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रविवार, 13 नवंबर 2011

ईट का जवाब पत्थर से दें !

ईट का जवाब पत्थर से दें !

                                               
                                                 [in wikipedia se sabhar ]
''.......मियां जी  एक थप्पड़ ही तो लग गया है मेरे हाथ से आपके गाल पर गलती से ...अब माफ़ भी कर दो .इस के कारण  हमारे आपसे ताल्लुकात में कोई फर्क नहीं आना चाहिए .आना-जाना,उठना -बैठना ,लेना-देना -सब पहले जैसा ही चलता रहना चाहिए .'' लाट साहब ने अपनी टाई की नॉट  कसते हुए और हाथ बढ़ाते हुए कहा .मियां जी गाल सहलाते हुए बोले ''......अब हटिये भी लाट साहब .कहाँ हम -कहाँ आप .आपने मुझको  भारत और खुद को अमेरिका समझ रखा है क्या ?आप थप्पड़ मारें जाएँ और मैं माफ़ करता जाऊ .हम तो ईट का जवाब पत्थर से देते हैं ......''और इसके बाद मियां जी ने फार्मूला-१ रेस की कार की गति से हाथ उठाया और एक जोरदार तमाचा लाट साहब के गोरे गाल पर रसीद कर दिया .


[[पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर अब्दुल कलाम जी के अमेरिका द्वारा किये  गए अपमान का जवाब भी तो  ''भारत  सरकार  को  मियां   जी की   तरह ही   देना चाहिए ना ?]
                                                     शिखा कौशिक 

गुरुवार, 10 नवंबर 2011

क्यों न ''भारत रत्न'' चुनने का अधिकार भी भारतीय जनता को प्रदान किया जाये ?

क्यों न ''भारत रत्न'' चुनने का अधिकार भी भारतीय जनता को प्रदान किया जाये ?



sushma.jpgभूपेनदा (भूपेन हजारिका) भारत के महान सपूत थे। मैं प्रधानमंत्री से निवेदन करूंगी कि उन्हें भारत रत्न से नवाजा जाए।-श्रीमती सुषमा स्वराज [twitter -९/11/11]
                    
              
क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिए जाने की मुहीम कुछ माह पहले काफी जोर पकड़ रही  थी  .हमारे कुछ ब्लोगर्स ने उनके पक्ष-विपक्ष में सराहनीय पोस्ट भी लिखी थी .कल सुषमा जी ने ''भूपेन दा'' को 'भारत रत्न' दिए जाने की मांग ट्विटर पर उठाकर एक नया मुद्दा सोच-विचार हेतु हम सब के समक्ष रख दिया है .बहुत समय से हमारे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी को भी 'भारत रत्न दिए जाने का मुद्दा उठाया जाता रहा है .
                           यदि पूर्व में घटी घटनाओं पर एक नजर डालें तो यह तथ्य भी प्रकट होता है कि इस पुरस्कार के निर्धारण में राजनीति भी खेली जाती है .हमारे महान स्वतंत्रता सेनानी नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के परिजनों ने ''बहुत देर से यह सम्मान '' नेता जी को दिए जाने पर वापस लौटा दिया था . ऐसे में जब भी कोई  इस सम्मान को किसी व्यक्ति विशेष को दिए जाने की मांग उठाता है तब दूसरा पक्ष किसी दूसरे को दिए जाने की वकालत करता है .राजनैतिक पार्टियाँ तो अक्सर  इसमें भी अपना हित तलाशने लगती हैं .
                  एक विचार मस्तिष्क में आया है जिसे आप सभी से साझा करना चाहती हूँ क्यों न ''भारत रत्न'' चुनने का अधिकार भी भारतीय जनता को प्रदान किया जाये ?सरकार किसी वर्ष विशेष में ''भारत रत्न '' के लिए दस नामों को चुने और हमें यह अधिकार दिया जाये कि हम उनमें से किसी एक को उस वर्ष के लिए ''भारत रत्न '' चुने .ऐसी प्रक्रिया से इस सर्वोच्च  सम्मान की गरिमा बची  रहेगी और हमारे लोकतान्त्रिक देश की प्रतिष्ठा  में चार चाँद लग जायेंगें .आपका क्या विचार है?
                                                 शिखा कौशिक 



