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सोमवार, 23 जुलाई 2012

पहनावे की ले आड़ ...अपना पल्ला झाड़ !

पहनावे  की  ले  आड़  ...अपना  पल्ला  झाड़  !


स्त्री के पहनावे  से  अधिक यदि पुरुष के आचरण पर अधिक ध्यान दिया  जाये  तो स्त्री के विरूद्ध अपराध में कमी  आने की ज्यादा सम्भावना है .यदि स्त्री का पहनावा ही हर स्त्री विरूद्ध अपराध हेतु जिम्मेदार है तो द्वापर  में द्रौपदी  का चीर-हरण न होता .इंद्र द्वारा अहिल्या का बलात्कार  न होता .वस्त्र एक सीमा तक ही किसी  को अपराध करने  के लिए  उकसा  सकते  हैं पर हर पुरुष तो विश्वामित्र नहीं होता कि मेनका  ने  उन्हें मोह लिया और वे  तपस्या विमुख हो गए .  योगी से भोगी  बन गए .मैं स्वयं स्त्री के शालीन पहनावे की कट्टर पक्षधर हूँ  पर मैंने  भी  पिछले  वर्ष  उमंग सबरवाल द्वारा दिल्ली में आयोजित  ''सलट  वॉक '' का समर्थन  किया  था क्योंकि   सम्पूर्ण व्यवस्था स्त्री के विरूद्ध अपराध हेतु स्त्री के वस्त्रों को ही जिम्मेदार ठहराकर अपनी अकर्मण्यता को छिपा लेती  है .गुवाहाटी  में युवती के साथ  दुर्व्यवहार  की घटना  साफ  तौर  पर कानून एवं सुरक्षा  व्यवस्था की विफलता  थी .प्रत्येक नागरिक  की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन पर है .जनता में ऐसी घटनाओं से यही सन्देश जाता है कि कानून व्यवस्था नाम की अब कोई चीज नहीं रही .इसे यदि स्त्री के वस्त्रों से जोड़ दिया जायेगा तो पहले से पंगु प्रशासन के लिए तो सोने पर सुहागा वाली बात हो जाएगी .किसी भी पहनावे में कोई बुराई नहीं यदि वह देश  व् संस्कृति के हिसाब से पहना जाये .जींस भी शालीन तरीके से पहनी हुई एक युवती को स्मार्ट लुक देती है .
Jeans_girls : Young smiling brunette in jeans. Isolated over white . Stock PhotoSchoolgirl : full length studio portrait of female elementary pupil
पुलिस की व् सेना की वर्दी में महिलाएं किस को  आकर्षित नहीं कर  लेती ?मिनी स्कर्ट में सानिया व् साइना के प्रति किसके   ह्रदय में बुरे भाव आ सकते हैं ?  वही साड़ी में भी अशालीन भाव वाली स्त्री को सराहा नहीं जा सकता .वस्त्रों पर बहस  को विराम  दिया जाना  चाहिए क्योकि ये बहस तो वही खत्म हो जाती है जब स्कूली  छात्राओं के साथ आते जाते समय छेड़कानी की जाती है .क्या स्कूली यूनिफ़ॉर्म  भी भड़काऊ होती है ?सन २००३ में धनबाद में तेजाबी हमले की शिकार सोनाली घर के  छज्जे पर सोयी हुई थी .उस समय पर क्या उसके  वस्त्रों ने गुंडों को यह अपराध करने हेतु उकसाया था ? वास्तव में हर स्त्री विरूद्ध अपराध का कारण भिन्न   ही होता है . ऐसे अपराधों में कई बार आहत   पुरुष अहम् भूमिका निभाता है तो कई बार पीड़ित लड़की के परिवार से उसकी रंजिश .कभी लड़की द्वारा किये  गए छल के कारण ऐसा होता है और कई बार प्रेमी कहलाने वाले पुरुष का मानसिक रूप से अस्वस्थ होना .इन  घटनाओं पर अंकुश लगाने हेतु सबसे कारगर उपाय है सदाचरण व् हमारी   कानून व्यवस्था का चुस्त-दुरुस्त होना .सड़कों पर अपराध रोकने में तो कानून व्यवस्था ही अहम् भूमिका  निभा  सकती  है और घर के भीतर के स्त्री विरूद्ध अपराधों में सदाचरण .पहनावा एक बहुत छोटा मुद्दा है इस पर पारिवारिक स्तर पर ह� 4�ो बेहतर है क्योकि भारतीय परिवार ही अपने शिशुओं में संस्कार भरने का काम करते आये हैं .पहनावे को आधार बनाकर  पुलिस प्रशासन    यदि अपनी विफलता से पल्ला झड़ने का प्रयास करेगा तो यह मेरे लिए स्वीकार करना असंभव ही है .


                                                          shikha kaushik 

शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

गुवाहाटी में पत्रकार गिरफ्तार..वाह रे पत्रकार ...


गुवाहाटी में पत्रकार गिरफ्तार..वाह रे पत्रकार ...

