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शनिवार, 12 जनवरी 2013

मर्यादा का ले नाम मत अपना पल्ला झाड़ पुरुष !

 मर्यादा का ले नाम मत अपना पल्ला झाड़ पुरुष !
 Man beating woman,silhouette photo

स्त्री के विरुद्ध किये जाने वाले अपराधों के लिए स्त्री को उत्तरदायी ठहराने  का चलन युगों युगों से रहा है .दिल्ली गैग रेप [१६ दिसंबर २०१२ ] की दुर्घटना के बाद से जहाँ आम भारतीय जनता की सोच इस ओर भी मुड़ी है कि-' हमें अपने पुत्रों को भी चरित्रवान बनाने की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है न कि केवल पुत्रियों पर मर्यादा के नाम पर प्रतिबन्ध लगाने की'  वही संस्कृति के रक्षक बनने वाले कई पुरुष पुन:  जनता को उसी लिंग-भेदी मानसिकता की ओर लौटा ले जाना चाहते हैं .जिसने मानव के सम मानवी को दोयम  दर्जे का प्राणी मात्र बनाकर छोड़ दिया है .वास्तविकता तो  ये है कि बलात्कार व् स्त्री हरण जैसी दुर्घटनाओं के लिए सृष्टि के आरम्भ से ही स्त्री द्वारा मर्यादा उल्लंघन उत्तरदायी नहीं है बल्कि पुरुष द्वारा स्त्री के साथ किया जाने वाला छल व् बल प्रयोग उत्तरदायी है .एक अन्य तथ्य भी यहाँ उल्लेखनीय है कि इतिहास से लेकर वर्तमान तक बलात्कार व् इसके प्रयास की दुर्घटनाएं मर्यादित नारी के साथ ही घटित हुई हैं .
                             दम्भी व् अल्पज्ञानी पुरुष जब माता  सीता द्वारा मर्यादा -उल्लंघन करने का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं तब वे विस्मृत कर देते हैं कि माता सीता ने '' 'अतिथि देवो भव:' के आर्य  संस्कार का पालन करते हुए ही ब्राह्मण वेश धारी रावण का अतिथि-सत्कार किया था .देखें -
'' द्विजतिवेशेन.................तथागतं ''[श्लोक३५ ,अरण्य कांड  ,सप्तचत्वारिंश :-श्रीमद वाल्मीकीय रामायण '']
अर्थात-वह[रावण]ब्राहमण वेश में आया था ,कमण्डलु और गेरुआ वस्त्र धारण किये हुए था .ब्राह्मण-वेश में आये हुए अतिथि की उपेक्षा असंभव थी}
                   इस   प्रसंग में यह भी विचारणीय है  कि रावण आर्य-संस्कृति से भली-भांति परिचित था और जानता  था कि आर्य-नारी द्वार पर आये ब्राह्मण अतिथि की  उपेक्षा कदापि नहीं कर सकती इसी कारण रावण ने छद्म ब्राह्मण-रूप धरकर छल से माता  सीता का हरण किया यहाँ लक्ष्मण  -रेखा को पार  करने अथवा मर्यादा उल्लंघन का कोई उल्लेख ''श्रीमद वाल्मीकिरामायण '' '' श्री रामचरितमानस '' ''श्री अध्यात्मरामायण '' -में नहीं आता .[सीता-हरण प्रसंग पढ़ें ]
              ''श्रीरामचरितमानस''के 'लंका  कांड ''में ''लक्ष्मण-रेखा'' का उल्लेख आता है  जहाँ मंदोदरी रावण को श्री राम से युद्ध न करने की  सलाह देते हुए कहती हैं कि -
''रामानुज लघु रेख खिचाई ,सोउ  नहि नाघेउ असि मनुसाई ''
[अर्थात आपकी (रावण)ऐसी तो बहादुरी है कि लक्षमण जी ने  धनुष की रेखा खींच दी थी ;वह आपसे लांघी न गयी ]
