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शनिवार, 15 नवंबर 2014

जब भी जी चाहे नयी दुनिया बसा लेते हैं मोदी !


जब  भी जी  चाहे नयी दुनिया  बसा  लेते हैं लोग ! 
एक चेहरे पे कई चेहरे लगा लेते हैं लोग !   
लगातार नेहरू जी का कद भारतीय -जनमानस के दिलो दिमाग में घटाने का कुत्सित प्रयास करने वाले आज नेहरू जन्म -शताब्दी कार्यक्रम में श्री मोदी  को न बुलाये जाने पर कॉंग्रेस की आलोचना कर रहे हैं पर एक भी अखबार ,एक भी मीडिया चैनल ये कहता नहीं दिख रहा कि आखिर नेहरू जी में ऐसा क्या बुरा था जो श्री मोदी लोक-सभा चुनाव  २०१४ से पहले उन्हें जिस हद तक जाकर कोस सकते थे .. कोसा और अब ये दावा ठोका जा रहा है कि नेहरू किसी एक की जागीर नहीं है .यदि उन महान आलोचकों को यह याद न हो तो ये पढ़ें -
* -At a convention of Chief Ministers of BJP-ruled states in Maharashtra last year, Modi had said "Jawaharlal Nehru was said to be very fond of kids and his birthday has been christened as Children's Day. Kids called him Chacha Nehru and it brings images of a benevolent Nehru flooding our minds. But what good has it done for the kids?"

*-Hyderabad: Paying glowing tributes to the first home minister of the country Sardar Vallabhbhai Patel at a function here, Gujarat Chief Minister Narendra Modi on Sunday criticised Jawaharlal Nehru, blaming him for the unresolved Kashmir issue.-HE SAID -"Every generation of Indians has felt that he should have been the first Prime Minister of the country, which (this perception) is a great tribute in itself. After Chanakya, it was Sardar who strove to integrate the country," Modi said.
श्री मोदी व् इनके समान  अन्य नेहरू जी के आलोचकों को आज क्यों उनकी विरासत हथियाने का विचार आ रहा है ये शीशे की तरह साफ़ है . ये समझ चुके हैं कि नेहरू भारतीयों की आत्मा में बसते हैं और इनका सम्मान किये बिना लोकप्रियता के शिखर पर ज्यादा दिन नहीं टिका जा सकता है .इसीलिए छद्म सम्मान का दिखावा कर आज ये नेहरू जी पर अहसान जताते हुए उनकी १२५ वी जयंती के अनेक कार्यक्रम  आयोजित करने का नाटक कर रहे हैं और कॉंग्रेस के  समर्थकों को यह भी दिखलाने का प्रयास कर रहे हैं कि देखों हम कितने महान हैं जो तुम्हारे लीडर को सम्मान दे रहे हैं . गांधी जी को देश-विभाजन के लिए कोसने वाले ये नेता आज अपने मकसद के लिए उनके भक्त बन रहे हैं ताकि सारी दुनिया में गांधी के लिए जो सम्मान है -उसका कुछ अंश ये भी प्राप्त कर ले .गांधी-नेहरू को ऐसे छद्म भक्तों की कोई आवश्यकता नहीं है और न ही हमारे जैसे भारतीयों को आप मूर्ख  बना सकते हैं .हम भी जानते  हैं कि अंतरात्मा में परिवर्तन  इतनी  जल्दी  नहीं आता .गांधी व् नेहरू जी को सम्मान देने के लिए तथाकथित ये छद्म भक्त अपनी आत्मा को कष्ट न दें ऐसी इनसे प्रार्थना है .

शिखा कौशिक 'नूतन' 

गुरुवार, 5 जून 2014

एक सप्ताह दो सम्मान ..हार्दिक धन्यवाद

  भारत मित्र मंच व् जागरण जंक्शन ने बेस्ट ब्लॉगर ऑफ दी वीक बनाया .हार्दिक आभार दोनों मंचों का .


                

SHIKHA KAUSHIK

Has won the blogger of the week for the blog : ''जब घोर निराशा में डूबे...
Best Blogger of the Week
प्रिय पाठक,
जागरण जंक्शन ब्लॉग मंच पर ब्लॉग कृतियों की विषय वस्तु, लेखन शैली, प्रासंगिकता, प्रस्तुतिकरण और गुणवत्ता के आधार पर सप्ताह के दौरान प्रकाशित हुई रचनाओं में से सर्वश्रेष्ठ रचना का चयन कर उसके रचनाकार को "Best Blogger of the Week" के सम्मान से नवाजा जाता है. जागरण जंक्शन पर इस सप्ताह की सर्वश्रेष्ठ रचना आदरणीया डॉ. शिखा कौशिक जी द्वारा रचित हर तरफ आवाज ये उठने लगी है.
आप इस सप्ताह के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग पोस्ट को पढ़ने के लिए नीचे दिए हुए लिंक पर हर तरफ आवाज ये उठने लगी हैक्लिक करें
नोट: यदि आप इस जानकारी को किसी के साथ साझा करना चाहते हैं तो उपरोक्त मेलर के दाहिनी ओर दिए गए Forward to your friends लिंक पर क्लिक करें:
सूचना: जागरण जंक्शन फेसबुक एकाउंट पर सप्ताह की सर्वश्रेष्ठ रचना देखने के लिए क्लिक करें

बुधवार, 21 मई 2014

राजकमल प्रकाशन की प्रतियोगिता में तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ . .

