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मंगलवार, 31 मई 2011

भ्रष्टाचार का वास्तविक दोषी कौन ?




१५ अगस्त १९४७ को भारतवासी विदेशी दासता से मुक्त हुए .भारतीय संविधान के अनुसार हम भारतीय ''प्रभुत्व संपन्न गणराज्य के नागरिक ' हैं परन्तु विचारणीय प्रश्न यह है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के समय हमने जिस राष्ट्र का सपना संजोया था क्या आज का भारत वही भारत है ?...जिन संकल्पों के साथ देश के सामाजिक -आर्थिक विकास की आधारशिला रखी गयी  थी क्या हम उन पर अटल रहे ?..आँखें खोल कर देखिये आज हमारा राष्ट्र किस गंभीर समस्या से जूझ रहा है .पिछले कुछ समय में भ्रष्टाचार के अनेक मामलें जिनमें -२जी स्पेक्ट्रम घोटाला ,.राष्ट्रमंडल खेल से सम्बंधित घोटाला ,आदर्श सोसाइटी घोटाला,आई .पी. एल .घोटाला ,एल.आई.सी.का आवास कर्ज घोटाला आदि प्रमुख हैं -उभरकर सामने आये हैं .इस स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आज हमारे समक्ष ''भ्रष्टाचार ' ''एक चुनौती बनकर खड़ा हो गया है .यद्यपि ''भ्रष्टाचार'' देश के लिए कोई नया मुद्दा नहीं है किन्तु आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि आज तक बड़े-बड़े घोटालों में लिप्त भ्रश्ताच्रियों को कोई सजा नहीं मिल पाई क्योकि भ्रष्टाचार निवारण के लिए जो भी तंत्र बनाये गए -वो चाहे विभागीय जाँच हो या केन्द्रीय सतर्कता आयोग ,लोकायुक्त अथवा सी.बी.आई.-ये सब एजेंसिया भ्रष्टाचार की आंधी को थामने में पूर्णतया  विफल रही है .                                        ''ट्रांसपेरेंसी इंटर्नेशनल   'से लेकर 'ग्लोबल फिनांशियल इंटीग्रीटि  [g.f.t.] की ताजा रिपोर्ट भी यह संकेत करती है कि सन १९९०-९१ में अपनाये उदारीकरण के पश्चात् हमारे देश में भ्रष्टाचार तेज़ी से बढ़ा है  .ट्रांसपेरेंसी इंटरनॅशनल  की रिपोर्ट के अनुसार २००९ में भारत भ्रष्टतम राष्ट्रों की सूची में ८४ वें नंबर पर था ,लेकिन अब और भ्रष्ट होकर ८७ वें स्थान पर पहुँच चुका है.
      हर ओर भ्रष्टाचार है -चाहे वह राजनीति का क्षेत्र हो अथवा नौकरशाही  ,न्यायपालिका हो अथवा सेना -राजा-प्रजा सब भ्रश्तर में बराबर के जिम्मेदार हैं .लीलाधर जूगडी की ये पंक्तियाँ यहाँ सटीक  बैठती  हैं -

                                       ''इस व्यवस्था में 
                                         हर आदमी कही न कही चोर है .''


*भ्रष्टाचार आंकड़ों पर एक नज़र -

*स्वतंत्रता के पश्चात् जो महाघोटाले हुए हैं उनमे दस बड़े घोटालें इस प्रकार हैं -बोफोर्स घोटाला ,हर्षद मेहता कांड ,केतन पारिख कांड,हवाला घोटाला ,चारा घोटाला ,तेलगी घोटाला ,सत्यम घोटाला ओर २जी स्पैक्ट्रम घोटाला .इन दस महाघोटालों में एक अनुमान के अनुसार घोटालेबाज जनता का तीन लाख करोड़ रूपया हजम कर गए .कहने की आवश्यकता नहीं कि इतनी बड़ी रकम से देश को विकास पथ पर अग्रसर करने में कितनी सहायता मिलती .घोटालों में सीधे तौर पर राजनेताओं व् नौकरशाहों की जुगलबंदी सामने आई . 

