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रविवार, 29 जुलाई 2012

टीम अन्ना दिल साफ करो तब कॉग्रेस का इंसाफ करो !

टीम अन्ना दिल साफ करो तब कॉग्रेस का इंसाफ करो ! 
Rajiv Gandhi's 20th death anniversary
पिछले वर्ष एक काम के सिलसिले में २० अगस्त २०११ को मेरठ जाना हुआ .यही वह समय था जब दिल्ली में जनलोकपाल बिल को लेकर अन्ना का आन्दोलन पूरे शबाब पर था .एक सरकारी कार्यालय में बैठे हुए बार बार ''भारत माता की जय '' और ''वन्देमातरम '' का उद्घोष कानों में अमृत घोल रहा था .वहां से बाहर आये तो देखा कई वाहनों पर प्यारा तिरंगा लगाया गया था .मन उमंगित हो उठा .ये सब  अन्ना आन्दोलन का समर्थन कर रहे थे .ह्रदय में एक आस बंधी कि ''भारत में भी भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे पर पूरा भारत एक साथ खड़ा हो  सकता है ......पर यह ख़ुशी ज्यादा  देर तक नहीं टिक  पाई क्योंकि हम जैसे ही व्यस्त सड़क पर पहुंचे इस अन्ना समर्थित रैली के कारण जाम में फँस गए . दुःख जाम में फँसने का नहीं था दुःख इस बात का था कि अब 'भारत माता की जय' और 'वन्देमातरम' के  उद्घोष का स्थान राजनैतिक रंग में रंगे नारों ने ले लिया था .उत्साही युवा चिल्ला रहे थे -''सोनिया जिसकी मम्मी है ...वो सरकार निकम्मी है .''मन में आया क्यों लक्ष्य से भटक जाते हैं हम .ये आन्दोलन क्यों दिशाहीन हो रहा है ?सोनिया जी ही को क्यों निशाना बनाया जा रहा है .''मायावती जी जिस सरकार की मम्मी हैं ''या  ''जयललिता जी जिस सरकार की मम्मी हैं ''क्या वो सरकार निक्कमी नहीं ?मम्मी को छोडो ये ''पापा लोग ''की सरकार ''कर्नाटक ''में क्या कर रही है ?
                          इस तमाशे को देखकर यह समझने में मुझे देर न लगी कि यह आन्दोलन कुछ अति बुद्धिशाली व् स्वार्थी व्यक्तियों की भेंट चढ़ने वाला है . जिस आन्दोलन के  कर्ता-धर्ता स्वयं आन्दोलन के मुख्य लक्ष्य से भटक गए हो उस आन्दोलन को दिशाहीन होने से कोई नहीं रोक सकता .भ्रष्टाचार की समस्या सभी राजनैतिक दलों से लेकर नौकरशाही ,प्रशासनिक संस्थाओं और जनता से भी जुडी है .कोई भी ईमानदार कहलाने लायक  नहीं है .हम स्वयं अपने काम को शीघ्र अति शीघ्र करवाने हेतु भ्रष्टाचार को पाल-पोस रहे हैं . भ्रष्टाचार का ठीकरा  केवल  एक  राजनैतिक पार्टी ''कौंग्रेस'' पर फोड़ने  का प्रयास  कर  अन्ना  टीम आन्दोलन ने समस्त आन्दोलन को राजनैतिक रंग में रंग दिया .बात बात पर जनता द्वारा चुनी हुई कॉग्रेस की सरकार पर हमला बोलकर अन्ना टीम अपनी विश्वसनीयता को खो दिया .आज ये केवल लकीर पीटने का काम कर रहे हैं .  टीम अन्ना ने पूरे भारत में केवल एक कुत्सित सन्देश प्रसारित करने का का विफल प्रयास किया कि-''भ्रष्टाचार के लिए केवल कॉंग्रेस दोषी है और वह जनलोकपाल  बिल पास नहीं होने देती . ''इस दौरान  होने वाले  कई  राज्यों  के चुनाव  में भी अन्ना टीम केवल कॉग्रेस के उम्मीदवारों  की खिलाफत करती रही .उसने अन्य दलों के खिलाफ क्यों नहीं कुछ कहा ? यह आन्दोलन ''जन लोकपाल  बिल को पास कराने के स्थान पर ''कॉग्रेस को हटाओ आन्दोलन ''बन कर रह गया .अपने अति स्वार्थवाद में अन्ना टीम यह भी भूल गयी  ''कि कॉग्रेस को जनता ने ही चुनकर भेजा है सरकार  बनाने हेतु .''यह आन्दोलन ''जन लोकपाल  बिल को पास कराने के स्थान पर ''कॉग्रेस को हटाओ आन्दोलन ''बन कर रह गया .अपने अति स्वार्थवाद में अन्ना टीम यह भी भूल गयी  ''कि कॉग्रेस को जनता ने ही चुनकर भेजा है सरकार  बनाने हेतु .''
जनता ने भी महसूस किया ''कि -अन्ना टीम तो लोकपाल के बहाने वही काम कर रही है जो कॉग्रेस की विपक्षी पार्टियाँ कॉग्रेस को बदनाम करने के लिए करती रहती हैं .''इस  तथ्य के उजागर होते ही अन्ना आन्दोलन की रीढ़ टूट गयी अर्थात आम जनता ने इस  आन्दोलन से दूरी बना  ली .आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे अन्ना ने अपने कई बयानों द्वारा यह साबित कर दिया कि वे संघी  मानसिकता के हैं और श्री शरद पंवार के एक युवक द्वारा तमाचा मारे जाने पर अन्ना के बयान ''बस एक ही ''ने उनके गाँधीवादी होने पर भी बड़ा सा प्रश्न चिह्न लगा दिया .यदि अन्ना टीम अपनी निजी भावनाओं को इस आन्दोलन से दूर रखती तो आज यह आन्दोलन इस तरह भीड़ के लिए न तरसता  .अन्ना टीम को अब पहले  अपना दिल साफ़ कर लेना चाहिए तब देश सेवा को समर्पित कॉग्रेस पार्टी पर कोई आरोप लगाने की हिम्मत करनी चाहिए .
                                           जय हिंद ! जय भारत !
                           शिखा कौशिक  