               यहाँ भी यह स्पष्ट नहीं है कि वह रेखा  लक्ष्मण  जी ने सीता-हरण प्रसंग से पूर्व माता सीता को पार न करने की सलाह देते हुए खीची थी अथवा अन्य किसी प्रयोजन से  , सीता हरण से पूर्व अथवा पश्चात .किस उद्देश्य से ,कब व् कहाँ ये रेखा खींची गयी -यह एक अलग शोध का विषय है पर माता सीता ने किसी लक्ष्मण रेखा को पार किया इसका कोई प्रमाण नहीं है . इसके अतिरिक्त पुरुष-वर्ग का ये दावा भी निराधार है कि माता सीता को मर्यादा-उल्लंघन का दंड भुगतना पड़ा .वास्तव में माता सीता को उसी पितृ सत्तात्मक  समाज की भेदभाव पूर्ण मानसिकता का दंड भोगना पड़ा जो  अग्नि-परीक्षा द्वारा अपनी शुचिता प्रमाणित करने वाली स्त्री को भी पवित्र नहीं मानता और इसी के परिणामस्वरूप अहिल्या  -उद्धार करने वाले उदार पुरुष श्रीराम को भी आर्य-कुल श्रेष्ठ  माता सीता के त्याग के लिए विवश होना .
                                                         पुरुष   के छल-बल  के उदाहरण यत्र-तत्र-सर्वत्र साक्ष्य-रूप में बिखरे पड़ें हैं .इंद्र  द्वारा महर्षि  गौतम का छद्म रूप धरकर देवी अहिल्या से बलात्कार छली पुरुष के छल का  उदाहरण है अथवा स्त्री के मर्यादा -उल्लंघन का ?   प्रह्लाद -माता साध्वी  कयाधू का इंद्र द्वारा हरण को  किस श्रेणी में रखगें  आप ?    आकाश -मार्ग से ब्रह्मा जी के पास जाती अप्सरा पुञ्जक्स्थला [वाल्मीकि रामायण ,युद्धकाण्ड सर्ग-१३ ] व् अपने प्रिय नलकूबर से मिलन को लालायित हो उसके समीप जाती रम्भा से रावण का बलपूर्वक बलात्कार[वाल्मीकि रामायण ,उत्तर कांड सर्ग-२६ ] इन दोनों अप्सराओं की कौन सी मर्यादा उल्लंघन को प्रमाणित करता है ?कदापि नहीं ! ये सब मर्यादाहीन पुरुष के दुराचरण के परिणाम हैं .दिल्ली गैग रेप की शिकार युवती को भी छह दरिंदों में से एक तथाकथित नाबालिग राजू ने ''बहन जी '' कहकर छल से बस में चढ़ाया था .पुरुष का छल-बल पुरातन काल से वर्तमान तक स्त्री विरुद्ध अपराधों का कारण रहा है जो आज समाज में उभरकर सामने आ रहा है .''शादी का झांसा देकर '' ''नौकरी का लालच देकर '' युवतियों को फँसाना  अथवा प्रेम-जाल में फँसाकर यौन-शोषण कर नरकतुल्य जीवन भोगने के लिए छोड़ देना- जैसा दुराचरण आज के छली पुरुष की पहचान  बन चुका है . छली पुरुष के लिए मर्यादित आचरण की मांग क्यों जोर नहीं पकड़ पाती  ?क्यों मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के बाद कोई पुरुष इस उपाधि को प्राप्त करने हेतु लालायित नहीं दिखाई पड़ता ? इन सवालों में है जड़ स्त्री विरुद्ध अपराध की .हर बलात्कार के बाद पुत्रियों पर मर्यादित आचरण का फंदा और भी ज्यादा कस दिया जाता है और दुराचारी पुरुष और भी उद्दंडता   के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया जाता है .यदि स्त्री विरुद्ध अपराधों में कमी लानी है तो अब पुत्रियों से ज्यादा पुत्रों को मर्यादित करने की आवश्यकता है तभी श्रीराम जैसे पुत्र भारतीय समाज को मिल पायेंगें जो रावण ,बालि जैसे दुराचारियों का अंत करने में सक्षम होंगे और भारतीय समाज में नारी को प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त हो पायेगा .

