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रविवार, 30 जनवरी 2011

हम हार नहीं मानेगें

महाराष्ट्र में अतिरिक्त जिला कलक्टर को जिन्दा जला देने की घटना हमारे पूरे देश की व्यवस्था पर जोरदार तमाचा है .अगर ईमानदार व्यक्ति के साथ ऐसा ही व्यवहार किया जायेगा तो कौन ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्य को अंजाम देगा? लेकिन एक बात जो माफियाओं को समझ लेनी चाहिए वो यह है क़ि ईमानदारी को तुम न तो जला सकते हो ;न काट सकते हो -तुम केवल एक व्यक्ति के शरीर को चोट पहुंचा सकते हो .आज हम सब के दिलों में आग लगी हुई है और ये तब तक नहीं बुझेगी जब तक ज़िम्मेदार अपराधी अपनी करनी क़ा फल नहीं पा लेते .ऐसी घटनाओं से हम सहम जाने वाले नहीं ;ये घटनाएँ तो हम में सोये हुए जज्बातों को और भी ज्यादा झकझोर    कर जगा देते है .भगत सिंह के देश में अब भी शहादत   देने वालों की कमी नहीं है .मुनाफाखोरी कर देश के साथ गद्दारी करने वाले देशद्रोहियों को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए .आजादी से पहले हम विदेशियों से टकराए थे पर अब हमे अपने ही देश में पल रहे इन साँपों क़ा सिर कुचलना होगा .हमारी इस चुनौती  को स्वीकार करने को तैयार हो जाओ -
                ''तुम जला सकते हो मुझको ;काट सकते हो मुझे ,
                पर मेरे ईमान को हरगिज डिगा न पाओगे , ''   

19 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

बिलकुल सही लिख रही हैं आप.यदि इन कार्यों से ईमानदारी को ख़त्म होना होता तो कब की ख़त्म हो चुकी होती.जब तक ईमानदारी पर mar mitne वाले हैं तब तक ईमानदारी का झंडा बुलंद ही रहेगा...

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

तुम जला सकते हो मुझको ;काट सकते हो मुझे ,
पर मेरे ईमान को हरगिज डिगा न पाओगे

ये ज़ज्बे कायम रहे ....!!

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

यक़ीनन विश्वास को बनाये रखना ही होगा.....

: केवल राम : ने कहा…

ऐसे विश्वास को सलाम

ज्योति सिंह ने कहा…

भगत सिंह के देश में अब भी शहादत देने वालों की कमी नहीं है
kitni sundar baat kahi hai

तुम जला सकते हो मुझको ;काट सकते हो मुझे ,
पर मेरे ईमान को हरगिज डिगा न पाओगे
bas ye hausala bana rahe .sundar post .

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

imandari ka junoon jiske dil me hai ,kayan rahega .

सुज्ञ ने कहा…

अश्रुपूरित नमन इस इमानदारी के जज्बे को!!

और आपके सौम्य-भावों को

Patali-The-Village ने कहा…

ये ज़ज्बे कायम रहे!! धन्यवाद |

अहसास की परतें - समीक्षा ने कहा…

A nice post on current hot topic.

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वीना ने कहा…

तुम जला सकते हो मुझको ;काट सकते हो मुझे ,
पर मेरे ईमान को हरगिज डिगा न पाओगे
इसे कहते है आत्म विश्वास

दिगम्बर नासवा ने कहा…

तुम जला सकते हो मुझको ;काट सकते हो मुझे ,
पर मेरे ईमान को हरगिज डिगा न पाओगे ...

Kaash ye jajba har naagrik mein ho ... dsh ki haalat badal jaayegi ...

mahendra verma ने कहा…

यह एक दुखद घटना है।
इसके विरोध में आपके द्वारा व्यक्त विचार सराहनीय हैं।
ईमानदारी को कोई जला नहीं सकता...कोई मार नहीं सकता।v

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

sundar likha hai aapne badhai

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

sundar likha hai aapne badhai

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

sundar likha hai aapne badhai

Kunwar Kusumesh ने कहा…

बहुत सुन्दर पोस्ट.शायद इसे पढ़कर अब लोगों की रगों में नाइंसाफी और बेईमानी के खिलाफ खून दौड़े .

Sunil Kumar ने कहा…

नमन इस इमानदारी के जज्बे को!!

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA ने कहा…

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अहसास की परतें - समीक्षा ने कहा…

बहन शिखा मैने आपत्तिजनक शब्द हटा लिया है, अब आशा है कि आप मेरे ब्लॉग को असपृश्य श्रेणी मे नही रखेंगी। वैसे मेरी आपसे एक अपेक्षा है, आप कृपया एक समुचित अलंकार बताएं जिससे मै जमाल को विभूषित कर सकूं