आखिर जो होना चाहिए था वो हो ही गया .नवभारत टाइम्स की
वेबसाईट पर यह खबर पढ़ी तो दिल को  तसल्ली हुई कि देश में अभी  भी कानून व्यवस्था
नाम की कोई चीज है .आप भी पढ़ें यह खबर - 

गुवाहाटी में लड़की के साथ छेड़छाड़ के मामले में पत्रकार गिरफ्तार

गुवाहाटी।। यहां 20 वर्षीय लड़की के साथ छेड़छाड़ का विडियो रेकॉर्ड करने वाले न्यूज लाइव चैनल के रिपोर्टर गौरव ज्योति निओग को लड़की पर हमले के लिए लड़कों को उकसाने के आरोप में शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया। निओग की गिरफ्तारी ऐसे समय पर की गई है जब एक दिन पहले ही गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। गुवाहाटी के नए एसएसपी आनंद प्रकाश तिवारी ने कहा, 'निओग को गिरफ्तार कर लिया गया है और शनिवार को उसे अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।' निओग के साथ भांगगढ़ पुलिस स्टेशन में पूछताछ की जा रही है।  गौरतलब है कि टीम अन्ना के सदस्य अखिल गोगोई ने आरोप लगाया है कि निओग ने एक बार के बाहर लड़की के साथ छेड़छाड़ की साजिश रची थी। इससे पहले इसी सप्ताह निओग ने चैनल से इस्तीफा दे दिया था। निओग के बॉस और चैनल के प्रधान संपादक अतनु भुयान ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 
निओग और उनके कैमरामैन ने इस पूरी घटना को कैमरे पर रेकॉर्ड किया था। विशेष जांच दल ने पहले ही विडियो फुटेज को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।''
                                  पत्रकार कहलाने मात्र से कोई पत्रकार नहीं हो जाता .पत्रकारिता एक पावन कर्म है .पत्रकार समाज को दिशा प्रदान करता है उसे भ्रमित नहीं करता .इन छद्म पत्रकार महोदय से मैं इतना ही कहना चाहूंगी  -

जैसा किया दुष्कर्म उसका मिल गया प्रतिफल ;
छोड़ छद्म पत्रकारिता अब जेल को तू चल ,
होगा वहां अब तेरा जोश से सत्कार 
वाह रे पत्रकार ...वाह वाह रे पत्रकार .

मशहूर होने का तुझे शौक जबरदस्त ;
पी जेल का पानी अब रहना वहां मस्त ,
सब ओर यही चर्चा तू हुआ गिरफ्तार .
वाह रे पत्रकार ....

पत्रकार तुम नहीं तुम तो हो दलाल ;
कर रहे इस पेशे को बदनाम खुलेआम ,
सिर उठाकर चलने का तुमको न अधिकार .
वाह रे पत्रकार ...

तुमने किया जो कर्म उसे पाप कहते हैं ;
अस्मत लूटे किसी की चुप आप रहते हैं ,
अब लगने चाहियें तुम्हें जूते कई हज़ार .
वाह रे पत्रकार ....

आगे से कोई ऐसा कभी काम न करे ;
अंजाम तेरा देखकर थोडा तो सबक ले ,
सभ्य समाज का स्वप्न हो साकार .
वाह रे पत्रकार ...
                     शिखा कौशिक 
              [विचारों का चबूतरा ]



गुरुवार, 3 मई 2012

.ऐश -A MOTHER ...WHAT FIGURE !


                                आज  अखबार में एक खबर पढ़ी कि-''चर्चाओं में ऐश   का फिगर  ''.खबर  में बताया गया है की ऐश  के बढे 
वजन को लेकर कुछ  लोगों ने इसे एक सदमा  करार दिया है .कैसी मनोवृति  है हमारी  ?क्या आज भी आप ऐश  को केवल अपना मनोरंजन करने वाली एक अभिनेत्री मानते हैं ?वो एक छः माह की बेटी की माँ हैं .क्या उनका कर्तव्य केवल आपके आकर्षण का केंद्र बने रहना होना  चाहिए .हमारे लिए यह एक सदमा नहीं एक राहत की खबर है कि हमारी प्रिय अभिनेत्री वास्तविक जीवन में एक सफल माँ का किरदार निभा  रही है .सदमा हम तब कह सकते थे जब वो बेटी को जन्म देते ही फिल्मों की ओर   रूख कर लेती .ऐश को भावी जीवन में खूब खुशियाँ मिले हम तो यही चाहेंगें .