                        डॉ.शिखा कौशिक 'नूतन'



शुक्रवार, 11 जनवरी 2013

हास्य व्यंग्य -मोहन भागवत धन्य-धन्य

हास्य  व्यंग्य  -मोहन भागवत धन्य-धन्य 


It is the mindset towards women which has to be fought: Ashutosh धन्य हैं मोहन भागवत जी .हिन्दू धर्म के सोलह-संस्कारों में से एक सर्वाधिक पवित्र संस्कार विवाह को सौदा जो बतलाया है उन्होंने .लो जी ये भी कोई बात है कि  युगों युगों से इस पवित्र संस्कार को ''विवाह'' ही कहा जाये और यदि पर्यायवाची प्रयोग हो तो ''शादी '' . चिल्लाते... चिल्लाते रहो ''विवाह ...विवाह....शादी... शादी ''.अब बस सही शब्द बोलना सीख लो .विवाह नहीं इसे ''सौदा कहते हैं जी .सबसे ज्यादा परेशान हैं बैंड-बाजे वाले ..बार बार प्रक्टिस कर रहे हैं इस गाने की-आज मेरे यार का सौदा है ...यार का सौदा है मेरे दिलदार का सौदा है .''  एक गाना हो तो तैयारी कर भी लें पर साहब जी यहाँ तो लम्बी लाइन है ऐसे गानों की .सारा मामला ही गड़बड़ हो गया .एक बुजुर्ग गाते जा रहे हैं सड़क पर -कोई मेरा भी सौदा करा दे तो फिर मेरी चाल देख ले ...जरा जम के भैय्या  '' . उधर देखिये वैडिंग हॉल में धूम मची हुई है डी.जे.पर -''मुबारक हो तुमको ये सौदा सुहाना ...'' जवान खून की बात मत पूछिए .बाइक पर गुनगुनाते जा रहे हैं साहबजादे -''मुझसे सौदा करोगी ****मुझसे सौदा करोगी .अब फिल्मकारों के लिए भी चुनौती है फिल्म के शीर्षक  रखना .राज श्री वाले सोच रहे होंगे -''विवाह या सौदा '' ''एक सौदा ऐसा भी '' रख लें तो फिल्म सामाजिक क्रांति ला देगी .
                                एक ओर  क्रांति  का विषय है पंडित वर्ग के लिए . अब जिजमान आकर चरण -स्पर्श करते हुए निवेदन करते हैं -''पंडित जी मेरे बेटे का ''सौदा -मुहूर्त ''  तो निकाल दीजिये ''  अथवा ''पंडित जी मेरी बिटिया की जन्म -पत्रिका बाँच कर बताइए तो सही इसका ''सौदा '' कब व् कैसे लड़के से होगा ?'' अब पंडित जी के स्वर भी पलटे हुए हैं ,वे गंभीर वाणी में कहते हैं -''जिजमान आपकी पुत्री की कुंडली में मांगलिक दोष है इसका सौदा किसी मांगलिक लड़के के साथ ही कीजियेगा .''
                      छपाई वाले भी क्रांति के इस युग से प्रभावित हुए हैं .अब विवाह के निमंत्रण कार्ड पर छप रहा है -''शुभ सौदा निमंत्रण ''.कार्ड के ऊपर दाई ओर छपता है -''शुभ सौदा '' और  अन्दर कार्ड का प्रारूप इस प्रकार है -'आयुष्मति '' व् ''चिरंजीव ''के सौदा संस्कार की सुमधुर बेला पर आपको सादर आमंत्रित करते हैं ''
                  अब हर सरकारी व् गैरसरकारी फार्म भरते समय इस कॉलम को भी ध्यान से भरे -
''विवाहित /अविवाहित '' के स्थान पर ''सौदा हुआ /सौदा नहीं ''
                       एक साथ इतने क्रन्तिकारी परिवर्तन समाज में लाकर मोहन भगवत जी ने उत्सव  का माहौल भारतीय  समाज में पैदा कर दिया है .बस भगवत जी इस प्रश्न का जवाब आप हमें ई.मेल पर जरूर भेज दें -क्या आपने सौदा किया है  ?यदि नहीं तो क्यों ?
             जय हिन्द ! जय भारत !

बुधवार, 9 जनवरी 2013

रेप इण्डिया में नहीं भारत में ही होते हैं !
 Is crime against women an issue of 'Bharat' versus 'India'?Mohan Bhagwat
भागवत जी ने जो कहा वो बिना सोचे समझे कहा है यदि वे पाश्चात्य संस्कृति और भारतीय संस्कृति का गूढ़ अध्ययन कर बयान देते तो ऐसा बयान कभी न देते कि रेप  भारत में नहीं इण्डिया में हो रहे हैं .पाश्चात्य संस्कृति के अनुसरनकर्ता तो आज लिव-इन जैसे संबधों को बढ़ावा दे रहे हैं जहाँ न कोई बंधन है ,न जिम्मेदारी .जितने दिन चाहो मौज मनाओ और अलग हो जाओ और इन संबंधों से उत्त्पन्न संतान को सड़क पर कुत्तों को नोचने के लिए छोड़ दो .इस वर्ग के लोग विवाह जैसी संस्था में विश्वास ही नहीं करते और एक से अधिक पुरुष/स्त्री शारीरिक संबंधों में इन्हें कुछ गलत नज़र नहीं आता .रेप करता है वो वर्ग जो भारतीय संस्कृति के द्वारा विवाह पूर्व शारीरिक संबंधों को अवैध  व् विवाह के पश्चात् एक स्त्री से संम्बंध रखने पर जोर देता है और नैतिक रूप से कमजोर अपनी इन्द्रियों को वश में न रख पाने वाला पुरुष ये कुकृत्य कर डालता है .भागवत जी को अपने बयान देते समय बहुत कुछ सोच लेना चाहिए ऐसी मेरी सलाह है उन्हें !
                           जय हिन्द ! जय भारत !
                      शिखा कौशिक 'नूतन '

शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

 रामायण में निर्देशित   बलात्कार के लिए दंड -एक विश्लेषण


from google

दिल्ली में हुए गैंगरेप  की शिकार युवती के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे भारतीय समाज को झंकझोर डाला है .आरोपियों पर सख्त से सख्त व् शीघ्र अति शीघ्र सजा की मांग को लेकर जनता का सैलाब सड़कों पर उतर आया है .अधिकांश जनसमूह इन अपराधियों को फांसी की सजा दिए जाने के पक्ष में है तो कानूनविदों की राय है कि भारतीय कानून के अनुसार इन्हें केवल उम्रकैद कीसजा  दी जा सकती है .किसी का मत है कि इन्हें हाथी के पैरों   टेल कुचलवा दिया जाये तो कुछ की मांग है कि इन्हें सीधे आग के हवाले कर दिया जाये .कुछ का मत है कि इनके अंग भंग कर इन्हें नपुंसक बना दिया जाये .विगत चालीस वर्षों में महिला विरूद्ध अपराधों में जिस तरह आठ सौ फीसदी की बढ़ोतरी हुई है [नवम्बर २०११ में एन.सी.आर.बी.द्वारा प्रकाशित आंकड़े ]  उसके परिपेक्ष्य में मानव समाज के माथे पर कलंक स्वरुप इस अपराध 'बलात्कार' के लिए कड़ी  सजा निर्धारित  करने  का समय  आ गया  है .इसी संदर्भ में हमें हमारे शीर्ष मार्गदर्शक धार्मिक ग्रन्थ ''श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण '' में उल्लिखित इस घिनोने अपराध 'बलात्कार' हेतु दण्डित किये गए पापाचारी पुरुषों से सम्बद्ध प्रसंगों पर विचार करना आवश्यक  ही नहीं समयोचित भी है क्योंकि ''रामायण '' पग पग पर हर भारतीय मनुज को उचित आचरण हेतु निर्देशित करती है .
                                   नारी की मान -मर्यादा को रौदने वाले इस दुष्कर्म का सूत्रपात करने का श्रेय देवराज इंद्र को जाता है .महामुनि गौतम की भार्या देवी अहल्या के रूप-सौन्दर्य पर आसक्त होकर काम के वशीभूत इंद्र ने महामुनि गौतम का छद्म रूप धरकर देवी अहल्या से बलात्कार किया .इस दुष्कर्म के परिणामस्वरूप  इंद्र को जो दंड  दिया गया उसका उल्लेख   ''श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण'' में इस प्रकार वर्णित है -
[''मम रूपं समास्थाय ....तत्क्षनात''   (श्लोक-२७,२८ ,बालकाण्डे  अष्टचत्वारिंश :  सर्ग: पृष्ठ १२६ ) ]
''अर्थात दुर्मते तूने मेरा रूप धारण कर यह न करने योग्य पापकर्म किया है ,इस लिए तू विफल (अन्डकोशों से रहित ) हो जायेगा .रोष में भरे महात्मा गौतम के ऐसा कहते ही देवराज इंद्र के दोनों अंडकोष उसी क्षण पृथ्वी पर गिर पड़े ]
                 इसके अतिरिक्त 'उत्तर कांड  ' के ' विंश:सर्ग: 'में भी रावण पुत्र मेघनाद [ जो देवराज इंद्र को कैद कर इन्द्रजीत कहलाया ]के  द्वारा कैद कर लिए जाने पर ब्रह्मा  जी मेघनाद को वरदान देकर इंद्र को उसकी कैद से मुक्त कराकर पराजय व् देवोचित तेज़ नष्ट हो जाने से दुखी इंद्र से कहते हैं -
''तम तू दृष्टा... .... ...सुदुष्क्रतम ''[श्लोक-१८ पृष्ठ   -६८९] अर्थात -भगवान ब्रह्मा जी ने उनकी इस अवस्था को लक्ष्य किया और कहा -शतक्रतो !यदि आज तुम्हे इस अपमान से शोक और दुःख हो रहा है तो बताओ पूर्वकाल में तुमने बड़ा भारी दुष्कर्म क्यों किया था ?'
''सा ........., .......तदाब्रवीत '' [३० से ३५ श्लोक ,पृष्ठ -६८२ ]-इंद्र !तुमने कुपित और काम पीड़ित  होकर उसके [अहल्या] के साथ बलात्कार किया .उस समय उन महर्षि ने अपने आश्रम में तुम्हे देख लिया ''
'देवेन्द्र  !इससे  उन परम तेज़स्वी महर्षि को बड़ा क्रोध हुआ और उन्होंने तुम्हे शाप दे दिया .उसी शाप के कारण तुमको इस विपरीत दशा में आना पड़ा -शत्रु का बंदी बनना पड़ा .''
 'उन्होंने शाप देते हुए कहा -'वासव !शक्र !तुमने निर्भय होकर मेरी पत्नी के साथ बलात्कार किया है ,इसीलिए तुम युद्ध में जाकर शत्रु के हाथ में पड़ जाओगे .''
 'दुर्बुद्धे !तुम जैसे राजा के दोष से मनुष्य लोक में भी यह जार भाव   प्रचलित हो जायेगा ,जिसका तुमने यहाँ सूत्रपात किया है .इसमें संशय नहीं है .''
