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शनिवार, 9 जुलाई 2011

''एक हल्की बात कर देती है किरदार तार-तार !''

''एक हल्की बात कर देती है किरदार तार-तार !''

ब्लॉग जगत अपने मूल स्वरुप में बुद्धिजीवियों का समूह है .ब्लॉग जगत में ऐसी हल्की बात की उम्मीद कोई भी सभ्य-सुशिक्षित ब्लोगर नहीं कर सकता है .ब्लोगर स्त्री है या पुरुष -क्या आप यह देखकर किसी के ब्लॉग पर जाते हैं ?आप ब्लॉग पर पोस्ट की गयी रचना-आलेख पर ध्यान देते हैं या प्रोफाइल में चिपकी ब्लोगर की फोटो पर ? मेरा मानना है कि कोई भी सभ्य ब्लोगर सिर्फ पहचान के लिए प्रोफाइल फोटो पर एक नज़र डाल लेता है .ऐसे में यदि कोई आपको बार-बार यह सलाह दे कि आप ब्लॉग पर अपने प्रोफाइल में ''अच्छी फोटो ''लगायें इससे पाठकों की संख्या बढती है तो इसे आप क्या सलाह देने वाले के दिमाग का दिवालियापन नहीं कहेंगे !
जो पाठक आपकी रचनाओं के स्थान पर आपकी फोटो पर ज्यादा ध्यान देते हैं -वे पाठक हैं ही कहाँ ?वे तो दर्शक हैं .उनके लिए तो बहुत सामग्री नेट पर अन्यत्र भी उपलब्ध है .ऐसे ब्लोगर न तो साहित्य प्रेमी कहे जा सकते हैं और न ही विशुद्ध आलोचक .वे केवल तफरी करने के लिए ब्लॉग बना कर बैठ गएँ हैं .ब्लॉग जगत में सुन्दर चेहरों को फोटो में तलाशने का उद्देश्य रखने वाले ऐसे ब्लोगर्स को यह जान लेना चाहिए कि यदि ब्लॉग को प्रसिद्द करने का यही तरीका होता तो न तो अच्छा लिखने वालों को कोई पूछता और न ही उम्रदराज ब्लोगर्स को जबकि ब्लॉग जगत में दोनों की ही महत्ता सिर चढ़ कर बोल रही है .
यदि सुन्दर फोटो लगाकर कोई ब्लॉग जगत में अपनी पाठक संख्या बढाने का ख्वाब देखता है तो यह केवल दिवास्वप्न ही है क्योंकि यदि ऐसा होता तो यहाँ भी फ़िल्मी हीरो-हिरोइन -मॉडल का बोलबाला हो चुका होता.इसके पीछे कारण यही है कि आम आदमी न तो उनकी तरह अपनी शारीरिक सुन्दरता को लेकर सचेत होता है और न ही उसके पास इन की तरह शरीर को सुन्दर-सुडोल बनाने का समय व् पैसा होता है .फिल्म-मॉडलिंग से जुड़े लोग अपने शरीर को दुकान के माल की तरह सजा-सवाँर कर रखते हैं क्योंकि यह उनके पेशे का हिस्सा है पर यहाँ ब्लॉग जगत में हम सभी का उद्देश्य मात्र अपने विचारों और भावों को अपने सामान आम लोगों तक संप्रेषित करना है व् अन्य ब्लोगर्स के विचारों से अवगत होना है .वास्तव में जो किसी को ऐसी घटिया सलाह देता है वह सबसे पहले किसी की निजता को चोट पहुंचाता है फिर सभ्यता की सीमाओं को लांघता है और इस सबके बाद वह स्वयं विचारकर देखे कि वह कितनी हल्की बात कर रहा है ! इससे उसका किरदार भी तो तार-तार हो जाता है .क्या ऐसा नहीं है ?

21 टिप्‍पणियां:

vidhya ने कहा…

bahut sundar

vidhya ने कहा…

keya sundar lekha hai

S.N SHUKLA ने कहा…

Shikha ji
bahut khari baat kahi aapane,is bebaki ke liye duharee badhai

अमरनाथ 'मधुर' ने कहा…

आपने बिलकुल ठीक लिखा है ब्लॉग लेखन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए |

