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सोमवार, 15 अगस्त 2011

आखिर सलट वॉक की जरूरत आज क्यों पड़ रही है ?'

आखिर सलट वॉक की जरूरत आज क्यों पड़ रही है ?'


कई ब्लोग्स पर सलीम खान जी की यह प्रस्तुति देखी -
इस आलेख में उन्होंने यह सूचना दी कि आगामी २१ अगस्त को लखनऊ में सलट वॉक का आयोजन होगा .उन्होंने इसे लखनऊ की तहजीब पर प्रहार बताया  है .हिन्दुस्तानी  स्त्रियों पर यह निशाना साधा है कि हिन्दुस्तानी तहजीब में स्त्री को देवी का दर्जा प्राप्त है पर आज की कुछ सिरफिरी  युवतियां अपने को देवी की जगह सलट कहलाना ज्यादा पसंद कर रही हैं .उनका कहना है ये वे युवतियां हैं जिनकी रोटी बेशर्मी वाले  रास्ते  से होकर चल रही है.
                  चलिए आपकी  सब बातें सही हैं पर एक मुद्दा मैं देती हूँ आप जैसी विचारधारा वालों  को कि ''आखिर सलट वॉक की जरूरत आज क्यों पड़ रही है ?''अब यह तर्क  मत दीजियेगा कि''युवतियों में संस्कार नहीं रहे .''क्योंकि एक लम्बी लिस्ट बनाई जा सकती है ऐसी घटनाओं की जिसमे पशुबल संपन्न पुरुष ने सिर से पैर तक ढकी स्त्री को अपनी वासना का शिकार बना डाला .सलट वॉक में शामिल होने वाली युवतियों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना उसी आदिम सोच को प्रकट करता है जो स्त्री के तन-मन पर अपना अधिकार बनाये रखना चाहती है क्योकि उसके विचार में स्त्री को उन्ही चौखटों के भीतर रहना चाहिए जो स्वामी पुरुष ने उसके लिए निर्धारित की हैं . 

                            स्त्री के साथ हुए अत्याचार हेतु स्त्री को दोषी कहने वाली
सोच को ऐसी ही सलट वॉक आइना दिखा सकती हैं.हमारी तहजीब हमारे विचारों से झलकती है.दिल्ली की उमंग द्वारा आयोजित सलट वॉक जैसी सफलता लखनऊ में भी दोहराई जाये ऐसी मेरी शुभकामना है .


[सलट वॉक क्या  है -इसे रचना जी  ने  टिप्पणी रूप  में स्पष्ट कर दिया है.आप भी  जानें -
''slut walk एक समाचार या एक क्रांति समाचार था की टोरंटो कनाडा में एक पुलिस अधिकारी ने कहा था महिला को अगर सुरक्षित रहना हैं तो slut की तरह कपडे ना पहना करे । इस पर वहां की महिला ने आपत्ति दर्ज कराने के लिये वाल्क यानी मार्च किया जिसमे उन्होने हर तरीका कपड़ा पहना और कुछ बहुत ही कम कपड़ो में भी रही

14 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

शिखा जी ,
बहुत सही प्रश्न उठाया है आपने .आज ऐसी वाक आयोजित करने का कारण भी यही है की लोगों की सोच जो स्त्रियों के कपड़ों तक आकर अटक गयी है उसे सही मोड़ दिया जाये ये सही है की ये फैशन नुमा कपडे बड़े शहरों में हैं और ऐसी घटनाएँ छोटे शहरों व् कस्बों में भी बहुत ज्यादा हैं ऐसे में सलीम खान जैसे बुद्धिजीवी लोग क्या कहेंगे.ये देश नारी की पूजा करता है और इसी देश में ऐसी घटनाएँ हमें शर्मिंदा कर रही हैं स्लत वाक जैसी स्थितियां इस देश के पुरुषों ने अपनी सोच से पैदा की हैं अब जब कुछ आत्मविश्वासी युवतियां इसका जवाब देने खड़ी हो गयी हैं तो तिलमिलाने का तो कोई प्रश्न ही नहीं उठता

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

शिखा जी,
हर युग में पुरुष प्रधान समाज इसी तरह स्त्रियों पर तरह तरह के आरोप लगाता रहा है ! हम सामान अधिकार की बातें तो बहुत करते हैं मगर जब उसे अमल में लाना होता है तो पीछे हट जाते हैं ! अगर महिलायें अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने के लिए अथवा अपने प्रति हो रहें अन्याय का विरोध करने के लिए सलट वाक करती हैं तो इससे कौन सी संस्कृति का हनन होता है ?

