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शनिवार, 8 दिसंबर 2012

सोनिया जी को जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें !

सोनिया जी को जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें !

Rajiv Gandhi - 2728
२१ मई १९९१ की रात्रि  को जब तमिलनाडु  में श्री पेराम्बुदूर   में हमारे प्रिय नेता राजीव  गाँधी जी की एक बम  विस्फोट में हत्या  कर दी गयी वह क्षण पूरे भारत वर्ष को आवाक कर देने वाला था .हम इतने व्यथित थे.... तब  उस स्त्री के ह्रदय  की वेदना  को समझने   का प्रयास  करें  जो अपना  देश ..अपनी संस्कृति  और अपने परिवारीजन  को छोड़कर यहाँ हमारे देश में राजीव जी की सहगामिनी -अर्धांगिनी बनने आई थी .मैं बात कर रही हूँ सोनिया गाँधी जी की .निश्चित रूप  से सोनिया जी के लिए वह क्षण विचिलित  कर देने वाला था -
''एक हादसे ने जिंदगी का रूख़ पलट दिया ;
जब वो ही न रहा तो किससे करें गिला ,
मैं हाथ थाम जिसका  आई थी इतनी  दूर ;
वो खुद बिछड़   कर दूर मुझसे चला गया  .''
सन १९८४ में जब इंदिरा जी की हत्या की गयी तब सोनिया जी ही थी जिन्होंने राजीव जी को सहारा दिया पर जब राजीव जी इस क्रूरतम  हादसे का शिकार हुए तब सोनिया जी को सहारा देने वाला कौन था ?दिल को झंकझोर कर रख देने वाले इस हादसे ने मानो सोनिया जी का सब  कुछ ही छीन लिया था .इस हादसे को झेल जाना बहुत मुश्किल रहा होगा उनके लिए .एक पल को तो उन्हें यह बात कचोटती ही होगी कि-''काश राजीव जी उनका कहना मानकर राजनीति में न  आते ''पर ....यह सब सोचने का समय अब कहाँ  रह  गया था ?पूरा  देश चाहता था कि सोनिया जी कॉग्रेस की कमान संभालें लेकिन  उन्होंने ऐसा  नहीं किया .२१ वर्षीय पुत्र राहुल व् 19 वर्षीय पुत्री प्रियंका को पिता  की असामयिक मौत के हादसे की काली छाया से बाहर  निकाल  लाना कम चुनौतीपूर्ण  नहीं था .
अपने आंसू पीकर सोनिया जी ने दोनों को संभाला और जब यह देखा कि कॉग्रेस पार्टी कुशल  नेतृत्व के आभाव में बिखर रही है तब पार्टी को सँभालने हेतु आगे  आई .२१ मई १९९१ के पूर्व  के उनके जीवन व् इसके बाद के जीवन में अब ज़मीन  आसमान  का अंतर  था .जिस राजनीति में प्रवेश करने हेतु वे राजीव जी को मना  करती  आई थी आज वे स्वयं  उसमे स्थान बनाने  हेतु संघर्ष शील थी .क्या कारण था अपनी मान्यताओं को बदल देने का ?यही ना कि वे जानती थी कि वे उस परिवार  का हिस्सा हैं जिसने देश हित में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया .कब तक रोक सकती थी वे अपने ह्रदय की पुकार   को ? क्या हुआ जो आज राजीव जी उनके साथ शरीर रूप में नहीं थे पर उनकी दिखाई गयी राह तो सोनिया जी जानती ही थी .
दूसरी ओर   विपक्ष केवल एक आक्षेप का सहारा लेकर भारतीय जनमानस में उनकी गरिमा को गिराने हेतु प्रयत्नशील था .वह आक्षेप था  कि-''सोनिया एक विदेशी महिला हैं '' . सोनिया जी के सामने चुनौतियाँ  ही चुनौतियाँ  थी .यह भी एक उल्लेखनीय तथ्य है कि जितना संघर्ष सोनिया जी ने कॉग्रेस को उठाने हेतु किया उतना संघर्ष नेहरू-गाँधी परिवार के किसी अन्य  सदस्य को नहीं करना पड़ा होगा .
सोनिया जी के सामने चुनौती थी भारतीयों के ह्रदय में यह विश्वास पुनर्स्थापित  करने की कि -''नेहरू गाँधी परिवार की यह बहू भले ही इटली से आई है पर वह अपने पति के देश हित हेतु राजनीति में प्रविष्ट हुई है ''.यह कहना अतिश्योक्ति पूर्ण न होगा कि सोनिया जी ने इस चुनौती को न केवल स्वीकार किया बल्कि अपनी मेहनत व् सदभावना से विपक्ष की हर चाल को विफल कर डाला .लोकसभा चुनाव २००४ के परिणाम सोनिया जी के पक्ष में आये .विदेशी महिला के मुद्दे को जनता ने सिरे से नकार दिया .सोनिया जी कॉग्रेस [जो सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर आया था ]कार्यदल की नेता चुनी गयी .उनके सामने प्रधानमंत्री बनने का साफ रास्ता था पर उन्होंने बड़ी विनम्रता से इसे ठुकरा दिया .कलाम साहब की हाल में आई किताब ने विपक्षियों के इस दावे को भी खोखला साबित कर दियाकी कलाम साहब ने सोनिया जी को प्रधानमंत्री बनने से रोका था .कितने व्यथित थे सोनिया जी के समर्थक और राहुल व् प्रियंका भी पर सोनिया जी अडिग रही .अच्छी सर्कार देने के वादे से पर वे पीछे नहीं हटी इसी का परिणाम था की २००९ में फिर से जनता ने केंद्र की सत्ता की चाबी उनके हाथ में पकड़ा दी .
विश्व की जानी मानी मैगजीन  ''फोर्ब्स ''ने भी सोनिया जी का लोहा माना और उन्हें  विश्व की शक्तिशाली महिलाओं में स्थान दिया -
7Sonia Gandhi