रविवार, 6 नवंबर 2011

इंटरव्यू-साक्षात्कार


इंटरव्यू-साक्षात्कार 
Businesswoman Meeting with Businessman Photo (42-19752177)
[google se sabhar]
टी.वी. के   एक कार्यक्रम में प्रस्तुतकर्ता---''दर्शकों आज हम लेकर आये हैं एक अलग -हटकर इंटरव्यू .एक ओर हैं भारत के सबसे अमीर व्यक्ति ''श्री अमीर'' और दूसरी ओर है भारत  क़ा ''सबसे गरीब व्यक्ति ' बेचारा गरीब.''' अब हम इनसे कुछ  प्रश्न करके जानेगे क़ि श्री अमीर कितने सुख से जीवन बिताते हैं और बेचारा गरीब कितना दुखी रहता है?
प्रश्न१---आप दोनों यह बताये की  कितनी देर सो पाते है  रोज?


श्री अमीर--सच बताऊँ कभी-कभी मैं इतना व्यस्त रहता हूँ क़ि दिन भर में एक घंटे भी नहीं सो पाता.कभी इतना तनाव हो जाता है क़ि ए.सी. की ठंडक में और नरम-गरम गद्दे-लिहाफ से भी गर्मी-सर्दी में सुकून की नीद नहीं आती.


बेचारा गरीब--मैं तो किसी भी पेड़ की छाव में गर्मी व् अलाव जलाकर सर्दी में गहरी नीद में सो जाता हूँ. अब मेरी जेब में तो फूटी कौड़ी भी नहीं होती इसलिए  डर या तनाव कैसा.मुझे न कुछ खोने की चिंता और न कुछ सँभालने क़ा तनाव.[इसके साथ ही उसका जोरदार ठहाका ]


प्रशन२-- आप दोनों को खाने में क्या-क्या पसंद है?
श्री अमीर-अजी छोडये....ये प्रश्न ..पसंद नापसंद तो तब मायने रखता है जब मैं अपनी इच्छा से कुछ खा सकू.डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर ;डिप्रेशन और भी न जाने कितनी मानसिक बीमारियों से ग्रस्त हूँ.डाक्टर के निर्देशानुसार सुबह शाम दवाइयां खाता हूँ .....जिन्दा हूँ!
बेचारा गरीब--मुझे तो सभी पकवान पसंद हैं.हलवा-पूरी.समोसे;चाट. जब भी मौका लगता है  जी भर कर खाता हूँ.


प्रशन३-अपने परिवार को कितना समय दे पाते है?
श्री अमीर--कई-कई महीने परिवार से नहीं मिल पाता.पत्नी सामाजिक कार्यों से बाहर जाती रहती है.बेटा अमेरिका में रहता है ,बेटी कनाडा में पढती  है .न मेरे पास समय है और न उनके पास.साल में एक दिन किसी तरह निकाल  कर साथ बीता लेते है.
बेचारा गरीब--अजी हमारा क्या?....हम सब तो साथ-साथ मजदूरी करते हैं,काम के साथ बतियाते भी रहते है.साथ बैठकर खाना खाते है.सारा परिवार साथ ही रहता है.


प्रशन४-- आगे जिन्दगी में क्या पाना चाहते है?
श्री अमीर-और दौलत;शोहरत .......नहीं...नहीं......थोडा सुकून,परिवार क़ा साथ ;अच्छा स्वास्थ्य .
बेचारा गरीब---मैं तो संतुष्ट हूँ.कुछ पाने के चक्कर में तो सब आराम ही हराम हो जाता है मेरा तो बस एक ही मन्त्र है''दाल रोटी खाओ प्रभु के गुण गाओ'''.
प्रशन५--किस से  डरते है?


श्री अमीर-सब कुछ लुट जाने से.
बेचारा गरीब--किसी से नहीं.है ही क्या मेरे पास जो लुट जायेगा.मैं खुश हूँ.थोडा खाता हूँ पर आनंद  से,कुछ लुट जाने क़ा डर नहीं--सुकून ही सुकून हैं.


प्रस्तुतकर्ता---तो दर्शकों आपने आज के साक्षात्कार  की बातों से जान ही लिया होगा की बेचारा अमीर भी कितना गरीब है और श्री गरीब कितना सुखी है.साक्षात्कार  कैसा लगा ?जरूर बताइयेगा.

                                            शिखा कौशिक 

गुरुवार, 3 नवंबर 2011

जनता आखिर कब तक देखेगी ऐसे युवाओं की हत्या ?