                                         शिखा कौशिक 
                         [विचारों का चबूतरा ]

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

श्रीमती सुषमा स्वराज जी -प्रधान मंत्री पद हेतु एक योग्य उम्मीदवार



श्रीमती सुषमा स्वराज जी -
प्रधान मंत्री पद हेतु एक योग्य उम्मीदवार





पिछले   दिनों राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने श्री नरेंद्र मोदी जी को  आगामी  लोकसभा चुनावों  २०१४  के लिए  प्रधान मंत्री पद हेतु एक योग्य उम्मीदवार घोषित किया है पर मेरा मानना  है कि बी.जे.पी. में इस समय प्रधानमंत्री पद हेतु जो  सबसे उपयुक्त नेता हैं वे हैं श्रीमती सुषमा स्वराज जी .सुषमा जी अनेक महत्वपूर्ण पदों पर आसीन  रही हैं और सफलतापूर्वक सभी दायित्वों का निर्वाह किया है .उनमे एक भारतीय नारी  की पूर्ण  छवि परिलक्षित  होती है .उनका संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है -
''From Wikipedia, the free encyclopedia
Sushma Swaraj (born 14 February 1952) is an Indian politician of the Bharatiya Janata Party(BJP)and Member of Parliament. She is currently the Leader of the Opposition in the 15th Lok Sabha. She is a former union cabinet minister of India and a former Chief Minister of Delhi. Also she served as the Chairperson of the BJP's 19 member campaign committee for the 2009 General Elections. She was the first female Chief Minister of Delhi

Early life

She was born in Palwal, Haryana. She was educated at S.D. College, Ambala Cantonment and earned a B.A. degree. She studied LL.B. from the Law Department of Punjab University,Chandigarh. She is an advocate by profession.
She has been associated with many social and cultural bodies in various capacities. She was President of the Sahitya Sammelan, Haryana for four years.

Political career

Sushma Swaraj began her political career as a student leader in the 1970s, organizing protests against Indira Gandhi's government. She was a member of the Haryana Legislative Assembly from 1977–82 and then from 1987–90. As a Janata Party MLA in Devi Lal's government, she was the Cabinet Minister of Labour and Employment (1977–1979). She joined the BJP in 1980. Under a combined Lok Dal-BJP government led by Devi Lal, she was the Cabinet Minister of Education, Food and Civil Supplies (1987–1990). She was judged Best Speaker of Haryana State Assembly for three consecutive years.''
                            इतनी योग्य व् प्रखर राष्ट्रीय नेता के होते हुए मात्र एक राज्य  के मुख्यमंत्री पद पर रहे श्री नरेंद्र मोदी जी  को प्रधानमंत्री पद का यदि उम्मीद्वार घोषित किया जा रहा तो यह संघ की भूल है .बी.जे.पी. को चाहिए की वो सुषमा जी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दे  व् पद के अनुरूप व्यक्ति को ही यह सुअवसर प्रदान करे .

गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

माया बाई का मुजरा-कब रूकेगा स्त्री का अपमान

माया बाई का मुजरा-कब रूकेगा स्त्री का अपमानन्नीचे 

Flax Awareness Society



WEDNESDAY, APRIL 11, 2012


माया बाई का मुजरा-FALX AWARENESS  SOCIETY  -ब्लॉग पर 


डॉ.ओ.पी वर्मा जी ने  निम्नं  

सन्दर्भ  देकर यह  पोस्ट प्रस्तुत की है  -
कल हमने फेसबुक पर माया बाई का मुजरा देखा, जिसे भड़ास पर भी लगा दिया है। लेकिन वो मुजरे में गा क्या रही है, यह स्पष्ट नहीं हो रहा था। इसलिए हमने वो मुजरा के बोल पता कर लिये है। आप भी सुन लीजिये। दुपट्टा मुख्यमंत्री की कुर्सी को समझियेगा।



                                           मायावती जी का इसप्रकार  चित्रण  करना पूरे   भारतीय  समाज   के मुंह   पर जोरदार   तमाचा   है ...आज तक हम उन बालाओं को तो इस अगरिमामय पेशे से निकाल नहीं पायें जो दुर्भाग्यवश इस पेशें में फसी हैं उस पर अपने संघर्षों से एक दलित परिवार में जन्म लेकर भी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री तक के सफ़र को तय करने वाली हमारी दलित नेत्री को इस रूप में प्रस्तुत करना मुंह पर तमाचा ही है .हम उनकी  आलोचना भ्रष्टाचार के मुद्दे पर शालीन तरीके   से  कर सकते हैं ....पर इस रूप में दलित  नेत्री को प्रस्तुत करना नीचता की पराकाष्ठा है .क्या भारतीय पुरुषों का पुरुषार्थ समाप्त हो चुका  है जो बहनों को इस रूप में प्रस्तुत कर मुजरा करवाया जा रहा है .शर्मनाक  ....निंदनीय ......घोर आपत्तिजनक ....मनोरंजन  या आलोचना का यह रूप यदि भारतीय पुरुषों ने अपनाया है तो उन्हें चुल्लू   भर पानी में डूब मरना चाहिए क्योकि  यह भारतीय संस्कृति के सर्वदा विरूद्ध है .हमारी  संस्कृति में शत्रु पक्ष की महिला को भी ''देवी  ''कहकर संबोधित किया जाता  है .पोस्ट करने वाले ब्लोगर डॉ.ओ.पी.वर्मा जी एक उच्चस्तरीय डॉक्टर हैं .सुशिक्षित हैं फिर एक बार भी उन्होंने इस पोस्ट को फेसबुक से ब्लॉग पर डालने से पूर्व यह क्यों   नहीं सोचा कि मायावती जी सर्वप्रथम एक महिला हैं .....इसके पश्चात् एक ऐसे दलित समाज का प्रतिनिधत्व करती है जिसने युगों तक शोषण सहा है .मायावती जी का संघर्षपूर्ण जीवन किसी से नहीं छिपा है .ठीक है आज उन पर भ्रष्टाचार के  आरोप है ..पर उसका मतलब ये तो नहीं कि कोई भी उन्हें इस रूप में प्रस्तुत करे .क्या आप अपनी बहन ....बेटी को इस रूप में प्रस्तुत करना चाहेंगे .स्त्री को मनोरंजन  की वस्तु बनाकर उससे मुजरा सुनने की जिस की इच्छा शेष है वो किसी का बेटा ....भाई नहीं हो सकता .डॉ.ओ.पी वर्मा जी न केवल फेसबुक से इस निंदनीय सामग्री को लायें हैं बल्कि पोस्ट के नीचे उनकी टिप्पणियां भी घोर अशालीन हैं -उनका परिचय व् टिप्पणिया -