Sonia Gandhi

President

सोनिया जी पर विपक्ष द्वारा कई बार तर्कहीन आरोप लगाये जाते रहे हैं पर वे इनसे कभी नहीं घबराई हैं क्योकि वे राजनीति में रहते हुए भी राजनीति  नहीं करती  .वे एक सह्रदय महिला हैं जो सदैव जनहित में निर्णय लेती है .उनके कुशल नेतृत्व में सौ करोड़ से भी ज्यादा की जनसँख्या वाला हमारा भारत देश विकास के पथ पर आगे बढ़ता रहे  बस यही ह्रदय से कामना है .आज महंगाई ,भ्रष्टाचार के मुद्दे लेकर विपक्ष सोनिया जी को घेरे में तत्पर है पर वे अपने विपक्षियों से यही कहती नज़र आती हैं-
''शीशे के हम नहीं जो टूट जायेंगें ;
फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .''
वास्तव में सोनिया जी के लिए यही उद्गार ह्रदय से निकलते हैं -''भारत की इस बहू में दम है .''
शिखा कौशिक
[विचारों का चबूतरा ]

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

अन्ना मौन व्रत ले लो !


 

अन्ना द्वारा निरंतर अरविन्द केजरीवाल पर दिए जा रहे बयान अत्यंत निंदनीय हैं .अन्ना का यह बयान भी नितांत आपत्तिजनक है कि-''केजरीवाल के सत्ता मोह के कारण उनका आन्दोलन बिखरा .''जबकि वास्तविकता सभी जानते हैं कि लम्बे खिचे इस आन्दोलन से जनता का मोह भंग होने लगा था तब टीम अन्ना के कई सदस्यों ने मिलकर इस आन्दोलन को एक दीर्घकालिक संकल्प में परिणत करने हेतु एक नई राजनैतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया जिसपर पहले अन्ना ने भी सहमति कि मुहर लगा दी थी ....पर अन्ना अपने इस कदम से भी बाद में पीछे हट गए .रही बात यह कि अन्ना केजरीवाल पर सत्ता प्राप्ति हेतु धन प्रयोग का जो आरोप लगा रहे हैं तो उसमे क्या गलत है ?अब ये तो सभी जानते हैं कि नेताओं और पूंजीपतियों के भेदिये पानी पी पी कर तो केजरीवाल को खबरे लाकर नहीं दे रहे .आज के युग में 'राम' बनकर कहाँ राजनीति में टिका जा सकता है यहाँ तो 'कृष्ण बनना पड़ता है जो 'न दैन्यं न पलायनम ' की शिक्षा देते हैं .अन्ना को चाहिए वे अविलम्ब ये ऐलान कर दें कि -''राजनैतिक बयानों के सम्बन्ध में मैं आजीवन मौन व्रत पर हूँ !''

                       शिखा कौशिक 'नूतन'

शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

श्वेता के साथ -सच का 'हाथ'



Shweta Bhatt, the wife of suspended IPS officer Sanjiv Bhatt. File Photo.

 कॉंग्रेस ने गुजरात के निलंबित आई.पी.एस.अधिकारी संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट को मणिनगर सीट पर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उतारकर अपने विरोधियों का मुहं बंद कर दिया है . गुजरात दंगों का सच सामने लाने वाले बहादुर एवं ईमानदार अधिकारी संजीव भट्ट के परिवार को जो ज्यादती झेलनी पड़ी है -उसका जवाब जनता नरेंद्र मोदी को हराकर दे सकती है .जो लोग ''वन्दे मातरम'' का उद्घोष करते हुए एवं ''राष्ट्रीय ध्वज '' लहराते हुए दिल्ली में भ्रष्टाचार के विरुद्ध सीना तानकर खड़े थे और भ्रष्टाचार के लिए एकमात्र जिम्मेदार 'कॉंग्रेस 'को ठहराने की जिद पर अड़े थे क्या आज गुजरात में जाकर श्वेता के साथ  खड़े हो सकेंगें ?क्या वे भ्रष्टाचार से भी ज्यादा गंभीर मुद्दे साम्प्रदायिकता के खिलाफ श्वेता के कदम से कदम मिलाकर नरेन्द्र मोदी को हराने की मुहीम में शामिल होंगें ?पिछले दस साल से गुजरात में लोकतंत्र की धज्जिया उड़ाते इस तानाशाह के खिलाफ खड़े होने का साहस करने वाली श्वेता ने 'नेता के रूप में' मोदी से अपने को कमतर आंकते हुए कहा है की -''हालाँकि मैं मानती हूँ की मेरा और मोदी का मुकाबला बराबरी का नहीं है ''  लेकिन इस सन्दर्भ में ये उल्लेखनीय है की श्वेता और मोदी का मुकाबला बराबरी का हो ही नहीं सकता क्योंकि सच और झ्हूठ का कोई मुकाबला होता ही नहीं .गुजरात दंगों के मुख्य दोषी नरेंद्र मोदी को भले ही किसी अदालत द्वारा सजा न सुनाई गयी हो क्योंकि उनके आतंक के चलते   एक एफ.आई.आर.तक उनके खिलाफ किसी थाने   में दर्ज न हो सकी किन्तु बहादुर व् ईमानदार अधिकारी संजीव भट्ट ने उनके आतंक के आगे घुटने नहीं टेके .फिर भट्ट परिवार के सच और मोदी के झूठ  का मुकाबला कैसे हो सकता है ?श्वेता जिस सच का हाथ थामकर मोदी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरी हैं उस सच का ओहदा मोदी के झूठ और षड्यंत्रों से कहीं ऊँचा है .नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी को समझ लेना चाहिए की श्वेता का उनके खिलाफ खड़ा होना ''सत्यमेव जयते ''की एक शुरुआत भर है .ये सिलसिला अब दूर तक जारी रहेगा .गुजरात के प्रत्येक नागरिक से श्वेता जैसे बहादुर -ईमानदार उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने की अपील करते हुए मैं यही कहूँगी -
''आतंक के आगे घुटने मत टेको !
जिंदगी को मौत बनने से रोको !
हर हालत को सह  जाना  हौसला नहीं !
एक बार खिलाफत करके भी देखो !!
                                     शिखा कौशिक 'नूतन'