जनता आखिर कब तक देखेगी  ऐसे युवाओं की हत्या ?


                                         लड़कियों को बचाने में गई इनकी जान1
                                             [कीनन व् रयूबेन की बहादुरी को शत-शत नमन ]
मुंबई में दो युवाओं की  गोली मारकर खुलेआम भीड़ के सामने हत्या कर दी गयी .कारण - वे क्लब में एक शराबी द्वारा लड़कियों से की जा रही छेड़कानी  का विरोध कर रहे थे .कीनन व् रयूबेन ने वही किया जो एक सभ्य नागरिक का कर्तव्य था.पुरस्कार  स्वरूप   उन दोनों को  मिली   मौत सारी जनता के सामने . ऐसा क्यों होता है कि आम जनता के सामने ऐसे अपराध होते हैं और वो निष्क्रिय  बनी रहती है .भीड़ मिल कर ऐसे हत्यारों को वही मौत के घाट उतार सकती है पर ....ऐसा नहीं होता .'' बस'' हो अथवा अन्य कोई सार्वजानिक स्थान लड़कियों के साथ खुलेआम बदतमीजी की जाती है पर उपस्थित जनता ''हम किसी और के मामले में क्यों पड़े ?'' सोचकर ऐसे अपराधों  को मौन स्वीकृति दे देते हैं .जनता मिल कर ऐसे अपराधों पर निर्णायक रोक लगा सकती है पर पहल तो हमें खुद से ही करनी होगी न !वरना हमारी आँखों के सामने कीनन व् रयूबेन जैसे युवाओं को ऐसे अपराधी मौत की नींद सुलाते रहेंगे .
                                                         शिखा कौशिक 

सोमवार, 24 अक्टूबर 2011

एक बेटी का परम्परा के मुंह पर करारा तमाचा


 एक बेटी  का  परम्परा   के  मुंह  पर करारा  तमाचा 
हमारे  समाज  में  सदियों  से वंश  चलाने  व्  अंत्येष्टि  संस्कार  के  नाम  पर  पुत्रों  के जन्म  पर  हर्ष  व्  उत्साह  प्रदर्शित  करने  की  परम्परा  रही  है  .पुत्र -उत्पत्ति  की इच्छा  के पीछे  हमारे  मान्य  ग्रंथों   में  पुत्रों  को  ही  मुक्ति  दिलाने  वाला  ,वंश  चलाने  वाला  के रूप  में  वर्णित  किया  जाना  एक  बड़ा  कारण  रहा  है  .''श्रीमदवाल्मीकीय  रामायण   '' में  इस  सन्दर्भ  में  उल्लेख  आता  है -
''''पुत्र्नाम्नों नरकाद यस्मात  पितरं त्रायते  सुत   
                   तस्मात्  पुत्र इति प्रोक्त:  पितरं  म: पाति सर्वतः ''
[श्री मद वाल्मीकीय रामायण ,अयोध्या काण्ड   ,सप्ताधिक्   शततम: सर्ग:,पृष्ठ -४४७,गीता  प्रेस गोरखपुर ] 
          स्मृतिकारों द्वारा उल्लिखित सोलह संस्कारों में भी ''अंत्येष्टि क्रिया ' पुत्रादि के द्वारा किया  जाना विधानित किये जाने से भी कन्या  जन्म की तुलना   में पुत्र   जन्म हर्ष  का कारण बन  गया  .इस एक कारण ने भारतीय समाज की मानसिकता  कन्या  जन्म विरोधी  बना  डाली .पिण्ड दान ,मोक्ष,स्वर्ग की भ्रांत धारणाओं  ने कन्या  -जन्म को एक अभिशाप    बना  डाला किन्तु   18 अक्टूबर   2011 को एक बेटी ने इस परम्परा   के मुंह  पर करारा  तमाचा  लगा डाला .मेरठ के प्रभातनगर निवासी   श्री खेमराज  की मृत्यु  ने जहाँ  उसकी दो पुत्रियों व् पत्नी को अन्दर तक तोड़ डाला होगा वहीँ उसकी १५ वर्षीय बेटी 'पूजा 'ने  पचास आदमियों  के समूह के आगे सिर पर सफ़ेद कपडा बांधकर  - आगे-आगे चलकर  सारे  समाज का ध्यान   अपनी  और खीचा  कि '' देखो एक बेटी भी अपने पिता की अंतिम  क्रिया  हेतु  शमशान घाट तक जा  सकती है वहीँ सूरजकुंड  शमशान घाट पर अपने पिता को मुखाग्नि देकर ''पुत्री'' शब्द  को सार्थक  कर दिया '' यदि  पुत्र  नरक  से मुक्ति  दिला  सकता  है तो  'पुत्री' क्यों नहीं  ?
          इस सब  में 'पूजा' का साथ उसके पूरे मोहल्ले ने दिया  जो इस और सकारात्मक संकेत है की हमारे  पुरुष प्रधान  समाज की मानसिकता  में परिवर्तन  आ रहा है .पुरुष प्रधान  समाज की मजबूत दीवारों को हिला कर रख देने वाली ''पूजा '' जैसी बेटी  को मेरा  सलाम  है . का 
                                                        शिखा  कौशिक 
                                    [विचारों का चबूतरा ]

