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शनिवार, 18 अगस्त 2012

मृत्यु तक फांसी पर लटकाया जाये गोपाल कांडा को !

मृत्यु तक फांसी पर लटकाया जाये गोपाल कांडा को !
geetika.jpg 
[मरते दम तक गीतिका के साथ हुई दरिंदगी]
'कांडा सिलेक्ट करता था लड़कियों की ड्रेस व शूज'

नन्ही सी चिड़िया  और  हैवान बाज़  !

नन्ही सी चिड़िया  उड़  रही  थी  ;
नन्हे  से  दिल   को  थाम    ,
पीछे  से  आया  दुष्ट  
बाज़  एक  शैतान  ,
बोला  सिखाऊंगा  तुझे  
ऊँची  मैं  उडान  ,
तुझको  दिखाऊंगा  
शोहरत   के  आसमान  ,
उड़ने  लगी  भोली  सी   वो   
उसको   न  था  गुमान  ,
ऊँचें  पहुचकर  नोंचने  
लगा  उसे हैवान ,
जख्म इतने  दे  दिए 
वो हो गयी निढाल ;
गिर पड़ी ज़मीन पर 
त्याग  दिए प्राण ,
चिड़िया थी प्यारी ''गीतिका '' 
और बाज़ है ''गोपाल ''
ऐसी  मिले सजा इसे कि 
काँप जाये काल !!!

गीतिका को वापस न ला पायेंगें !

नन्ही सी गीतिका के संवार कर बाल ;
माँ ने किया होगा लाडो से ये सवाल 
क्या बनेगी नन्ही सी मेरी परी बड़ी होकर ?
फैलाकर नन्ही बांहें वो बोले होगी हंसकर 
माँ मैं उड़नपरी बनकर आसमान में उडूँगी
ला तारे तोड़कर तेरी गोद में भरूँगी ,
चूमा होगा माँ ने माथा अपनी इस कली का 
पर क्या पता था दोनों को होनी के खेल का ?
एक हैवान ''गोपाल'' उनके जीवन में आएगा ,
सपने दिखाकर कली को हो नोंच जायेगा ,
उसने खरोंच  डाला गीतिका का तन मन 
और माँ से उसकी उडान परी को दूर ले गया 
इतनी दूर कि चाहकर भी कोई 
गीतिका को वापस नहीं ला सकता !!!

[    इस हैवान के लिए बस एक ही सजा है ''मौत की सजा '']

                                          शिखा कौशिक 
                             [विचारों का चबूतरा ]



1 टिप्पणी:

रविकर फैजाबादी ने कहा…

जितने पल इसने जिये, दुःख के उतने मास ।

मांसखोर के अंग को, काट करें उपहास ।

काट करें उपहास, उलट लटकाएं भैंसा ।

दंड नियम प्राचीन, मिले जैसे को तैसा ।

लेकिन जिम्मेदार, पिता भाई भी थोड़े ।

रूपया आता देख, रहे चुप पड़े निगोड़े ।।