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बुधवार, 6 मार्च 2013

IS THIS VALID IN ISLAM ?क्या इस्लाम जायज़ मानता है ?




  

 IS THIS VALID IN ISLAM ?क्या इस्लाम जायज़ मानता है ? 
क्या इस्लाम ऐसे विज्ञापन को जायज़ मानता है ?जब मुस्लिम समाज को वैवाहिक विज्ञापनों से परहेज नहीं तब ''परगाश ''जैसे बैंड पर आपत्ति क्यों ?परिवर्तन प्रकृति का नियम है !सोचिये जरा !


IS THIS VALID IN ISLAM ? IF MUSLIMS HAVE NO OBJECTION ON THIS... WHY HAVE THEY OPPOSED A BAND LIKE 'PARGASH ' CHANGE IS THE RULE OF  NATURE .
THINK !THINK !THINK !


 SHIKHA KAUSHIK 'NUTAN'

1 टिप्पणी:

Aziz Jaunpuri ने कहा…

pragati ke liye navacharo ko abhigrahit karna behatar hota hai, ak ak kadam to aage badhna hi hoga