My Photo
Vaibhav Hospital, 7-B-43, Mahaveer Nagar III, Kota, Raj., India
पिछले कई वर्षों से हमारी संस्था “अलसी चेतना यात्रा” अलसी के बारे में जागरूकता लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। हमारी संस्था के अन्य उद्देश्य हैं। •जैविक खाद्य पदार्थों के उत्पादन, उपयोग को प्रोत्साहन देना और लोगों को जैविक खाद्य पदार्थों के लाभ समझाना। •खाद्य पदार्थों में मिलावट, जो आज की सबसे गंभीर समस्या है, के बारे में लोगों को जानकारी देना। मिलावट रोकने के लिए सम्बंधित विभागों से सामंजस्य रखते हुए कार्यवाही करना। •अलसी के तेल, पनीर, तथा कैंसर रोधी फल व सब्जियों से विकसित किया हुआ डॉ. बुडविज आहार-विहार कैंसर के रोगियों को उपलब्ध करवाने हेतु पूरे भारत में बुडविज प्रोटोकोल कैंद्रों का निर्माण करना। •कोटा में देश-विदेश के रोगियों को उच्च स्तरीय प्राकृतिक और आयुर्वेदिक चिकित्सा उपलब्ध कराने हेतु विशाल हर्बल पार्क विकसित करना। go.flax@gmail.com ०९४६०८१६३६०
Dr. O.P.Verma said...
सचमुच दु्हन सी लग रही है माया... शादी कर लेती तो अभी 2-4 बच्चों की मां होती।
Dr. O.P.Verma said...
आदरणीय दिलबाग विर्क जी, चर्चामंच पर प्रस्तुत होना गर्व की बात मानी जाती है। आपने चर्चामंच पर माया बाई का मुजरा करवा कर बड़ा अच्छा काम किया है। आपका किन शब्दों में शुक्रिया करूँ। मुफलिसी में हमें दो पैसे मिल गये। और आजकल मायाबाई भी फालतू ही बैठी थी। आपके याद ही होगा जबसे अखिलेश बाबू नये नये दारोगा बने हैं, उन्होंने लखनऊ के सारे कोठों पर माया के मुजरे पर पाबंदी लगा दी है। इसलिए आपको आगे भी कहीं मौका मिले मुजरा करवाना हो तो सेवा का अवसर देना। आपके लिए तो मायाबाई तो खाली बख्शीश में भी नाच लेगी।
Dr. O.P.Verma said...
गब्बर का ही डर है वो आगया तो कांच पे नचायेगा, उसको खबर मत होने देना रचना जी।
                       दुखद है रचना जी व् राजेश कुमारी जी ने एक स्त्री होकर भी  मायावती जी के इस आपत्तिजनक चित्रण को गलत न बताकर ये  टिप्पणियां कर दी है -
रचना दीक्षित said...
बहुत नाइंसाफी है....
Rajesh Kumari said...
hahaha vaah kya pairodi banaai hai.chitra to lajabaab hai.                                                              मैं इसप्रकार  की  किसी भी पोस्ट के विरूद्ध हूँ  और आप सभी से चाहती हूँ  की आप भी विरोध करें ताकि फेसबुक की गंदगी ब्लॉग जगत के निर्मल वातावरण  को प्रदूषित    न करे                                                                                                                                              जय हिंद !                                                              शिखा  कौशिक 

रविवार, 11 मार्च 2012

सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा राहुल गाँधी की अनर्गल आलोचना


          