*एक अनुमान के अनुसार स्विस बैंक में भारतीयों का ७० लाख करोड़ रूपया जमा है .कानूनविद रामजेठमलानी का मानना है कि यदि यह पैसा भारत वापस आ जाये और आज की जनसँख्या के हिसाब से सारे परिवारों में बाँट दिया जाये तो प्रत्येक भारतीय परिवार को ढाई लाख रूपये मिलेंगें .भारत की अर्थव्यवस्था अगले तीस साल तक के लिए कर्ज़ रहित हो जायेगीऔर विदेशों से लिया गया सारा क़र्ज़ भी चुकता हो जायेगा किन्तु क्या इतने भ्रष्ट राजनैतिक परिवेश में ये पैसा वापस आने की उम्मीद भी की जा सकती है ?

*राजनीतिज्ञों के पश्चात् देश का सञ्चालन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नौकरशाहों पर आरोप है कि वे प्रतिवर्ष ७ अरब डॉलर यानि ३१५ अरब रूपये डकार जाते हैं .नीरा यादव ,रवीन्दर सिंह,गौतम गोस्वामी   ,केतन देसाई का नाम भ्रष्टाचार के क्षेत्र में काफी जोर से उछला है .

*सेनाएं अपने त्याग व् बलिदान के लिए जानी जाती हैं किन्तु आज भारत में भ्रष्टाचार की दीमक इन्हें भी खोखला कर रही है .१९४८ में जीप घोटाला  ,१९७० के दशक में घटिया कम्बल खरीदने पर हंगामा से लेकर घोटालेबाज इतनी नीचता पर उतर आये कि शहीद जवानों के लिए खरीदे गए ताबूतों में भी पैसा खाने से पीछे न हटे.

*देश की न्यायपालिका खुद भ्रष्टाचार के घेरे में हैं .अपने पक्ष में फैसला करवानें के उदेश्य से ,जमानत हासिल करने आदि के लिए रिश्वत की पेशकश होते ही कई न्यायाधीशों  का ईमान डोल जाता है .जस्टिस वी.रामास्वामी ,जस्टिस शमित मुखर्जी  ,जस्टिस सौमित्र सेन नयायपालिका के दमन पर दाग की भांति हैं .ये और कई अन्य न्यायिक अफसरों से लेकर बाबुओं की अदालत में घूसखोरी की प्रवर्ति ने न्यायालयों को दलाली का अड्डा बना डाला है .

*अन्य घोटालों में वर्ष १९९६ में हुए चारा घोटाला में ६५० करोड़ की चपत लगी .झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा पर राज्य के विकास के ४हजर करोड़ के घोटालों का आरोप लगा .

*सन २०१० में तो घोटालों की भरमार रही .कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले में ३.१८ करोड़ हजम किये गए .इस घोटाले को सभ्यों द्वारा डाली गयी डकैती का नाम भी दिया गया .आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी पर आरोप है कि इसमें उनकी मुख्य भूमिका है .आजकल सी.बी.आई. रिमांड पर है .१००० करोड़ रूपये का आदर्श सोसाइटी घोटाला [शहीदों के परिवारों के लिए बने फ़्लैट ] नैतिकता की सभी सीमाओं को लाँघ गया .नेताओं और रीयल स्टेट के दलालों का गठजोड़ इस घोटाले में सारी रकम डकार गया .२जी स्पैक्ट्रम आवंटन मामले में १.७६ लाख रूपये का घोटाला हुआ .६०० करोड़ रूपये का कर्नाटक जमीन घोटाला भी चर्चा में रहा .

