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गुरुवार, 4 जुलाई 2013

सोशल साइट्स पर महिलाओं के साथ वैचारिक बलात्कार


ये एक सच्चाई है भले ही कडवी क्यों न हो ! फेसबुक से लेकर ट्विटर तक हर सोशल साईट पर महिलाओं को अभद्र टिप्पणियों  का  सामना  करना  पड़  रहा  है .अलका  जी  ने  अपनी  ट्वीट  के   माध्यम  से ये ही मुद्दा  उठाया  है .सोशल साइट्स को यूँ तो पढ़े-लिखे लोगों का मंच माना जा सकता है पर यहाँ पर महिलाओं को शर्मिदा करने वाले पुरुष वर्ग की टिप्पणियों से ऐसा लगता है कि वे अपनी अहमवादी सोच को भी यहाँ साथ लेकर बैठे हैं .फेसबुक पर लड़कियों को कितने हल्के में लिया जाता है इससे कोई भी अनजान है .कुछ पुरुष फर्जी लड़की नाम से अकाउंट खोलकर मज़े लेने का काम करते हैं और लड़कियों की छवि मजे लेने वाली वस्तु की बना डालते हैं .महिला केवल मनोरंजन का साधन  है -ऐसी सोच रखने वाले कितनी गन्दी टिप्पणियां करते हैं इसका मुझे स्वयं अंदाजा है .''नवभारत टाइम्स '' पर मेरी ब्लॉग पोस्ट्स पर आने वाली अभद्र टिप्पणियों के कारण ही मैंने पिछले वर्ष अपनी १६० पोस्ट रात में जागकर एक घंटे में डिलीट कर डाली थी और तब से अब तक 'नवभारत टाइम्स ' की वेबसाईट पर बने अपने ब्लॉग पर मैं नहीं गयी .

Alka Lamba
Kuchh Twts Us Baltkario ki tarha hote hey,Jinki Mansikta Rape hone yani twt padne key baad hi pata chalti hey,No way2escape,Jst Killed,BLCKD

पर क्या महिलाओं को घबरा जाना चाहिए इससे ? नहीं .मैंने भी यही विचार रखे और क्या और ने भी -
woh toh hai par inko Roka ja saktA hai, complaint file kijiye

I THINK YOU'R RIGHT BUT WE HAVE TO FACE NOT NEGLECT

पर अलका जी इससे सहमत नहीं हैं -

can u face these Rapists or vulgar & abusive twts ? Sorry I can't .. I will prefer to block them than to face such cheep chepus

लेकिन एक मजबूत राजनैतिक पार्टी से सम्बद्ध योग्य कार्यकर्त्ता अलका जी को तो ऐसे मुद्दों पर आगे बढ़कर काम करना ही चाहिए -
as a public figure this is your responsibility to take strong action against these type twts .if you can't this is not good .


महिलाओं के साथ ऐसा वैचारिक बलात्कार इन सोशल साइट्स पर बंद होना ही चाहिए .सरकार को आवश्यक कदम उठाते हुए सोशल साइट्स को महिलाओं के खिलाफ शोषण का हथियार बनने से रोकना ही चाहिए !आपकी क्या राय है ? शिखा कौशिक 'नूतन'

4 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

उफ़-
कब सुधरेगा समाज-
शोचनीय स्थिति -

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

कुछ लोग गलत मानसिकता से ग्रसित हैं और वैसे ऐसे लोगों को ब्लोक किया जा सकता है और ऐसा हर सोशल साइट्स पर सिस्टम्स है ! कानून के द्वारा अगर सोशल साइट्स पर ऐसे लोगों को रोकने की जहां तक बात है तो उसके लिए कानून तो है लेकिन उसके लिए शिकायत आपको ही करनी होगी और कोई यह सोचता है कि सरकार कानून बनाकर खुद निगरानी करे तो यह संभव भी नहीं है और फिर तो उस कानून का उपयोग सरकारें मनमाने तरीके से करेगी !!

Alpana Verma ने कहा…

yeh dukhad magar ek kadwa sach hai ..internet par /social sites /even blog/site par likhne wali mahilaaon ko 'halke' mei lene wale,unhen kuchh bhi kah kar chal dene wale ye 'kuchh'sar'fire yahan har jagah maujud hain.
......
kah dena asaan hota hai ki ignore karo..lekin aisa kar paana mushkil hota hai .emotionally koi kitna toot sakta hai shayd isee ko aajmate hain aise log aur isee mei inhen aanand aata hai.
Alka ji ne apni posts delete karne ka nirnay bahut pareshaan ho kar/hatotsaahit ho kar liya hoga.
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kuchh striyan bataa deti hain ,kuch chupchaap chali jaatii hain.
.....duniya mei kahin bhii to safe nahin hai ek stri chahe wah antrjaal kii hii duniya kyun na ho.

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

समाज का आइना यह भी है