सुब्रमण्यम   स्वामी   जी   बहुत  योग्य   व्   ज्ञानी   महापुरुष   हैं    .इनका   सारा   ज्ञान   गाँधी   परिवार   को   लांछित   करने   में   ही   प्रकट   होता   है   .चर्चित  होने  के  लिए राहुल गाँधी की  अनर्गल  आलोचना  करने वालों  की कमी   नहीं   है फिर   यूं .पी.चुनाव   परिणाम   ने   तो   ऐसे   सभी   ज्ञानियों   को जैसे   राहुल की निंदा   खुले   आम   करने का    सुअवसर   प्रदान   कर   दिया   है .शालीनता   की सीमाओं   को लान्घतें   हुए   स्वामी ने   एक   बहुत ही भद्दी  ट्वीट  की -
स्वामी का यह ट्वीट है-' अखिलेश में और बुद्धू में क्या फर्क है? अखिलेश की उम्र 38 वर्ष है और उसके तीन बच्चे हैं ,बुद्धू की उम्र 42 है और वह अभी तक बच्चा है।' 
                ये  बताने  की जरूरत  नहीं  की यहाँ  ''बुद्धू '' कहकर राहुल को ही निशाना  बनाया  गया  है .स्वामी जी फिर  आपको  मैं  मिलवाती  हूँ   कुछ  और  आपके  द्वारा  निर्दिष्ट  ''बुद्धू'' की परिभाषा  पर  खरे  उतरते  व्यक्तियों से  -
*हमारे पूर्व राष्ट्रपति श्री ए.पी.जे  अब्दुल  कलाम  -अब अस्सी से ऊपर और अविवाहित हैं ...कोई संतान नहीं .
*पूर्व प्रधानमंत्री-श्री अटल बिहारी  बाजपेई -अस्सी से ऊपर उम्र और अविवाहित .....एक बेटी गोद ली  है  .
*स्वर कोकिला   -लता मंगेशकर जी -अस्सी से ऊपर उम्र ....अविवाहित ..कोई संतान नहीं .
*पूर्व मुख्य  मंत्री [यूं.पी.] मायावती जी -पचास से ऊपर उम्र ..अविवाहित ...कोई संतान नहीं .
*केन्द्रीय मंत्री -कुमारी शैलजा .....अविवाहित 
*प्रसिद्द अभिनेता -सलमान खान ....चालीस से ऊपर ...अविवाहित 
*प्रसिद्द सीरियल निर्माता -एकता कपूर 
*प्रसिद्द फिल्म निर्देशक -करण जोहर 
                        यदि ये सब ''बुद्धू'' हैं स्वामी जी तो आप ही ज्ञानी पद को सुशोभित करे और विशेष ''अखिलेश '' की प्रशंसा करें .
                                                     शिखा कौशिक 
                             


गुरुवार, 1 मार्च 2012

राहुल ने वरुण को शालीनता के साथ दिया जवाब


''राष्ट्रीय सहारा''के पेज-३ पर आज १-३-२०१२ पर  छपे  इस फोटो को जरा ध्यान से देखिये .

क्या आपको कोई खास बात नज़र आई .नहीं ?....अरे ऐसे कैसे .चलिए मैं ही बता देती हूँ .आज कांग्रेस के इस विज्ञापन को देखकर मुझे तो कम से कम ऐसा ही लगा जैसे राहुल गाँधी जी ने अपने चचेरे भाई वरुण गाँधी को ईट का जवाब पत्थर से दिया हो .कल  ''अमर उजाला ''दैनिक के मेरठ  संस्करण [पेज-१५] में एक खबर छपी थी जिसमे वरुण गाँधी जी का यह बयान था कि-''कांग्रेस में एक भी ऐसा चेहरा नहीं है जिसे पूरे प्रदेश में पहचाना जाता हो ,जबकि भाजपा में ऐसे ५५ चेहरे हैं जो पूरे प्रदेश में पहचाने जाते हैं और वे मुख्यमंत्री बन सकते हैं ''.ये पढ़कर मुझे वरुण गाँधी की बुद्धि पर बहुत तरस आया था  .सहानूभूति तो उनसे बहुत रही है पर उनके बयानों पर गुस्सा ही आता है .आज भी कांग्रेस में ऐसे नेताओं की कमी नहीं है जिन्हें पूरा देश पहचानता है .उत्तर प्रदेश ने ही ऐसे योग्य नेता देश को दिए हैं फिर वरुण गाँधी जी ऐसा बयान किस आधार पर देते हैं यह तो वे ही बता सकते हैं पर आज ऊपर दिए विज्ञापन में कांग्रेस ने देश व् प्रदेश में पहचाने जाने वाले नेताओं का सामूहिक  चित्र  देकर वरुण गाँधी जी को बहुत शालीनता के साथ जवाब दिया है .वरुण गाँधी जी कांग्रेस के इस मन्त्र को ही अपना लीजिये-उठो....जागो....बदलो .....!
शिखा  कौशिक 

रविवार, 25 दिसंबर 2011

मैं क्यों अग्नि-परीक्षा देती रहूँ ?