Photo: राजकमल प्रकाशन समूह की फेसबुक प्रतियोगिता 
'गुज़रें किताब से...' में 
छठवें सप्ताह की अरविंद केजरीवाल और विष्णु राजगढ़िया की किताब 
'सूचना का अधिकार' पर आधारित प्रतियोगिता के विजेताओं के नाम.

सभी विजेताओं को राजकमल प्रकाशन समूह की ओर से हार्दिक बधाई.

राजकमल प्रकाशन की प्रतियोगिता में तृतीय पुरस्कार प्राप्त  हुआ  .



 शिखा कौशिक 'नूतन '


शुक्रवार, 9 मई 2014

''नैतिक:व्यक्ति-विशेष व् परिस्थिति-विशेषानुसार बदलते मायने ''




''नैतिक'' शब्द से तात्पर्य है -'नीति सम्बन्धी ''. अब 'नीति ' क्या है ? 'नीति ' से तात्पर्य है -व्यवहार का ढंग बर्ताव का तरीका ,लोक-व्यवहार हेतु नियत किया गया आचार ,सदाचार -व्यवहार आदि  के नियम और रीतियाँ ,शासन की रक्षा एवं व्यवस्था हेतु स्थिर किये  गए तत्व व् सिद्धांत आदि .'१किन्तु प्रश्न उठता है कि ये नियम-रीतियाँ किसने निर्धारित की हैं ? 'नैतिक' होने का प्रमाण-पत्र कौन प्रदान करेगा ? ''नैतिक'' होने के मायने क्या हैं ? मेरा मानना है कि कोई भी नीति-शास्त्र ये निर्धारित नहीं कर सकता है कि हम नैतिक हैं या नहीं .नैतिक होने के मायने व्यक्ति व् परिस्थिति विशेष निर्धारित करती हैं .श्री राम ने बालि पर छिपकर वाण चलाकर उसका वध किया तब बालि ने रोष में भरकर श्री राम पर अनैतिक कार्य का आरोप लगते हुए कहा -''त्वयादृश्येन ...पापवशं गत:''२''अर्थात ''जैसे किसी सोये पुरुष को सांप डस ले और वह मर जाये उसी प्रकार रणभूमि में मुझ दुर्जेय वीर को आपने छिपे रहकर मारा तथा ऐसा करके आप पाप के भागी हुए हैं .'' इस पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री राम नैतिकता को परिभाषित करते हुए से कहते हैं -''नहि ...हरियूथप '' ३''''वानर राज ! जो लोकाचार से भ्रष्ट होकर लोकविरुद्ध आचरण करता है उसे रोकने या राह पर लेन के लिए मैं दंड के शिव और कोई उपाय नहीं देखता !'' अर्थात पापाचारी का वध करने के लिए जो भी मार्ग चुना जाये वो  नैतिक है  .पीछे से वार करना -छिपकर वार करना  भले ही अनैतिक कहा जाये पर न भूलें इसी मत का सहारा लेकर नक्सलवादी हमारे जवानों पर हमला करते हैं क्योंकि नक्सलवादियों की दृष्टि में हमारी सरकार उनकी शोषक है और इसी सोच का सहारा लेकर पाकिस्तान से प्रेरित आतंकवादी मानव-बम बनकर ''जिहाद'' के नाम पर खुद को उड़ा डालते .उनके लिए मासूमों का क़त्ल होना अनैतिक नहीं क्योंकि वे अपनी सोच में इसी मार्ग को नैतिक मानते हैं .भले ही सामान्य परिस्थिति में ये सब अनैतिक कहा जाये पर जेहादियों -नक्सलवादियों  के लोकाचार में ये नैतिक की श्रेणी में आता है .उनके नैतिक होने के मायने यही है .
                    लोकाचार व् नीतियां  किताबों या नीति-शास्त्रों के अनुसार नहीं चलती .ये रोज़ की समस्याओं व् परिस्थितियों  के अनुसार निर्धारित होते रहते हैं .नीति-शास्त्रों के आधार पर व्यक्ति खुद को नैतिक या अनैतिक के साँचें में नहीं ढाल सकता .कहा गया है -''बुभुक्षित:किं न करोति पापं  !''-भूखा आदमी क्या पाप नहीं करता पर भूखे आदमी को आप अनैतिक नहीं कह सकते .एक भूखे व्यक्ति का रोटी चुराना अनैतिक नहीं कहा जा सकता .गहराई में जाएँ तो आर्थिक संसाधनों पर कब्ज़ा ज़माने वाला धनी वर्ग अनैतिक कह लाएगा जिसके कारण एक भूखा आदमी रोटी चुराने को मज़बूर होता है .बुदेलखंड में गरीबी के कारण बेटियां तक बेचीं जा रही हैं .उनके लिए ये अनैतिक नहीं है .एक सैनिक जब गोलियां बरसाकर अपनी सीमा में घुसे दुश्मन राष्ट्र के सैनिक का सीना छलनी कर देता है तब मानवतावादी एक मानव की हत्या पर शोर नहीं मचाते बल्कि सैनिक को सम्मानित किया जाता है क्योंकि सैनिक का नैतिक-धर्म है देश की सीमाओं की रक्षा करना .झूठ बोलना महापाप कहलाता है पर किसी की जान बचाने के  लिए झूठ बोलने वाले को पापी नहीं फरिश्ता कहा जाता है .मूल में जाएँ तो हम सब नैतिकता को निभाने का सौ प्रतिशत प्रयास करते हैं पर यदि किसी चालाक व्यक्ति के साथ चालाकी कर अपना हित कर लेते हैं तो क्या हम अनैतिक हो गए ? नहीं क्योंकि कहा गया है -''शठे शाठयम समाचरेत ''.''निसहाय ही हममे से कोई भी अनैतिक होकर नहीं रह सकता है .सम्भव है हमारे  कार्यों पर अन्य कोई ऊँगली उठा दे पर हम जब तक स्वयं को आश्वस्त नहीं कर लेते है कि ''ये कार्य ऐसे ही करना नैतिक रूप से सही होगा !'' तब तक हम कुछ नहीं करते .फिल्मों व् मॉडलिंग में नग्नता की सीमा पार करने वाली अभिनेत्रियों व् मॉडल्स को इस अश्लीलता  में कुछ भी अनैतिक नहीं लगता .
      निष्कर्ष रूप में कह सकते हैं कि ''नैतिक'' शब्द हमेशा से जीवित है और हर  व्यक्ति अपनी परिस्थितियों  के अनुसार नैतिक रहने का भगीरथ प्रयत्न करता है ...हाँ !इसके मायने व्यक्ति-विशेष व् परिस्थिति-विशेष के अनुसार बदलते रहते हैं !