सोमवार, 17 अक्टूबर 2011

एक नए शोध की आवश्यकता है .


यह   खबर पढ़ी    -येदयुरप्पा के सीने में दर्द, अस्पताल में भर्ती'' तो अनायास  ही निम्न  विचार  मन में  आ गए -
 एक नए शोध की आवश्यकता है .    भ्रष्टाचारी और ह्रदय रोग .जब भी कोई भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़ा जाता है उसके दिल में दर्द शुरू हो जाता है .ऐसा क्यों होता है ? यही शोध क़ा विषय होना चाहिए .जिस जनता क़ा शोषण कर ये लोग इतना बड़ा रोग पाल लेते है वो जनता इनके पकडे जाने पर यह आस भी नहीं रख पाती कि अब भ्रष्टाचार क़ा भांडा फूटेगा मगर कमबख्त भ्रष्टाचारी क़ा ह्रदय बीच में आ जाता है और सारा मजा किरकिरा हो जाता है .इतना पैसा तिजोरियों में छुपा कर रखना भी तो आसान बात नहीं न !इतने भेद ! इतने झूठ  ! आखिर दिल तो दर्द करेगा ही .मेरा सभी शोधार्थियों से नम्र निवेदन है कि इस खास विषय पर गहन शोध कीजिये .सफल होने पर शायद नोबेल पुरस्कार तक मिल जाये .मेरी शुभकामनाये आप सभी के साथ है .
                                        शिखा कौशिक 
                           [विचारों का  चबूतरा ]

शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2011

जनता का हक़ है !

जनता का हक़ है !

आज के राजनैतिक [जिसमे कुछ भी नैतिक  नहीं है] हालातों में अपने नेताओं के आचरण पर वाकई क्रोध आता है .एक और गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र  मोदी  ने  उपवास   के आयोजन  पर करोड़ों रूपये  बहा  दिए ;दूसरी ओर  पूर्व उप प्रधानमंत्री श्री लाल कृष्ण आडवानी  जी 50 लाख के रथ में सवार होकर नंगी -भूखी जनता को जगाने-सचेत   करने के लिए निकले पड़ें   हैं . जो सत्ता में हैं वे  तो भ्रष्ट  हैं ही पर जो सत्ता से बाहर हैं उनका आचरण भी यह नहीं दर्शाता कि ये हमें एक स्वच्छ  व् ईमानदार  सरकार  प्रदान  कर सकेंगें .रथ-यात्रा पर निकले  व् सत्तासीन सभी नेताओं से जनता को यह कहने  व् पूछने  का पूरा  हक़ है -

जनता का हक़ है ये पूछे क्या तुम करते हो ?
जनता के पैसे से क्यों तुम जेबे भरते हो ?

कितने  खाते  स्विस  बैंक  में गद्दारों  तुमने  खोले  ?
फांसी  पर लटका देंगे  जो अब  भी सच  ना  बोले  .

नाम  गरीबों  का लेकर  'पैकेज ' का रुपया  खाते ;
बेहतर  होता   इससे  पहले  डूब  के तुम मर  जाते .

लाखों मरे  किसान  देश के ;रोटी के हैं लाले  ;
तुम ही जिम्मेदार  हो इसके  ;कर लो  अब मुंह  काले  .

जनता जाग  उठी  है तोड़ेगी   चुप्पी  के ताले  ;
पकड़  के गर्दन  पूछेगी  ''क्यूँ  करते हो घोटाले  ?

                           क्या आज के नेता इनमे  से एक भी सवाल  का जवाब  दे  पाएंगे  ?........
                                                               जय हिंद !