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मंगलवार, 10 जनवरी 2012

कुत्तों की प्रार्थना !

कुत्तों  की प्रार्थना !

[गूगल से साभार ]


[एक खबर -(स्मारकों से पकडे जायेंगें  कुत्ते -{आगरा}राष्ट्रीय सहारा;पेज ९ -१०-1-२०१२ ]
इस खबर ने कुत्तों में खलबली मचा दी .सड़क पर अलाव सेकते भूरे रंग का कुत्ता कुछ मुंह बनाता सा बोला -''......भाई कुछ भी कहो ये अन्याय है .एक तो हमें खामख्वाह में आवारा कहकर ज़लील करते हैं और अब हमारे पुरखों से मिली संपत्ति स्मारकों से हमें बेदखल करने की साजिश  रच रहे हैं ''......काली कुतिया जम्हाई लेती हुई बोली -''...सत्यानाश हो इस पुरातत्व विभाग का ....कालू बबुआ अख़बार में पढ़कर आया है कि ताजमहल ;आगरा किला ;सिकंदर;एत्माद्दौला ,चीनी का रोजा,मेहताब बाग ....सब जगह से पकड़ेंगें हमें ...ससुरों पर भ्रष्टाचार करने वाले तो पकडे नहीं जाते और चले हमें पकड़ने .कहते हैं हम गंदगी फैलाते हैं ...खुद को देखा है कभी इन्सान ने जहाँ चाहे वही थूक देता है ...जबकि जगह-जगह इनके लिए थूकदान-पीकदान रखे रहते हैं ...'' ''...अरी चुप कर इन्सान के बारे में कौन कुत्ता नहीं जानता और क्या नहीं जानता ?सड़क हो या गली का कोना जहाँ देखों लघु शंका करने लग जाता है और कहते हैं हम कुत्ते गंदगी फैलाते हैं !
...अरे हमारे लिए सार्वजानिक शौचालय  बनाकर देखो .......''सफ़ेद-काला कुत्ता यह कहकर अलाव की ओर मुंह करके बैठ गया . तभी एक किशोर कुत्ता समझदारी के साथ धीरे से बोला -''....चाचा जलकल विभाग ने तो ठीक किया जो वहां से हम कुत्तों को हटा दिया ..पानी के टेंक में गिरकर हमारे कई साथी मारे गए ....चलो कोई बात नहीं पर अब यहाँ से हमें पकड़ना .....और नाम दे दिया ''कुत्ता पकड़ो अभियान ''.....इन से कभी चोर नहीं पकड़ा जाता ,बन्दर नहीं पकड़ा जाता ,बिल्ली नहीं पकड़ी जाती ...यहाँ तक कि एक चूहा तक नहीं पकड़ा जाता पर सबसे पहले हमें ही पकड़ेंगे ...हद हो गयी ज्यादती  की भी ..घोर कलियुग है .ऊपर से कहते हैं हमने विदेशी पर्यटक को शिकार बनाया .ससुरी वो गोरी मेम मेरे पैर पर सेंडिल की हील रखकर आगे बढ़ रही थी ...दिए दो दांत मैंने भी गाड उसके पैर में ...क्या गलत किया ?पर उस दिन तगड़ी पिटाई हो गयी थी मेरी... तब से नफरत है मुझे इन्सान से ....साला देखता तक नहीं गलती किसकी और जान लेने पर हमारी उतारू .अब तो मैं किसी को गाली भी देता हूँ तो यही कहता हूँ .''.जा इन्सान बन जा ''. एक बूढा चिकना काला कुत्ता उदास स्वर में बोला ''.....बेटा यही तो इंसानियत है .इन्सान अपनी गलती देखता नहीं और हम कुत्तों को ''कुत्ता ''  ''आवारा '' कहकर अपमानित करता है .मैं तो दिन-रात बस भगवान से यही मांगता हूँ ''हे भगवान !किसी भी जन्म में मुझे इन्सान न बनाना .''उसके ये कहते ही सभी कुत्ते जोर से भोंकने लगे .


                                              शिखा कौशिक 
                               [विचारों का चबूतरा ]

रविवार, 6 नवंबर 2011

इंटरव्यू-साक्षात्कार


इंटरव्यू-साक्षात्कार 
Businesswoman Meeting with Businessman Photo (42-19752177)
[google se sabhar]
टी.वी. के   एक कार्यक्रम में प्रस्तुतकर्ता---''दर्शकों आज हम लेकर आये हैं एक अलग -हटकर इंटरव्यू .एक ओर हैं भारत के सबसे अमीर व्यक्ति ''श्री अमीर'' और दूसरी ओर है भारत  क़ा ''सबसे गरीब व्यक्ति ' बेचारा गरीब.''' अब हम इनसे कुछ  प्रश्न करके जानेगे क़ि श्री अमीर कितने सुख से जीवन बिताते हैं और बेचारा गरीब कितना दुखी रहता है?
प्रश्न१---आप दोनों यह बताये की  कितनी देर सो पाते है  रोज?