                     उपरोक्त घोटालों के अतिरिक्त भ्रष्टाचार के विरूद्ध काम करने वाली संस्था केन्द्रीय सतर्कता आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो गए जब सर्वोच्च न्यायलय ने पी. जी. थॉमस की नियुक्ति पर प्रश्नचिह्न लगा दिए .कौन है इन सब घोटालों के लिए जिम्मेदार? केन्द्रीय सर्कार,राज्य सरकार,नौकरशाही ,भ्रष्ट न्यायलय या हम सब ?वर्तमान केन्द्रीय सरकार पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों पर नोबेल पुरस्कार विजेता प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने रोचक टिप्पणी देकर पिछली सरकारों के आचरण पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए .उन्होंने कहा कि -''मौजूदा  सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ा है लेकिन मैं यह नहीं मानता कि यह कोई नई परिघटना है .यदि पिछली सरकार की जाँच की जाये तो वहां भी वही कहानी होगी .''अर्थात भ्रष्टाचार के लिए सत्ता में बैठे लोग जिम्मेदार हैं -यह मान लिया जाये किन्तु सेना में भ्रष्टाचार के मुद्दे  पर दी गयी एअर मार्शल [रिटायर्ड] ए. के.सिंह की टिप्पणी भ्रष्टाचार के बढते हुए जंजाल हेतु सारे समाज को ही इसके दायरे  में लेती है . .वे कहते हैं -''जो समाज में हो रहा है उससे सेना भी अछूती नहीं है .इसी समाज के लोग सेना में आते हैं इसलिए यह कहना कि अकेला सेना में  भ्रष्टाचार बढ़ा  है ठीक नहीं .समाज के सभी हिस्सों में भ्रष्टाचार बढ़  रहा है .''

*भ्रष्टाचार का वास्तविक दोषी कौन ?