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

अच्छी पोस्ट शिखा बधाई

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

अच्छी पोस्ट शिखा बधाई

Rahul Paliwal ने कहा…

Million Dollar Question.

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

विचारणीय मुद्दा.

ZEAL ने कहा…

स्त्रियाँ खुद को slut कहलाना नहीं चाहतीं बल्कि उनको slut कहा गया इसके विरोध में यह प्रदर्शन चल रहा है , ये समझने की ज़रुरत है । कुछ लोग शायद समझ नहीं पाये हैं । स्त्रियों को अपनी गरिमा और मर्यादाएं पता हैं । अपने हक के लिए अवश्य लड़ना चाहिए।

NEELKAMAL VAISHNAW ने कहा…

नमस्कार....
बहुत ही सुन्दर लेख है आपकी बधाई स्वीकार करें
मैं आपके ब्लाग का फालोवर हूँ क्या आपको नहीं लगता की आपको भी मेरे ब्लाग में आकर अपनी सदस्यता का समावेश करना चाहिए मुझे बहुत प्रसन्नता होगी जब आप मेरे ब्लाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे तो आपकी आगमन की आशा में पलकें बिछाए........
आपका ब्लागर मित्र
नीलकमल वैष्णव "अनिश"

इस लिंक के द्वारा आप मेरे ब्लाग तक पहुँच सकते हैं धन्यवाद्

1- MITRA-MADHUR: ज्ञान की कुंजी ......

2- BINDAAS_BAATEN: रक्तदान ...... नीलकमल वैष्णव

3- http://neelkamal5545.blogspot.com

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

दरअसल हमें ऐसे क़ानून की ज़रूरत है जो समाज में स्त्री की रक्षा करे और उससे भी ज्यादा मानसिकता बदलने की ज़रूरत है ...

अवनीश सिंह ने कहा…

अगर आपको प्रेमचन्द की कहानिया पसंद हैं तो आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है |
http://premchand-sahitya.blogspot.com/

mahendra verma ने कहा…

विचारपरक आलेख।

Amrita Tanmay ने कहा…

मेरी भी शुभकामना है . फिर भी विकृत मानसिकता में बदलाव आये तब न.

veerubhai ने कहा…

पूरी तरह सहमत आपसे उन कारणों की पड़ताल होनी चाहिए जिन्होनें "सलट वाल्क "को प्रेरित किया आधी दुनिया को .शिखाजी , आप लोगों ने हौसला बंधाया हुआ है वरना एक श्रेष्ठ वरिष्ठ ,नेक नागरिक की गिरती सेहत ....हम सबको विचलित करने लगी है ..कब तक रुकेगा यह लावा अन्दर .....इफ्तियार पार्टी का पुण्य लूटना चाहती है रक्त रंगी सरकार ./ http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com
Tuesday, August 23, 2011
इफ्तियार पार्टी का पुण्य लूटना चाहती है रक्त रंगी सरकार .
जिस व्यक्ति ने आजीवन उतना ही अन्न -वस्त्र ग्रहण किया है जितना की शरीर को चलाये रखने के लिए ज़रूरी है उसकी चर्बी पिघलाने के हालात पैदा कर दिए हैं इस "कथित नरेगा चलाने वाली खून चुस्सू सरकार" ने जो गरीब किसानों की उपजाऊ ज़मीन छीनकर "सेज "बिछ्वाती है अमीरों की ,और ऐसी भ्रष्ट व्यवस्था जिसने खड़ी कर ली है जो गरीबों का शोषण करके चर्बी चढ़ाए हुए है .वही चर्बी -नुमा सरकार अब हमारे ही मुसलमान भाइयों को इफ्तियार पार्टी देकर ,इफ्तियार का पुण्य भी लूटना चाहती है ।
अब यह सोचना हमारे मुस्लिम भाइयों को है वह इस पार्टी को क़ुबूल करें या रद्द करें .उन्हें इस विषय पर विचार ज़रूर करना चाहिए .भारत देश का वह एक महत्वपूर्ण अंग हैं ,वाइटल ओर्गेंन हैं .

http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com//......
गर्भावस्था और धुम्रपान! (Smoking in pregnancy linked to serious birth defects)
Posted by veerubhai on Sunday, August 21
२३ अगस्त २०११ १:३६ अपराह्न

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

jabtak ochhi samaj ki gandi mansikta na badal jaye kuchh nahi ho sakta kuchh walk kar len ......