शोध -ग्रन्थ :
१ -राजपाल हिंदी -शंब्दकोश -४५५ पृष्ठ
२ -वाल्मीकि रामायण -६७६ पृष्ठ [किष्किन्धा -काण्ड ]
३ -वाल्मीकि रामायण -६८८  पृष्ठ [किष्किन्धा -काण्ड ]

शिखा कौशिक 'नूतन'

शुक्रवार, 11 अप्रैल 2014

ये श्री मोदी का व्यक्तिगत मामला नहीं है !




बीजेपी के प्रवक्ता श्री रविशंकर  प्रसाद आज बौखलाए  हुए थे  .श्री मोदी  ने  जसोदा  बेन  को पत्नी  का  दर्ज़ा  देने  में इतना समय लगाया कि झूठे शपथ -पत्र तक  दे दिए  चार- चार विधान -सभा चुनाव लड़ते समय . इस पर जब राहुल जी ने एक महिला के प्रति श्री मोदी के छल को धिक्कारा तब रविशंकर प्रसाद जी  ने घिनौना बयान देते हुए गांधी-नेहरू परिवार को इस मुद्दे पर चुप रहने की न केवल धमकी दी बल्कि चुप न रहने पर नेहरू जी ,इंदिरा जी ,राजीव जी के व्यक्तिगत जीवन के राज़ उजागर करने का भय भी दिखाया .ऊपर से अपना स्तर बहुत संस्कारित बताया . रविशंकर प्रसाद जी सर्वप्रथम तो श्री मोदी का अपनी वैवाहिक-स्थिति के सम्बन्ध में झूठ बोलना भारतीय-कानून की  दृष्टि से एक अपराध है .इसके बाद एक महिला के सामाजिक -सम्मान को लगाया गया आघात है और सबसे बढ़कर ये उनका व्यक्तिगत -मामला नहीं है .अब आते हैं गांधी-नेहरू परिवार के राज़ पर .बीजेपी -आर.एस.एस नेहरू जी ,इंदिरा जी ,राजीव जी ,सोनिया जी व् राहुल जी  के चरित्र-हनन का कोई मौका नहीं छोड़ा है .आज हर सोशल वेबसाइट पर इन सबके  के खिलाफ इतने जहरीले व् अश्लील  आलेख व् वीडियो आपने डाले हुए हैं कि हम जैसे भारतीय नागरिक तो इनकी झलक तक नहीं देख सकते .राहुल जी ने श्री मोदी के दोहरे चरित्र   को निशाना बनाकर जो कहा उसमे क्या गलत है ? जो आज महिलाओं को सशक्त बनाने की बात करता है उसे ये बताने  में क्या शर्म  आती  थी  कि उसका विवाह हुआ  है और उसकी  एक पत्नी है ? बीजेपी को समझ लेना चाहिए की अब और ज्यादा वो भारतीय-जनता को बेवकूफ नहीं बना सकती है .आपके द्वारा चुना गया प्रधानमंत्री -पद का दावेदार एक झूठा व्यक्ति है जिसे भारतीय जनता कभी लोकतंत्र के सर्वोच्च पद पर नहीं बैठाएगी और रही बात गांधी-नेहरू परिवार के चरित्र-हनन की तो ये कोशिश तो आप हमेशा से कर रहे हैं पर इतना याद रखियेगा -