समाज में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है तो आखिर दोषी कौन है ?राजनीति  ,नौकरशाही ,पुलिस विभाग,न्यायपालिका में पदासीन लोग कहाँ से आते हैं ?कौन हैं वे ?वे भी तो हमारे द्वारा चुने जाते हैं ,हमारे परिवार -समाज का ही तो हिस्सा हैं हैं .एक अनुमान कहता है की अस्सी प्रतिशत भारतीय जनता मानती है किहमारे नेता भ्रष्ट हैं किन्तु जरा अपने गिरेबान में झांककर देखिये कहीं आप अपने गली-मोहल्ले के इमानदार राजनैतिक कार्यकर्त्ता को ठुकराकर बाहुबली क्षेत्रीय  व्यक्ति को तो नहीं चुनते ?
                                     जंतर-मंतर पर नारे लगाने और अन्ना की जय-जयकार करने वालों में कितने  हैं जो अदालत में अपना काम निकलवाने  ,अपने बच्चे के अच्छे स्कूल में एडमिशन करवाने हेतु -घूस ,डोनेशन,टिप,खर्चा-पानी आदि का सहारा नहीं लेते ?यह ठीक है कि बड़े-बड़े घोटालों में नेताओं -नौकरशाहों-कार्पोरेट लौबी का गठजोड़ ही सब हजम कर जाता है किन्तु क्या ये सभी हमेशा से भ्रष्ट थे अथवा इन्हें भ्रष्ट होने का मौका हमने दिया .हम चुप रहना जानते हैं ,सहन करना जानते हैं,सब कुछ देखकर नज़रअंदाज करना जानते हैं तो फिर भ्रष्टाचार पर शोर क्यों और वो भी जमीनी स्तर पर नहीं .
                                 आज सभी के दिल में धुक-पुक है कि १५ अगस्त तक जन लोकपाल विधेयक पास हो पायेगा या नहीं पर हमारी जैसी सोयी हुई जनता इसके पास होने पर भी भ्रष्टाचार का क्या बिगाड़ पायेगी ?हम क्यों उम्मीद करते हैं कि नेता बदले,नौकरशाह बदले-हम सबसे पहले खुद को क्यों नहीं बदलना चाहते  ?हम अपने अंतर्मन तक को तो समझा नहीं पाते फिर भ्रष्टाचार को समूल नष्ट क्या कर पाएंगे ?
                                  हम सब भ्रष्ट हैं क्योंकि हम प्रत्येक अवसर पर अपनी अंतरात्मा की आवाज को दबाते हैं .पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर अब्दुल कलम जी के शब्दों में -''यदि वह अपनी अंतरात्मा की आवाज नहीं सुन सकता है तो यह भ्रष्टाचार की निशानी है क्योंकि ऐसा व्यक्ति सही और गलत में फर्क नहीं कर सकता .''
                  इसलिए सर्वप्रथम हमें स्वयं को सुधारना होगा .भ्रष्टाचार कैसे मिटे इस सम्बन्ध में डॉक्टर त्रिलोचन शास्त्री जी के द्वारा दिए गए सुझाव यहाँ बतलाना सार्थक रहेगा -
''हमें पूरे तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म करने तीन कारकों पर काम करने की आवश्यकता  है -
१-सरकार पर बड़े-बड़े उद्योग जगत,कार्पोरेट और पूंजीवादियों की मजबूत पकड़ को कम  करना होगा .
२- हमें निचले स्तर पर घूस लेने की प्रवर्ति के खिलाफ एक नई और कारगर रणनीति बनाने की जरूरत है .
३- इसके खिलाफ बुद्धिजीवियों ,स्वयंसेवी संगठनों और मीडिया को आगे आना होगा .जब तक भ्रष्टाचार चुनावी मुद्दा नहीं बनेगा -इसकी सफाई नहीं होगी .
                              इसके अतिरिक्त परिवार व् समाज को अपनी जिम्मेदारी उठानी होगी .डॉक्टर अब्दुल कलाम जी का यह कथन यहाँ सटीक बैठता है -'' देश को भ्रष्टाचार से मुक्त बनाने का काम माता-पिता और अध्यापक ही कर सकते हैं .'' हमें अपनी समस्त आत्मशक्ति को जगाकर भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा होना होगा क्योंकि इसे बढ़ावा देने के वास्तविक दोषी भी तो हम ही हैं -
                   '' छोड़ विवशता वचनों को व्यवस्था धार बदल डालें ,
                 समर्पण की भाषा को तज क्रांति स्वर में ललकारें ,
              छीनकर जो तेरा हिस्सा बाँट देते हैं ''अपनों'' में 
           लूटकर सुख तेरा सारा लगते सेंध सपनों में ;
                 तोड़कर मौन अब अपना उन्हें जी भर के धिक्कारें 
     समर्पण की भाषा को तज क्रांति स्वर में ललकारें .''

                                                      शिखा कौशिक 


                        
                 

शनिवार, 28 मई 2011

दहेज़ की आग



राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म ''विवाह '' के एक संवाद ने हमारे समाज की सच्चाई को कितने गहराई के साथ कुरेदा था  यह फिल्म देखने के करीब एक-डेढ़ साल बाद तक मुझे झंझोरता है .जब फिल्म की नायिका को एक हादसे में बुरी तरह जलने  के बाद अस्पताल में भर्ती कराया जाता है तब उसके ससुराल वाले उससे मुह न मोड़कर तय मुहूर्त में अस्पताल में ही शादी की व्यवस्था  करते  है यह देखकर डॉक्टर द्वारा कहे गए ये शब्द कितने मर्मस्पर्शी है कि-''हमने तो आज तक दुल्हनों को जलकर अस्पताल लाते हुए देखा है पर आज किसी लड़की को दुल्हन बनते हुए यहाँ पहली बार देख रहे हैं ''.
                   एक लड़की जब दुल्हन बनकर जाती है उसके ह्रदय में कितना डर होता है अपने भविष्य को लेकर ,कितना दुःख होता है अपने सगो से बिछड़ने का -उस पर यदि ससुराल में उसके साथ बुरा व्यवहार  किया जाये तो वो किस हद तक टूट जाती होगी यह अनुमान लगाना कठिन तो नहीं है !लेकिन हर दिन दहेज़ की आग में दुल्हनें जलाई जा रही हैं .
                    दहेज़ प्रथा को समाप्त करने का काम युवा पीढ़ी ही कर सकती है और उन्हें करना भी चाहिए .
                                                                शिखा कौशिक 

