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शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

''अन्ना तुम संघर्ष करो -मन-मैला पुर भी साथ है !


[गूगल से साभार ]
हाथों में तिरंगा  लिए ''वन्देमातरम'' का उद्घोष करती मन-मैला पुर की जनता सभा स्थल की ओर बढ़ रही थी .भीड़ का नेतृत्व कर रहें हैं  पूर्व-मंत्री जो कल ही क़त्ल के एक मुक़दमे में जमानत पर छूटकर  आये थे .घर से चलने से पहले पत्नी ने उनके पेट  में फल   व् मेवे   खूब  ठूस दिए थे ;ये कहकर ''कहीं अन्ना के चक्कर में तुम भी भूखे मरते फिरो .'' भीड़ में मुख्य रूप से जो शामिल थे उनमें न्यायाधीश से लेकर कोर्ट के चपरासी ,पंसारी लाला से लेकर शिक्षक ,फ़िल्मी हस्तियों से लेकर लोकल नेता और गृहिणी से लेकर सफाई कर्मचारी ,नगरपालिका अध्यक्ष से लेकर छात्र-छात्रा -ये समझ लीजिये सारी जनता ही निकल पड़ी है .किसलिए ?अजी वही '' भ्रष्टाचार हटाने के लिए जन लोकपाल बिल के मसौदे को मंजूरी दिलाना ''
मिलावट चौक पर पहुँचते ही  न्यायाधीश साहब का मोबाईल बज उठा .वे ''अन्ना तुम संघर्ष करो ;हम तुम्हारे  साथ हैं ''का नारा लगाते हुए कॉल रिसीव करने लगे ''.......नहीं भाई .....पचास से नीचे नहीं ......करोड़ों का अवैध निर्माण है ....कानून के खिलाफ जाकर स्टे दूंगा तो ......इतने का हक़ तो मेरा बनता ही है .ईमानदारी की बात है ......इससे कम नहीं .....चलो शाम तक पहुँचता हूँ ......घर पर सब सैट कर लेंगें ....अभी तो मैं भ्रष्टाचार मिटाओ ...आजादी की दूसरी लड़ाई ...रैली में हूँ .ओ. के.''और ''इन्कलाब जिंदाबाद ''का नारा लगाते हुए आगे बढ़ लिए .
भीड़ में हाथ में नारे लिखी तख्तियां  लिए माया और शीला भी थी .माया के हाथ में जो तख्ती थी उस पर लिखा था  -''फूल नहीं चिंगारी हूँ;मैं भारत की नारी हूँ ''.शीला ने धीरे  से कोहनी मारकर  माया से कहा-''देखती हो जया के कान में हीरे के कुंडल हैं....कितने के होंगें करीब ?'' माया मुंह बनाती  हुई बोली ''शीला बहन मेरे पास कहाँ ऐसे कुंडल !मैं क्या जानू इनकी कीमत  के बारे में ......सबका अपना भाग  है ....जब से जया का पति सरकारी नौकरी में लगा तब से इनके घर पर लक्ष्मी की कृपा हो गयी ......ऊपर  की कमाई भी तो बहुत है ना .......एक हमारे मियां जी हैं कितनी  बार कहा -अरे फर्जी बीमारी बता बता कर तुम भी कुछ कमा लिया करो ......पर हिम्मत ही नहीं उनमे ...वर्ना आज डॉक्टरों से ज्यादा कोई कमा रहा है क्या !''...''शीला सुर में सुर मिलाती हुई बोली ''...हाँ बहन सच कहती हो ऊपर की कमाई के लिए जिगर चाहिए ...मेरे पतिदेव पुलिस की नौकरी में लगकर भी कुछ नहीं कमा पा रहे ....थाने में जो हिस्सा बंधा है वो भी बहुत कम है ...'' तभी जोर से फिर नारा गूंजा -''सत्यमेव जयते .....सत्यमेव जयते ''
लाला जगलूट  ने भीड़ से थोडा अलग जाकर मोबाईल मिलाया अपने नौकर से -''अबे जब तक मैं इस भ्रष्टाचार निवारण रैली से वापस आऊं तब तक तू नकली  घी  बनाने  का काम पूरा करवा लियो
....और हाँ छोटू देसी चनों की बोरी में कंकड़ ठीक से मिला  लियो .....''यह कहकर फोन काट  दिया और लाला जी जोर से जनता के स्वर  से स्वर मिलते हुए चिल्लाये-''लाठी डंडे खायेंगे -जन लोकपाल बिल लायेंगे ''
रैली सभा स्थल पर पहुंची .व्यवस्था देख पत्रकार भड़क  गये  -ये क्या व्यवस्था की है संयोजकों ने ....न चाय-पानी ...न बैठने को कुर्सियां ......कल को इनके  कार्यक्रम  की हवा निकाल देते है ....ऐसी खबर छापेंगे कि  ...पता चल जायेगा''. तभी मास्टर ट्यूशन पाल जी मुस्कुराते हुए एक पत्रकार के पास पहुंचें-''भाई कल के अखबार में मेरा नाम जरूर होना चाहिए '' यह कहते हुए एक सौ का नोट पत्रकार की जेब में डाल दिला .तभी नारा गूंजा -''सोनिया जिसकी मम्मी  है ,वो सरकार निकम्मी है''
मंच के  समीप खड़े लोकल नेताओं के चेहरों पर चमक थी और वे बातें बनाने में मसरूफ थे -''सरकार की खिलाफत का बढ़िया समां बंध गया है .अब के अपनी पार्टी की सरकार आ जाये तो दो-एक खाते हम भी स्विस बैंक में खुलवा ही लें .'' तभी जोर से नारा गूंजा -''हर जोर जुल्म की टक्कर पे ;संघर्ष हमारा नारा है ....अन्ना तुम संघर्ष करो करो हम तुम्हारे साथ हैं ''
इस बीच मंत्री जी मंच पर पहुँच गए .मंत्री जी के हाथ में माइक आते ही चेलों ने ताली बजानी शुरू कर दी और ''वन्देमातरम ...वन्देमातरम ...''के उद्घोष से आकाश गूंजा दिया .मंत्री जी ओजपूर्ण वाणी में बोले -साथियों समय आ गया है भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेकने का .ये आजादी की दूसरी लड़ाई है .बोलिए -मैं भी अन्ना ...तू भी अन्ना ...अन्ना तुम संघर्ष करो ...मन मैला पुर भी साथ है .जय हिंद '' सारी जनता भी जोर से चिल्लाई -हाँ भ्रष्टाचार मिटाना है...''