'जो जारभाव से पापाचार करेगा ,उस पुरुष पर उस पाप का आधा  भाग  पड़ेगा और आधा  भाग  तुम पर पड़ेगा   क्योंकि  इसके  प्रवर्तक  तुम्ही  हो .निसंदेह  तुम्हारा  यह स्थान  स्थिर  नहीं होगा  ''
                   वर्णित प्रसंग में उल्लिखित तथ्य इस और संकेत करते हैं कि-उस समय बलात्कारी को नपुंसक बनाना   व् उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा  से उसे विलग कर देना बलात्कार के दंड निर्धारित किये गए थे .
                                      ''उत्तर कांड ''के 'अशीतितम:सर्ग ' में राजा दण्ड द्वारा भार्गव कन्या अरजा के साथ बलात्कार का प्रसंग भी विचारणीय है .गुरु पुत्री द्वारा बार बार सचेत किये जाने पर भी काम के अधीन दण्ड ने बलपूर्वक स्वेच्छाचारवश   अरजा के साथ समागम किया .दंड द्वारा किये गए इस अत्यंत दारुण व् महाभयंकर अनर्थ पर देवर्षि शुक्र तीनों लोकों को दग्ध करते हुए कहते हैं -
[पश्यध्वं....... ....भविष्यति ' -श्लोक ४ से १० पृष्ठ -७८४ ]'अर्थात -देखो शास्त्रविपरीत आचरण करने वाले अज्ञानी राजा दण्ड को कुपित हुए मेरी ओर से अग्नि-शिखा के समान कैसे घोर विपत्ति प्राप्त होती है ' 
'पापकर्म का आचरण करने वाला वह दुर्बुद्धि नरेश सात रात के भीतर ही पुत्र ,सेना और सवारियों सहित नष्ट हो जायेगा .'''खोटे विचारवाले इस राजा के राज्य को सब ओर से सौ योजन लम्बा-चौड़ा है ,देवराज इंद्र ,भारी धूल की वर्षा करके नष्ट कर देंगे .''खोटे विचारवाले इस राजा के राज्य को सब ओर से सौ योजन लम्बा-चौड़ा है ,देवराज इंद्र ,भारी धूल की वर्षा करके नष्ट कर देंगे .''यहाँ जो सब प्रकार के स्थावर-जंगम जीव निवास करते हैं ,इस धूल की भारी वर्षा से सब ओर से विलीन हो जायेंगे  'जहाँ तक दण्ड का राज्य है वहां तक के समस्त चराचर प्राणी सात रात तक केवल धूलि की वर्षा पाकर अद्रश्य हो जायेंगे .'
[इत्युक्त्वा .....ब्रह्मवादिना ,श्लोक-१७,१८ ]'ऐसा कहकर शुक्र ने दूसरे राज्य में जाकर निवास किया तथा उन ब्रह्मवादी के कथनानुसार राजा दण्ड का वह राज्य सेवक,सेना और सवारियों सहित सात दिन में भस्म हो गया .''
                                            स्पष्ट है कि उस काल में बलात्कार को सर्वोच्च धर्मविरुद्ध आचरण मानते हुए ब्रह्म ऋषि   ने राजा दण्ड व् उसके देशवासियों को शाप की आग में जला डाला .राजा दण्ड को अपने इस पापाचार के कारण अपना समस्त वैभव -राज्य गवाना पड़ा .इस दण्ड को यदि वर्तमान परिपेक्ष्य में लागू किया जाये तो बलात्कारी के साथ उसके परिवारीजन को भी दण्डित किया जाना चाहिए और उसकी समस्त संपत्ति सरकार द्वारा जब्त कर ली जानी चाहिए .
                      'बलात्कारी शिरोमणि ' रावण का उल्लेख यहाँ न किया जाये यह तो संभव ही नहीं ..ब्रह्मर्षि कन्या वेदवती जहाँ रावण द्वारा तिरस्कृत  किये  जाने पर प्रज्वलित अग्नि में समां गयी वही रावण द्वारा अपह्रत हुई देवताओं,नागों,राक्षसों.  असुरों ,मनुष्यों ,यक्षों और दानवों की कन्यायें व् स्त्रियाँ भय से त्रस्त एवं विह्वल हो उठी थी .ऐसे पापाचारी रावण द्वारा जब 'रम्भा'पर बलात्कार किया जाता है तब नलकूबर उसे भयंकर शाप देते हुए कहते हैं -
 'अकामा.....तदा ''  -श्लोक-५४,५५,५६ ,उत्तर कांड   षड्विंश : पृष्ठ -६७१]अर्थात -वे [नलकूबर ] बोले 'भद्रे  [रम्भा ] !तुम्हारी इच्छा न रहते हुए भी रावण ने तुम पर बल पूर्व्वक अत्याचार किया है .अत:वह आज से दूसरी किसी युवती से समागम नहीं कर सकेगा जो उसे चाहती न हो ' 
'यदि वह काम से पीड़ित होकर उसे न चाहने वाली युवती पर बलात्कार करेगा तो तत्काल उसके मस्तक के सात टुकड़े हो जायेंगे '' माता सीता के हरण का दुष्परिणाम तो रावण को अपने प्राण गवाकर ही भुगतना पड़ा था .
                     निश्चित रूप से यहाँ भी बलात्कारी को प्राणदंड की ही सजा दिए  जाने का निर्देश दिया गया है .