बुधवार, 18 मई 2011

मियाँ साहब और ब्लोगिंग

  कई महीनो बाद जब अपने घर लौटा तो सामने वाले मियां साहब को देखकर पहचान न पाया.दौड़कर उनके घर पहुंचा और सहानभूति जताते हुए बोला 'मियां ये क्या हाल बना रखा है ?लम्बी-लम्बी दाढ़ी,मैले-कुचले कपडे और सेहत तो ऐसी गिर गयी है आपकी -जैसे महीनों से कुछ न खा-पी रहे हों -सब खैरत से तो है ?'' मेरी बात सुनते ही मियां साहब के आंसू निकल आये ;अपनी कुर्सी से खड़े होते हुए मुझे जबरदस्ती उस पर बैठा दिया और खुद जमीन पर पालथी मारकर बैठ गए .भर्राए   गले से धीरे-धीरे आसमान की और देखते हुए बोले -क्या बताऊँ भाईजान मेरा तो सब कुछ लुट गया.सत्यानाश हो इस ब्लोगिंग का !बेगम ने कई ब्लॉग बना लिए हैं,दिन भर जहाँ पहले सलमा -सलीम को गोद में लिए रहती थी आज मुआ लेपटॉप  शान से कब्ज़ा जमाये है ब्लॉग-पोस्ट पर टिपण्णी आई तो बेगम का मिजाज रंगीन पर अगर नहीं आई तो जैसे घर में मनहूसियत छा जाती है .कोई ''आधुनिक नारी ''ब्लॉग से भी जुड़ गयी हैं मोहतरमा -बस फिर क्या मै तो पॉंव की जूती बन कर रह गया .खाना मांगों तो कहती हैं -''खुद बना लो मैं तो कमेन्ट कर रही हूँ .....कपडे क्या खाक धुलेंगे ? सलमा-सलीम के ब्लॉग भी बना दिए हैं.सलमा कैसे टूथपेस्ट करती है ?सलीम साईकिल चलाना सीख रहा है .......सबके फोटो चिपका दिए हैं उनके ब्लॉग पर और भाईजान यकीन मानिये सारी दुनिया आस्ट्रेलिया से लेकर अमेरिका तक; तमिलनाडु से लेकर झुमरीतलैया तक से तारीफों भरी टिपपन्नियाँ हजारों की  संख्या में आती हैं .सलमा तो अब सीधे मुंह बात भी नहीं करती ,कहती है ''...अब्बू अब तो हम सेलेब्रिटी हैं .दो सौ फौलोवर हैं हमारे !अब्बू आप भी बना लो एक ब्लॉग .''भाईजान मेरे तो सीने पर सांप लौट रहे हैं .अल्लाह की कसम यदि वो इंसान मिल जाये जिसने ये ब्लागस्पाट बनाए है मैं उसे जिन्दा जमीन में गाड़ दूँ .'' मैंने उन्हें कुछ शांत करते हुए कहा '''मियां साहब थोडा सब्र कीजिये .....अब क्या बताऊँ मैंने भी एक ब्लॉग बना रखा है ''आस-पड़ोस'' .आप भी दिल की बात एक सामूहिक ब्लॉग '''भड़ास ''से जुड़कर निकाल ही डालो पर एक बात पूछना चाह रहा हूँ 'ये दाढ़ी इतनी कैसे बढ़ गयी ?'' मियां साहब कुछ गुस्से में बोले ''...भाईजान वो नाइ भी एक ब्लॉग बना लिए है .ससुरा जब भी उसकी दुकान पर जाओ सामने के साइबर कैफे में घुसा रहता है ...दोस्ती गाठ रखी है उससे और आप तो मुझे जानते ही हो दाढ़ी बनवानी है तो उसी से इसीलिए रुके हुए हैं ...कभी तो ब्लोगर फेल होगा या इंटरनेट कनेक्ट नहीं होगा तभी दबोच लूँगा उस को !''मियां साहब के दर्द सुनकर जी भर आया .मन ही मन सोचा ''इनका दर्द तो ''हिन्दुस्तान के दर्द '' से भी बढ़कर है .'' मैं उन्हें धैर्य बंधाकर अपने घर की ओर चल दिया ....पर मेरा मन अब ख़ुशी से बल्लियों उछलने लगा जैसे ही मेरे दिमाग में यह आया कि क्यों न मियां साहब के दर्द को ही आज अपनी ब्लॉग पोस्ट का मुद्दा बनाकर ब्लॉग जगत में वाहवाही लूट ली जाये .''आमीन ''