[एक प्रश्न यदि मन-मैला पुर की सारी जनता ईमानदार है तो भ्रष्टाचार कैसे है ? ]

शिखा कौशिक
                      [विचारों का चबूतरा ]

सोमवार, 15 अगस्त 2011

आखिर सलट वॉक की जरूरत आज क्यों पड़ रही है ?'

आखिर सलट वॉक की जरूरत आज क्यों पड़ रही है ?'


कई ब्लोग्स पर सलीम खान जी की यह प्रस्तुति देखी -
इस आलेख में उन्होंने यह सूचना दी कि आगामी २१ अगस्त को लखनऊ में सलट वॉक का आयोजन होगा .उन्होंने इसे लखनऊ की तहजीब पर प्रहार बताया  है .हिन्दुस्तानी  स्त्रियों पर यह निशाना साधा है कि हिन्दुस्तानी तहजीब में स्त्री को देवी का दर्जा प्राप्त है पर आज की कुछ सिरफिरी  युवतियां अपने को देवी की जगह सलट कहलाना ज्यादा पसंद कर रही हैं .उनका कहना है ये वे युवतियां हैं जिनकी रोटी बेशर्मी वाले  रास्ते  से होकर चल रही है.
                  चलिए आपकी  सब बातें सही हैं पर एक मुद्दा मैं देती हूँ आप जैसी विचारधारा वालों  को कि ''आखिर सलट वॉक की जरूरत आज क्यों पड़ रही है ?''अब यह तर्क  मत दीजियेगा कि''युवतियों में संस्कार नहीं रहे .''क्योंकि एक लम्बी लिस्ट बनाई जा सकती है ऐसी घटनाओं की जिसमे पशुबल संपन्न पुरुष ने सिर से पैर तक ढकी स्त्री को अपनी वासना का शिकार बना डाला .सलट वॉक में शामिल होने वाली युवतियों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना उसी आदिम सोच को प्रकट करता है जो स्त्री के तन-मन पर अपना अधिकार बनाये रखना चाहती है क्योकि उसके विचार में स्त्री को उन्ही चौखटों के भीतर रहना चाहिए जो स्वामी पुरुष ने उसके लिए निर्धारित की हैं . 