बुधवार, 21 नवंबर 2012

ध्यान से तू चल भैया ध्यान से तू चल !

India No 1 in road accident deaths

India No 1 in road accident deaths

 

 एक चूक जाती है जिंदगी निगल
ध्यान से तू चल भैया  ध्यान से तू चल !

 हो  सवारी पर या  हो  पैदल
ध्यान से तू चल भैया ध्यान से तू चल !

 

 पीकर शराब कभी वाहन न चलाना ,
तय रफ़्तार से तेज न भगाना ,
सीट बैल्ट बांधकर चलाना तू कार ,
हैलमेट पहन कर हो बाइक पर सवार ,
अब तक ना संभला तो अब तो संभल  !
ध्यान से तू चल भैया ध्यान से तू चल !

 

 पैदल चलने वाले जरा हो जा होशियार ,
लाल बत्ती पर कर सड़क को पार ,
हैड फोन लगाकर सड़क पर ना चलना
रेल की पटरी को खेल ना समझना ,
मोबाइल साइलेंट कर के निकल !
ध्यान से तू चल भैया ध्यान से तू चल !

 

 शिखा कौशिक 'नूतन ''

 

 

 

सोमवार, 19 नवंबर 2012

मात गंगे हमें क्षमा करो !


युग युग से हम सभी के पापों को धोती माता गंगा आज स्वयं प्रदूषण  के गंभीर संकट से जूझ  रही हैं .हम कितनी कृतघ्न संतान हैं ?हमने माता को ही मैला कर डाला .हे माता हमें क्षमा करें -

 

मात गंगे हमें क्षमा करो !
संतान हैं कृतघ्न  हम !

हमने किया मैला तुम्हे
दण्डित करो हमें सर्वप्रथम !


 तुम ब्रह्मलोक  से आई तुमने जन जन संताप हरे ,
हे पतित पावनी तुमने हम सबके पाप हरे ,
और हमने कर डाला दूषित तेरा ही जल !


 तेरे अमृत जल से हरियाई भूमि ,
संत लगाते तेरे तट पर नित दिन धूनी ,
हे कल्याणी बदले में कर डाला हमने छल !


 मंदमति संतान हैं हम ;माँ सद्बुद्धि  दो ,
करें शीघ्र प्रयास जल की शुद्धि हो ,
मल व् मैल से मुक्त जल हो जाये निर्मल !  


मात गंगे हमें क्षमा करो !
संतान हैं कृतघ्न  हम !

हमने किया मैला तुम्हे
दण्डित करो हमें सर्वप्रथम !







                                                                       सन्दर्भ
                                               

 [साभार -http://hi.wikipedia.org/s/1y4f ]
एक अनुमान के अनुसार हिंदुओं द्वारा पवित्र मानी जाने वाली नदी में बीस लाख लोग रोजाना धार्मिक स्नान करते हैं। हिन्दू धर्म में कहा जाता है कि यह नदी भगवान विष्णु के कमल चरणों से (वैष्णवों की मान्यता) अथवा शिव की जटाओं से (शैवों की मान्यता) बहती है. इस नदी के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व की तुलना प्राचीन मिस्र वासियों के लिए नील नदी के महत्त्व से की जा सकती है. जबकि गंगा को पवित्र माना जाता है, वहीं पारिस्थितिकी तंत्र से संबंधित इसकी कुछ समस्याएं भी हैं। यह रासायनिक कचरे, नाली के पानी और मानव व पशुओं की लाशों के अवशेषों से भरी हुई है, और गंदे पानी में सीधे नहाने से (उदाहरण के लिए बिल्हारज़ियासिस संक्रमण) अथवा इसका जल पीने से (फेकल-मौखिक मार्ग से) स्वास्थ्य संबंधी बड़े खतरे हैं।
लोगों की बड़ी आबादी के नदी में स्नान करने तथा जीवाणुभोजियों के संयोजन ने प्रत्यक्ष रूप से एक आत्म शुद्धिकरण का प्रभाव उत्पन्न किया है, जिसमें पेचिश और हैजा जैसे रोगों के जलप्रसारित जीवाणु मारे जाते हैं और बड़े पैमाने पर महामारी फैलने से बच जाती है. नदी में जल में घुली हुई ऑक्सीजन को प्रतिधारण करने की असामान्य क्षमता है.[1