रविवार, 8 मई 2011

'ब्लोगर सम्मान परम्परा का ढकोसला बंद कीजिये !''

'ब्लोगर सम्मान परम्परा का ढकोसला  बंद कीजिये !''
इस आलेख का जन्म वर्तमान में ब्लोगिंग जगत में चल रही ''ब्लोगर सम्मान समारोह परम्परा 'के प्रति मेरे मस्तिष्क में चल रही उधेड़-बुन से हुआ .सम्मान पाना सभी चाहते हैं और इसमें कोई बुराई भी नहीं है किन्तु ब्लॉग-जगत में जो भी सम्मान प्रदान किये गए उनका आधार क्या है ?इसकी कोई ठोस जानकारी तथाकथित सम्मान सम्मलेन आयोजित करने वालों ने अंतर्जाल पर नहीं डाली.आखिर क्या हैं ये आधार -

१-क्या किसी ब्लॉग के समर्थकों के आधार पर उसे सर्वश्रेठ ब्लोगर चुना जाता है ?

२-क्या ब्लॉग पर आने वाली टिप्पन्नियों की संख्या के आधार पर सर्वश्रेठ ब्लोगर का चुनाव होता है ?

३-आप किन ब्लोग्स को किस आधार पर सम्मान प्रदान करने हेतु विश्लेषण के लिए चुनते हैं?

४-नन्हे ब्लोगर का चयन किस आधार पर करते हैं जबकि सभी जानते हैं की नन्हे ब्लोगर स्वयं ब्लोग्स पर पोस्ट नहीं डालते उनके माता-पिता ही ये काम करते हैं ?

५-किसी बलोगर की टिपण्णी और ब्लोगर्स से श्रेठ है इसका क्या आधार है ?

६-ऐसा क्या खास है सम्मान पाने वाले ब्लोगर में जो उसे अन्य ब्लोगर से श्रेष्ठ  बनता है ?क्या उसकी लेखन क्षमता अन्य ब्लोगर्स से श्रेष्ठ है ?

७-ब्लोग्स को  किन किन kश्रेणियों  में बांटा गया -राजनैतिक,सामाजिक ,अथवा-साहित्यिक  विधा के आधार पर पर-कविता,कहानी,लघु कथा,आलेख आदि ?