श्री अमीर--सच बताऊँ कभी-कभी मैं इतना व्यस्त रहता हूँ क़ि दिन भर में एक घंटे भी नहीं सो पाता.कभी इतना तनाव हो जाता है क़ि ए.सी. की ठंडक में और नरम-गरम गद्दे-लिहाफ से भी गर्मी-सर्दी में सुकून की नीद नहीं आती.


बेचारा गरीब--मैं तो किसी भी पेड़ की छाव में गर्मी व् अलाव जलाकर सर्दी में गहरी नीद में सो जाता हूँ. अब मेरी जेब में तो फूटी कौड़ी भी नहीं होती इसलिए  डर या तनाव कैसा.मुझे न कुछ खोने की चिंता और न कुछ सँभालने क़ा तनाव.[इसके साथ ही उसका जोरदार ठहाका ]


प्रशन२-- आप दोनों को खाने में क्या-क्या पसंद है?
श्री अमीर-अजी छोडये....ये प्रश्न ..पसंद नापसंद तो तब मायने रखता है जब मैं अपनी इच्छा से कुछ खा सकू.डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर ;डिप्रेशन और भी न जाने कितनी मानसिक बीमारियों से ग्रस्त हूँ.डाक्टर के निर्देशानुसार सुबह शाम दवाइयां खाता हूँ .....जिन्दा हूँ!
बेचारा गरीब--मुझे तो सभी पकवान पसंद हैं.हलवा-पूरी.समोसे;चाट. जब भी मौका लगता है  जी भर कर खाता हूँ.


प्रशन३-अपने परिवार को कितना समय दे पाते है?
श्री अमीर--कई-कई महीने परिवार से नहीं मिल पाता.पत्नी सामाजिक कार्यों से बाहर जाती रहती है.बेटा अमेरिका में रहता है ,बेटी कनाडा में पढती  है .न मेरे पास समय है और न उनके पास.साल में एक दिन किसी तरह निकाल  कर साथ बीता लेते है.
बेचारा गरीब--अजी हमारा क्या?....हम सब तो साथ-साथ मजदूरी करते हैं,काम के साथ बतियाते भी रहते है.साथ बैठकर खाना खाते है.सारा परिवार साथ ही रहता है.


प्रशन४-- आगे जिन्दगी में क्या पाना चाहते है?
श्री अमीर-और दौलत;शोहरत .......नहीं...नहीं......थोडा सुकून,परिवार क़ा साथ ;अच्छा स्वास्थ्य .
बेचारा गरीब---मैं तो संतुष्ट हूँ.कुछ पाने के चक्कर में तो सब आराम ही हराम हो जाता है मेरा तो बस एक ही मन्त्र है''दाल रोटी खाओ प्रभु के गुण गाओ'''.
प्रशन५--किस से  डरते है?


श्री अमीर-सब कुछ लुट जाने से.
बेचारा गरीब--किसी से नहीं.है ही क्या मेरे पास जो लुट जायेगा.मैं खुश हूँ.थोडा खाता हूँ पर आनंद  से,कुछ लुट जाने क़ा डर नहीं--सुकून ही सुकून हैं.


प्रस्तुतकर्ता---तो दर्शकों आपने आज के साक्षात्कार  की बातों से जान ही लिया होगा की बेचारा अमीर भी कितना गरीब है और श्री गरीब कितना सुखी है.साक्षात्कार  कैसा लगा ?जरूर बताइयेगा.

                                            शिखा कौशिक 

सोमवार, 3 जनवरी 2011

एक नए शोध की आवश्यकता है .

यह   खबर पढ़ी    -येदयुरप्पा के सीने में दर्द, अस्पताल में भर्ती'' तो अनायास  ही निम्न  विचार  मन में  आ गए -
 एक नए शोध की आवश्यकता है .    भ्रष्टाचारी और ह्रदय रोग .जब भी कोई भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़ा जाता है उसके दिल में दर्द शुरू हो जाता है .ऐसा क्यों होता है ? यही शोध क़ा विषय होना चाहिए .जिस जनता क़ा शोषण कर ये लोग इतना बड़ा रोग पाल लेते है वो जनता इनके पकडे जाने पर यह आस भी नहीं रख पाती कि अब भ्रष्टाचार क़ा भांडा फूटेगा मगर कमबख्त भ्रष्टाचारी क़ा ह्रदय बीच में आ जाता है और सारा मजा किरकिरा हो जाता है .इतना पैसा तिजोरियों में छुपा कर रखना भी तो आसान बात नहीं न !इतने भेद ! इतने झूठ  ! आखिर दिल तो दर्द करेगा ही .मेरा सभी शोधार्थियों से नम्र निवेदन है कि इस खास विषय पर गहन शोध कीजिये .सफल होने पर शायद नोबेल पुरस्कार तक मिल जाये .मेरी शुभकामनाये आप सभी के साथ है .
                                        शिखा कौशिक 
                           [विचारों का  चबूतरा ]