                           
                       'किष्किन्धा कांड 'के 'अष्टादश:'सर्ग में 'श्री राम 'स्वयं लोकाचार व् लोकविरुद्धआचरण हेतु पापी के वध को धर्मयुक्त ठहराते है . बाली द्वारा अपने वध पर रोष व्यक्त करने पर श्रीराम उसे उसके वध का कारण बताते हुए कहते हैं  -
[अस्य ........ ...पर्यवस्तिथ:-श्लोक १९,२४ ,पृष्ठ -६८८,८८९ ]''इस महामना सुग्रीव के जीते जी इसकी पत्नी रूमा का ,जो तुम्हारी पुत्रवधू के सामान है ,कामवश उपभोग करते हो ,अत: पापाचारी हो .वानर ! इस तरह तुम धर्म से भ्रष्ट हो स्व्च्छाचारी हो गए ............तुम्हारे इसी अपराध के कारण तुम्हे यह दंड दिया गया है .वानरराज जो लोकाचार से भ्रष्ट होकर लोकविरुद्ध आचरण करता है ,उसे रोकने या राह पर लेन के लिए मैं दंड के सिवा और कोई उपाय नहीं देखता .मैं उत्तम कुल में उत्पन्न क्षत्रिय हूँ अथ मैं तुम्हारे पाप को क्षमा नहीं कर सकता जो पुरुष अपनी कन्या,बहिन अथवा .छोटे भाई की स्त्री के पास काम बुद्धि से जाता है ,उसका वध करना ही उसके लिए उपयुक्त दंड माना गया है ..........तुम धर्म से गिर गए हो ......हरीश्वर !हम लोग तो भरत की आज्ञा को ही प्रमाण मानकर धर्म मर्यादा   का उल्लंघन करने वाले तुम्हारे जैसे लोगों को दंड देने के लिए सदा उद्यत रहते हैं .''
                                                             स्पष्ट है कि हमारे मार्गदर्शक धार्मिक ग्रन्थ ''रामायण'' में बलात्कारियों के लिए नपुंसकता ,वध -जैसे कठोर दण्डों का विधान किया गया है .वर्तमान में बर्बरता कि सीमायें लाँघ चुके इस अपराध हेतु ऐसे ही कड़े दंड का प्रावधान शीघ्र किया जाना चाहिए .

