समर्थक

गुरुवार, 3 नवंबर 2011

जनता आखिर कब तक देखेगी ऐसे युवाओं की हत्या ?


जनता आखिर कब तक देखेगी  ऐसे युवाओं की हत्या ?


                                         लड़कियों को बचाने में गई इनकी जान1
                                             [कीनन व् रयूबेन की बहादुरी को शत-शत नमन ]
मुंबई में दो युवाओं की  गोली मारकर खुलेआम भीड़ के सामने हत्या कर दी गयी .कारण - वे क्लब में एक शराबी द्वारा लड़कियों से की जा रही छेड़कानी  का विरोध कर रहे थे .कीनन व् रयूबेन ने वही किया जो एक सभ्य नागरिक का कर्तव्य था.पुरस्कार  स्वरूप   उन दोनों को  मिली   मौत सारी जनता के सामने . ऐसा क्यों होता है कि आम जनता के सामने ऐसे अपराध होते हैं और वो निष्क्रिय  बनी रहती है .भीड़ मिल कर ऐसे हत्यारों को वही मौत के घाट उतार सकती है पर ....ऐसा नहीं होता .'' बस'' हो अथवा अन्य कोई सार्वजानिक स्थान लड़कियों के साथ खुलेआम बदतमीजी की जाती है पर उपस्थित जनता ''हम किसी और के मामले में क्यों पड़े ?'' सोचकर ऐसे अपराधों  को मौन स्वीकृति दे देते हैं .जनता मिल कर ऐसे अपराधों पर निर्णायक रोक लगा सकती है पर पहल तो हमें खुद से ही करनी होगी न !वरना हमारी आँखों के सामने कीनन व् रयूबेन जैसे युवाओं को ऐसे अपराधी मौत की नींद सुलाते रहेंगे .
                                                         शिखा कौशिक 

6 टिप्‍पणियां:

S.N SHUKLA ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकारें.

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

ज्वलंत प्रश्न ?

ASHA BISHT ने कहा…

sarthk prastuti...

kanu..... ने कहा…

Shi kha shikha ji awaj uthani hogi kbhi to.acchi post

Rajesh Kumari ने कहा…

janta ko apni jaan bachane ki lag jaati hai jo doosron ke dukh me apne ko aatmsaat kar lete hain vo chup nahi rah sakte.bahut achchi seekh deti hui rachna....sarahniye post..aabhar.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

हम किस समाज में रह रहे हैं..... सार्थक सवाल