''पत्थर ही मारना है तो देख ले पहले ,
जो सामने खड़ा है वो शख्स कौन है ! ''

जय हिन्द ! जय भारत !

शिखा कौशिक 'नूतन'

मंगलवार, 25 मार्च 2014

आईये मिलते हैं श्री राहुल गाँधी जी से



यूं तो  राहुल गाँधी जी का जीवन एक खुली किताब की तरह है .स्व .श्री राजीव गाँधी जी व्  सोनिया गाँधी जी के सुपुत्र  राहुल जी का जन्म  19 जून  १९७० को  नईदिल्ली में हुआ .राहुल जी ने ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज  यूनिवर्सिटी [  यूं..के. ]से डेवलपमेंट इकोनोमिक्स  में एम् .फिल  की डिग्री  हासिल की है .राहुल जी की - प्राथमिक शिक्षा के उन्नतिकरण ,समाज के दलित व् अन्य   शोषित वर्गों   के सशक्तिकरण  से सम्बंधित  मुद्दों में,अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों- आदि में विशेष  रुचि है .खेलों में राहुल जी को-Scuba  diving  , swimming  , cycling  , playing squash में विशेष दिलचस्पी है .इतिहास ,समाज शास्त्र,अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध ,विकास,प्रबंधन व् जीवनी आदि विषयों को पढना  उन्हें   भाता है  व् शतरंज व् flying  उनके प्रिय समय व्यतीत करने के साधन है . अब तक  वे  निम्न   पदों को सुशोभित कर चुके हैं  -

Positions Held
2004
Elected, to 14th Lok Sabha
Member, Committee on Home Affairs
5 Aug. 2006
Member, Committee on Home Affairs
5 Aug. 2007 onwards
Member, Committee on Human Resource Development
2009
Re-elected to 15th Lok Sabha (2nd ter
31 Aug. 2009
Member, Committee on Human Resource Development


एक लोकसभा सदस्य के रूप में राहुल जी का  परिचय  इस  प्रकार  है --'' Details of MemberParticularsDescriptionNameShri Rahul GandhiConstituency from which I am electedAmethiState from which I am electedUttar PradeshPolitical party nameIndian National CongressPresent Address12, Tughlak Lane,New Delhi - 110 011Tels. (011) 23795161 Fax. (011) 23012410Permanent Address12, Tughlak Lane,New Delhi - 110 011Tels. (011) 23795161 Fax. (011) 23012410''[india.gov.in से sabhar ]