[शोध ग्रन्थ-''श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण '' गीता प्रेस ,संवत-२०६३ इकतीसवां पुनर्मुद्रण ]

                                         डॉ.शिखा कौशिक 'नूतन '

शनिवार, 8 दिसंबर 2012

सोनिया जी को जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें !

सोनिया जी को जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें !

Rajiv Gandhi - 2728
२१ मई १९९१ की रात्रि  को जब तमिलनाडु  में श्री पेराम्बुदूर   में हमारे प्रिय नेता राजीव  गाँधी जी की एक बम  विस्फोट में हत्या  कर दी गयी वह क्षण पूरे भारत वर्ष को आवाक कर देने वाला था .हम इतने व्यथित थे.... तब  उस स्त्री के ह्रदय  की वेदना  को समझने   का प्रयास  करें  जो अपना  देश ..अपनी संस्कृति  और अपने परिवारीजन  को छोड़कर यहाँ हमारे देश में राजीव जी की सहगामिनी -अर्धांगिनी बनने आई थी .मैं बात कर रही हूँ सोनिया गाँधी जी की .निश्चित रूप  से सोनिया जी के लिए वह क्षण विचिलित  कर देने वाला था -
''एक हादसे ने जिंदगी का रूख़ पलट दिया ;
जब वो ही न रहा तो किससे करें गिला ,
मैं हाथ थाम जिसका  आई थी इतनी  दूर ;
वो खुद बिछड़   कर दूर मुझसे चला गया  .''
सन १९८४ में जब इंदिरा जी की हत्या की गयी तब सोनिया जी ही थी जिन्होंने राजीव जी को सहारा दिया पर जब राजीव जी इस क्रूरतम  हादसे का शिकार हुए तब सोनिया जी को सहारा देने वाला कौन था ?दिल को झंकझोर कर रख देने वाले इस हादसे ने मानो सोनिया जी का सब  कुछ ही छीन लिया था .इस हादसे को झेल जाना बहुत मुश्किल रहा होगा उनके लिए .एक पल को तो उन्हें यह बात कचोटती ही होगी कि-''काश राजीव जी उनका कहना मानकर राजनीति में न  आते ''पर ....यह सब सोचने का समय अब कहाँ  रह  गया था ?पूरा  देश चाहता था कि सोनिया जी कॉग्रेस की कमान संभालें लेकिन  उन्होंने ऐसा  नहीं किया .२१ वर्षीय पुत्र राहुल व् 19 वर्षीय पुत्री प्रियंका को पिता  की असामयिक मौत के हादसे की काली छाया से बाहर  निकाल  लाना कम चुनौतीपूर्ण  नहीं था .
अपने आंसू पीकर सोनिया जी ने दोनों को संभाला और जब यह देखा कि कॉग्रेस पार्टी कुशल  नेतृत्व के आभाव में बिखर रही है तब पार्टी को सँभालने हेतु आगे  आई .२१ मई १९९१ के पूर्व  के उनके जीवन व् इसके बाद के जीवन में अब ज़मीन  आसमान  का अंतर  था .जिस राजनीति में प्रवेश करने हेतु वे राजीव जी को मना  करती  आई थी आज वे स्वयं  उसमे स्थान बनाने  हेतु संघर्ष शील थी .क्या कारण था अपनी मान्यताओं को बदल देने का ?यही ना कि वे जानती थी कि वे उस परिवार  का हिस्सा हैं जिसने देश हित में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया .कब तक रोक सकती थी वे अपने ह्रदय की पुकार   को ? क्या हुआ जो आज राजीव जी उनके साथ शरीर रूप में नहीं थे पर उनकी दिखाई गयी राह तो सोनिया जी जानती ही थी .
दूसरी ओर   विपक्ष केवल एक आक्षेप का सहारा लेकर भारतीय जनमानस में उनकी गरिमा को गिराने हेतु प्रयत्नशील था .वह आक्षेप था  कि-''सोनिया एक विदेशी महिला हैं '' . सोनिया जी के सामने चुनौतियाँ  ही चुनौतियाँ  थी .यह भी एक उल्लेखनीय तथ्य है कि जितना संघर्ष सोनिया जी ने कॉग्रेस को उठाने हेतु किया उतना संघर्ष नेहरू-गाँधी परिवार के किसी अन्य  सदस्य को नहीं करना पड़ा होगा .
सोनिया जी के सामने चुनौती थी भारतीयों के ह्रदय में यह विश्वास पुनर्स्थापित  करने की कि -''नेहरू गाँधी परिवार की यह बहू भले ही इटली से आई है पर वह अपने पति के देश हित हेतु राजनीति में प्रविष्ट हुई है ''.यह कहना अतिश्योक्ति पूर्ण न होगा कि सोनिया जी ने इस चुनौती को न केवल स्वीकार किया बल्कि अपनी मेहनत व् सदभावना से विपक्ष की हर चाल को विफल कर डाला .लोकसभा चुनाव २००४ के परिणाम सोनिया जी के पक्ष में आये .विदेशी महिला के मुद्दे को जनता ने सिरे से नकार दिया .सोनिया जी कॉग्रेस [जो सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर आया था ]कार्यदल की नेता चुनी गयी .उनके सामने प्रधानमंत्री बनने का साफ रास्ता था पर उन्होंने बड़ी विनम्रता से इसे ठुकरा दिया .कलाम साहब की हाल में आई किताब ने विपक्षियों के इस दावे को भी खोखला साबित कर दियाकी कलाम साहब ने सोनिया जी को प्रधानमंत्री बनने से रोका था .कितने व्यथित थे सोनिया जी के समर्थक और राहुल व् प्रियंका भी पर सोनिया जी अडिग रही .अच्छी सर्कार देने के वादे से पर वे पीछे नहीं हटी इसी का परिणाम था की २००९ में फिर से जनता ने केंद्र की सत्ता की चाबी उनके हाथ में पकड़ा दी .
विश्व की जानी मानी मैगजीन  ''फोर्ब्स ''ने भी सोनिया जी का लोहा माना और उन्हें  विश्व की शक्तिशाली महिलाओं में स्थान दिया -
7Sonia Gandhi

Sonia Gandhi

President

सोनिया जी पर विपक्ष द्वारा कई बार तर्कहीन आरोप लगाये जाते रहे हैं पर वे इनसे कभी नहीं घबराई हैं क्योकि वे राजनीति में रहते हुए भी राजनीति  नहीं करती  .वे एक सह्रदय महिला हैं जो सदैव जनहित में निर्णय लेती है .उनके कुशल नेतृत्व में सौ करोड़ से भी ज्यादा की जनसँख्या वाला हमारा भारत देश विकास के पथ पर आगे बढ़ता रहे  बस यही ह्रदय से कामना है .आज महंगाई ,भ्रष्टाचार के मुद्दे लेकर विपक्ष सोनिया जी को घेरे में तत्पर है पर वे अपने विपक्षियों से यही कहती नज़र आती हैं-
''शीशे के हम नहीं जो टूट जायेंगें ;
फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .''
वास्तव में सोनिया जी के लिए यही उद्गार ह्रदय से निकलते हैं -''भारत की इस बहू में दम है .''
शिखा कौशिक
[विचारों का चबूतरा ]

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

अन्ना मौन व्रत ले लो !