शुक्रवार, 27 जुलाई 2012

''राजनैतिक गुंडागर्दी झेलती कॉँग्रेस ''


TMC denies quitting UPA govt
पिछले सात दिनों से चल  रही NCP की राजनैतिक गुंडागर्दी पर कल विराम लग गया .जब उसकी  मांग  को मान  लिया  गया .सन  2009 से  UPA  का  मुखिया होने के कारण कॉग्रेस को सहयोगी दलों  की इसी राजनैतिक गुंडागर्दी का बार बार शिकार बनना पड़ रहा है . क्या सरकार बचाए रखने की जिम्मेदारी मात्र कॉग्रेस की है ?एक अरब  से भी ज्यादा  जनसँख्या वाले  हमारे देश  को मध्यावधि चुनाव   की आग में झोंक देने को तैयार  UPA के सहयोगी दलों की नैतिकता  देखने  लायक  है .
                                            कभी महंगाई ;कभी 'ऍफ़.डी.आई.';कभी लोकपाल  बिल को लेकर ;कभी अपनी ही पार्टी के रेलमंत्री को हटाने ..तो कभी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार  को लेकर बंगाल  की शेरनी  सुश्री  ममता  बनर्जी  ने  जिस  तरह केंद्र  सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया क्या वह शोभनीय  है ? यदि  ममता दी  के पास  मंहगाई  घटने  का कोई  नायब  नुस्ख़ा  है तो वे केंद्र की सरकार को क्यों नहीं बता देती हैं ?पेट्रोल की कीमत बढ़ते ही वे जिस तरह सरकार से हटने का ऐलान कर देती हैं उससे  से तो जनता में ये ही सन्देश प्रसारित होता है जैसे  केवल कॉँग्रेस ही बढती मंहगाई के लिए जिम्मेदार है और उसे गरीबों की कोई चिंता नहीं .
                              सात दिन तक कृषि  मंत्री  श्री  शरद  पंवार  अपने मंत्रालय  से  विरक्त  रहे  अपना मनचाहा   करवाने  हेतु  .सात दिन तक उन्हें  ख़राब मानसून की मार  झेल  रहे किसानों  की तनिक  भी  चिंता  न  हुई  .उन्हें  चिंता थी तो केवल महाराष्ट्र में अपने दागी NCP नेताओं  की और उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाये वहां के मुख्यमंत्री  श्री पृथ्वी राज चौहान के तेवरों  में कमी   लाने की .
                            &nbs , Helvetica, sans-serif; line-height: 1.8;">जनता को चाहिए कि जैसे वो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एकमत होकर भ्रष्टाचार का  विरोध करती है उसी प्रका� bsp; की ''राजनैतिक  गुंडागर्दी'' का पुरजोर  विरोध करे  जिससे  ऐसे सहयोगी दल ''सरकार को अस्थिर करने  की'' रोज़ की धमकी देने  से  बाज  आये  .
                                        जय हिंद !जय भारत !
                                      शिखा  कौशिक  

गुरुवार, 26 जुलाई 2012

कारगिल विजय दिवस -सलाम हिन्दुस्तानी सैनिकों को !


कारगिल  विजय  दिवस -सलाम  हिन्दुस्तानी सैनिकों  को !

लग  जाती है लगन जब  ;होकर   के मगन  तब  ,
हम धरती आसमान मिला देते हैं ,
हम हिन्दुस्तानी  सैनिक जो ठान लेते हैं
कर के दिखला   देते हैं .


मर मर कर हमने  कभी  सीखा नहीं है जीना ;
जोश हमारा देखकर दुश्मन को आता पसीना  ,
हम जयहिंद के नारों से आकाश गूंजा  देते हैं .
हम हिन्दुस्तानी सैनिक जो ठान लेते .......


पीछे कदम न   हटाते आगे ही बढ़ते   जाते   ;
सीनों पे  खाते हैं गोली पीठ नहीं   हैं दिखाते  ;
हम खून बहाकर माँ  की आन बचाते हैं .
हम हिन्दुस्तानी  सैनिक  जो  ठान  ....                             