                            स्त्री के साथ हुए अत्याचार हेतु स्त्री को दोषी कहने वाली
सोच को ऐसी ही सलट वॉक आइना दिखा सकती हैं.हमारी तहजीब हमारे विचारों से झलकती है.दिल्ली की उमंग द्वारा आयोजित सलट वॉक जैसी सफलता लखनऊ में भी दोहराई जाये ऐसी मेरी शुभकामना है .


[सलट वॉक क्या  है -इसे रचना जी  ने  टिप्पणी रूप  में स्पष्ट कर दिया है.आप भी  जानें -
''slut walk एक समाचार या एक क्रांति समाचार था की टोरंटो कनाडा में एक पुलिस अधिकारी ने कहा था महिला को अगर सुरक्षित रहना हैं तो slut की तरह कपडे ना पहना करे । इस पर वहां की महिला ने आपत्ति दर्ज कराने के लिये वाल्क यानी मार्च किया जिसमे उन्होने हर तरीका कपड़ा पहना और कुछ बहुत ही कम कपड़ो में भी रही

शनिवार, 13 अगस्त 2011

एक बिटिया का दृढ़-निश्चय !

एक बिटिया का दृढ़-निश्चय !
[६५७-माधुरी ]

इससे अच्छी खबर और क्या होगी कि एक बेटी अपनी माँ के अधूरे सपने को पूरा करने का दृढ़ निश्चय करे .''अमर उजाला ''दैनिक के ७अगस्त २०११ के अंक में पृष्ठ  -17  पर छपी खबर ''माँ का सपना बेटी करेगी  पूरा '' ने एकाएक ही अपनी ओर ध्यान आकर्षित कर लिया .बुसान एशियन  गेम्स  की ८०० मी. दौड़  में रजत  पदक जीतने वाली अर्जुन  अवार्डी ' माधुरी 'ने लखनऊ में आयोजित 600 मी . की दौड़ में स्वर्ण पदक
जीतने वाली अपनी बेटी को जैसे  ही विक्ट्री  स्टैंड पर गोल्ड मैडल दिया सारा  स्टेडियम करतल ध्वनि की गडगडाहट से गूंज उठा .तेरह वर्षीय बिटिया ''हरमिलन '' ने यह कहकर सबका दिल जीत लिया कि ''मम्मी का ओलम्पिक में खेल पाने का सपना अब मैं पूरा करूंगी ''यह सुनकर माधुरी ने तो बिटिया को गले से ही लगा लिया .''भारतीय नारी '' ब्लॉग परिवार की ओर से मैं प्रभु से प्रार्थना करूंगी कि ''इस बिटिया के दृढ निश्चय को वे  अवश्य पूरा करें ''
                    माधुरी व् हरमिलन दोनों को बहुत बहुत शुभकामनाएं  .

                                                    शिखा कौशिक 
                                

सोमवार, 1 अगस्त 2011

उमंग ने भरी उमंग !




१९ वर्षीय  छात्रा उमंग सब्बरवाल ने भारत में सल्ट वॉक  का सफलता पूर्वक आयोजन कर भारतीय पुरुष समाज को चुनौती  दी है .प्रसिद्ध साहित्यकार अज्ञेय ने लिखा है कि ''अधूरा देखना अश्लील है ''इसी पंक्ति को यथार्थ में एक आन्दोलन का रूप दे उमंग ने यह बात उठाई कि छेड़कानी  व् बलात्कार जैसी घटनाओं के लिए लड़कियों द्वारा धारण की गयी वेशभूषा जिम्मेदार नहीं है बल्कि पुरुष की स्त्री को एक उपभोग की वस्तु मानने वाली मानसिकता इसके लिए जिम्मेदार है .बड़ी संख्या में युवाओं ने इस आयोजन में हिस्सा लेकर एक आशा जगाई है .स्त्री को सम्मान देना -हमारी संस्कृति की परंपरा रही है .उम्मीद कर सकते हैं कि पुरुष अपनी सोच में बदलाव लाने का सार्थक प्रयास करेंगे .उमंग को इस सफल आयोजन पर हार्दिक शुभकामनायें .
           शिखा कौशिक