ये तो हुई राहुल जी के विषय में वे जानकारियां  जो सबको दिखाई देती हैं पर आज  मैं  यहाँ उनकी उन  विशेषताओं  का उल्लेख भी करना चाहूंगी  जिन्हें  केवल हम तभी देख सकते हैं  जब हम राजनैतिक रूप से निष्पक्ष होकर देखें  .१४ वर्ष की किशोर आयु में अपनी दादी की नृशंस   हत्या का हादसा झेलने वाले राहुल जी के धैर्य  की कड़ी परीक्षा  लेने में क्रूर प्रकृति ने कोई दया नहीं की .२१ मई १९९१ की रात को जब उनके स्नेही पिता राजीव जी की एक बम विस्फोट में नृशंस हत्या की गयी तब वे भारत में नहीं थे .जिसने भी अपने किसी प्रिय परिवारीजन को हादसे में खोया होगा वह उस समय के उनके हालात...मानसिक अवस्था को सहज  ही  महसूस   कर सकता है .किस तरह २१ वर्षीय उस युवा राहुल ने झेला  होगा यह हादसा !........आज जब स्वामी सुब्रमण्यम  जैसे तथाकथित  ज्ञानी राहुल जी को ''बुद्धू'' कहकर  उनकी खिल्ली उड़ाने  का प्रयास करते हैं ..वे भूल जाते हैं हमारे राहुल जी चट्टानी- कड़ाई जैसी मानसिक सबलता रखते हैं .दादी व् पिता को हादसों में खो देने के बावजूद वे स्वयं जन सेवा  हेतु  राजनीति में आये और सन 2004 से निरंतर जनसेवा में लगे  हुए हैं .....बिना किसी पद के लालच के .
राहुल जी द्वारा किये जाने वाले जनसंपर्क को ''नाटक ''का नाम   देने वाले ये भूल जाते हैं कि-राहुल जी इन आक्षेपों से घबराते नहीं है .वे ऐसे कुत्सित बयां देने वालों को चुनौती देते हुए ठीक ही तो कहते हैं-''यदि ये नाटक है तो ये चलता  रहेगा ''.उत्तर  प्रदेश में मिले जनादेश को भी उन्होंने बड़ी शालीनता के साथ स्वीकार किया  पर मीडिया ने  राहुल जी की आलोचना को ही स्थान दिया ...उनकी मेहनत को नहीं.
हाल ही में सर्वोच्च  न्यायलय  ने  राहुल जी के खिलाफ  फर्जी बलात्कार  के मामले  में साजिश   करने वाले व्यक्ति पर भारी अर्थ दंड लगाया है और राहुल जी को क्लीन चिट दी है  .राहुल जी के शत्रुओं को जान लेना चाहिए कि ऐसी घटिया कूटनीति से  वे  राहुल जी की छवि  को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं राहुल जी ऐसी सभी से यही कहते नज़र आते हैं -
'' पत्थर ही  है मारना है तो देख ले पहले
जो सामने खड़ा है वो शख्स कौन है !''
गरिमामयी   व् आकर्षक व्यक्तित्व  के स्वामी राहुल जी से यदि आप कभी मिले तो ये अवश्य पूछियेगा कि ''आखिर वे इतने अनर्गल आक्षेपों को ..........कटु आलोचनाओं को .... को कैसे सह जाते हैं? .विपरीत परिस्थितियों  में इतने शालीन  कैसे रह पाते हैं ?

राहुल जी इसी तरह भारतीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहें और आने वाले दिनों में भारतीय जनता के हितार्थ अच्छे निर्णय लेकर देश को प्रगति पथ पर अग्रसर करने में अपना सार्थक योगदान प्रदान करें ऐसी प्रभु से कामना  है .
शिखा कौशिक 'नूतन'

मंगलवार, 18 मार्च 2014

संघर्षों से निखरेगा राहुल जी का व्यक्तित्व



आने वाले लोक सभा २०१४ के चुनाव परिणाम जो भी हो पर राहुल गांधी जी ने यह साबित कर दिया है कि यदि इस समय वास्तव में कोई नेता सच्चे ह्रदय से राजनैतिक भ्रष्ट व्यवस्था को सुधारने के लिए दृढ़-संकल्प है तो वे हैं केवल -राहुल गांधी जी . उन्होंने जनता के साथ वार्तालाप का नया मार्ग चुना और माना कि पहले केवल नेता आते थे और भाषण देकर चले जाते थे पर अब ऐसा नहीं है .चुनाव-घोषणा पत्र में वही मुद्दे रखे जायेंगें जिन पर जनता मुहर लगाएगी . राहुल जी ने दस साल के राजनैतिक कैरियर में अनुभव से सीखा और अपने को जनता की उम्मीदों के अनुसार ढाला पर इस प्रक्रिया में मीडिया ने उनकी निंदा करने का मार्ग अपनाया जबकि होना तो यह चाहिए था कि मीडिया उनकी प्रशंसा करता .जनता +नेता+मीडिया =हम सबको मिलकर ही इस देश की समस्याओं के उपाय ढूंढने हैं .व्यक्तिगत पसंद को सार्वजानिक पसंद के रूप में थोपने के लिए ये तो जरूरी नहीं कि किसी उभरते हुए राष्ट्रिय व्यक्तित्व को नीचा गिराने की कोशिश की जाये पर मीडिया ने यही किया .राहुल जी की गरिमा को गिराने का कुत्सित प्रयास किया गया .एक झूठे रेप के मामले को बेवजह उछाला गया , राहुल जी को युवराज ,बुद्धू ,पप्पू और भी न जाने क्या-क्या अपमानजनक संज्ञाओं से विभूषित किया गया . मीडिया के अलावा विपक्षी नेताओं ने भी राहुल जी के प्रति अभद्र भाषा का खुलकर प्रयोग किया पर ये राहुल जी की शालीनता ही है कि उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं तक को अभद्र-भाषा के प्रयोग से रोका .यही है हमारे राष्ट्रीय -व्यक्तित्व की पहचान . महिलाओं के एक समूह से वार्तालाप के दौरान वे कहते हैं ''मैं आपसे समर्थन मांगने नहीं आया ..मैं आपसे वोट मांगने भी नहीं ..मैं चाहता हूँ आप खुद इतनी मजबूत बनें कि कोई आपका शोषण न कर पाये .'' यही है वो सोच जो हम आज के अपने राष्ट्रीय नेता में चाहते हैं .निश्चित रूप से संघर्षो से राहुल जी के व्यक्तित्व में और निखार आएगा .जो हमारे देश के लिए शुभ-संकेत है .