 SHIKHA KAUSHIK 

बुधवार, 25 जुलाई 2012

''वन्देमातरम ''.मत कहना क्या कोई धर्म सिखाता है ?


''वन्देमातरम ''.मत कहना क्या कोई धर्म सिखाता है ?

जो  ''वन्देमातरम '' नहीं  गा  सकता  वो सच्चा  हिन्दुस्तानी  कहलाने  के काबिल  ही  नहीं .''वन्देमातरम'' कहते  ही ह्रदय  भर  आता  देश  भक्ति  के भाव से .इस राष्ट्रीय गीत में वो ज़ज्बा छिपा है जिसने  ब्रिटिश  हुकूमत  की  जड़ों  को उखाड़ फेंकने में स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया .ये गीत है जन्म भूमि  की  उज्जवल  महिमा  को चहुँ दिशा में प्रसारित करने वाला .कोई धर्म नहीं जो माँ व्  संतान के बीच  आये और संतान को माँ की महिमा गाने से रोक  दे .भ्रमित विचारधाराओं वाले भारत माँ की संतानों  के लिए ही लिखा है यह गीत मैंने -
जो नहीं कृतज्ञ   माँ का है ; जिसको नहीं जन्मभूमि से नेह  ,
माँ के 
चरणों  
में सकल सुख ; जिसको हो इस पर ही संदेह ,
वो पढ़े  -सुने इस कविता को मन का मैल धुल जाता है ,
माँ का वंदन जिह्वा  से नहीं  ह्रदय से गया जाता है .
जिस  शस्य -श्यामला माटी  में खेले  कूदे नाचे गाये ,
जिसने अपनी ले गोद हमें कोमल स्पर्श से सहलाये ,
उसका वंदन करने से पूर्व क्या इतना सोचा जाता है ?
माँ का वंदन जिह्वा ........
श्वासों में बसती है सौरभ  जिसकी सौंधी इस माटी की ,
जिस पर प्रवाहित सरिता जल प्यास मिटाता हम  सब की ,
उपकारी माँ का वंदन कर मन किसका न हर्षाता है ?
माँ का वंदन जिह्वा से ....
सृष्टि की कोई भी सत्ता  माँ की शक्ति से बड़ी नहीं ,
जो रोके माँ के वंदन से जग में ऐसा कोई धर्म नहीं ,
मन की गांठों को खोल जरा अरे !इतना क्यों सकुचाता है .
माँ का वंदन जिह्वा से ...
जन्म भूमि ने हम सब को दिया अन्न जल फल का उपहार ,
नहीं भेद  किया संतानों में बांटा समान सबमे है प्यार ,
'मत करना उसका वंदन तुम ''क्या कोई धर्म सिखाता है ?
माँ का वंदन जिह्वा से नहीं .....
मैं नहीं जानती  ''अल्लाह '' को मैंने  देखा  ''ईश्वर'' को नहीं ,
है जन्मभूमि सर्वस्व मेरा  इस पर जीवन म्रत्यु है यही ,
''वन्देमातरम'' कहते ही उर में आनंद समता है .
माँ का वंदन जिह्वा से नहीं ह्रदय से गया जाता है !!
                              ''वन्देमातरम ''
                जय हिंद ! जय भारत !
               शिखा कौशिक 

सोमवार, 23 जुलाई 2012

पहनावे की ले आड़ ...अपना पल्ला झाड़ !

पहनावे  की  ले  आड़  ...अपना  पल्ला  झाड़  !


