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मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

लड़कियां जब चौखट से बाहर आती हैं !

आजकल हर ओर ''औनर किलिंग '' के नाम पर लड़कियों को मौत के घाट उतारा जा रहा है .मेरा मानना है कि ये ''हॉरर किलिंग '' हैं .15 से २० साल की युवतियों को परिवार की मर्यादा के नाम पर मौत के घाट उतारना अमानवीय कृत्य तो है ही साथ ही यह आज की प्रगतिशील नारी शक्ति को ठेंगा दिखाना भी है जबकि अधिकांश  लड़कियां अपने परिवार का नाम ऊँचा कर रही हैं .ऐसे में इज्जत के नाम पर उनका क़त्ल न करके बहुत सोच विचार के बाद परिवार को कोई निर्णय लेना चाहिए .लड़कियां चौखट से बाहर आकर कैसे हर कसौटी पर खरी उतरती हैं इन्हें मैंने इन शब्दों में व्यक्त करने का प्रयास किया है -

लड़कियां जब चौखट से 
बाहर आती हैं 
उनके साथ पग-पग चलती 
है कुल की मर्यादा 
पिता का स्वाभिमान 
माता का विश्वास 
भाई की हिदायतें 
और अनंत स्वप्नों 
की श्रृंखला  ,
लड़कियां हर कसौटी
पर खरी उतर जाती हैं 
लड़कियां जब चौखट से 
बाहर आती हैं .

वो धैर्य  से ,सहनशीलता से 
पार करती हैं हर बाधा ,
छीन लेती हैं इस जग से 
लूटा गया अपना हक आधा ,
आधी दुनिया  की बुझी 
आस फिर जग जाती है .
लड़कियां जब चौखट से 
बाहर आती हैं .

सदियों से सुप्त मेधा को 
झंकझोर कर जगाती हैं ,
चहुँ ओर अपनी प्रतिभा का 
लोहा मनवाती हैं ,
बछेंद्री बन एवरेस्ट पर 
चढ़ जाती हैं ,कल्पना रूप 
में ब्रह्माण्ड घूम आती हैं .
लड़कियां जब चौखट 
से बाहर आती हैं .

''हॉरर किलिंग'' करने वालों को अपने गिरेबान में भी झांक कर   देख लेना चाहिए कि आखिर घर का बच्चा ऐसा करने के लिए क्यों विवश हो जाता है .वो क्यों बाहर के व्यक्ति पर  विश्वास कर घरवालों से बगावत कर देता है ?क्यों घर से भागने को विवश होता है ? कहीं न कहीं कमी उन में ही है जो मर्यादा का नाम लेकर अपने मासूम बच्चों  का  खून  बहा रहें हैं .

21 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

bahut sahi bat kahi hai aapne shikha ji ,jimmedar kahin n kahin sanskaron ki kami hai jo bachchon ko aisa karne ko vivash kar rahi hai.aaj hi supreme court ne bhi apne faisle me honour killing ko apradh mana hai aur iske liye uchit karyavahi ke sarkar ko nirdesh diye hain.

यशवन्त माथुर ने कहा…

एक दम सही बात कही आपने.

Arunesh c dave ने कहा…

what more 1 can say but problem lies in the society when ever a girl marries without permission whole community makes fun of the family some times this leads to honor killing

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सब कुछ लड़कियों को संभालना होता है.... सही लिखा आपने

amrendra "amar" ने कहा…

waah kya khub kaha hai .........bikul satya

Sunil Kumar ने कहा…

एक सन्देश देती हुई एक जरुरी पोस्ट, सही लिखा आपने

mahendra srivastava ने कहा…

बिल्कुल सच।

nilesh mathur ने कहा…

सुन्दर और विचारणीय रचना!

ghazalganga ने कहा…

मैं आपके लगभग सभी ब्लॉगस पर गया. गद्य और पद्य दोनों पर आपकी बराबर की पकड़ है. शोध कार्य करते हुए इतने सारे ब्लॉगस को अपडेट रखना आपकी रचनात्मक ऊर्जा को दर्शाता है. मेरी शुभकामनायें क़ुबूल करें.
----देवेंद्र गौतम

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

सत्‍य को सलीके से बयां किया है आपने। बधाई।

---------
देखिए ब्‍लॉग समीक्षा की बारहवीं कड़ी।
अंधविश्‍वासी आज भी रत्‍नों की अंगूठी पहनते हैं।

shikha varshney ने कहा…

दुनियाभर की जिम्मेदारी लड़कियों के ही जिम्मे.
बहुत सही लिखा है आपने.

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

संवेदनाओं को विस्तार देेता है आपका शब्द संसार। अच्छा लिखा है आपने।

मैने अपने ब्लाग पर एक कविता लिखी है-शब्दों की सत्ता। समय हो तो पढ़ें और प्रतिक्रिया भी दें।

http://www.ashokvichar.blogspot.com/

सदा ने कहा…

बिल्‍कुल सही कहा है आपने ... ।

निशांत ने कहा…

honour killing karne waalon ke liye

ekdam sahi kavvita..

they blame on society and become a part of that..
they should not marry..if they kill brutally..

मदन शर्मा ने कहा…

एक सन्देश देती हुई एक जरुरी पोस्ट, सही लिखा आपने

मदन शर्मा ने कहा…

एक सन्देश देती हुई एक जरुरी पोस्ट, सही लिखा आपने

मदन शर्मा ने कहा…

एक सन्देश देती हुई एक जरुरी पोस्ट, सही लिखा आपने

मदन शर्मा ने कहा…

एक सन्देश देती हुई एक जरुरी पोस्ट, सही लिखा आपने

अरूण साथी ने कहा…

सारगर्भित रचना

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

बहुत सुन्दर सशक्त रचना के साथ आपने एक बहुत जरूरी सवाल उठाया है ... जो निर्दोषों का खून बहते है ओनर किलिंग के नाम पर ..फिल्म देखते समय फ़िल्मी हीरो हेरोइन का साथ देते हैं रील में ..और रियल में प्रेम का गला घोंटते है ..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सार्थक और बहुत शशक्त लेखन ...