प्रदूषण

1981 में अध्ययनों से पता चला कि वाराणसी से ऊर्ध्वाधर प्रवाह में, नदी के साथ-साथ प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक में जैवरासायनिक ऑक्सीजन की मांग तथा मल कोलिफोर्म गणना कम थी. पटना में गंगा के दाहिने तट से लिए गए नमूनों के 1983 में किए गए अध्ययन पुष्टि करते हैं कि एशरिकिआ कोली (escherichia coli) (ई. कोलि (E.Coli)), फीकल स्ट्रेप्टोकोकाई (Fecal streptococci) और विब्रियो कोलेरी (vibrio cholerae) जीव सोन तथा गंडक नदियों, उसी क्षेत्र में खुदे हुए कुओं और नलकूपों से लिेए गए पानी की अपेक्षा गंगा के पानी में दो से तीन गुना तेजी से मर जाते हैं.[2]
तथापि हाल ही में[कब?] इस की पहचान दुनिया की सबसे अधिक प्रदूषित नदियों में से एक के रूप में की गई है. यूईसीपीसीबी (UECPCB) अध्ययन के अनुसार, जबकि पानी में मौजूद कोलिफोर्म (coliform) का स्तर पीने के प्रयोजन के लिए 50 से नीचे, नहाने के लिए 500 से नीचे तथा कृषि उपयोग के लिए 5000 से कम होना चाहिए- हरिद्वार में गंगा में कोलिफोर्म का वर्तमान स्तर 5500 पहुंच चुका है।
कोलिफोर्म (coliform), घुलित ऑक्सीजन और जैव रासायनिक ऑक्सीजन के स्तर के आधार पर, अध्ययन ने पानी को ए, बी, सी और डी श्रेणियों में विभाजित किया है. जबकि श्रेणी ए पीने के लिए, बी नहाने के लिए, सी कृषि के लिए और डी अत्यधिक प्रदूषण स्तर के लिए उपयुक्त माना गया.
चूंकि हरिद्वार में गंगा जल में 5000 से अधिक कोलिफोर्म (coliform) है और यहां तक कि जल में घुली हुई ऑक्सीजन और जैव रासायनिक ऑक्सीजन का स्तर निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, इसे श्रेणी डी में रखा गया है.
अध्ययन के अनुसार, गंगा में कोलिफोर्म (coliform) के उच्च स्तर का मुख्य कारण इसके गौमुख में शुरुआती बिंदु से इसके ऋषिकेश के माध्यम से हरिद्वार पहुँचने तक मानव मल, मूत्र और मलजल का नदी में सीधा निपटान है.
हरिद्वार तक इसके मार्ग में पड़ने वाले लगभग 12 नगरपालिका कस्बों के नालों से लगभग आठ करोड़ नब्बे लाख लिटर मलजल प्रतिदिन गंगा में गिरता है. नदी में गिरने वाले मलजल की मात्रा तब अधिक बढ़ जाती है जब मई और अक्तूबर के बीच लगभग 15 लाख(1.5 मिलियन) लोग चारधाम यात्रा पर प्रति वर्ष राज्य में आते हैं।
मलजल निपटान के अतिरिक्त, भस्मक के अभाव में हरिद्वार में अधजले मानव शरीर तथा श्रीनगर के बेस अस्पताल से हानिकारक चिकित्सकीय अपशिष्ट भी गंगा के प्रदूषण के स्तर में योगदान दे रहे हैं।
इस का परिणाम यह है कि भारत के सबसे मूल्यवान संसाधनों में से एक की क्रमिक हत्या को रही है. गंगा की मुख्य सहायक नदी, यमुना नदी का एक खंड कम से कम एक दशक तक जलीय जीव विहीन रहा है।
भारत के सबसे पावन नगर वाराणसी में कोलिफोर्म (coliform) जीवाणु गणना संयुक्त राष्ट्र विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा स्थापित सुरक्षित मानक से कम से कम 3000 गुना अधिक है. कोलिफोर्म (coliform) छड़ के आकार के जीवाणु हैं जो सामान्य रूप से मानव और पशुओं की आंतों में पाए जाते हैं और भोजन या जलापूर्ति में पाए जाने पर एक गंभीर संदूषक बन जाते हैं।