स्त्री के पहनावे  से  अधिक यदि पुरुष के आचरण पर अधिक ध्यान दिया  जाये  तो स्त्री के विरूद्ध अपराध में कमी  आने की ज्यादा सम्भावना है .यदि स्त्री का पहनावा ही हर स्त्री विरूद्ध अपराध हेतु जिम्मेदार है तो द्वापर  में द्रौपदी  का चीर-हरण न होता .इंद्र द्वारा अहिल्या का बलात्कार  न होता .वस्त्र एक सीमा तक ही किसी  को अपराध करने  के लिए  उकसा  सकते  हैं पर हर पुरुष तो विश्वामित्र नहीं होता कि मेनका  ने  उन्हें मोह लिया और वे  तपस्या विमुख हो गए .  योगी से भोगी  बन गए .मैं स्वयं स्त्री के शालीन पहनावे की कट्टर पक्षधर हूँ  पर मैंने  भी  पिछले  वर्ष  उमंग सबरवाल द्वारा दिल्ली में आयोजित  ''सलट  वॉक '' का समर्थन  किया  था क्योंकि   सम्पूर्ण व्यवस्था स्त्री के विरूद्ध अपराध हेतु स्त्री के वस्त्रों को ही जिम्मेदार ठहराकर अपनी अकर्मण्यता को छिपा लेती  है .गुवाहाटी  में युवती के साथ  दुर्व्यवहार  की घटना  साफ  तौर  पर कानून एवं सुरक्षा  व्यवस्था की विफलता  थी .प्रत्येक नागरिक  की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन पर है .जनता में ऐसी घटनाओं से यही सन्देश जाता है कि कानून व्यवस्था नाम की अब कोई चीज नहीं रही .इसे यदि स्त्री के वस्त्रों से जोड़ दिया जायेगा तो पहले से पंगु प्रशासन के लिए तो सोने पर सुहागा वाली बात हो जाएगी .किसी भी पहनावे में कोई बुराई नहीं यदि वह देश  व् संस्कृति के हिसाब से पहना जाये .जींस भी शालीन तरीके से पहनी हुई एक युवती को स्मार्ट लुक देती है .
Jeans_girls : Young smiling brunette in jeans. Isolated over white . Stock PhotoSchoolgirl : full length studio portrait of female elementary pupil
पुलिस की व् सेना की वर्दी में महिलाएं किस को  आकर्षित नहीं कर  लेती ?मिनी स्कर्ट में सानिया व् साइना के प्रति किसके   ह्रदय में बुरे भाव आ सकते हैं ?  वही साड़ी में भी अशालीन भाव वाली स्त्री को सराहा नहीं जा सकता .वस्त्रों पर बहस  को विराम  दिया जाना  चाहिए क्योकि ये बहस तो वही खत्म हो जाती है जब स्कूली  छात्राओं के साथ आते जाते समय छेड़कानी की जाती है .क्या स्कूली यूनिफ़ॉर्म  भी भड़काऊ होती है ?सन २००३ में धनबाद में तेजाबी हमले की शिकार सोनाली घर के  छज्जे पर सोयी हुई थी .उस समय पर क्या उसके  वस्त्रों ने गुंडों को यह अपराध करने हेतु उकसाया था ? वास्तव में हर स्त्री विरूद्ध अपराध का कारण भिन्न   ही होता है . ऐसे अपराधों में कई बार आहत   पुरुष अहम् भूमिका निभाता है तो कई बार पीड़ित लड़की के परिवार से उसकी रंजिश .कभी लड़की द्वारा किये  गए छल के कारण ऐसा होता है और कई बार प्रेमी कहलाने वाले पुरुष का मानसिक रूप से अस्वस्थ होना .इन  घटनाओं पर अंकुश लगाने हेतु सबसे कारगर उपाय है सदाचरण व् हमारी   कानून व्यवस्था का चुस्त-दुरुस्त होना .सड़कों पर अपराध रोकने में तो कानून व्यवस्था ही अहम् भूमिका  निभा  सकती  है और घर के भीतर के स्त्री विरूद्ध अपराधों में सदाचरण .पहनावा एक बहुत छोटा मुद्दा है इस पर पारिवारिक स्तर पर ह� 4�ो बेहतर है क्योकि भारतीय परिवार ही अपने शिशुओं में संस्कार भरने का काम करते आये हैं .पहनावे को आधार बनाकर  पुलिस प्रशासन    यदि अपनी विफलता से पल्ला झड़ने का प्रयास करेगा तो यह मेरे लिए स्वीकार करना असंभव ही है .


                                                          shikha kaushik 

शनिवार, 21 जुलाई 2012

भारत की इस बहू में दम है -सोनिया गाँधी



भारत की इस बहू में दम है -सोनिया गाँधी 
Rajiv Gandhi - 2728
२१ मई १९९१ की रात्रि  को जब तमिलनाडु  में श्री पेराम्बुदूर   में हमारे प्रिय नेता राजीव  गाँधी जी की एक बम  विस्फोट में हत्या  कर दी गयी वह क्षण पूरे भारत वर्ष को आवाक कर देने वाला था .हम इतने व्यथित थे.... तब  उस स्त्री के ह्रदय  की वेदना  को समझने   का प्रयास  करें  जो अपना  देश ..अपनी संस्कृति  और अपने परिवारीजन  को छोड़कर यहाँ हमारे देश में राजीव जी की सहगामिनी -अर्धांगिनी बनने आई थी .मैं बात कर रही हूँ सोनिया गाँधी जी की .निश्चित रूप  से सोनिया जी के लिए वह क्षण विचिलित  कर देने वाला था -

''एक हादसे ने जिंदगी का रूख़ पलट दिया ;
जब वो ही न रहा तो किससे करें गिला ,
मैं हाथ थाम जिसका  आई थी इतनी  दूर ;
वो खुद बिछड़   कर दूर मुझसे चला गया  .''

     सन १९८४ में जब इंदिरा जी की हत्या की गयी तब सोनिया जी ही थी जिन्होंने राजीव जी को सहारा दिया पर जब राजीव जी इस क्रूरतम  हादसे का शिकार हुए तब सोनिया जी को सहारा देने वाला कौन था ?दिल को झंकझोर कर रख देने वाले इस हादसे ने मानो सोनिया जी का सब  कुछ ही छीन लिया था .इस हादसे को झेल जाना बहुत मुश्किल रहा होगा उनके लिए .एक पल को तो उन्हें यह बात कचोटती ही होगी कि-''काश राजीव जी उनका कहना मानकर राजनीति में न  आते ''पर ....यह सब सोचने का समय अब कहाँ  रह  गया था ?पूरा  देश चाहता था कि सोनिया जी कॉग्रेस की कमान संभालें लेकिन  उन्होंने ऐसा  नहीं किया .२१ वर्षीय पुत्र राहुल व् 19 वर्षीय पुत्री प्रियंका को पिता  की असामयिक मौत के हादसे की काली छाया से बाहर  निकाल  लाना कम चुनौतीपूर्ण  नहीं था .