रविकर ने कहा…

sahi hai darshakon se naaraaji ||

सुन्दर भावाभिव्यक्ति ||
बधाई ||

smshindi By Sonu ने कहा…

महोदय/ महोदया जी,
अब आपके लिये एक मोका है आप भेजिए अपनी कोई भी रचना जो जन्मदिन या दोस्ती पर लिखी गई हो! रचना आपकी स्वरचित होना अनिवार्य है! आपकी रचना मुझे 20 जुलाई तक मिल जानी चाहिए! इसके बाद आयी हुई रचना स्वीकार नहीं की जायेगी! आप अपनी रचना हमें "यूनिकोड" फांट में ही भेंजें! आप एक से अधिक रचना भी भेजें सकते हो! रचना के साथ आप चाहें तो अपनी फोटो, वेब लिंक(ब्लॉग लिंक), ई-मेल व नाम भी अपनी पोस्ट में लिख सकते है! प्रथम स्थान पर आने वाले रचनाकर को एक प्रमाण पत्र दिया जायेगा! रचना का चयन "स्मस हिन्दी ब्लॉग" द्वारा किया जायेगा! जो सभी को मान्य होगा! मेरे इस पते पर अपनी रचना भेजें sonuagra0009@gmail.com या आप मेरे ब्लॉग “स्मस हिन्दी” मे टिप्पणि के रूप में भी अपनी रचना भेज सकते हो.
हमारी यह पेशकश आपको पसंद आई?
नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया
http://smshindi-smshindi.blogspot.com/2011/07/12.html
मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है !

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Saarthak Alekh.... Koi bhi likhe Agar lekh achcha hai to prabhavit zaroor karata hai...

mahendra verma ने कहा…

यह लेखन यज्ञशाला है, कोई फैशन शो नहीं।
सामयिक विचार।

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

Shikha ji apne ek dam sahi bat kahi hai abhar

रेखा ने कहा…

ब्लॉग के हर पोस्ट का एक सार्थक उद्देश्य होना चाहिए. ब्लॉग के पाठक या दर्शक का नजरिया भी उतना ही महत्वपूर्ण है.

Gopal Mishra ने कहा…

very nice. good way to put your thoughts

veerubhai ने कहा…

शिखा जी !सामने वाले का मकसद क्या है यह ज्यादा महत्वपूर्ण है .बाहर तो शब्द ही होतें हैं उनके अर्थ हमारे अन्दर होतें हैं .कई बार पहचान के लिए लगाया गया चित्र बहुत धुंधला या अस्पस्ट होता है .कई लोगों ने अपना नाम और रूप दोनों ही विरूपित करके चित्र के स्थान पर लगाया हुआ है .यह विचित्र विशिष्ठ दिखने की कोशिश ब्लॉग जगत में क्यों ?जबकि ब्लॉग जगत एक परिवार है .कोई हलकी फुलकी बात यहाँ हम भी पसंद न करेंगें .सीधे सीधे उस व्यक्ति से पूछा जा सकता है भाई साहब /बहना मेरी/मेम जी /श्रीमान आपका मकसद क्या है चित्र से पहचान या कुछ और ?आकर्षक छवि स्त्री की हो या पुरुष की या फिर राधा जी की ,देवी देवताओं में भी सौन्दर्य निहारने वाले हैं हम भारत वंशी तब ही तो उन्हें विविध पोशाकें चढातें हैं संवारतें हैं .सौन्दर्य पूरे वातावरण को खुशनुमा बना देता है फूलों की तरह .फिर बतलादूं दोहरा दूं हम अपने माहौल को विषाद और उत्तप्त विवाद के ताप से क्यों विपरीत बनाएं .बात पर न जाएँ उसके पीछेका इरादा देखें .वह कलुषित है तो हम उसका तर्पण करतें हैं सरयू घाट पर .,ब्लोगिए समेत .
विमर्श वातायन खुला रहे .बधाई इस साफ़ गोई के लिए संवाद के लिए जो एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है कोई नारा नहीं ,वाद नहीं .

