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गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

माया बाई का मुजरा-कब रूकेगा स्त्री का अपमान

माया बाई का मुजरा-कब रूकेगा स्त्री का अपमानन्नीचे 

Flax Awareness Society



WEDNESDAY, APRIL 11, 2012


माया बाई का मुजरा-FALX AWARENESS  SOCIETY  -ब्लॉग पर 


डॉ.ओ.पी वर्मा जी ने  निम्नं  

सन्दर्भ  देकर यह  पोस्ट प्रस्तुत की है  -
कल हमने फेसबुक पर माया बाई का मुजरा देखा, जिसे भड़ास पर भी लगा दिया है। लेकिन वो मुजरे में गा क्या रही है, यह स्पष्ट नहीं हो रहा था। इसलिए हमने वो मुजरा के बोल पता कर लिये है। आप भी सुन लीजिये। दुपट्टा मुख्यमंत्री की कुर्सी को समझियेगा।



                                           मायावती जी का इसप्रकार  चित्रण  करना पूरे   भारतीय  समाज   के मुंह   पर जोरदार   तमाचा   है ...आज तक हम उन बालाओं को तो इस अगरिमामय पेशे से निकाल नहीं पायें जो दुर्भाग्यवश इस पेशें में फसी हैं उस पर अपने संघर्षों से एक दलित परिवार में जन्म लेकर भी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री तक के सफ़र को तय करने वाली हमारी दलित नेत्री को इस रूप में प्रस्तुत करना मुंह पर तमाचा ही है .हम उनकी  आलोचना भ्रष्टाचार के मुद्दे पर शालीन तरीके   से  कर सकते हैं ....पर इस रूप में दलित  नेत्री को प्रस्तुत करना नीचता की पराकाष्ठा है .क्या भारतीय पुरुषों का पुरुषार्थ समाप्त हो चुका  है जो बहनों को इस रूप में प्रस्तुत कर मुजरा करवाया जा रहा है .शर्मनाक  ....निंदनीय ......घोर आपत्तिजनक ....मनोरंजन  या आलोचना का यह रूप यदि भारतीय पुरुषों ने अपनाया है तो उन्हें चुल्लू   भर पानी में डूब मरना चाहिए क्योकि  यह भारतीय संस्कृति के सर्वदा विरूद्ध है .हमारी  संस्कृति में शत्रु पक्ष की महिला को भी ''देवी  ''कहकर संबोधित किया जाता  है .पोस्ट करने वाले ब्लोगर डॉ.ओ.पी.वर्मा जी एक उच्चस्तरीय डॉक्टर हैं .सुशिक्षित हैं फिर एक बार भी उन्होंने इस पोस्ट को फेसबुक से ब्लॉग पर डालने से पूर्व यह क्यों   नहीं सोचा कि मायावती जी सर्वप्रथम एक महिला हैं .....इसके पश्चात् एक ऐसे दलित समाज का प्रतिनिधत्व करती है जिसने युगों तक शोषण सहा है .मायावती जी का संघर्षपूर्ण जीवन किसी से नहीं छिपा है .ठीक है आज उन पर भ्रष्टाचार के  आरोप है ..पर उसका मतलब ये तो नहीं कि कोई भी उन्हें इस रूप में प्रस्तुत करे .क्या आप अपनी बहन ....बेटी को इस रूप में प्रस्तुत करना चाहेंगे .स्त्री को मनोरंजन  की वस्तु बनाकर उससे मुजरा सुनने की जिस की इच्छा शेष है वो किसी का बेटा ....भाई नहीं हो सकता .डॉ.ओ.पी वर्मा जी न केवल फेसबुक से इस निंदनीय सामग्री को लायें हैं बल्कि पोस्ट के नीचे उनकी टिप्पणियां भी घोर अशालीन हैं -उनका परिचय व् टिप्पणिया -