अपने आंसू पीकर सोनिया जी ने दोनों को संभाला और जब यह देखा कि कॉग्रेस पार्टी कुशल  नेतृत्व के आभाव में बिखर रही है तब पार्टी को सँभालने हेतु आगे  आई .२१ मई १९९१ के पूर्व  के उनके जीवन व् इसके बाद के जीवन में अब ज़मीन  आसमान  का अंतर  था .जिस राजनीति में प्रवेश करने हेतु वे राजीव जी को मना  करती  आई थी आज वे स्वयं  उसमे स्थान बनाने  हेतु संघर्ष शील थी .क्या कारण था अपनी मान्यताओं को बदल देने का ?यही ना कि वे जानती थी कि वे उस परिवार  का हिस्सा हैं जिसने देश हित में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया .कब तक रोक सकती थी वे अपने ह्रदय की पुकार   को ? क्या हुआ जो आज राजीव जी उनके साथ शरीर रूप में नहीं थे पर उनकी दिखाई गयी राह तो सोनिया जी जानती ही थी .
दूसरी ओर   विपक्ष केवल एक आक्षेप का सहारा लेकर भारतीय जनमानस में उनकी गरिमा को गिराने हेतु प्रयत्नशील था .वह आक्षेप था  कि-''सोनिया एक विदेशी महिला हैं '' . सोनिया जी के सामने चुनौतियाँ  ही चुनौतियाँ  थी .यह भी एक उल्लेखनीय तथ्य है कि जितना संघर्ष सोनिया जी ने कॉग्रेस को उठाने हेतु किया उतना संघर्ष नेहरू-गाँधी परिवार के किसी अन्य  सदस्य को नहीं करना पड़ा होगा .
सोनिया जी के सामने चुनौती थी भारतीयों के ह्रदय में यह विश्वास पुनर्स्थापित  करने की कि -''नेहरू गाँधी परिवार की यह बहू भले ही इटली से आई है पर वह अपने पति के देश हित हेतु राजनीति में प्रविष्ट हुई है ''.यह कहना अतिश्योक्ति पूर्ण न होगा कि सोनिया जी ने इस चुनौती को न केवल स्वीकार किया बल्कि अपनी मेहनत व् सदभावना से विपक्ष की हर चाल को विफल कर डाला .लोकसभा चुनाव २००४ के परिणाम सोनिया जी के पक्ष में आये .विदेशी महिला के मुद्दे को जनता ने सिरे से नकार दिया .सोनिया जी कॉग्रेस [जो सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर आया था ]कार्यदल की नेता चुनी गयी .उनके सामने प्रधानमंत्री बनने का साफ रास्ता था पर उन्होंने बड़ी विनम्रता से इसे ठुकरा दिया .कलाम साहब की हाल में आई किताब ने विपक्षियों के इस दावे को भी खोखला साबित कर दियाकी कलाम साहब ने सोनिया जी को प्रधानमंत्री बनने से रोका था .कितने व्यथित थे सोनिया जी के समर्थक और राहुल व् प्रियंका भी पर सोनिया जी अडिग रही .अच्छी सर्कार देने के वादे से पर वे पीछे नहीं हटी इसी का परिणाम था की २००९ में फिर से जनता ने केंद्र की सत्ता की चाबी उनके हाथ में पकड़ा दी .
              विश्व की जानी मानी मैगजीन  ''फोर्ब्स ''ने भी सोनिया जी का लोहा माना और उन्हें  विश्व की शक्तिशाली महिलाओं में स्थान दिया -

7Sonia Gandhi

Sonia Gandhi

President

 सोनिया जी पर विपक्ष द्वारा कई बार तर्कहीन आरोप लगाये जाते रहे हैं पर वे इनसे कभी नहीं घबराई हैं क्योकि वे राजनीति में रहते हुए भी राजनीति  नहीं करती  .वे एक सह्रदय महिला हैं जो सदैव जनहित में निर्णय लेती है .उनके कुशल नेतृत्व में सौ करोड़ से भी ज्यादा की जनसँख्या वाला हमारा भारत देश विकास के पथ पर आगे बढ़ता रहे  बस यही ह्रदय से कामना है .आज महंगाई ,भ्रष्टाचार के मुद्दे लेकर विपक्ष सोनिया जी को घेरे में तत्पर है पर वे अपने विपक्षियों से यही कहती नज़र आती हैं-
''शीशे के हम नहीं जो टूट जायेंगें ;
फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .''
                वास्तव में सोनिया जी के लिए यही उद्गार ह्रदय से निकलते हैं -''भारत की इस बहू में दम है .''
                                     शिखा कौशिक 
               [विचारों का चबूतरा ]
[ALL PHOTOS HAVE BEEN TAKEN FROM -[Rahul Gandhi OFFICIAL WEBSITE ]

शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

गुवाहाटी में पत्रकार गिरफ्तार..वाह रे पत्रकार ...


गुवाहाटी में पत्रकार गिरफ्तार..वाह रे पत्रकार ...