पर्यावरण जीवविज्ञान प्रयोगशाला, प्राणीविज्ञान विभाग, पटना विश्वविद्यालय द्वारा एक अध्ययन में वाराणसी शहर में गंगा नदी में पारे की उपस्थिति देखी गई. अध्ययन के अनुसार, नदी के पानी में पारे की वार्षिक सघनता 0.00023 पीपीएम थी. सघनता की सीमा एनटी (NT) (नहीं पाया गया) से 0.00191 पीपीएम तक थी।
1986-1992 के दौरान भारतीय विषाक्तता अनुसंधान केंद्र (ITRC), लखनऊ द्वारा किए गए अध्ययन से पता चला कि ऋषिकेश, इलाहाबाद जिला और दक्षिणेश्वर में गंगा नदी के जल में पारे की वार्षिक सघनता क्रमशः 0.081, 0.043, तथा 0.012 और पीपीबी (ppb) थी।
वाराणसी में गंगा नदी, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पीने के पानी के लिए निर्धारित अधिकतम अनुमेय स्तर 0.001 पीपीएम से कम ही था।[3]
दिसंबर 2009 में, गंगा की सफाई के लिए विश्व बैंक £ 6000 लाख ($1 अरब) उधार देने पर सहमत हुआ था.यह धन भारत सरकार की 2020 तक गंगा में अनुपचारित अपशिष्ट के निर्वहन का अंत करने की पहल का हिस्सा है. इससे पहले 1989 तक इसके पानी को पीने योग्य बनाने सहित, नदी को साफ करने के प्रयास विफल रहे थे

गंगा कार्य योजना

नदी में प्रदूषण भार को कम करने के लिए 1985 में श्री राजीव गांधी द्वारा गंगा कार्य योजना या गैप (GAP) का शुभारंभ किया गया था. कार्यक्रम खूब धूमधाम के साथ शुरू किया गया था, लेकिन यह 15 वर्ष की अवधि में 901.71 करोड़ (लगभग 1010) रुपये व्यय करने के बाद नदी में प्रदूषण का स्तर कम करने में विफल रहा. http://www.cag.gov.in/reports/scientific/2000_book2/gangaactionplan.htm[5]
1985 में शुरू किए गए जीएपी चरण 1 की गतिविधियों को 31 मार्च 2000 को बंद घोषित कर दिया गया. राष्ट्रीय नदी संरक्षण प्राधिकरण की परिचालन समिति ने गैप (GAP) की प्रगति और गैप (GAP) चरण 1 से से सीखे गए सबकों तथा प्राप्त अनुभवों के आधार पर आवश्यक सुधारों की समीक्षा की; इस योजना के अंतर्गत 2.00 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं. दस लाख लीटर मलजल को रोकने, हटाने और उपचारित करने का लक्ष्य है।

शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

नादानों मैं हूँ ' भगत सिंह ' दिल में रख लेना याद मेरी ,



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[पाकिस्तान के लाहौर में हाफिज सईद के नेतृत्व वाले जमात उद दावा और दूसरे कट्टरपंथी संगठनों के दबाव के आगे झुकते हुए लाहौर जिला प्रशासन ने अपने ही एक चौक शामदन चौक का नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर रखने की योजना ठंडे बस्ते में डाल दी है । इससे शहीद के परिजन क्षुब्ध है। 

गुरुवार को होशियारपुर के कचहरी चौक पर स्थित अपने निवास पर शहीद भगत सिंह की भतीजी भूपिंदर कौर व नाती एडवोकेट सुखविंदर जीत सिंह संघा ने कहा कि शहीद किसी भी जाति व धर्म से ऊंचा स्थान रखते हैं, ऐसे में लाहौर के शामदन चौक जिसे सिटी सेंटर चौक के नाम से भी जाना जाता है, का नाम स्वयं लाहौर के जिला प्रशासन ने ही 31 अगस्त को शहीद-ए-आजम भगत सिंह रख, वहां पर उनकी मूर्ति व उनकी लिखी कविता को पत्थर पर उकेर कर लगाने की बात कह पूरे संसार में एक सदभावना के तौर पर मिसाल कायम की थी। अब कट्टरपंथियों के आगे जिस तरह लाहौर जिला प्रशासन व वहां की सरकार अपने वायदे से मुकर रही है, उससे शहीद के परिजनों को ठेस पहुंची है।

लाहौर के सौंदर्यीकरण के लिए बनाए गए समिति दिलकश लाहौर के सदस्य एजाज अनवर ने कहा कि चौक का नाम बदलने का फैसला कुछ समय के लिए टाल दिया गया है। भुपिंदर कौर व सुखविंदरजीत सिंह ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वह इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चयोग से बात कर इस मामले का हल करें।]
इससे शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता  है .शहीद  -ए-आज़म  के नाम  पर  एक  चौराहे  के नाम रखने तक में पाकिस्तान  में आपत्ति  की जा  रही है .जिस युवक ने   देश की आज़ादी के खातिर प्राणों का उत्सर्ग करने तक में देर  नहीं की उसके  नाम पर एक चौराहे का नाम रखने तक में इतनी देर ....क्या  कहती  होगी  शहीद भगत  सिंह  की आत्मा ?यही  लिखने का प्रयास किया है -

आज़ादी  की खातिर हँसकर फाँसी को गले लगाया था ,
हिन्दुस्तानी  होने का बस अपना फ़र्ज़ निभाया था .

तब नहीं बँटा था मुल्क मेरा  भारत -पाकिस्तान में ,
थी दिल्ली की गलियां अपनी ; अपना लाहौर चौराहा था .

पंजाब-सिंध में फर्क कहाँ ?आज़ादी का था हमें जूनून ,
अंग्रेजी  अत्याचारों से कब पीछे कदम हटाया था ?

आज़ाद मुल्क हो हम सबका; क्या ढाका,दिल्ली,रावलपिंडी !
इस मुल्क के हिस्से होंगे तीन ,कब सोच के खून बहाया था !