मैं  क्यों अग्नि-परीक्षा देती रहूँ ?
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नवभारत टाइम्स  की  वेबसाईट  पर  ये   खबर  पढ़ी  - 
''इस सप्ताह प्रीति जिंटा की बारी है अपने सबसे बड़े हेटर (नफरत करने वाले) चिराग महाबल से टकराने की। चिराग महाबल ने जिंटा की यह कहते हुए आलोचना की कि वह आईपीएल में इसलिए शामिल हुईं क्योंकि उनका फिल्मी करियर ठीक नहीं चल रहा था। महाबल के मुताबिक बॉलिवुड हस्तियों के शामिल होने की वजह से शो बिज आईपीएल से हट गया। 
अपने बचाव में प्रीति जिंटा ने कहा, ' मैंने क्रिकेट की दीवानगी सीखी यहां। पहले मैं क्रिकेट के बारे में कुछ नहीं जानती थी। आईपीएल क्रिकेट सबसे बड़ी मंदी से ठीक पहले लॉन्च हुआ। यह मेरा खून-पसीने से कमाया हुआ पैसा था जो मैंने आईपीएल में डाला। मैंने कोई घपला नहीं किया, मैं किसी के साथ नहीं सोई। ' 
''इस खबर की यह पंक्ति वास्तव में स्त्री होने का खामियाजा  भुगतना  ही प्रतीत  होती  है कि -''मैं किसी  के साथ नहीं  सोयी ''
                  त्रेता युग से हर स्त्री अपनी  शुद्धता का प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए ऐसी ही अग्नि परीक्षाओं से गुजर रही है पर पुरुष प्रधान समाज  के पास तो स्त्री को अपमानित  करने का बस यही ब्रह्मास्त्र है कि -''देखो यह स्त्री दुश्चरित्र है ....कलंकनी  है .....मर्यादाहीन  है  .''
                           ऐसे में स्त्री को भी अब पुरुष समाज को चुनौती देते हुए कहना चाहिए कि -आप प्रमाणित कीजिये मैं किसके साथ सोयी ?मैं क्यों अग्नि-परीक्षा देती रहूँ ?
                                                     शिखा कौशिक 
                                  [विचारों का चबूतरा ]

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

अनशन तो क्षेत्रीय सांसद के समक्ष करना चाहिए ''अन्ना जी''

अनशन तो क्षेत्रीय सांसद के समक्ष करना चाहिए ''अन्ना जी''


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अन्ना जी ने कहा है कि -'' .... नए लोकपाल बिल का ड्राफ्ट बेहद कमजोर है और इससे समाज का भला नहीं होने वाला है। अन्‍ना ने साफ किया कि अनशन के लिए 2-3 जगहों पर विचार हो रहा है। यदि उन्हें जगह नहीं मिली तो वह जेल में ही अनशन करेंगे।''......[टीम अन्ना ने अपने 30 दिसंबर से शुरू होने जा रहे जेल भरो आंदोलन के लिए अब एकऑनलाइन कैंपेन शुरू किया ]   [ नवभारत टाइम्स से साभार] 
         अन्ना जी  कभी सोनिया गाँधी जी के आवास के समक्ष अनशन करने के लिए कहते हैं तो कभी राहुल गाँधी जी के आवास के समक्ष .कभी दिल्ली में तो कभी महाराष्ट्र में .कभी जंतर -मंतर पर तो कभी रामलीला मैदान में ....पर कभी वे यह क्यों नहीं कहते की अपने क्षेत्र के सांसद के समक्ष अनशन कीजिये .जब संविधान ने कानून बनाने का अधिकार जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले हमारे सांसदों को दिया है तो सर्वोच्च कानून निर्माण  संस्था ''संसद '' की गरिमा को बनाये रखते हुए हम क्यों न अपने ही क्षेत्र के सांसद को अपने विचारों से अवगत कराएँ .हम कैसा लोकपाल चाहते हैं ? यह हमारा प्रतिनिधि -हमारा सांसद संसद में लोकपाल पर बहस के दौरान रखे तो लोकतंत्र - प्रजातंत्र का अनुशासित रूप प्रकट होगा पर जनता को उत्तेजित कर ''जेल भरो '' जैसे आन्दोलनों से अन्ना जी स्वयं तो चर्चित कर सकते हैं पर देश की जनता का इससे कोई कल्याण नहीं होने वाला है .ऐसे आन्दोलन लोकतान्त्रिक प्रणाली से चुनी हुई सरकार पर ही प्रश्न चिन्ह लगाती है और जो संस्था लोकतंत्र की बात करती है वो लोकतान्त्रिक तरीकों को क्यों नहीं अपनाती ?क्षेत्रीय सांसद को घेरिये यदि जनता के अधिकारों का हनन हो रहा है. यदि पूरे देश में जनता अपने सांसदों को लोकपाल के मुद्दे पर घेरेगी तो संसद में जैसा जनता चाहती  है वैसे ही लोकपाल विधेयक को लाये जाने की बहस होगी  जिसका परिणाम शुभ ही होगा .अन्ना के ''जेल भरो '' आन्दोलन ''का मैं कड़ा विरोध करती हूँ  .
                                  शिखा कौशिक 
                           [विचारों का चबूतरा ]