 

अन्ना द्वारा निरंतर अरविन्द केजरीवाल पर दिए जा रहे बयान अत्यंत निंदनीय हैं .अन्ना का यह बयान भी नितांत आपत्तिजनक है कि-''केजरीवाल के सत्ता मोह के कारण उनका आन्दोलन बिखरा .''जबकि वास्तविकता सभी जानते हैं कि लम्बे खिचे इस आन्दोलन से जनता का मोह भंग होने लगा था तब टीम अन्ना के कई सदस्यों ने मिलकर इस आन्दोलन को एक दीर्घकालिक संकल्प में परिणत करने हेतु एक नई राजनैतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया जिसपर पहले अन्ना ने भी सहमति कि मुहर लगा दी थी ....पर अन्ना अपने इस कदम से भी बाद में पीछे हट गए .रही बात यह कि अन्ना केजरीवाल पर सत्ता प्राप्ति हेतु धन प्रयोग का जो आरोप लगा रहे हैं तो उसमे क्या गलत है ?अब ये तो सभी जानते हैं कि नेताओं और पूंजीपतियों के भेदिये पानी पी पी कर तो केजरीवाल को खबरे लाकर नहीं दे रहे .आज के युग में 'राम' बनकर कहाँ राजनीति में टिका जा सकता है यहाँ तो 'कृष्ण बनना पड़ता है जो 'न दैन्यं न पलायनम ' की शिक्षा देते हैं .अन्ना को चाहिए वे अविलम्ब ये ऐलान कर दें कि -''राजनैतिक बयानों के सम्बन्ध में मैं आजीवन मौन व्रत पर हूँ !''

                       शिखा कौशिक 'नूतन'

शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

श्वेता के साथ -सच का 'हाथ'



Shweta Bhatt, the wife of suspended IPS officer Sanjiv Bhatt. File Photo.

 कॉंग्रेस ने गुजरात के निलंबित आई.पी.एस.अधिकारी संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट को मणिनगर सीट पर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उतारकर अपने विरोधियों का मुहं बंद कर दिया है . गुजरात दंगों का सच सामने लाने वाले बहादुर एवं ईमानदार अधिकारी संजीव भट्ट के परिवार को जो ज्यादती झेलनी पड़ी है -उसका जवाब जनता नरेंद्र मोदी को हराकर दे सकती है .जो लोग ''वन्दे मातरम'' का उद्घोष करते हुए एवं ''राष्ट्रीय ध्वज '' लहराते हुए दिल्ली में भ्रष्टाचार के विरुद्ध सीना तानकर खड़े थे और भ्रष्टाचार के लिए एकमात्र जिम्मेदार 'कॉंग्रेस 'को ठहराने की जिद पर अड़े थे क्या आज गुजरात में जाकर श्वेता के साथ  खड़े हो सकेंगें ?क्या वे भ्रष्टाचार से भी ज्यादा गंभीर मुद्दे साम्प्रदायिकता के खिलाफ श्वेता के कदम से कदम मिलाकर नरेन्द्र मोदी को हराने की मुहीम में शामिल होंगें ?पिछले दस साल से गुजरात में लोकतंत्र की धज्जिया उड़ाते इस तानाशाह के खिलाफ खड़े होने का साहस करने वाली श्वेता ने 'नेता के रूप में' मोदी से अपने को कमतर आंकते हुए कहा है की -''हालाँकि मैं मानती हूँ की मेरा और मोदी का मुकाबला बराबरी का नहीं है ''  लेकिन इस सन्दर्भ में ये उल्लेखनीय है की श्वेता और मोदी का मुकाबला बराबरी का हो ही नहीं सकता क्योंकि सच और झ्हूठ का कोई मुकाबला होता ही नहीं .गुजरात दंगों के मुख्य दोषी नरेंद्र मोदी को भले ही किसी अदालत द्वारा सजा न सुनाई गयी हो क्योंकि उनके आतंक के चलते   एक एफ.आई.आर.तक उनके खिलाफ किसी थाने   में दर्ज न हो सकी किन्तु बहादुर व् ईमानदार अधिकारी संजीव भट्ट ने उनके आतंक के आगे घुटने नहीं टेके .फिर भट्ट परिवार के सच और मोदी के झूठ  का मुकाबला कैसे हो सकता है ?श्वेता जिस सच का हाथ थामकर मोदी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरी हैं उस सच का ओहदा मोदी के झूठ और षड्यंत्रों से कहीं ऊँचा है .नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी को समझ लेना चाहिए की श्वेता का उनके खिलाफ खड़ा होना ''सत्यमेव जयते ''की एक शुरुआत भर है .ये सिलसिला अब दूर तक जारी रहेगा .गुजरात के प्रत्येक नागरिक से श्वेता जैसे बहादुर -ईमानदार उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने की अपील करते हुए मैं यही कहूँगी -
''आतंक के आगे घुटने मत टेको !
जिंदगी को मौत बनने से रोको !
हर हालत को सह  जाना  हौसला नहीं !
एक बार खिलाफत करके भी देखो !!
                                     शिखा कौशिक 'नूतन'