आखिर जो होना चाहिए था वो हो ही गया .नवभारत टाइम्स की
वेबसाईट पर यह खबर पढ़ी तो दिल को  तसल्ली हुई कि देश में अभी  भी कानून व्यवस्था
नाम की कोई चीज है .आप भी पढ़ें यह खबर - 

गुवाहाटी में लड़की के साथ छेड़छाड़ के मामले में पत्रकार गिरफ्तार

गुवाहाटी।। यहां 20 वर्षीय लड़की के साथ छेड़छाड़ का विडियो रेकॉर्ड करने वाले न्यूज लाइव चैनल के रिपोर्टर गौरव ज्योति निओग को लड़की पर हमले के लिए लड़कों को उकसाने के आरोप में शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया। निओग की गिरफ्तारी ऐसे समय पर की गई है जब एक दिन पहले ही गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। गुवाहाटी के नए एसएसपी आनंद प्रकाश तिवारी ने कहा, 'निओग को गिरफ्तार कर लिया गया है और शनिवार को उसे अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।' निओग के साथ भांगगढ़ पुलिस स्टेशन में पूछताछ की जा रही है।  गौरतलब है कि टीम अन्ना के सदस्य अखिल गोगोई ने आरोप लगाया है कि निओग ने एक बार के बाहर लड़की के साथ छेड़छाड़ की साजिश रची थी। इससे पहले इसी सप्ताह निओग ने चैनल से इस्तीफा दे दिया था। निओग के बॉस और चैनल के प्रधान संपादक अतनु भुयान ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 
निओग और उनके कैमरामैन ने इस पूरी घटना को कैमरे पर रेकॉर्ड किया था। विशेष जांच दल ने पहले ही विडियो फुटेज को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।''
                                  पत्रकार कहलाने मात्र से कोई पत्रकार नहीं हो जाता .पत्रकारिता एक पावन कर्म है .पत्रकार समाज को दिशा प्रदान करता है उसे भ्रमित नहीं करता .इन छद्म पत्रकार महोदय से मैं इतना ही कहना चाहूंगी  -

जैसा किया दुष्कर्म उसका मिल गया प्रतिफल ;
छोड़ छद्म पत्रकारिता अब जेल को तू चल ,
होगा वहां अब तेरा जोश से सत्कार 
वाह रे पत्रकार ...वाह वाह रे पत्रकार .

मशहूर होने का तुझे शौक जबरदस्त ;
पी जेल का पानी अब रहना वहां मस्त ,
सब ओर यही चर्चा तू हुआ गिरफ्तार .
वाह रे पत्रकार ....

पत्रकार तुम नहीं तुम तो हो दलाल ;
कर रहे इस पेशे को बदनाम खुलेआम ,
सिर उठाकर चलने का तुमको न अधिकार .
वाह रे पत्रकार ...

तुमने किया जो कर्म उसे पाप कहते हैं ;
अस्मत लूटे किसी की चुप आप रहते हैं ,
अब लगने चाहियें तुम्हें जूते कई हज़ार .
वाह रे पत्रकार ....

आगे से कोई ऐसा कभी काम न करे ;
अंजाम तेरा देखकर थोडा तो सबक ले ,
सभ्य समाज का स्वप्न हो साकार .
वाह रे पत्रकार ...
                     शिखा कौशिक 
              [विचारों का चबूतरा ]



गुरुवार, 19 जुलाई 2012

“I want justice, or allow me to end my life-SONALI.


“I want justice, or allow me to end my life-SONALI.

READ THIS NEWS AND SEE THIS WOMAN .SHE WANTS 
JUSTICE .HER WORDS HURTS THE HEART -“Meri zindagi khatam ho jayegi, pata nahin tha (My life would finish, I did not know,”
Today's News of India

