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शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2011

जनता का हक़ है !

जनता का हक़ है !

आज के राजनैतिक [जिसमे कुछ भी नैतिक  नहीं है] हालातों में अपने नेताओं के आचरण पर वाकई क्रोध आता है .एक और गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र  मोदी  ने  उपवास   के आयोजन  पर करोड़ों रूपये  बहा  दिए ;दूसरी ओर  पूर्व उप प्रधानमंत्री श्री लाल कृष्ण आडवानी  जी 50 लाख के रथ में सवार होकर नंगी -भूखी जनता को जगाने-सचेत   करने के लिए निकले पड़ें   हैं . जो सत्ता में हैं वे  तो भ्रष्ट  हैं ही पर जो सत्ता से बाहर हैं उनका आचरण भी यह नहीं दर्शाता कि ये हमें एक स्वच्छ  व् ईमानदार  सरकार  प्रदान  कर सकेंगें .रथ-यात्रा पर निकले  व् सत्तासीन सभी नेताओं से जनता को यह कहने  व् पूछने  का पूरा  हक़ है -

जनता का हक़ है ये पूछे क्या तुम करते हो ?
जनता के पैसे से क्यों तुम जेबे भरते हो ?

कितने  खाते  स्विस  बैंक  में गद्दारों  तुमने  खोले  ?
फांसी  पर लटका देंगे  जो अब  भी सच  ना  बोले  .

नाम  गरीबों  का लेकर  'पैकेज ' का रुपया  खाते ;
बेहतर  होता   इससे  पहले  डूब  के तुम मर  जाते .

लाखों मरे  किसान  देश के ;रोटी के हैं लाले  ;
तुम ही जिम्मेदार  हो इसके  ;कर लो  अब मुंह  काले  .

जनता जाग  उठी  है तोड़ेगी   चुप्पी  के ताले  ;
पकड़  के गर्दन  पूछेगी  ''क्यूँ  करते हो घोटाले  ?

                           क्या आज के नेता इनमे  से एक भी सवाल  का जवाब  दे  पाएंगे  ?........
                                                               जय हिंद !


शनिवार, 9 जुलाई 2011

''एक हल्की बात कर देती है किरदार तार-तार !''

''एक हल्की बात कर देती है किरदार तार-तार !''

ब्लॉग जगत अपने मूल स्वरुप में बुद्धिजीवियों का समूह है .ब्लॉग जगत में ऐसी हल्की बात की उम्मीद कोई भी सभ्य-सुशिक्षित ब्लोगर नहीं कर सकता है .ब्लोगर स्त्री है या पुरुष -क्या आप यह देखकर किसी के ब्लॉग पर जाते हैं ?आप ब्लॉग पर पोस्ट की गयी रचना-आलेख पर ध्यान देते हैं या प्रोफाइल में चिपकी ब्लोगर की फोटो पर ? मेरा मानना है कि कोई भी सभ्य ब्लोगर सिर्फ पहचान के लिए प्रोफाइल फोटो पर एक नज़र डाल लेता है .ऐसे में यदि कोई आपको बार-बार यह सलाह दे कि आप ब्लॉग पर अपने प्रोफाइल में ''अच्छी फोटो ''लगायें इससे पाठकों की संख्या बढती है तो इसे आप क्या सलाह देने वाले के दिमाग का दिवालियापन नहीं कहेंगे !
जो पाठक आपकी रचनाओं के स्थान पर आपकी फोटो पर ज्यादा ध्यान देते हैं -वे पाठक हैं ही कहाँ ?वे तो दर्शक हैं .उनके लिए तो बहुत सामग्री नेट पर अन्यत्र भी उपलब्ध है .ऐसे ब्लोगर न तो साहित्य प्रेमी कहे जा सकते हैं और न ही विशुद्ध आलोचक .वे केवल तफरी करने के लिए ब्लॉग बना कर बैठ गएँ हैं .ब्लॉग जगत में सुन्दर चेहरों को फोटो में तलाशने का उद्देश्य रखने वाले ऐसे ब्लोगर्स को यह जान लेना चाहिए कि यदि ब्लॉग को प्रसिद्द करने का यही तरीका होता तो न तो अच्छा लिखने वालों को कोई पूछता और न ही उम्रदराज ब्लोगर्स को जबकि ब्लॉग जगत में दोनों की ही महत्ता सिर चढ़ कर बोल रही है .
यदि सुन्दर फोटो लगाकर कोई ब्लॉग जगत में अपनी पाठक संख्या बढाने का ख्वाब देखता है तो यह केवल दिवास्वप्न ही है क्योंकि यदि ऐसा होता तो यहाँ भी फ़िल्मी हीरो-हिरोइन -मॉडल का बोलबाला हो चुका होता.इसके पीछे कारण यही है कि आम आदमी न तो उनकी तरह अपनी शारीरिक सुन्दरता को लेकर सचेत होता है और न ही उसके पास इन की तरह शरीर को सुन्दर-सुडोल बनाने का समय व् पैसा होता है .फिल्म-मॉडलिंग से जुड़े लोग अपने शरीर को दुकान के माल की तरह सजा-सवाँर कर रखते हैं क्योंकि यह उनके पेशे का हिस्सा है पर यहाँ ब्लॉग जगत में हम सभी का उद्देश्य मात्र अपने विचारों और भावों को अपने सामान आम लोगों तक संप्रेषित करना है व् अन्य ब्लोगर्स के विचारों से अवगत होना है .वास्तव में जो किसी को ऐसी घटिया सलाह देता है वह सबसे पहले किसी की निजता को चोट पहुंचाता है फिर सभ्यता की सीमाओं को लांघता है और इस सबके बाद वह स्वयं विचारकर देखे कि वह कितनी हल्की बात कर रहा है ! इससे उसका किरदार भी तो तार-तार हो जाता है .क्या ऐसा नहीं है ?

