समर्थक

शुक्रवार, 25 मई 2012

मध्यावधि- चुनाव कौन चाहता है ?

मध्यावधि- चुनाव कौन चाहता है ?

जनता...नहीं केवल अवसरवादी विपक्षी दल .


जिनके लिए है 


राजनीति खिलता हुआ कमल ;


जनता को पता है 


ये है दलदल 


जिसमे कोई भी हो दल 


जनता के साथ करता है छल ;


समस्याओं को सुलझाने में 


रहते हैं विफल ;


हर काम को टाल देते हैं 


आज नहीं कल

 ,
फिर चुनावों के लिए 


क्यों हो रहे विकल ;


शायद लग जाये लॉटरी 


और खटारा गाड़ी भी 


इस बार धक्के देकर 


जाये निकल 

.
shikha kaushik

मंगलवार, 22 मई 2012

''सत्यमेव जयते -सत्यमेव जयते ''



''सत्यमेव जयते -सत्यमेव जयते  ''


[google se sabhar ]




आंसू को तेजाब बना लो
इस दिल को फौलाद बना लो

हाथों को हथियार बना लो
बुद्धि को तलवार बना लो

फिर मेरे संग कदम मिलाकर
प्राणों में तुम आग लगाकर

ललकारों उन मक्कारों को
भारत माँ के गद्दारों को ,

धूल  चटा दो इन दुष्टों को
लगे तमाचा इन भ्रष्टों को

इन पर हमला आज बोल दो
इनके सारे राज खोल दो ,

आशाओं के दीप जला दो
मायूसी को दूर भगा दो

सोया मन हुंकार भरे अब
सच की जय-जयकार करें सब ,

झूठे का मुंह कर दो काला
तोड़ो हर शोषण का ताला

हर पापी को कड़ी सजा दो 
कुकर्मों  का इन्हें मजा दो ,

सत्ता मद में जो हैं डूबे
लगे उन्हें जनता के जूतें

जनता भूखी नंगी बैठी
उनकी बन जाती है कोठी ,

आओ इनकी नीव हिला दे
मिटटी में अब इन्हें मिला दे

भोली नहीं रही अब जनता
इतना इनको याद दिला दे ,

हम मांगेंगे अब हक़ अपना
सच कर लेंगे हर एक सपना

आगे बढना है ये कहते
''सत्यमेव जयते -सत्यमेव जयते  ''


                                        shikha kaushik 
                                     [vikhyat]




गुरुवार, 17 मई 2012

श्री राम ने सिया को त्याग दिया ?''-एक भ्रान्ति !





श्री गणेशाय नम: 
''हे गजानन! गणपति ! मुझको यही वरदान दो 
हो सफल मेरा ये कर्म दिव्य मुझको ज्ञान दो 
हे कपिल ! गौरीसुत ! सर्वप्रथम तेरी वंदना 
विघ्नहर्ता विघ्नहर साकार करना कल्पना ''
                     
''''सन्दर्भ  ''''
                                             ॐ नम : शिवाय !
                                            श्री सीतारामचन्द्रभ्याम नम :


'श्री  राम ने सिया को त्याग  दिया  ?''-एक  भ्रान्ति !
  Jai Shri Ram
[google se sabhar ]




  सदैव से इस प्रसंग पर मन में ये विचार  आते रहे हैं कि-क्या आर्य कुल नारी भगवती माता सीता को भी कोई त्याग सकता है ...वो भी नारी सम्मान के रक्षक श्री राम ?मेरे मन में जो विचार आये व् तर्क की कसौटी पर खरे उतरे उन्हें  इस रचना के माध्यम से मैंने प्रकट करने का छोटा सा प्रयास किया है -

हे  प्रिय  ! सुनो  इन  महलो  में
अब और  नहीं  मैं  रह  सकती  ;
महारानी  पद पर रह आसीन  
जन जन का क्षोभ  न  सह  सकती .

एक गुप्तचरी को भेजा था 
वो  समाचार ये लाई है 
''सीता '' स्वीकार   नहीं जन को 
घर रावण  के रह  आई   है .

जन जन का मत  स्पष्ट  है ये 
चहुँ और हो  रही  चर्चा है ;
सुनकर ह्रदय छलनी होता है 
पर सत्य तो सत्य होता है .

मर्यादा जिसने लांघी  है 
महारानी कैसे हो सकती ?
फिर जहाँ उपस्थित  प्रजा न हो 
क्या अग्नि परीक्षा हो सकती ?

हे प्रभु ! प्रजा के इस  मत ने 
मुझको भावुक  कर  डाला है ;
मैं आहत हूँ ;अति विचलित हूँ 
मुश्किल से मन  संभाला है .

पर प्रजातंत्र में प्रभु मेरे
 हम प्रजा के सेवक  होते  हैं ;
प्रजा हित में प्राण त्याग की 
शपथ भी तो हम लेते हैं .

महारानी पद से मुक्त करें 
हे प्रभु ! आपसे विनती है ;
हो मर्यादा के प्रहरी तुम 
मेरी होती कहाँ गिनती है ?

अश्रुमय  नयनों  से  प्रभु  ने 
तब सीता-वदन  निहारा था ;
था विद्रोही भाव युक्त 
जो मुख सुकोमल प्यारा था . 

गंभीर स्वर में कहा प्रभु ने 
'सीते !हमको सब ज्ञात है 
पर तुम हो शुद्ध ह्रदय नारी 
निर्मल तुम्हारा गात है .