नादानों मैं हूँ ' भगत सिंह ' दिल में रख लेना याद मेरी ,
'रंग दे बसंती ' जिसने अपना चोला कहकर रंगवाया था .

बांटी तुमने नदियाँ -ज़मीन  ,मुझको हरगिज़ न देना बाँट  ,
कुछ शर्म  करो खुद पर बन्दों ! बस इतना  कहने आया  था !!!

जय  हिन्द !
शिखा  कौशिक  'नूतन '


बुधवार, 31 अक्तूबर 2012

जन्म -दिवस पर लौह महिला को शत शत नमन !!!

     जन्म -दिवस पर  लौह महिला को शत  शत  नमन  !!!


इंदिरा जी के जीवन  से  सम्बंधित  जानकारी  जो भी अंतर्जाल पर मौजूद थी मैं जुटा लायी हूँ आप सभी के लिए -[साभार विकिपीडिया से ]

smt.indira gandhi 

इंदिरा प्रियदर्शिनी गाँधी (जन्म उपनाम: नेहरू) (19 नवंबर १९१७-31 अक्टूबर 1984) वर्ष 1966 से 1977 तक लगातार 3 पारी के लिए भारत गणराज्य की प्रधानमन्त्री रहीं और उसके बाद चौथी पारी में 1980 से लेकर 1984 में उनकी राजनैतिक हत्या तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं। वे भारत की प्रथम और अब तक एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रहीं।



इन्दिरा का जन्म 19 नवंबर 1917 को राजनीतिक रूप से प्रभावशाली नेहरू परिवार में हुआ था। इनके पिताजवाहरलाल नेहरू और इनकी माता कमला नेहरू थीं। इन्दिरा को उनका "गांधी" उपनाम फिरोज़ गाँधी से विवाह के पश्चात मिला था। इनका मोहनदास करमचंद गाँधी से न तो खून का और न ही शादी के द्वारा कोई रिश्ता था। इनके पितामह मोतीलाल नेहरू एक प्रमुख भारतीय राष्ट्रवादी नेता थे। इनके पिता जवाहरलाल नेहरू भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के एक प्रमुख व्यक्तित्व थे और आज़ाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री रहे।
1934–35 में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के पश्चात, इन्दिरा ने शान्तिनिकेतन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा निर्मित विश्व-भारती विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ही इन्हे "प्रियदर्शिनी" नाम दिया था। इसके पश्चात यह इंग्लैंड चली गईं और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में बैठीं, परन्तु यह उसमे विफल रहीं, और ब्रिस्टल के बैडमिंटन स्कूल में कुछ महीने बिताने के पश्चात, 1937 में परीक्षा में सफल होने के बाद इन्होने सोमरविल कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में दाखिला लिया। इस समय के दौरान इनकी अक्सर फिरोज़ गाँधी से मुलाकात होती थी, जिन्हे यह इलाहाबाद से जानती थीं, और जो लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स में अध्ययन कर रहे थे। अंततः 16 मार्च 1942 को आनंद भवन, इलाहाबाद में एक निजी आदि धर्म ब्रह्म-वैदिक समारोह में इनका विवाह फिरोज़ से हुआ
ऑक्सफोर्ड से वर्ष 1941 में भारत वापस आने के बाद वे भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन में शामिल हो गयीं।
1950 के दशक में वे अपने पिता के भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल के दौरान गैरसरकारी तौर पर एक निजी सहायक के रूप में उनके सेवा में रहीं। अपने पिता की मृत्यु के बाद सन् 1964 में उनकी नियुक्ति एकराज्यसभा सदस्य के रूप में हुई। इसके बाद वे लालबहादुर शास्त्री के मंत्रिमंडल में सूचना और प्रसारण मत्री बनीं।[1]
श्री लालबहादुर शास्त्री के आकस्मिक निधन के बाद तत्कालीन कॉंग्रेस पार्टी अध्यक्ष के. कामराज इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाने में निर्णायक रहे। गाँधी ने शीघ्र ही चुनाव जीतने के साथ-साथ जनप्रियता के माध्यम से विरोधियों के ऊपर हावी होने की योग्यता दर्शायी। वह अधिक बामवर्गी आर्थिक नीतियाँ लायीं और कृषि उत्पादकता को बढ़ावा दिया। 1971 के भारत-पाक युद्ध में एक निर्णायक जीत के बाद की अवधि में अस्थिरता की स्थिती में उन्होंने सन् 1975 में आपातकाल लागू किया। उन्होंने एवं कॉंग्रेस पार्टी ने 1977 के आम चुनाव में पहली बार हार का सामना किया। सन् 1980 में सत्ता में लौटने के बाद वह अधिकतर पंजाब के अलगाववादियों के साथ बढ़ते हुए द्वंद्व में उलझी रहीं जिसमे आगे चलकर सन् 1984 में अपने ही अंगरक्षकों द्वारा उनकी राजनैतिक हत्या हुई।


                                                 जीवन के अंतिम क्षण  तक  
                            खून की आखिरी  बूँद  शेष  रहने  तक  
                                                        देश  सेवा  में  संलग्न  लौह  महिला  
                          को  शत  शत  नमन  !!!
                               

