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गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

पूनम पांडे ढूंढें से भी नहीं मिलेगी इंटरनेट पर !

पूनम पांडे  ढूंढें से भी नहीं मिलेगी इंटरनेट पर !




फेसबुक व्  ट्विटर  जैसी  सोशल वेबसाईट    पर निगरानी को लेकर कपिल सिब्बल  जी  द्वारा  की गयी  पहल को अधिकांश यूजर्स  ने गलत रूप में लिया है .सबसे  ज्यादा हंसी तो मुझे तब आई जब पूनम पांडे ने भी इस पर आपत्ति जताई .जाहिर सी बात है यदि सरकार इंटरनेट पर से आपत्तिजनक सामग्री हटाने में सफल हो जाती है तो पूनम पांडे  तो ढूंढें से भी नहीं मिलेगी .शालीनता की सारी हदे पार करने वाली ऐसी मॉडल्स और अभिनेत्रियों ने स्त्री जाति का सिर शर्म से झुका दिया है .रोज किसी न किसी अशालीन कथन अथवा फोटो को लेकर ये चर्चा में बनी रहती हैं .एक वेबसाईट पर तो पूनम पाण्डें की नग्न तस्वीर का सहारा लेकर समस्त हिन्दू स्त्रियों को अपमानजनक शब्द लिखे गए थे .अब वीना मालिक की तस्वीर पर कोई  हिन्दू मुस्लिमों  को अभद्र  शब्द लिख दे तो पूनम व् वीना का तो मुफ्त में प्रचार हो गया और पढने वालों का दिमाग गर्म. फेसबुक व् ट्विटर जैसी सोशल वेबसाईट पर निगरानी के सम्बन्ध के मुद्दे   पर शेखर कपूर ने ट्वीट में कहा, सोशल मीडिया पर हर व्यक्ति क्षमतावान और प्रभावशाली है। यह सरकार के रखवालों को डरा रहा है। '


                              मैं इससे सहमत नहीं हूँ .मनमोहन सिंह जी व् सोनिया गाँधी जी की तस्वीरों को असभ्य तरीके से -अशालीन संवादों के साथ प्रस्तुत कर किस को डराया जा रहा है ?राहुल गाँधी जी पर बलात्कार का आरोप लगाकर किस सरकार का तख्ता पलट किया जा रहा है ?नेहरू -गाँधी परिवार का शजरा प्रस्तुत कर हर सदस्य पर अवैध  संबंधों का आरोप लगाकर किस लोकतंत्र की नीव रखी जा रही ?शरद पावर जी पर किये गए एक युवक के हमले को भगत सिंह के बलिदान से जोड़कर देश की सरकार को क्या सन्देश दे रहे हैं ?
आलोचना  व् विरोध की भी एक भाषा होनी चाहिए .यह नहीं कि इन वेबसाइटों का सहारा लेकर किसी भी व्यक्ति की अस्मिता  से खेला जा सके .शरद पावर जी पर हुए हमले का अवसरवादी लेखकों ने बहुत अभद्र शीर्षकों के साथ आलेख प्रस्तुत कर फ़ायदा उठाया .सुपर हिट पोस्ट का ख़िताब भी पा लिया पर उन्होंने यह नहीं सोचा कि शरद पावर जी के व्यक्तित्व  की गरिमा को वे कितनी चोट पहुंचा रहे हैं ? मुझे राहुल जी के एक बयाँ पर समर्थन में लिखे लेख पर ''कॉंग्रेस की चमची '' जैसे अपशब्दों से विभूषित किया गया .सरकार या कॉंग्रेस के पक्ष में लिखना पैसे लेकर लिखना है और विरोध में लिखना भगत सिंह बन जाना है .ऐसी सोच वाले भी हैं इंटरनेट यूजर्स में फिर कपिल जी का इन पर निगरानी रखने का विचार कहाँ से गलत है ?इतना जरूर है कि  किसी के विरोध में लिखें या पक्ष में -शालीनता बनी रहनी चाहिए .अभिव्यक्ति का गला घोटना न होकर यह एक सार्थक पहल  होगी ऐसा मेरा विश्वास  है क्योंकि मैं न तो अपनी अस्मिता के साथ कोई खिलवाड़ पसंद करती हूँ और न ही भारत के किसी भी सभ्य नागरिक की अस्मिता के साथ .पूनम पांडे जैसे  यूजर्स को  जरूर दिक्कत होगी और उन्हें  भी जो बिना किसी सोच-विचार के किसी के विषय में कुछ भी अनर्गल लिख देते हैं .
                                                 शिखा कौशिक 
                                [विचारों का चबूतरा ]
                            

5 टिप्‍पणियां:

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ये रोक अगर लगनी है तो बिना किसी पर्सनल को मध्य में रख के होनी चाहिए ... न की सिर्फ गांधी परिवार को बीच में रख के ...

मनोज कुमार ने कहा…

बिल्कुल सही कहा है, शालीनता बनी रहनी चाहिए।

अमरनाथ 'मधुर' ने कहा…

आपने मेरे मन कि बात कही है | सरकार को गरियाना बहुत आसान है और चाँद लेने लिखर लोग स्वयं को बहादुर और देशभक्त समजहने लगते हैं | थोड़ी सही बात भी अगर सरकार के पखा कि कह दी जाये तो लोग बहुत हिकारत से लेते हैं |सोनिया गांधी और MANMOHAN सिंह जैसे शालीन लोगों को निहायत भोंडा और बदतमीजी तरीके से शब्दों और कार्टूनों से अपमानित करना असहनीय है| अगर ऐसा ही नरेंद्र मोदी या मायावती के साथ करते तो उअसका तुरत जबाब मी जाता | लोग भूले नहीं होंगे जब एक अखबार के मालिक को मान्यवर कांशीराम से उनके चरित्र हनन को लेकर सरेआम माफ़ी मांगनी पड़ी थी |

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

शालीनता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दोनों बनीं रहें.....

Always Unlucky ने कहा…

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