ये  भूल  प्रिया  कैसे  तुमको 
बिन अपराध करू दण्डित ?
मैं राजा हूँ पर पति भी हूँ 
सोचो तुम ही क्षण भर किंचित . 

राजा के रूप में न्याय करू 
तब भी तुम पर आक्षेप नहीं ;
एक पति रूप में विश्वास मुझे 
निर्णय का मेरे संक्षेप यही .

सीता ने देखा प्रभु अधीर 
कोई त्रुटि नहीं ये कर बैठें ;
''राजा का धर्म एक और भी है ''
बोली सीता सीधे सीधे .

'हे प्रभु !मेरे जिस क्षण तुमने 
राजा का पद स्वीकार था ;
पुत्र-पति का धर्म भूल 
प्रजा -हित लक्ष्य तुम्हारा था .

मेरे कारण विचलित न हो 
न निंदा के ही पात्र बनें ;
है धर्म 'लोकरंजन 'इस क्षण 
तत्काल इसे अब पूर्ण करें .

महारानी के साथ साथ 
मैं आर्य कुल की नारी हूँ ;
इस प्रसंग से आहत हूँ 
क्या अपनाम की मैं अधिकारी हूँ ?

प्रमाणित कुछ नहीं करना है 
अध्याय सिया का बंद करें ;
प्रभु ! राजसिंहासन उसका है 
जिसको प्रजा स्वयं पसंद करे .

है विश्वास अटल मुझ पर '
हे प्रिय आपकी बड़ी दया  ;
ये कहकर राम के चरणों में 
सीता ने अपना शीश धरा .

होकर विह्वल श्री राम झुके 
सीता को तुरंत  उठाया था ;
है कठोर ये राज-धर्म जो 
क्रूर घड़ी ये लाया था .

सीता को लाकर ह्रदय समीप 
श्री राम दृढ   हो ये बोले;
है प्रेम शाश्वत प्रिया हमें 
भला कौन तराजू ये तोले ? 

मैंने नारी सम्मान हित 
रावण कुल का संहार किया  ;
कैसे सह सकता हूँ बोलो 
अपमानित हो मेरी प्राणप्रिया ?

दृढ निश्चय कर राज धर्म का 
पालन आज मैं करता हूँ ;
हे प्राणप्रिया !हो ह्रदयहीन  
तेरी इच्छा पूरी  करता हूँ .

होकर करबद्ध सिया ने तब 
श्रीराम को मौन प्रणाम किया ;
सब सुख-समृद्धि त्याग सिया ने 
नारी गरिमा को मान दिया .

मध्यरात्रि  लखन   के  संग 
त्याग अयोध्या गयी सिया ;
प्रजा में भ्रान्ति ये  फ़ैल गयी 
''श्री राम ने सिया को त्याग दिया ''!!! 
                                            शिखा कौशिक 
                                              [विख्यात }



गुरुवार, 10 मई 2012

आज करता है हिंदुस्तान सलाम ![''10 May 1857'' पर विशेष ]


आज करता है हिंदुस्तान  सलाम !

आज ही दिन KE  1857 में भड़की थी चिंगारी .जिसने दिलाई हमें आज़ादी अंग्रेजों के ज़ालिम 

राज से .स्वाधीनता संग्राम में अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले सभी शहीदों को नमन -


[''10 May 1857'' पर विशेष ]

SHAHEEDON KO SALAM..MY SONG -MY VOICE 


Shaheedon ko salaam



जो लुटा देते जान अपनी वतन के लिए 
जो बहा देते खून अपना  वतन के लिए 
उन शहीदों को ....खुशनसीबों को 
आज करता है हिंदुस्तान 
सलाम-सलाम-सलाम !

इस धरती के लाल हैं वे 
'भारत माँ के दुलारे '
कौन भुला सकता है उनको 
जगमगाते सितारे 
उन जवानों को 
उन दीवानों को 
आज करता है हिंदुस्तान 
सलाम-सलाम-सलाम .

शत्रु के आगे न झुकते 
बढ़ते कदम नहीं रुकते 
वे रण में पीछे न हटते 
माँ की आन पे मिटते 
उन सपूतों को 
देवदूतों को 
आज करता है हिंदुस्तान  
सलाम- सलाम -सलाम 
                                    शिखा कौशिक 


गुरुवार, 3 मई 2012

.ऐश -A MOTHER ...WHAT FIGURE !


                                आज  अखबार में एक खबर पढ़ी कि-''चर्चाओं में ऐश   का फिगर  ''.खबर  में बताया गया है की ऐश  के बढे 
वजन को लेकर कुछ  लोगों ने इसे एक सदमा  करार दिया है .कैसी मनोवृति  है हमारी  ?क्या आज भी आप ऐश  को केवल अपना मनोरंजन करने वाली एक अभिनेत्री मानते हैं ?वो एक छः माह की बेटी की माँ हैं .क्या उनका कर्तव्य केवल आपके आकर्षण का केंद्र बने रहना होना  चाहिए .हमारे लिए यह एक सदमा नहीं एक राहत की खबर है कि हमारी प्रिय अभिनेत्री वास्तविक जीवन में एक सफल माँ का किरदार निभा  रही है .सदमा हम तब कह सकते थे जब वो बेटी को जन्म देते ही फिल्मों की ओर   रूख कर लेती .ऐश को भावी जीवन में खूब खुशियाँ मिले हम तो यही चाहेंगें .

                                         शिखा कौशिक 
                         [विचारों का चबूतरा ]