                                    हो सकता है मेरा ज्ञान कम हो किन्तु मैंने सम्मान प्राप्त करने वालों की सोची तो देखी,फोटो भी देखे पर सम्मान किस आधार पर प्रदान किये गए इस सम्बन्ध में एक भी पोस्ट सम्मान आयोजित करने वालों की और से अंतर्जाल पर डाली गए हो मैंने नहीं पढ़ी  . 
                                   इस परम्परा में व्यापक परिवर्तन की जरूरत है .अभी से ही ब्लॉग जगत दो धडों में टूटता नज़र आ रहा है .मेरी समझ में नहीं आता की आखिर सम्मान की जरूरत क्या है ?मैं तो जिस भी ब्लॉग पर जाती हूँ मुझे तो ख़ुशी होती है की यहाँ पर भी एक नया ब्लोगर अपनी समस्त दुनिया को अपनी नज़र से हमारे समक्ष रख रहा है .सम्मान तो सभी के विचारों का किया जाना चाहिए .ये क्या की इसके विचार उससे बेहतर है ?
                                    इस सन्दर्भ में ''ब्लोगर मीट ''बहुत उपयोगी हो सकती हैं .ये समाज व् राष्ट्र की समस्याओं को सुलझाने की दिशा में सार्थक पहल कर सकती हैं .हर ब्लोगर का सम्मान कीजिये-सम्मान समारोह द्वारा नहीं उसका उत्साहवर्धन करके .उसकी सोच को सराह्कर.
                               ''ये ब्लोगर बेस्ट है ''कहने से ही तो सम्मान नहीं होता ये परम्परा ब्लोगर्स के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के स्थान पर कटुता की खाई ही चौड़ी करेगी .ब्लोगिंग की बगिया को फूलों से महकने दे नफरत के कांटे निकाल फेकिये .सम्मान परम्परा सभी ब्लोगर आपस में एक दूजे के ब्लोग्स पर सार्थक व् सटीक टिपण्णी देकर निभा ही रहे हैं.सभी बेस्ट ब्लोगर हैं .सभी अच्छा लिख रहे हैं ,सभी अच्छी टिपण्णी कर रहे हैं ,सभी लघु कथाएं सार्थक मुद्दे उठा रही हैं .सभी कवितायेँ दिल को छू रही हैं और .....सभी का सम्मान हमारे ह्रदय में समान रूप से है .आगे जब भी कोई सम्मान समारोह हो आप उसका बहिष्कार करें.सम्मान प्राप्त करने के स्थान पर सभी को सम्मान देने की वकालत करें ऐसा मेरा आपसे अनुरोध है .क्या आप मुझसे सहमत नहीं ?
                                                    शिखा कौशिक 

गुरुवार, 5 मई 2011

बस यही फ़र्क होता है !

कुछ दिन पहले भारत में एक महान संत ''सत्य साईं बाबा'' के महानिर्वाण से सारी भारतीय जनता का मन उनके प्रति श्रद्धा से भर गया और आँखें नम हो गयी उनसे बिछड़कर .आखिर क्यों ?केवल इसलिए क्योंकि वे प्रेम का सन्देश देते थे .हर गरीब-अमीर को समान रूप से अपने आशीर्वाद से नवाजते थे .लाखों-करोड़ों के ह्रदय सिंघासन  पर विराजमान कोई ऐसे ही नहीं हो जाता .ऐसी विभूति से बिछड़ना एक त्रासदी ही होती है .अब दूसरी  और द्रष्टि डालिए -अमेरिका में ९/११ की आतंकी घटना में अपनों को खो चुके लोग सड़कों पर निकल आये क्योंकि इस अमानवीय घटना को अंजाम देने वाला ''मानवता ''को कलंकित करने वाला ''ओसामा ''अमेरिकी ख़ुफ़िया  एजेंसी द्वारा मौत के घाट उतार दिया गया था .निश्चित तौर पर अपनों को आतंकी घटनाओं में खोने वालों की आँखों में अब भी आंसू आये होंगे पर ख़ुशी के और एक सवाल भी जहन में उठा होगा -''ओसामा तुम्हे क्या मिल गया हमारी खुशियों में आग लगाकर ?'' यही अंतर है मानवता के प्रति समर्पित साईं बाबा जैसे महान मानव और मानवता को डसने वाले ओसामा जैसे नागों के संसार से विदा होने पर हमारे भावों में .प्रेम और नफरत में ,पाप और पुण्य में ,मानव और राक्षस में .साईं बाबा हमारे मन में सदैव विराजते रहेंगे और प्रेम की ज्योति जगाते रहेंगे .ओसामा के प्रति बस यही  जुबाँ से निकलेगा 'तुम्हारा अंत हो गया अब मानवता सुकून की साँस ले सकेगी .''
                                                        साभार गूगल