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Vaibhav Hospital, 7-B-43, Mahaveer Nagar III, Kota, Raj., India
पिछले कई वर्षों से हमारी संस्था “अलसी चेतना यात्रा” अलसी के बारे में जागरूकता लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। हमारी संस्था के अन्य उद्देश्य हैं। •जैविक खाद्य पदार्थों के उत्पादन, उपयोग को प्रोत्साहन देना और लोगों को जैविक खाद्य पदार्थों के लाभ समझाना। •खाद्य पदार्थों में मिलावट, जो आज की सबसे गंभीर समस्या है, के बारे में लोगों को जानकारी देना। मिलावट रोकने के लिए सम्बंधित विभागों से सामंजस्य रखते हुए कार्यवाही करना। •अलसी के तेल, पनीर, तथा कैंसर रोधी फल व सब्जियों से विकसित किया हुआ डॉ. बुडविज आहार-विहार कैंसर के रोगियों को उपलब्ध करवाने हेतु पूरे भारत में बुडविज प्रोटोकोल कैंद्रों का निर्माण करना। •कोटा में देश-विदेश के रोगियों को उच्च स्तरीय प्राकृतिक और आयुर्वेदिक चिकित्सा उपलब्ध कराने हेतु विशाल हर्बल पार्क विकसित करना। go.flax@gmail.com ०९४६०८१६३६०
Dr. O.P.Verma said...
सचमुच दु्हन सी लग रही है माया... शादी कर लेती तो अभी 2-4 बच्चों की मां होती।
Dr. O.P.Verma said...
आदरणीय दिलबाग विर्क जी, चर्चामंच पर प्रस्तुत होना गर्व की बात मानी जाती है। आपने चर्चामंच पर माया बाई का मुजरा करवा कर बड़ा अच्छा काम किया है। आपका किन शब्दों में शुक्रिया करूँ। मुफलिसी में हमें दो पैसे मिल गये। और आजकल मायाबाई भी फालतू ही बैठी थी। आपके याद ही होगा जबसे अखिलेश बाबू नये नये दारोगा बने हैं, उन्होंने लखनऊ के सारे कोठों पर माया के मुजरे पर पाबंदी लगा दी है। इसलिए आपको आगे भी कहीं मौका मिले मुजरा करवाना हो तो सेवा का अवसर देना। आपके लिए तो मायाबाई तो खाली बख्शीश में भी नाच लेगी।
Dr. O.P.Verma said...
गब्बर का ही डर है वो आगया तो कांच पे नचायेगा, उसको खबर मत होने देना रचना जी।
                       दुखद है रचना जी व् राजेश कुमारी जी ने एक स्त्री होकर भी  मायावती जी के इस आपत्तिजनक चित्रण को गलत न बताकर ये  टिप्पणियां कर दी है -
रचना दीक्षित said...
बहुत नाइंसाफी है....
Rajesh Kumari said...
hahaha vaah kya pairodi banaai hai.chitra to lajabaab hai.                                                              मैं इसप्रकार  की  किसी भी पोस्ट के विरूद्ध हूँ  और आप सभी से चाहती हूँ  की आप भी विरोध करें ताकि फेसबुक की गंदगी ब्लॉग जगत के निर्मल वातावरण  को प्रदूषित    न करे                                                                                                                                              जय हिंद !                                                              शिखा  कौशिक 

3 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

.shikha ji ye bat aapne uthayi hai iske liye vastav me aap badhai ki patr hain .o.p. verma ji shayad aaj is ukti se navazne yogya rah gaye hain jo kabhi mati ne kahi thi aaj nari kah rahi hai-''mati kahe kumhar se tu kya ronde mohe, ek din aisa aayega main rondungi tohe.''manzil pas aayegi

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

आपके उच्च विचारों से हम भी सहमत है |शिखा जी किसी का भी अपमान नहीं होना चाहिए |

Bharat Bhushan ने कहा…

मायावती के बारे में ऐसे लिखना पुरुष समाज (ऐसा लिखने वाले पुरुषों) की हीनभावना का परिणाम है और उसके पीछे तुच्छ सोच है. मायावती ने कुछ ग़लत किया है तो उसकी आलोचना करने में अपनी गरिमा पर कालिख पोतने की क्या आवश्यकता है?