dipak kumar ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है

well wisher ने कहा…

फ़ोटो व्यक्तित्व की पहचान होती है। आदमी केवल शब्दों से ही प्रभाव ग्रहण नहीं करता वरन कहने वाले का व्यक्तित्व भी प्रभावित करता है। आम तौर पर हम अपने घरों में केवल लुंगी बनियान या किसी अन्य सुविधाजनक घरेलू वस्त्रों में भी रहते हैं लेकिन जब किसी मंच से सभा को संबोधित करने के लिए जाना होता है तो वस्त्र दूसरे पहनकर जाते हैं।
हम उस समय यह क्यों नहीं सोचते कि लोगों को हमारे विचार सुनने हैं या हमारे कपड़ों का डिजायन देखना है ?
इसी प्रकार ब्लॉग जगत की भी एक सभ्यता है कि या तो फ़ोटो सिरे से ही न हो या फिर कोई प्रतीक फ़ोटो हो या फिर हो तो साफ सा फ़ोटो हो। अगर फ़ोटो साफ़ न हो तो जिसका फ़ोटो होता है वह भूत या भूतनी सा नज़र आता है और देखने वालों को उलझन सी होती है कि इतना पढ़ लिखकर भी इन्हें फ़ोटो खिंचाने तक का सलीका नहीं है।
जिसने भी आपको सलाह दी है आपके भले के लिए दी है।
बाकी आपकी मर्जी है कि आप उसकी सलाह को किस एंगल से लेती हैं।
भली बात को बुराई के एंगल से लेना दूसरे को अकारण ही मानसिक कष्ट पहुंचाना है और जो लोग इस आदत के शिकार हो जाते हैं, उन्हें फिर कोई और सही सलाह कैसे दे सकता है ?
यही वजह है कि ब्लॉग जगत में लोग दिखावटी और नकली कमेंट देते हैं ताकि किसी को कोई शिकायत ही पैदा न हो।
आपके फ़ोटो वास्तव में ही धुंधले हैं और इन्हें जो भी अपने ब्लॉग पर लगाएगा, फूहड़ समझा जाएगा।
अपने शरीर को फिल्म कलाकारों की तरह बनाने की जरूरत नहीं है बल्कि आप जैसी भी हैं वैसी ही सूरत का अच्छे रिज़ॉल्यूशन का फ़ोटो काफी है।
इस संबंध में आप योगेन्द्र जी के अनुभव से भी लाभ उठा सकती हैं।
मुझे डर है कि कहीं आपकी नज़र में मेरा भी किरदार तार तार न हो जाए तो भी आपको बहनवत सुझाव दे रहा हूं।
शुभकामनाएं !

एस.एम.मासूम ने कहा…

शिखा जी लेख़ कुछ समझ मैं नहीं आया. यह सत्य है की किसी भी ब्लॉगर का लेख़ अहमियत रखता है ना की उसकी तस्वीर. मैं जब ब्लॉगजगत में आया था तो मैंने अमन का पैग़ाम नाम लिख के तस्वीर की जगह लगा रखा था लेकिन ना जाने कितने ब्लॉगर ने बार बार यह कहा की तस्वीर आप अपनी लगा लें. यकीनन उनकी बात अनुचित थी लेकिन मैंने सकारात्मक सोंच रखते हुए अपनी तस्वीर लगा दी. और आज उनकी शिकायत ख़त्म है.
महिला ब्लॉगर के लिए वो चाहे तो अपनी तस्वीर ही ना लगाये ,इसकी आवश्यकता मैं नहीं समझता. तस्वीर यदि कोई महिला लगती है तो वो वैसी तस्वीर लगा सकती है जिन कपड़ों मैं वो समाज मैं बाहर आती जाती है. क्यों की जिस हाल मैं वो सबके सामने बाज़ार मैं ,दफ्तर मैं जा सकती है वैसी ही अपने ब्लॉग मैं भी लगा सकती है.
मान लेकिन यदि कोई औरत मुस्लिम है तो हिजाब के साथ वो बाहर जाती है और वैसी ही तस्वीर लगा सकती है.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सच है ब्लॉग जगत को फेशन की रेम्प नहीं बनाना चाहिए ..

Vivek Jain ने कहा…

बहुत सार्थक पोस्ट है,
ब्लॉगिंग को गंभीरता से लेना जरुरी है,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

संजय भास्कर ने कहा…

आपने बिलकुल ठीक लिखा है.....शिखा जी

Dr Varsha Singh ने कहा…

उत्तम विचार...सटीक आलेख...

महेश बारमाटे "माही" ने कहा…

शिखा जी !
बात तो सही है कि ब्लॉग्गिंग को फैशन का अड्डा नहीं बनाना चाहिए...

पर कभी कभी जब आप मशहूर होने लगते हैं तो आपके प्रशंसक जरूर चाहेंगे कि वे आपको देखें जरूर...

खैर जो भी हो... सोच अपनी अपनी...


आप से एक और निवेदन है !
आपका व शालिनी जी का छोटा सा परिचय मैंने अपने एक लेख में दिया है...
कृपया जरूर आयें और मेरा मार्गदर्शन करें...

http://meri-mahfil.blogspot.com/2011/07/3.html

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri ने कहा…

शिखा जी ..सही कहा आपने सर्वप्रथम महत्व विचारों का ही होता है..अगर तस्वीर ही सब कुछ होती तो हर ब्लॉग ,अखबार , पत्रिका पर केवल तस्वीर ही होती ...तत्पश्चात तस्वीर या फोटो का भी महत्त्व होता है ..जब में फेस बुक साईट पर था तो कुछ मित्रों ने सलाह दी की अपनी तस्वीर भी लगाईयेगा जिससे पाता चले की असली प्रोफाइल है
उनकी बात मुझे सही लगी मेने अपनी तस्वीर लगाई ...आपके सारगर्भित कटु सत्य युक्त लेख के लिए साधुवाद....!!!