बुधवार, 21 दिसंबर 2011

स्त्री को एक शो-पीस बना कर प्रस्तुत करने वाले लोगों को कड़ा दंड मिलना चाहिए

एक खबर पढ़ी -
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''कोच्चि।। बॉलिवुड स्टार शाहरुख खान के खिलाफ महिलाओं के अश्लील चित्रण (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है। एक शोरुम के उद्घाटन के सिलसिले में चार दिसंबर को शाहरुख ने यहां अपनी हालिया फिल्म 'रा. वन' के चर्चित गाने 'छम्मक छल्लो' पर कुछ कलाकारों के साथ डांस किया था, जिसमें उनके साथ डांस करने वाली लड़कियां बहुत कम कपड़ों में थीं।''[नवभारत टाइम्स से साभार ]


                  शाहरुख़ खान पर मामला दर्ज किया जाना उचित ही है क्योंकि ये सितारे फिल्मों में तो भारतीय संस्कृति का गुणगान करते दिखलाई देते हैं पर निजी जीवन में मर्यादाओं की धज्जियाँ व्यवसायिक हितों हेतु उड़ा देते हैं .हैरानी की बात ये है कि ये कार्यक्रम एक कपडा कम्पनी ने आयोजित किया था .कपडा कम्पनी को भी आरोपी बनाया गया है .इतनी शोहरत -दौलत कमा लेने के बाद भी शाहरुख़  जैसे सितारे क्यों नहीं ऐसे  मर्यादाहीन प्रदर्शन के लिए इंकार  करते ? शाहरुख़ खान स्वयं एक पुत्री के पिता हैं क्या वे अपनी पुत्री को  ऐसी  ही पोशाक में नचाना पसंद करेंगे ?यदि नहीं तो  अन्य लड़कियों का ऐसा शोषण क्यों करते हैं ये ?शाहरुख़ के साथ-साथ वे लड़कियां भी जिम्मेदार हैं जो ऐसे वस्त्रो को धारण  करने के लिए तैयार हो जाती हैं .ऐसे अमर्यादित प्रदर्शन को देखने वाले भी जिम्मेदार हैं .पश्चिमी संस्कृति के सकारात्मक पक्षों को ग्रहण करना अलग बात है पर नग्नता को हमारे समाज में स्वीकृति   दी  जाये  ऐसा संभव  नहीं है .सिर से पांव तक ढकी  स्त्री  तो अस्मिता की रक्षा कर नहीं पा रही ऐसे में अर्ध नग्न कर स्त्री देह का प्रयोग व्यवसायिक हितों के लिए करना क्रूरतापूर्ण अपराध है . स्त्री को एक शो-पीस बना कर प्रस्तुत करने वाले लोगों को कड़ा दंड मिलना ही चाहिए   .
                                              शिखा कौशिक 
                                 [विचारों का चबूतरा ]

सोमवार, 19 दिसंबर 2011

पूनम आपसे सहमत नहीं मैं !

पूनम आपसे सहमत नहीं मैं !

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दुनिया में पाप जैसा कुछ नहीं होता। जो चाहें कीजिए, बस दूसरों के भी ऐसा ही करने के अधिकार का सम्मान जरूर कीजिए। -पूनम पांडे [१९ दिसंबर 2011 ]
                ऐसा क्यों होता है कि पूनम जो भी कहती हैं मैं  उससे  सहमत  नहीं हो पाती.हो सकता है मेरी और उनकी परवरिश में अंतर हो .मेरी सोच संकुचित हो और उनकी विराट पर ये भी लगता है कि वे जो कुछ भी लिखती हैं या करती हैं सब शोहरत पाने के लिए .आखिर वे इस सार्वभौम  सत्य से कैसे इंकार कर सकती हैं कि कर्म दो प्रकार के होते हैं -पाप व् पुण्य  कर्म .हम जब छोटे थे तब से ही हमें अच्छे व् बुरे में अंतर बताकर अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित किया जाता रहा है .अमूमन सभी भारतीय परिवारों में ऐसी ही शिक्षा दी जाती है पर पूनम की सोच सभी से अलग है .पाप व् पुण्य के न होने पर हम जीवन के लक्ष्य कैसे निर्धारित करेंगे ?आज हम कोई गलती करते है तो उसे सुधार कर   प्रभु से प्रार्थना करते है कि -हे प्रभु हमें शक्ति देना हम जीवन में पुण्य पथ पर अग्रसर हो .हम पाप के मार्ग पर न बढे .''पर यदि पाप व् पुण्य में अंतर ही नहीं  तो कर्मों का विश्लेषण  ही नहीं होगा .मैं तो ऐसे मत का समर्थन ही नहीं कर सकती .कर्म में निहित भावना ही उसे पाप-पुण्य में विभाजित करती है .पाप-पुण्य के विभाजन  बिना सार्थक जीवन व् समाज की कल्पना करना भी असंभव है ..पूनम जी कुछ तो ऐसा भी कीजिये या लिखिए जिससे हम जैसे साधारण नागरिक भी सहमत हो सके .
                            शिखा कौशिक 
               [विचारों का चबूतरा ]

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

पूनम पांडे ढूंढें से भी नहीं मिलेगी इंटरनेट पर !