शिखा कौशिक 'नूतन'

बुधवार, 26 फ़रवरी 2014

भाजपा घुटने टेकने को तैयार


मुस्ल‌िमों से भाजपा ने मांगी माफी

मुस्ल‌िमों से माफी मांगने को तैयार है भाजपा: राजनाथ


 आख़िरकार भाजपा ने अपना आखिरी दांव सत्ता प्राप्ति के लिए चल ही दिया .जब भाजपा ने यह देख लिया कि श्री मोदी को आगे करने पर भी वे हिन्दू -समाज को धार्मिक रूप से बहलाने व् फुसलाने में कामयाब नहीं हो पाये तब मुस्लिम-समाज से गलतियों के लिए क्षमा मांगने के लिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व तैयार हो गया . इस तरह घुटने टेकने के तीन ही निहितार्थ हैं -

* श्री मोदी के रूप में छोड़ा गया ब्रह्मास्त्र मिटटी में मिल गया !

* भाजपा ने श्री मोदी के कारण एन.डी.ए. के पूर्व सहयोगियों को खोया उन्हें फिर से जोड़ने का प्रयास है ये !

*भाजपा को दिख गया है कि वे २०१४ के लोक-सभा चुनाव में भी पूर्ण-बहुमत नहीं प्राप्त कर पायेंगें क्योंकि मुस्लिम-वोट उन्हें मिलेंगी नहीं और हिन्दू दोबारा पागल बनेंगें नहीं !

 सत्ता प्राप्ति के लिए पहले राम-मंदिर का मुद्दा गरमाना फिर बाबरी-मस्जिद के गुम्बद तोड़ने के लिए जनता को उकसाना ,गुजरात में गोधरा और साम्प्रदायिक दंगे -ये ऐसे अपराध हैं जिनकी लिए माफ़ी मांगने तक का हक़ भाजपा को नहीं है .बेहतर है वे देश की बागडोर स्थिर सरकार प्रदान करने वाली कॉंग्रेस पार्टी जैसी धर्मनिरपेक्ष पार्टी के पास ही रहने दें !

 शिखा कौशिक 'नूतन'