 शिखा कौशिक 


सोमवार, 29 अक्तूबर 2012

जाट लड़की ने जीन्स पहनी, तो प्रधान दे जुर्माना'

लड़की क्या पहनती है बस सारा भारतीय पुरुष समाज इस पर ही अपना ध्यान केन्द्रित किये हुए है .बलात्कार का मुख्य कारण भी लड़की का  पहनावा है .इस पर ये नया फरमान जारी किया गया है -
[नवभारत टाइम्स से साभार ]
                               

                   जाट लड़की ने जीन्स पहनी, तो प्रधान दे जुर्माना'

                                     jat-girls
लखनऊ।। लड़कियों के जीन्स पहनने पर रोक लगा पाने में असमर्थ उत्तर प्रदेश के भारतीय किसान मोर्चा ने अब एक नया फरमान जारी कर दिया है। भारतीय किसान मोर्चा (बीकेएम) ने ऐलान किया है कि जिस गांव में जाट लड़कियां जीन्स पहने दिख जाएंगी, उस गांव के प्रधान को 20 हजार रुपए जुर्माना देना होगा।

बीकेएम चाहता है कि गांव के प्रमुख इस बात की जिम्मेदारी लें कि उनके गांव में कोई लड़की जीन्स न पहने। इस तुगलकी फरमान पर बीकेएम के नैशनल प्रेजिडेंट मन्नू लाल चौधरी ने कहा है, 'यदि कोई भी जाट लड़की जीन्स पहने पाई गई तो गांव के सरपंच को जुर्माना भरना होगा। उन्हें 20 हजार रुपए का दंड भरना होगा।'

शनिवार को बागपत जिले के धिकौली गांव में बीकेएम ने जाटों की मीटिंग बुलाई और यह ऐलान किया। चौधरी ने कहा कि लड़कियां उनके किसी फरमान को नहीं मान रही हैं चाहे वह जीन्स न पहनने का हो या फिर मोबाइल के इस्तेमाल को बंद करने का।

चौधरी का कहना है, 'ये चीजें हमारे बच्चों पर बुरा असर डाल रही हैं और हमें उनके भविष्य पर बुरा असर डालने वाली हर चीज को रोकने का हक है।' चौधरी ने कहा कि हर जाट लड़की पर नजर रखना नामुमकिन है लेकिन गांव का प्रधान उन सबको पहचानता है। इसलिए, यह उसकी जिम्मेदारी है कि वह हमारा फैसला लागू करे। चौधरी ने कहा, 'यदि कोई जाट लड़की जीन्स पहने दिख गई तो हम प्रधान से 20 हजार रुपए बतौर जुर्माना वसूलेंगे।'
वैसे यहां बता दें कि यह कोई पहला तुगलकी फरमान नहीं है जिससे वेस्टर्न यूपी को दो चार होना पड़ रहा है। ऐसे ही फरमान कई गांवों में जारी किए गए हैं। हाल ही में खुद लड़कियों के एक समूह ने यह कसम खाई थी कि वे बड़ों के निर्देशों का पालन करेंगी। लेकिन, इन फरमानों को धता बता देने वाली लड़कियों की संख्या कहीं ज्यादा है।

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक बागपत की एक अंडरग्रैजुएट स्टूडेंट ने बताया, 'बीकेएम के नेता ये सब पब्लिसिटी के लिए कर रह रहे हैं और वे खुद को भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) से आगे बताना चाहते हैं।' बीकेयू महेंद्र सिंह टिकैत द्वारा बनाई गई किसान यूनियन है। स्टूडेंट ने कहा कि जाट किसान बीकेयू के साथ खड़े होते हैं न कि बीकेएम के और इसलिए मन्नू लाल चौधरी जाटों की अटैंशन पाने के लिए यह सब कर रहा है। जबकि, हम इन सब फरमानों को सीरियसली लेते ही नहीं हैं।

                                  निश्चित रूप से ये फरमान तुगलकी  हैं और ग्लोबल विलेज के रूप में बदलते विश्व   में इनका समर्थन कोई नहीं कर सकता है .
                                           शिखा कौशिक 



गुरुवार, 25 अक्तूबर 2012

आईये मिलते हैं श्री राहुल गाँधी जी से -


भारतीय  राजनीति  में आने वाला रविवार इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाने की प्रबल  सम्भावना  है जब  जन जन के प्रिय  नेता  श्री  राहुल गाँधी  कैबिनेट   में शामिल   होंगें -
''Rahul Gandhi may get a berth after Cabinet reshuffle on Sunday TOI 9 hrs ago
NEW DELHI: Prime Minister Manmohan Singh is expected to shuffle his Cabinet on Sunday in an exercise that may carry Congress general secretary Rahul Gandhi's stamp and mark an end to the long wait among ministerial aspirants in party ranks. ''

आईये मिलते हैं श्री राहुल गाँधी जी से -


shri rahul gandhi
[facebook se sabhar ]



