़ी भी 


इस बार धक्के देकर 


जाये निकल 

.
shikha kaushik

मंगलवार, 22 मई 2012

''सत्यमेव जयते -सत्यमेव जयते ''



''सत्यमेव जयते -सत्यमेव जयते  ''


[google se sabhar ]




आंसू को तेजाब बना लो
इस दिल को फौलाद बना लो

हाथों को हथियार बना लो
बुद्धि को तलवार बना लो

फिर मेरे संग कदम मिलाकर
प्राणों में तुम आग लगाकर

ललकारों उन मक्कारों को
भारत माँ के गद्दारों को ,

धूल  चटा दो इन दुष्टों को
लगे तमाचा इन भ्रष्टों को

इन पर हमला आज बोल दो
इनके सारे राज खोल दो ,

आशाओं के दीप जला दो
मायूसी को दूर भगा दो

सोया मन हुंकार भरे अब
सच की जय-जयकार करें सब ,

झूठे का मुंह कर दो काला
तोड़ो हर शोषण का ताला

हर पापी को कड़ी सजा दो 
कुकर्मों  का इन्हें मजा दो ,

सत्ता मद में जो हैं डूबे
लगे उन्हें जनता के जूतें

जनता भूखी नंगी बैठी
उनकी बन जाती है कोठी ,

आओ इनकी नीव हिला दे
मिटटी में अब इन्हें मिला दे

भोली नहीं रही अब जनता
इतना इनको याद दिला दे ,

हम मांगेंगे अब हक़ अपना
सच कर लेंगे हर एक सपना

आगे बढना है ये कहते
''सत्यमेव जयते -सत्यमेव जयते  ''


                                        shikha kaushik 
                                     [vikhyat]