रविवार, 12 जनवरी 2014

ऑनर किलिंग व् पुत्री धर्म

Sita : Goddess Sita Stock Photo
ऑनर किलिंग व् पुत्री धर्म 

आज भारतीय समाज 'ऑनर  किलिंग ' जैसे स्त्री विरूद्ध अपराध से आक्रांत दिखाई दे रहा है .वैश्विक जीवन मूल्यों  से प्रभावित होते भारतीय सामाजिक-पारिवारिक मूल्यों ने एक विचित्र   स्थिति को जन्म दे दिया है .आज पिता -पुत्री व् बहन -भाई के पारस्परिक स्नेहमयी संबंधों में दरार सी आई प्रतीत होती है .परिवर्तन के इस दौर में पुन:-पुन:पिता व् भ्राताओं के पुत्री व् भगिनी के प्रति कर्तव्यों  पर तो विचार की मांग उठती रहती है किन्तु पुत्री व् बहन के कर्तव्यों व् आचरण का भी इस सन्दर्भ में अवलोकन कर लेना अनिवार्य हो जाता है .गत वर्ष घटित एक घटना में एक पुत्री अपने प्रेमी के साथ घर से भाग गयी जिसके परिणाम  स्वरुप उसके पिता ने जहर खा लिया .क्या पुत्री का धर्म  यही है कि वो अपने हित -चिंतन में अपने पिता की भावनाओं को स्वाहा कर दे ? एक अन्य घटना क्रम में एक पुत्री ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर माता -पिता की हत्या कर दी .उसका एकलौता भाई किसी तरह बच गया .धिक्कार है ऐसी पुत्रियों पर !संयम- अनुशासन जैसे गुण कहाँ लुप्त हो गए हमारी पुत्रियों में से ?
                          भ्रमित व् स्वार्थी पुत्रियों को जानना चाहिए कि वे उस देश में पैदा हुई हैं जिसका इतिहास पुत्रियों के उज्जवल चरित्रों से भरा पड़ा है .राजा कुशनाभ की घृताची अप्सरा  के गर्भ से जन्मी सौ कन्याओं की पितृ-भक्ति वन्दनीय है और असंयमित होती आज की पीढ़ी की बेटियां इससे पुत्री-धर्म की शिक्षा ले सकती हैं . राजा कुशनाभ की अत्यंत सुन्दर अंगों वाली पुत्रियाँ एक दिन उद्यान भूमि में गति ,नृत्य करती आनंद मग्न हो रही थी तब उनके रूप-यौवन पर आसक्त होकर वायु देवता ने उनसे कहा -
''अहम् ...            ...भविष्यत ''-[श्लोक-१६-१७ ,पृष्ठ ९६ ,बाल कांड त्रियस्त्रिश: सर्ग :-श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण ]  
 [अर्थात-सुन्दरियों मैं तुम सबको अपनी प्रेयसी के रूप में प्राप्त करना चाहता हूँ !तुम सब मेरी भार्यएं बनोगी .अब मनुष्य भाव का त्याग करो और मुझे अंगीकार करके देवांगनाओं  की भांति दीर्घ आयु प्राप्त कर लो .विशेषतः मानव शरीर में यौवन कभी स्थिर नहीं रहता -प्रतिक्षण क्षीण होता जाता है .मेरे साथ सम्बन्ध हो जाने से तुम लोग अक्षय यौवन प्राप्त करके अमर हो जाओगी !]  
वायु देव के इस प्रस्ताव को सुनकर पतिर -भक्त  कुशनाभ कन्याओं का यह  प्रतिउत्तर  भारतीय  संस्कृति में पुत्रियों को दिए गए संस्कारों  को प्रदर्शित करते हैं -यथा -
''माँ भूत स  कालो  .....नो  भर्ता भविष्यति ''  [21-22 श्लोक  उपरोक्त ]
[दुर्मते ! वह समय कभी न आवे जब कि हम अपने सत्यवादी पिता की अवहेलना करके कामवश या अत्यंत अधर्मपूर्वक स्वयं ही वर  ढूँढने लगें .हम लोगों पर हमारे पिता जी का प्रभुत्व है , वे हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ देवता हैं .पिता जी हमें  जिसके हाथ में दे देंगे ,वही हमारा पति होगा ]
ऐसी पितृ भक्त कन्याओं को जब वायुदेव ने कुपित होकर उनके भीतर प्रवेश कर उनके अंगों  को टेढ़ा कर कुबड़ी बना दिया तब पिता कुशनाभ द्वारा चयनित ऐश्वर्यशाली तेजस्वी वर ब्रह्मदत्त के साथ विवाहकाल में हाथ के स्पर्श होते ही सभी कन्यायें कुब्जत्व दोष से रहित ,निरोग तथा उत्तम शोभा से संपन्न हुई .    
कुल की मर्यादा को अपने काम भाव से ऊपर स्थान देने वाली कुशनाभ कन्याओं ने पुत्री-धर्म  का जो उदाहरण प्रस्तुत किया वह वर्तमान में कितना प्रासंगिक हो उठा है .आज यदि पुत्री-धर्म की शिक्षा कन्याओं को शिशु काल से ही प्रदान की जाये तो भारतीय समाज को देश व् कुल का मन बढ़ने वाली पुत्रियाँ प्राप्त हो सकेंगी .
                                            माता सीता की पितृ भक्ति सर्वविदित है .राजा जनक ने निश्चय  किया था कि-
''वीर्य शुल्केती ........मुनिपुङ्गव '' [श्लोक १३ ,बाल कांड, पृष्ठ १५५ षटपष्टितम: सर्ग :]
[अपनी इस अयोनिजा (सीता)कन्या के विषय में मैंने यह निश्चय किया है कि जो अपने पराक्रम से इस धनुष को चढ़ा देगा ,उसी के साथ मैं इसका ब्याह करूंगा .इस तरह इसे वीर्य शुल्क (  पराक्रम शुल्क वाली ) बनाकर अपने घर में रख छोड़ा .मुनि श्रेष्ठ ! भूतल से प्रकट होकर दिनों-दिन बढ़ने वाली मेरी पुत्री सीता को कई राजाओ ने यहाँ आकर माँगा ]   