 A beautiful life of Sonali Mukherjee melted away in an acid attack

A beautiful life of Sonali Mukherjee melted away in an acid attack

July 13, 2012 19:55:17 IST
Last Updated : July 13, 2012 20:11:25 IST
A beautiful life of Sonali Mukherjee melted away in an acid attack
New Delhi  :  “Main bahut himmatwali thi (I had lots of guts)”, she says looking at you with eyes reduced to unseeing opaque white mottled orbs and her once-pretty face a mass of melted flesh. But acid attack victim Sonali Mukherjee is still a fighter, as she battles all odds for justice.
She was fast asleep on the terrace of her house in Dhanbad, Jharkhand, on the night of April 22, 2003, when she felt the burning liquid splashed on her – melting away the flesh on her face, neck, the right part of her chest and lower torso… That horrific acid attack on Mukherjee when she was barely 18 also ended her dreams of a beautiful future.
“Meri zindagi khatam ho jayegi, pata nahin tha (My life would finish, I did not know,” Mukherjee told IANS.
The three men responsible, including a married man, were held and two of them were even convicted. But they got bail from the Jharkhand High Court. Mukherjee and her father, who has sold all his land and family jewels in her treatment and in legal fees, are fighting to get the bail cancelled, coping with threats from the accused, besides paying innumerable visits to hospitals for her treatment.
Mukherjee was studying sociology honours in a Dhanbad women’s college and also juggling a job with a private firm and was part of the National Cadet Corps when the acid attack ruined her life. She was a very pretty girl then, as one could see from the photographs her father shows the IANS correspondent.
The three men, one of who was in his 40s and one was an 18-year-old, would tail her everyday, pass lewd comments and harrass her.
“When it increased, I decided to protest. I had lots of guts then… I was part of the NCC and was a senior sergeant…I told them to stop troubling me or I will complain to the police,” Muherjee said.
The three accused, who she named as – Tapas Mitra, Sanjay Paswan, and Bhrahmadev Hajra – told her that she had become very “ghamandi” (arrogant) and they would teach her a lesson. She told her father of the incident and he in turn complained to the families of the three men.
Nothing happened for one and a half months. And then the men struck back, pouring acid on Mukherjee as she lay asleep alongside her sister and father on the terrace. “It was 2 a.m., that night. I never thought this would ever happen to me.”
Her father has spent Rs.10-15 lakh in the court cases and on her treatment. They have also borrowed Rs.3-4 lakh from relatives, who are demanding the money back. Her father, Chandidas Mukherjee, who had a menial job in a mill earning about Rs.5,000 a month, has given up his job. He makes ends meet by working as a pujari (priest) in homes.
The youngest of the three men was let off on account of being a juvenile, while the other two were convicted and sentenced by the district court in 2006 to nine year jail. However, they appealed in the high court, which granted them bail.
“In the six years since I have not been granted hearing by the high court,” she said.
Mukherjee said she and her father have met the chief minister of Jharkhand, all the legislators, and MPs, but all she got was “aashwasan (assurances).. nothing else”.
She has also approached the union women and child development ministry and has been assured of help.
Her younger sister, who also suffered acid burns on her hands and feet, was married off early. “We were getting threats and did not want it to ruin her life, so we got her married off.”
Mukherjee has approached Safdarjung Hospital for treatment, but has been told to wait as they have lots of patients, she said.
Her treatment in private clinics will cost over Rs.10 lakh, which she does not have.
Recalling the days immediately after the attack, Mukherjee said all she remembers is waking up in excruciating pain. “I would scream in pain, and fall unconscious.. I was like that for six months…I would tell god to kill me.”
The acid melted her nose, her right ear and some of it went into her ear drum, but luckily it did not enter her brain. She can’t hear from her right ear, which as she shows by lifting her dupatta, is reduced to a small glob of flesh.
Doctors took skin from her thighs and grafted it on her nose and cheeks, to give it a modicum of shape.
“I want justice, or allow me to end my life,” says Mukherjee.
Those wishing to help in any manner can call up her cell no- 9210022919.]
union women and child development ministry SHOULD GIVE HER MORE HELP . the chief minister of Jharkhand, all the legislators, and MPs,SHOULD GIVE MORE CONCERN OVER THIS ISSUE AND TAKE ALL POSSIBLE STEPS .
 I JUST WANT TO SAY HER -NEVER LOSE YOUR HEART .YOU ARE BRAVE AND YOU GOD HELPS THOSE WHO HELPS THEMSELVES .BEST OF LUCK SONALI .
                                                       SHIKHA KAUSHIK 

सोमवार, 16 जुलाई 2012

अमर उजाला को अविलम्ब माफ़ी मांग लेनी चाहए !


[amar ujala dainik page 16 ]
[date 16-7 2012]

किसी भी प्रतिष्ठित समाचार पत्र से यह  अपेक्षा की जाती है कि वह पाठको तक कोई भी समाचार सत्य तथ्यों  के गहन अध्ययन के पश्चात  ही प्रेषित करेगा क्योंकि  समाचार पत्र की प्रति पाठक  एक  सबूत  अथवा अपना पक्ष  मजबूत   करने  हेतु   विरोधी  के समक्ष  प्रस्तुत  करते  हैं  .दैनिक अमर उजाला के आज [16-७-२०१२]के अंक में पेज 16 पर प्रकाशित ''आइये जाने ...कितने पढ़े लिखे हैं हमारे नेता '' में श्री राहुल गाँधी की शैक्षणिक  योग्यता को जिस प्रकार विद्वेष पूर्ण रूप से प्रस्तुत किया  गया  है वह न  केवल निदनीय है बल्कि अमर उजाला जैसे  समाचार पत्र कि निष्पक्ष छवि पर भी प्रश्न चिन्ह  लगाता  है .पत्र राहुल जी   की शैक्षणिक योग्यता के सम्बन्ध  में लिखता है -''कम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज से एम्.फिल.की पढाई .इस पर परस्पर विरोधी दावे ''क्या समाचार पत्र ने उन  दावों  की जाँच की ?यदि हाँ  तो क्या हैं वे ठोस सबूत ?...और  यदि नहीं तो यहाँ ये  लिखने के पीछे   क्या मंशा   है ?बेहतर होता  वे  राहुल जी के सम्बन्ध में सरकारी  वेबसाईट [ http://india.gov.in/]से तथ्यों को उद्धृत करते .जो इस प्रकार है -


NameShri Rahul Gandhi
Constituency from which I am electedAmethi
Father's NameLate Shri Rajiv Gandhi
Mother's NameSmt. Sonia Gandhi
Date of Birth19 Jun 1970
Birth PlaceDelhi
Maritial StatusUnmarried
Date of Marriage-NA-
No. of ChildrenNo.of Sons:0   No.of Daughters:0
State NameUttar Pradesh
Party NameIndian National Congress
Permanent Address12, Tughlak Lane,New Delhi - 110 011Tels. (011) 23795161 Fax. (011) 23012410
Present Address12, Tughlak Lane,New Delhi - 110 011Tels. (011) 23795161 Fax. (011) 23012410
Email idoffice[at]rahulgandhi[dot]in 

Educational Qualifications M.Phil. (Development Economics) Educated at Trinity College, Cambridge University, U.K.

