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शनिवार, 14 जुलाई 2012

आया बुलावा -''आओ कलमाड़ी''


आया बुलावा -''आओ  कलमाड़ी''


लन्दन से आया बुलावा -''आओ  कलमाड़ी'' ;
भ्रष्टाचार के खेल  में तुम हो बड़े खिलाडी  ,
कैसे चलती है  भ्रष्टाचार की गाड़ी ?
बतला तो दाढ़ी में तिनका या तिनके में दाढ़ी !!



5 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

बहुत सार्थक प्रस्तुति. अपराध तो अपराध है और कुछ नहीं ...

शालिनी कौशिक ने कहा…

बहुत सुन्दर व सार्थक प्रस्तुति. अपराध तो अपराध है और कुछ नहीं ...

रविकर फैजाबादी ने कहा…

वाह शिखा जी-
अन्दर की बात-

शिवनाथ कुमार ने कहा…

शिखा जी, छोटी मगर काफी सुंदर, व्यंग्यपूर्ण कविता !!

Devendra Gautam ने कहा…

गागर में सागर...सटीक कटाक्ष