यूं तो  राहुल गाँधी जी का जीवन एक खुली किताब की तरह है .स्व .श्री राजीव गाँधी जी व्  सोनिया गाँधी जी के सुपुत्र  राहुल जी का जन्म  19 जून  १९७० को  नईदिल्ली में हुआ .राहुल जी ने ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज  यूनिवर्सिटी [  यूं..के. ]से डेवलपमेंट इकोनोमिक्स  में एम् .फिल  की डिग्री  हासिल की है .राहुल जी की - प्राथमिक शिक्षा के उन्नतिकरण ,समाज के दलित व् अन्य   शोषित वर्गों   के सशक्तिकरण  से सम्बंधित  मुद्दों में,अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों- आदि में विशेष  रुचि है .खेलों में राहुल जी को-Scuba  diving  , swimming  , cycling  , playing squash में विशेष दिलचस्पी है .इतिहास ,समाज शास्त्र,अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध ,विकास,प्रबंधन व् जीवनी आदि विषयों को पढना  उन्हें   भाता है  व् शतरंज व् flying  उनके प्रिय समय व्यतीत करने के साधन है . अब तक  वे  निम्न   पदों को सुशोभित कर चुके हैं  -

Positions Held
2004
Elected, to 14th Lok Sabha
Member, Committee on Home Affairs
5 Aug. 2006
Member, Committee on Home Affairs
5 Aug. 2007 onwards
Member, Committee on Human Resource Development
2009
Re-elected to 15th Lok Sabha (2nd ter
31 Aug. 2009
Member, Committee on Human Resource Development


एक लोकसभा सदस्य के रूप में राहुल जी का  परिचय  इस  प्रकार  है --'' Details of MemberParticularsDescriptionNameShri Rahul GandhiConstituency from which I am electedAmethiState from which I am electedUttar PradeshPolitical party nameIndian National CongressPresent Address12, Tughlak Lane,New Delhi - 110 011Tels. (011) 23795161 Fax. (011) 23012410Permanent Address12, Tughlak Lane,New Delhi - 110 011Tels. (011) 23795161 Fax. (011) 23012410''[india.gov.in से sabhar ]


ये तो हुई राहुल जी के विषय में वे जानकारियां  जो सबको दिखाई देती हैं पर आज  मैं  यहाँ उनकी उन  विशेषताओं  का उल्लेख भी करना चाहूंगी  जिन्हें  केवल हम तभी देख सकते हैं  जब हम राजनैतिक रूप से निष्पक्ष होकर देखें  .१४ वर्ष की किशोर आयु में अपनी दादी की नृशंस   हत्या का हादसा झेलने वाले राहुल जी के धैर्य  की कड़ी परीक्षा  लेने में क्रूर प्रकृति ने कोई दया नहीं की .२१ मई १९९१ की रात को जब उनके स्नेही पिता राजीव जी की एक बम विस्फोट में नृशंस हत्या की गयी तब वे भारत में नहीं थे .जिसने भी अपने किसी प्रिय परिवारीजन को हादसे में खोया होगा वह उस समय के उनके हालात...मानसिक अवस्था को सहज  ही  महसूस   कर सकता है .किस तरह २१ वर्षीय उस युवा राहुल ने झेला  होगा यह हादसा !........आज जब स्वामी सुब्रमण्यम  जैसे तथाकथित  ज्ञानी राहुल जी को ''बुद्धू'' कहकर  उनकी खिल्ली उड़ाने  का प्रयास करते हैं ..वे भूल जाते हैं हमारे राहुल जी चट्टानी- कड़ाई जैसी मानसिक सबलता रखते हैं .दादी व् पिता को हादसों में खो देने के बावजूद वे स्वयं जन सेवा  हेतु  राजनीति में आये और सन 2004 से निरंतर जनसेवा में लगे  हुए हैं .....बिना किसी पद के लालच के .
राहुल जी द्वारा किये जाने वाले जनसंपर्क को ''नाटक ''का नाम   देने वाले ये भूल जाते हैं कि-राहुल जी इन आक्षेपों से घबराते नहीं है .वे ऐसे कुत्सित बयां देने वालों को चुनौती देते हुए ठीक ही तो कहते हैं-''यदि ये नाटक है तो ये चलता  रहेगा ''.उत्तर  प्रदेश में मिले जनादेश को भी उन्होंने बड़ी शालीनता के साथ स्वीकार किया  पर मीडिया ने  राहुल जी की आलोचना को ही स्थान दिया ...उनकी मेहनत को नहीं.
हाल ही में सर्वोच्च  न्यायलय  ने  राहुल जी के खिलाफ  फर्जी बलात्कार  के मामले  में साजिश   करने वाले व्यक्ति पर भारी अर्थ दंड लगाया है और राहुल जी को क्लीन चिट दी है  .राहुल जी के शत्रुओं को जान लेना चाहिए कि ऐसी घटिया कूटनीति से  वे  राहुल जी की छवि  को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं राहुल जी ऐसी सभी से यही कहते नज़र आते हैं -
'' पत्थर ही  है मारना है तो देख ले पहले
जो सामने खड़ा है वो शख्स कौन है !''
गरिमामयी   व् आकर्षक व्यक्तित्व  के स्वामी राहुल जी से यदि आप कभी मिले तो ये अवश्य पूछियेगा कि ''आखिर वे इतने अनर्गल आक्षेपों को ..........कटु आलोचनाओं को .... को कैसे सह जाते हैं? .विपरीत परिस्थितियों  में इतने शालीन  कैसे रह पाते हैं ?

राहुल जी इसी तरह भारतीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहें और आने वाले दिनों में भारतीय जनता के हितार्थ अच्छे निर्णय लेकर देश को प्रगति पथ पर अग्रसर करने में अपना सार्थक योगदान प्रदान करें ऐसी प्रभु से कामना  है .
शिखा कौशिक