''एक हल्की बात कर देती है किरदार तार-तार !''

''एक हल्की बात कर देती है किरदार तार-तार !''

ब्लॉग जगत अपने मूल स्वरुप में बुद्धिजीवियों का समूह है .ब्लॉग जगत में ऐसी हल्की बात की उम्मीद कोई भी सभ्य-सुशिक्षित ब्लोगर नहीं कर सकता है .ब्लोगर स्त्री है या पुरुष -क्या आप यह देखकर किसी के ब्लॉग पर जाते हैं ?आप ब्लॉग पर पोस्ट की गयी रचना-आलेख पर ध्यान देते हैं या प्रोफाइल में चिपकी ब्लोगर की फोटो पर ? मेरा मानना है कि कोई भी सभ्य ब्लोगर सिर्फ पहचान के लिए प्रोफाइल फोटो पर एक नज़र डाल लेता है .ऐसे में यदि कोई आपको बार-बार यह सलाह दे कि आप ब्लॉग पर अपने प्रोफाइल में ''अच्छी फोटो ''लगायें इससे पाठकों की संख्या बढती है तो इसे आप क्या सलाह देने वाले के दिमाग का दिवालियापन नहीं कहेंगे !
जो पाठक आपकी रचनाओं के स्थान पर आपकी फोटो पर ज्यादा ध्यान देते हैं -वे पाठक हैं ही कहाँ ?वे तो दर्शक हैं .उनके लिए तो बहुत सामग्री नेट पर अन्यत्र भी उपलब्ध है .ऐसे ब्लोगर न तो साहित्य प्रेमी कहे जा सकते हैं और न ही विशुद्ध आलोचक .वे केवल तफरी करने के लिए ब्लॉग बना कर बैठ गएँ हैं .ब्लॉग जगत में सुन्दर चेहरों को फोटो में तलाशने का उद्देश्य रखने वाले ऐसे ब्लोगर्स को यह जान लेना चाहिए कि यदि ब्लॉग को प्रसिद्द करने का यही तरीका होता तो न तो अच्छा लिखने वालों को कोई पूछता और न ही उम्रदराज ब्लोगर्स को जबकि ब्लॉग जगत में दोनों की ही महत्ता सिर चढ़ कर बोल रही है .
यदि सुन्दर फोटो लगाकर कोई ब्लॉग जगत में अपनी पाठक संख्या बढाने का ख्वाब देखता है तो यह केवल दिवास्वप्न ही है क्योंकि यदि ऐसा होता तो यहाँ भी फ़िल्मी हीरो-हिरोइन -मॉडल का बोलबाला हो चुका होता.इसके पीछे कारण यही है कि आम आदमी न तो उनकी तरह अपनी शारीरिक सुन्दरता को लेकर सचेत होता है और न ही उसके पास इन की तरह शरीर को सुन्दर-सुडोल बनाने का समय व् पैसा होता है .फिल्म-मॉडलिंग से जुड़े लोग अपने शरीर को दुकान के माल की तरह सजा-सवाँर कर रखते हैं क्योंकि यह उनके पेशे का हिस्सा है पर यहाँ ब्लॉग जगत में हम सभी का उद्देश्य मात्र अपने विचारों और भावों को अपने सामान आम लोगों तक संप्रेषित करना है व् अन्य ब्लोगर्स के विचारों से अवगत होना है .वास्तव में जो किसी को ऐसी घटिया सलाह देता है वह सबसे पहले किसी की निजता को चोट पहुंचाता है फिर सभ्यता की सीमाओं को लांघता है और इस सबके बाद वह स्वयं विचारकर देखे कि वह कितनी हल्की बात कर रहा है ! इससे उसका किरदार भी तो तार-तार हो जाता है .क्या ऐसा नहीं है ?