  माता सीता ने पिता द्वारा निर्धारित पराक्रम शुल्क अर्थात परम प्रकाशमान शिव जी के धनुष पर प्रत्यन्चा चढ़ा देने वाले अयोध्या के राजकुमार श्रीराम को ही वरमाला पहनाई .यद्यपि माता सीता पुष्प वाटिका में श्रीराम के दर्शन कर उन पर मुग्ध हो गयी थी किन्तु वे यह भी जानती थी कि पिता का निश्चय उनकी भावनाओं से ऊपर है .इसीलिए   श्रीराम को वर के रूप में प्राप्त करने की इच्छा वे जिह्वा पर नहीं लाती और गौरी पूजन के समय मात्र इतना ही वर मांगती हैं -
''मोर मनोरथु जानहु नीके ,बसहु सदा उर पुर सबहि के ,
कीन्हेउ प्रगट न कारन तेहि ,अस कही चरण गहे वैदेही !''[श्रीरामचरितमानस ,बाल कांड ,पृष्ठ -२१९]
माता सीता श्री राम को वर रूप में प्राप्त करना चाहती हैं पर तभी जब वे उनके पिता द्वारा किये गए निश्चय को पूरा करें .यही कारण है कि वे सब ह्रदय में निवास करने वाली माता गौरी से अपनी मनोकामना नहीं  प्रकट करती क्योंकि माता गौरी तो उनके ह्रदय की कामना को भली -भांति जानती ही हैं .पिता के प्रण को अपनी मनोकामना से ऊपर स्थान देने वाली माता सीता इसीलिए जगत में जनकनंदनी ,जानकी ,जनकसुता और वैदेही के नाम से प्रसिद्द हुई .पुत्री धर्म का पालन करने वाली महान माता सीता के समक्ष जब आज की पिता को धोखा  देकर  भाग  जाने  वाली पुत्री को खड़ा करते  हैं तब सिर  शर्म  से झुक जाता है .
                                             तपस्विनी कन्या वेदवती की पितृ भक्ति के आगे कौन जन नतमस्तक न होगा ?रावण द्वारा उनका परिचय पूछे जाने पर वे कहती हैं -
''कुशध्वज  जो ........राक्षस पुंगव्  '' [श्लोक ८-१७ ,उत्तरकांडे पृष्ठ -६४३ ,सप्तदश: सर्ग:] 
[अमित तेजस्वी ब्रह्म ऋषि श्रीमान कुशध्वज मेरे पिता थे , जो ब्रहस्पति के पुत्र थे और बुद्धि में भी उन्ही के समान माने जाते थे .प्रति दिन वेदाभ्यास करने वाले उन महात्मा पिता से वांगमयी   कन्या के रूप में मेरा प्रादुर्भाव हुआ था .मेरा नाम वेदवती है .जब मैं बड़ी हुई तब देवता ,गन्धर्व ,राक्षस और नाग भी पिता जी के पास आकर उनसे मुझे मांगने लगे .राक्षसेश्वर ! मेरे पिता जी ने उनके हाथ में मुझे नहीं सौपा .इसका कारण क्या था ? मैं बता रही हूँ ...सुनिए  -पिता जी की इच्छा थी कि तीनों लोकों के स्वामी देवेश्वर भगवान् विष्णु मेरे दामाद बने .इसीलिए वे दूसरे किसी के हाथ में मुझे नहीं देना चाहते थे .उनके इस अभिप्राय को सुनकर बलाभिमानी दैत्यराज शम्भू उन पर कुपित हो उठा और उस पापी ने रात में सोते समय मेरे पिता की हत्या कर दी .   इससे मेरी महाभागा माता को बड़ा दुःख हुआ और वे पिता जी के शव को ह्रदय से लगाकर चिता की आग में प्रविष्ट हो गयी .तबसे मैंने प्रतिज्ञा कर ली है कि भगवान नारायण के प्रति पिता जी का जो मनोरथ था उसे सफल करूंगी .इसीलिए मैं उन्ही को अपने ह्रदय मंदिर में धारण करती हूँ .यही प्रतिज्ञा करके मैं ये महान तप कर रही हूँ ]
रावण के द्वारा कामवश अपने केश पकडे जाने पर वेदवती क्रोधित होकर अग्नि में समाने के लिए तत्पर होकर यही कहती हैं -
'यदि ...सुता '[उत्तर कांड   ,अष्टादश:सर्ग: .पृष्ठ ६४५ ,श्लोक ३३ ]
[यदि मैंने कुछ भी सत्कर्म ,दान और होम किये हो तो अगले जन्म में मैं सती-साध्वी अयोनिजा कन्या के रूप में प्रकट होऊं तथा किसी धर्मात्मा पिता की पुत्री बनू ]
यही वेदवती अगले जन्म में राजा जनक की पुत्री सीता  के रूप में जानी गयी .पिता के प्रण को प्राण चुकाकर  भी देवी वेदवती ने भंग न होने दिया और अगले जन्म में सनातन विष्णु अवतार श्रीराम को पति रूप में पाया .
ऐसी उज्जवल चरित्र वाली पुत्रियों की भूमि भारत में आज जब कुछ पुत्रियाँ अमर्यादित आचरण कर पिता की भावनाओं को रौंदती हुई कामोन्माद में घरों से भाग रही हैं तब यह जरूरी हो जाता है कि भारतीय समाज अपने परिवारों में दिए जाने वाले संस्कारों पर ध्यान दें क्योंकि शिशु तो अनुसरण से सीखता है .पुत्रियों को पुत्री धर्म की शिक्षा दें ताकि आने वाली पीढ़िया उनके उज्जवल चरित्रों से शिक्षा लेकर कुल व् देश का गौरव बढ़ाएं तथा ''ऑनर किलिंग' जैसे स्त्री विरूद्ध अपराधों पर भी इसी तरह  रोक लगायी जा सकती हैं .

शिखा कौशिक 'नूतन