पूनम पांडे  ढूंढें से भी नहीं मिलेगी इंटरनेट पर !




फेसबुक व्  ट्विटर  जैसी  सोशल वेबसाईट    पर निगरानी को लेकर कपिल सिब्बल  जी  द्वारा  की गयी  पहल को अधिकांश यूजर्स  ने गलत रूप में लिया है .सबसे  ज्यादा हंसी तो मुझे तब आई जब पूनम पांडे ने भी इस पर आपत्ति जताई .जाहिर सी बात है यदि सरकार इंटरनेट पर से आपत्तिजनक सामग्री हटाने में सफल हो जाती है तो पूनम पांडे  तो ढूंढें से भी नहीं मिलेगी .शालीनता की सारी हदे पार करने वाली ऐसी मॉडल्स और अभिनेत्रियों ने स्त्री जाति का सिर शर्म से झुका दिया है .रोज किसी न किसी अशालीन कथन अथवा फोटो को लेकर ये चर्चा में बनी रहती हैं .एक वेबसाईट पर तो पूनम पाण्डें की नग्न तस्वीर का सहारा लेकर समस्त हिन्दू स्त्रियों को अपमानजनक शब्द लिखे गए थे .अब वीना मालिक की तस्वीर पर कोई  हिन्दू मुस्लिमों  को अभद्र  शब्द लिख दे तो पूनम व् वीना का तो मुफ्त में प्रचार हो गया और पढने वालों का दिमाग गर्म. फेसबुक व् ट्विटर जैसी सोशल वेबसाईट पर निगरानी के सम्बन्ध के मुद्दे   पर शेखर कपूर ने ट्वीट में कहा, ' सोशल मीडिया पर हर व्यक्ति क्षमतावान और प्रभावशाली है। यह सरकार के रखवालों को डरा रहा है। '


                              मैं इससे सहमत नहीं हूँ .मनमोहन सिंह जी व् सोनिया गाँधी जी की तस्वीरों को असभ्य तरीके से -अशालीन संवादों के साथ प्रस्तुत कर किस को डराया जा रहा है ?राहुल गाँधी जी पर बलात्कार का आरोप लगाकर किस सरकार का तख्ता पलट किया जा रहा है ?नेहरू -गाँधी परिवार का शजरा प्रस्तुत कर हर सदस्य पर अवैध  संबंधों का आरोप लगाकर किस लोकतंत्र की नीव रखी जा रही ?शरद पावर जी पर किये गए एक युवक के हमले को भगत सिंह के बलिदान से जोड़कर देश की सरकार को क्या सन्देश दे रहे हैं ?
आलोचना  व् विरोध की भी एक भाषा होनी चाहिए .यह नहीं कि इन वेबसाइटों का सहारा लेकर किसी भी व्यक्ति की अस्मिता  से खेला जा सके .शरद पावर जी पर हुए हमले का अवसरवादी लेखकों ने बहुत अभद्र शीर्षकों के साथ आलेख प्रस्तुत कर फ़ायदा उठाया .सुपर हिट पोस्ट का ख़िताब भी पा लिया पर उन्होंने यह नहीं सोचा कि शरद पावर जी के व्यक्तित्व  की गरिमा को वे कितनी चोट पहुंचा रहे हैं ? मुझे राहुल जी के एक बयाँ पर समर्थन में लिखे लेख पर ''कॉंग्रेस की चमची '' जैसे अपशब्दों से विभूषित किया गया .सरकार या कॉंग्रेस के पक्ष में लिखना पैसे लेकर लिखना है और विरोध में लिखना भगत सिंह बन जाना है .ऐसी सोच वाले भी हैं इंटरनेट यूजर्स में फिर कपिल जी का इन पर निगरानी रखने का विचार कहाँ से गलत है ?इतना जरूर है कि  किसी के विरोध में लिखें या पक्ष में -शालीनता बनी रहनी चाहिए .अभिव्यक्ति का गला घोटना न होकर यह एक सार्थक पहल  होगी ऐसा मेरा विश्वास  है क्योंकि मैं न तो अपनी अस्मिता के साथ कोई खिलवाड़ पसंद करती हूँ और न ही भारत के किसी भी सभ्य नागरिक की अस्मिता के साथ .पूनम पांडे जैसे  यूजर्स को  जरूर दिक्कत होगी और उन्हें  भी जो बिना किसी सोच-विचार के किसी के विषय में कुछ भी अनर्गल लिख देते हैं .
                                                 शिखा कौशिक 
                                [विचारों का चबूतरा ]