क्या सरकारी वेबसाईट पर भी राहुल जी गलत तथ्यों को प्रस्तुत कर सकते  हैं ? 


...पूर्व   में भी एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र ने राहुल जी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर गलत खबर छाप दी थी जिस पर राहुल जी ने कड़ा विरोध  दर्ज  कराया  था  .गाँधी परिवार के प्रति दुराग्रह रखने वाले किस सीमा तक जाकर इस परिवार के सदस्यों   की गरिमा  के साथ  खिलवाड़  करते हैं यह कई  बार भाजपा  नेता साबित  कर चुके  हैं .यशवंत सिन्हा  जी का  राहुल जी को कम  पढ़ा  लिखा  कहना  क्या साबित करता  है ?...पर ''अमर उजाला 'जैसे 
 प्रतिष्ठित अख़बार  को खबर छापते  समय  यह ध्यान  रखना  चाहिए  कि उसके   पाठकों   में ऐसे पाठक भी हैं जो इस तरह  की ख़बरों का  कड़ा विरोध करते हैं .निर्मूल  बैटन  को इस तरह  तथ्य  बनाकर  खबर में उसका  उल्लेख  करना  पत्र की ख़बरों की विश्वसनीयता  को घटती  है .अविलम्ब अख़बार को इस त्रुटि पूर्ण   प्रकाशित तथ्य आधारित  खबर हेतु क्षमा   मांग   लेनी चाहिए ताकि इसे आधार बनाकर राहुल जी के विरोधी दुष्प्रचार    करना आरम्भ कर दें और हम जैसे ''अमर उजाला''पाठक इस पत्र से विमुख हो जाएँ .

                           
शिखा कौशिक
[विचारों का चबूतरा ] 

रविवार, 15 जुलाई 2012

शिव प्राणों में उत्साह का संचार .....



शिव प्राणों में उत्साह का संचार  .....
Thumbnail for version as of 11:27, 14 July 2009Lord shiva posters



शिव प्राणों में उत्साह का संचार  करेंगें ;
श्रावण का है मास तेरा  उद्धार  करेंगें .

गौर संग धरा आन विराजें  इसी  मास में ;
भक्तों की रक्षा करते दिन और रात में ,
भव सागर से तेरा बेडा पर करेंगें .
श्रावण का है मास तेरा उद्धार करेंगें .


जिस  इच्छा से लेकर कावड भक्त  है जाता  ;
शिव महिमा से पूरी  उसको पल में पाता ,
आओ मिलकर भोले की जयकार करेंगें  .
श्रावण का है मास तेरा उद्धार करेंगें .
                       जय गौरी शंकर की !
                     शिखा कौशिक 
          [भक्ति अर्णव ]


शनिवार, 14 जुलाई 2012

आया बुलावा -''आओ कलमाड़ी''


आया बुलावा -''आओ  कलमाड़ी''


लन्दन से आया बुलावा -''आओ  कलमाड़ी'' ;
भ्रष्टाचार के खेल  में तुम हो बड़े खिलाडी  ,
कैसे चलती है  भ्रष्टाचार की गाड़ी ?
बतला तो दाढ़ी में तिनका या तिनके में दाढ़ी !!



गुरुवार, 12 जुलाई 2012

भारतीय हॉकी पुरुष टीम को अग्रिम शुभकामनायें !



भारतीय हॉकी पुरुष  टीम  को अग्रिम शुभकामनायें !

भारतीय हॉकी पुरुष  टीम  को  मैं  अपने इस  प्रेरक  सन्देश  द्वारा ''लन्दन ओलेम्पिक   '' हेतु अग्रिम शुभकामनायें देती हूँ - some wishes, as love, joy, peace and goodwill, with a pine cone on a golden background Stock Photo - 11760821
मुकद्दर को नहीं अपने कभी इल्ज़ाम  देते हैं ;
जो अपने बाजुओं से काम को अंजाम देते हैं .
नहीं वे टेकते घुटने कभी दुश्मन  के सामने ;
बड़े ही सब्र से वे हर इम्तिहान देते हैं . ज़मी  पर तोड़ कर ला देते तारे आसमां  के  वो ;
है मुश्किल कुछ नहीं उनके लिए जो ठान लेते   हैं .
जो अपने हौसलों से  दुश्मनों  को  पस्त  कर देते;
वो अपने मुल्क  का  दुनिया  में  बड़ा  नाम  करते  हैं .
जो रखते हैं इरादे दिल में फौलाद के ''शिखा  ''
वो आगे  बढ़कर  हर तूफ़ान थाम देते हैं .
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''मिशन  लन्दन ओलम्पिक  गोल्ड  ''
मिशन लन्दन ओलंपिक हॉकी गोल्ड 
                                             शिखा कौशिक